"कश्मीर फाइल्स" राजनीतिक आकाओं के निर्देशन में बनी एक राजनीतिक फिल्म है, जिसके कुछ राजनीतिक लक्ष्य हैं!
जिसमें भावुक जनता रोती है, और कुटिल निर्माता हँसते हैं।
लटके हुए चेहरे बता रहे हैं कि "विश्वासघात" सिर्फ "गद्दार" ही नही बनाता....बल्कि "बेबस और लाचार" भी बनाता है !
जनता ने अपना वोट देकर इनको ताकत दी थी और इन्होंने उसका सौदा कर लिया !!
महामनाव का विदेश भ्रमण का पैटर्न!
हाँथ हिलाते हुए प्लेन में चढ़ जाओ !
दूसरे देश पहुंचते ही नाच गाना देख लो।
बढ़िया खाओ-पियो, ठहाके लगाओ!
NRI से कहलवाओ “मोदी जी आप महान हैं”
फिर Mute Mode में नेताओं से बात करो।
फिर छुट्टी एंजॉय कर लौट आओ!
देश के लिए क्या आया कोई खबर नहीं!
कई साथियों ने INDIA गठबंधन की बैठक में मेरे भाषण का हिंदी अनुवाद मांगा था - यह रहा, ज़रूर सुनें।
8 जून को INDIA गठबंधन की बैठक में 20 से भी ज़्यादा नेताओं के भाषणों और बातों को सुनने के बाद आखिर में मैंने इस भाषण से उन्हें संबोधित किया।
जब भारत की सोच, देश की आत्मा पर संकट हो... जब संस्थाओं पर कब्ज़ा हो... जब जनता की आवाज़ दबाई जाए...तब सिर्फ़ एकता के साथ प्रतिरोध काम आता है।
मैं फिर से कह रहा हूँ - 2024 का चुनाव हम हारे नहीं थे और 2029 का चुनाव हम जीत चुके हैं।
हम एकजुट रहेंगे, जन-जन को संगठित करेंगे और प्रतिरोध की ताकत से BJP और उसके भारत के संस्थानों पर कब्ज़े को हराएंगे।
https://t.co/JkKgow6pi7
अन्तर्राष्ट्रीय जल में तीन दिन में तीन जहाज़ों पर अमेरिकी हमलों में तीन भारतीयों की मृत्यु हो गई। और हमारे Compromised PM? एक शब्द तक नहीं।
जब कोई विदेशी ताकत किसी भारतीय की हत्या करे, तो प्रधानमंत्री को बोलना पड़ता है। लेकिन मजाल है जो ये एक शब्द बोल जाएं।
अगले हफ्ते G7 में, हमारे नाविकों की हत्या के बस चंद दिनों बाद, मोदी जी मुस्कुराएंगे, गले मिलेंगे और समझौते करेंगे - मगर, उन तीन भारतीयों के लिए उनके पास एक शब्द भी नहीं होगा।
Compromised PM भारत माता के बेटों की रक्षा नहीं कर सकते, क्योंकि जिन्होंने उन बेटों की जान ली उन्हें नाराज़ करने की इनमें न हिम्मत है, न ताकत।
आज राहुल गांधी ने एक ऑडियो शेयर किया था जो इंडिया गठबंधन की मीटिंग में उनकी स्पीच का था। वो अंग्रेजी में था लेकिन मुझे जिज्ञासा थी ये जानने की कि उन्होंने मीटिंग में क्या कहा होगा...तो इसे अपने लिए हिंदी में ट्रांसलेट किया...पढ़ते हुए लगा कि ये बहुत जरूरी है तो आप भी पढ़ सकते हैं...
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मैं आज यहां आए सभी लोगों का स्वागत करता हूं। आने के लिए धन्यवाद। कई साल पहले मेरी एक बहुत अच्छे दोस्त से बहस हुई थी। मैंने उससे कहा, "जो तुम कर रहे हो वो बिल्कुल अनफेयर है।" उसका जवाब था — "दुनिया अनफेयर है। अब इसकी आदत डाल लो।"
आज यहां कांग्रेस पार्टी के बारे में जो कुछ भी कहा गया, उसका जवाब देना मेरा काम नहीं है। मेरा काम शिव परंपरा को अपनाना है — सब कुछ निगल जाना। नीले कंठ वाले शिव की तरह, जो सारा जहर पी जाते हैं।
आप चाहे जितना कहें, मुझ पर या कांग्रेस पर जितनी भी आलोचना करनी हो, हम उसे खुशी-खुशी स्वीकार करेंगे। हम आपको खुश करने की कोशिश करेंगे, क्योंकि हमारी भूमिका आपकी भूमिका से बुनियादी तौर पर अलग है। और यह मैं अहंकार से नहीं कह रहा हूं। मेरी भूमिका आप सबको प्यार और स्नेह से जोड़ने की है।
मैं 2004 से कांग्रेस पार्टी का सांसद हूं, जब मैंने अपना पहली चुनाव लड़ा था। हमारी पार्टी भारत की दूसरी सभी पार्टियों से बुनियादी तौर पर अलग तरीके से संगठित है। और मैं यह विनम्रता से कह रहा हूं। क्यों?
क्योंकि यह पार्टी एक प्रतिरोध आंदोलन के रूप में शुरू हुई थी, जब आधुनिक भारत अस्तित्व में भी नहीं था। अन्य सभी पार्टियों के विपरीत, इसे भारतीय राज्य की इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा पर खड़ा नहीं किया गया था। कांग्रेस पार्टी एक प्रतिरोध आंदोलन है, जो इस विचार की रक्षा करती है कि सभी भारतीय बराबर हैं।
हम RSS की सोच के बिल्कुल खिलाफ हैं। हम मर जाएंगे, कांग्रेस पार्टी में मर जाएंगे, लेकिन BJP या RSS के साथ कभी समझौता नहीं करेंगे। इसके लिए हमें हमारे सिर काटने पड़ेंगे। मुझे पता है कि इस देश में लाखों-लाखों कांग्रेस कार्यकर्ता हैं जो कहेंगे — "हमारे सिर काट दो, हम RSS के सामने झुकेंगे नहीं।"
मुझे अफसोस है कि इस समूह में कुछ भ्रम है। भ्रम यह है कि आप — SP, TMC, RJD — यह मानते हैं कि अब तक जो राजनीतिक औजार आप इस्तेमाल करते आए हैं, वे आगे भी काम करेंगे।
दरअसल वे तभी काम करते थे जब देश का सिस्टम उन्हें निष्पक्ष मैदान उपलब्ध कराता था। वो मैदान अब नहीं बचा है। BJP देश के संस्थानों पर कब्जा कर चुकी है। BJP कानूनी व्यवस्था को कंट्रोल करती है। BJP नौकरशाही को कंट्रोल करती है। खुफिया एजेंसियों को कंट्रोल करती है। BJP चुनाव आयोग को भी कंट्रोल करती है।
मेरे TMC में कई दोस्त हैं। वे मानते थे कि बंगाल में वे चुनाव जीत रहे हैं। मैं उन्हें बार-बार कहता रहा — तुम सपनों की दुनिया में हो। मैंने गुजरात में देखा है, मध्य प्रदेश में देखा है, छत्तीसगढ़ में देखा है, हरियाणा और महाराष्ट्र में देखा है। फिर भी आपमें से कई अभी भी आश्वस्त नहीं हैं।
कांग्रेस पार्टी प्रतिरोध की पार्टी है। इसे भारतीय राज्य की तटस्थता की जरूरत नहीं है। बल्कि, जितना ज्यादा भारतीय राज्य के संस्थान दबाए जाएंगे, कब्जाए जाएंगे, कांग्रेस पार्टी उतनी ही आक्रामकता से भारत के संविधान की रक्षा के लिए लड़ेगी। हम सभी कांग्रेस पार्टी के आदर्शों को साझा करते हैं। वे आदर्श क्या हैं? सत्य, अहिंसा और करुणा।
मुख्य मुद्दा क्या है? मुझे आपसे लड़ने में कोई दिलचस्पी नहीं है। मुझे पागल होना पड़ेगा कि अचानक उठकर कहूं — "मैं तुमसे लड़ूंगा क्योंकि तुम हमारे सहयोगी हो, हमारे दोस्त हो, हम जिनसे प्यार करते हैं।
"कृपया समझिए, हमने 2024 का चुनाव जीता था। हमने हारा नहीं था। आप पूछते हैं कि नीतीश जी क्यों चले गए? वह मेरी वजह से नहीं, कांग्रेस की वजह से नहीं गए। और मैं आपको बताता हूं कि निकट भविष्य में वे कुछ औजार भी काम करना बंद कर देंगे, क्योंकि BJP और RSS भारतीय राज्य पर अपनी पकड़ और मजबूत कर रहे हैं। कांग्रेस पार्टी ने 100 साल से ज्यादा पहले यही फैसला लिया था। 1927 से पहले हम एक राजनीतिक संगठन थे। गांधी जी ने जब स्वराज की मांग की, हम प्रतिरोध आंदोलन बन गए। अगर राजनीतिक पार्टियां काम नहीं कर सकतीं, तो क्या काम कर सकता है? प्रतिरोध काम करता है। Resistance works।
जहां हम प्रतिरोध करते हैं, वहां काम करता है। मैंने अपनी आंखों से देखा है। मैंने इस देश में 4000 किलोमीटर पैदल चला है। Resistance works।आपको राजनीतिक आर्किटेक्चर की जरूरत नहीं। नौकरशाही की जरूरत नहीं। खुफिया एजेंसियों की जरूरत नहीं। आपको सिर्फ प्रतिरोध का कार्य चाहिए। मतलब — मैं प्रतिरोध करूंगा। मैं अन्याय नहीं होने दूंगा। बस। खत्म। यह एक भावना है, संगठन नहीं। यह सोचने का तरीका है। और चाहे हम पसंद करें या नहीं, हमें वहीं जाना होगा। माइंडसेट बदलना होगा। माइंडसेट अब यह होना चाहिए कि हम एक-दूसरे से नहीं लड़ेंगे। हम प्रेस को हम पर हमला करने का मौका नहीं देंगे। हम प्रतिरोध करेंगे।
आप सोच रहे हैं कि चुनौती अगला चुनाव जीतने की है। अगला चुनाव तो पहले ही जीत लिया गया है। कृपया समझिए, भारत की जनता में इतना गुस्सा है कि अगला चुनाव पहले ही खत्म हो चुका है। समस्या RSS द्वारा भारतीय राज्य के औजारों पर कब्जा है। समस्या यह है कि आपको जीतने के लिए निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव नहीं मिलेगा। इसलिए हमें प्रतिरोध मोड में जाना होगा। Resistance works। Resistance CBSE है। Resi
stance NEET है। Resistance पदयात्रा है। सुबह उठकर पूछो — मैं आज प्रतिरोध कैसे करूं? और प्रतिरोध करो। मैं आपको गारंटी देता हूं, यह काम करेगा।
मेरी नजर में, किसी भी तरफ से कोई भी आलोचना मैं खुशी से झेलने को तैयार हूं, क्योंकि मेरे लिए यह धार्मिक कर्तव्य है, आध्यात्मिक कर्तव्य है। यह अब राजनीति नहीं रही। इसलिए मैं आपको वादा करता हूं कि इस समूह को जोड़ने और सफल बनाने के लिए जितना भी अपमान सहने पड़ेंगे, मैं सहूंगा। आगे कैसे बढ़ें, यह बहुत सरल है। हमें एक खास विचार से दूर होना होगा। ममता दी 100% तो नहीं, लेकिन 90% यकीन से कहती हैं कि उनका चुनाव चुराया गया। उद्धव जी 40% यकीन रखते हैं। मेरे भाई तेजस्वी 40%... सुनिए, 100% यकीन रखिए — चुनाव चुराए जा रहे हैं। अपने मन से सारे संदेह हटा दीजिए। समझिए कि सोशल मीडिया पर उपस्थिति बनाने में सालों लगते हैं। यह एक हफ्ते में ऑर्गेनिक नहीं होता। मेरे 1 करोड़ YouTube फॉलोअर्स हैं, लेकिन मेरा अकाउंट पूरी तरह दबाया गया है। अगर आप यह सोच रहे हैं कि सोशल मीडिया निष्पक्ष है और विपक्ष को सपोर्ट मिल रहा है, तो आप दूसरी दुनिया में जी रहे हैं। पूरा आर्किटेक्चर — मीडिया, सोशल मीडिया, कानूनी व्यवस्था, नौकरशाही, खुफिया एजेंसियां — सब इस सरकार को सत्ता में बनाए रखने के लिए संरेखित हैं। लेकिन यह सरकार टिक नहीं पाएगी। यह टिक नहीं पाएगी क्योंकि इसने हमारे लोकतंत्र को नष्ट कर दिया है। इसने भारतीय लोगों के भविष्य को नष्ट कर दिया है।
अब जो आने वाला है (ईरान के बाद), वह अनियंत्रित है। और यह हमें जनता को संगठित करने का अवसर देगा। यह भी समझ लीजिए कि हम समन्वयित नहीं हैं, साथ नहीं काम करते — ये सब BJP और उनके मीडिया दोस्त फैला रहे हैं। यह सच नहीं है।
मैं DMK की गारंटी ले सकता हूं कि भारत के विचार की रक्षा में हर कोई इस कमरे में खड़ा होगा। हमारे बीच झगड़े हैं, लेकिन अगर आप मुझसे कहें कि मैं केरल के पूर्व मुख्यमंत्री को गले लगाऊं, तो मैं नहीं कर सकता और नहीं करूंगा, क्योंकि मेरी उनसे राजनीतिक लड़ाई चल रही है।
हमें लचीले होना होगा और समझना होगा कि हम पर पूरा हमला है — यह साबित करने के लिए कि विपक्ष कमजोर है, disorganized है।अंत में, मुझे लगता है कि हमारी चर्चाओं में अक्सर उदासी छाई रहती है। लोग सोचते हैं — "ओह भगवान, हम BJP को कभी हरा पाएंगे?" मैं आपको बताता हूं, अगर हम साथ खड़े होकर प्रतिरोध करें तो उन्हें हराना आसान है। पिछले चुनाव में इस कमरे में मेरे अलावा किसी को यकीन नहीं था कि हम BJP को हरा सकते हैं। अब इस कमरे में हर कोई यह विश्वास करना शुरू करे कि हम उन्हें हरा देंगे।इस विश्वास से शुरू कीजिए, और मैं गारंटी देता हूं — राज्य दर राज्य, चुनाव दर चुनाव, चाहे वे धांधली करें या न करें, वे गिरेंगे।
कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में INDIA गठबंधन की महत्वपूर्ण बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष श्री @kharge, CPP चेयरपर्सन श्रीमती सोनिया गांधी जी और नेता विपक्ष श्री @RahulGandhi के साथ INDIA गठबंधन के वरिष्ठ नेता शामिल हुए।
सरकार प्रमाण के साथ बता रही है कि आप कम समय में ज्यादा प्रगति कैसे कर सकते थे !
आपको अधिक से अधिक अनैतिक और बेज़मीर होना पड़ेगा और फिर इस दौर में सफलता आपके कदम चूमेगी !
IAS धीमान चकमा अपनी पहली ही पोस्टिंग में ₹10 लाख की घूस लेते हुए पकड़े गए थे।
छापे में सरकारी घर ₹47 लाख जब्त किए गए थे। लेकिन अब पता है क्या हुआ 👇🏼
धीमान चकमा को रेवन्यू डिपार्टमेंट में डिप्टी सेक्रेटरी बनाया गया है।
ये अंजना ओम कश्यप हैं।
ये पिछले 18 सालों से पत्रकारिता कर रही हैं।
इनकी सैलरी 34 लाख रुपये है।
इनकी कुल संपत्ति 55 करोड़ रुपये है।
इन्होंने NEET मामले में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग नहीं की।
इन्होंने NEET के लिए कभी मोदी को दोषी नहीं ठहराया।
अब ये 'दो कौड़ी की टिप्पणी' से हुए अपमान के लिए 2 करोड़ रुपये के मुआवज़े की मांग कर रही हैं।
आज इन्होंने खान सर, अभिनव शर्मा, बबीता और 5 अन्य लोगों के खिलाफ़ केस दर्ज कराया है।
मुझे हैरानी है कि जिस मीडिया की कोई इज़्ज़त नहीं है, वह भी मानहानि के मुकदमे कर रहा है।
पत्रकारिता - 0%
ड्रामा - 100%..
केवल CBSE नहीं
इस साल हर बोर्ड के रिजल्ट में भारी धपला हुआ है
गुजरात बोर्ड हो या महाराष्ट्र बोर्ड,सभी बच्चों की शिकायत है कि उनके मार्क्स बहुत कम आए है
सरकार को इस बारे में सोचना चाहिए
@nareshsharma107 रिजर्व बैंक ने लीपा पोती की है कोई सही फैक्ट्स नही दिए हैं। ब्लूमबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में मई के पहले दो सप्ताह का जिक्र किया है सोना बेचने का, और रिजर्व बैंक डाटा दे रहा है मार्च तक का।
(मैं अपने ‘राइट टू रिप्लाई’ के तहत ये X पोस्ट कर रहा हूं क्योंकि मेरे पास @DDNewsHindi जैसा प्लेटफ़ॉर्म नहीं है जिसका बेजा इस्तेमाल करते हुए @sudhirchaudhary ने मुझे टारगेट किया है)
सुनो सुधीर चौधरी,
तुम एक घटिया पत्रकार ही नहीं घटिया इंसान भी हो। जानता तो पहले से था, आज ये कहने को इसलिए मजबूर हुआ हूं क्योंकि तुमने मेरे साथ फिर एक घटियापन किया है। दूरदर्शन के प्रोग्राम में ‘समोसे जलेबी’ वाली स्टोरी का ज़िक्र कर तुमने मुझ पर निशाना साधा है। और ये तुमने पहली बार नहीं किया है। पहली बार तो तुमने तब किया था जब तुम ज़ी न्यूज़ में थे और तुमने प्रधानमंत्री मोदी का एक लल्लो चप्पो वाला इंटरव्यू किया था। 2019 चुनाव से पहले। और फिर जब तुम्हारी जगहंसाई शुरु हुई तो फिर तुमने अपना चेहरा बचाने के लिए एक DNA कार्यक्रम पूरी तरह मुझे और राजदीप सरदेसाई को समर्पित कर बनाया था। तब मेरी रिपोर्ट की क्लिपिंग्स भी लगायी थी। ख़ैर। तुम्हारा चेहरा तब भी नहीं बचा था। अब तो तुम्हारे पास कोई चेहरा है ही नहीं। तुमने हमेशा सरकारों की गोद में बैठ कर ही पत्रकारिता की है। कांग्रेस कार्यकाल में भी तुम जैसे पत्रकार ही बहुत बड़े चापलूस थे। यहां पर एक प्रदेश की कांग्रेस सरकार का ज़िक्र करना बेमानी होगा जिसके बूते तुम तब पत्रकारिता में पले बढ़े।
क़रीब सवा मिनट के क्लिप से तुम्हारा चेहरा बचता है तो बचा लो, जनता के टैक्स के पैसे से 15 करोड़ का सरकारी पैकेज जस्टिफ़ाई कर रहे हो कर लो। और ऐसा करने के लिए ही तुमने इस क्लिप के नीचे लिखे ‘राजनीति के हल्के फुल्के पल’ को नज़रअंदाज़ किया। क्योंकि तुम संपादक नहीं चंपादक हो। अरे वो एक मोमेंट था फील्ड रिपोर्टिंग का जब राहुल गांधी यूपीए सरकार के दौरान कथित घोटाले से जुड़े सवालों का जवाब नहीं दे रहे थे। फिर मैंने यही पूछना शुरु किया। इसकी डिटेलिंग फिर कभी। यहां तुमको सफ़ाई के तौर पर नहीं दूंगा।
मैं जानता हूं कि तुम मुझसे सिर्फ़ इस बात का बदला ले रहे हो कि मैंने 2003 में एनडीटीवी में मेरी नौकरी लगने में तुम्हारी मदद नहीं कर पाया। 2002-03 में सहारा में तुम्हारे साथ मैंने चंद महीने काम किया था। तब तुम शेखी बघारा करते थे कि मैं तो एनडीटीवी जाने वाला हूं मेरी बात हो गई है। लेकिन तुम शेखी बघारते ही रहे लेकिन जा नहीं पाए। जब तुम्हें पता चला कि मेरी नौकरी वहां लग गई है तो पहले तो सहसा तुम्हें भरोसा नहीं हुआ... फिर तुमने कहा कि जब जा ही रहे हो तो मेरे लिए भी बात करना कि मामला कहां अटका है। मैंने कोशिश भी की और राजदीप सरदेसाई से अनुरोध भी किया था तुम्हारे लिए। लेकिन क्योंकि संस्थान में मैं ख़ुद नया था इसलिए तुम्हारे लिए ज़ोर नहीं डाल पाया था। तुम्हारी नौकरी वहां लगा नहीं पाया। आई एम सॉरी फॉर दैट। पर तुम अब कभी डीडी से निकाले जाओ तो एनडीटीवी जा सकते हो। अब माहौल तुम्हारे अनुरुप है वहां।
अंत में एक बात। ये तुम ही हो जिसका 100 करोड़ वाला वीडियो क्लिप आज भी इंटरनेट तैर रहा है। जिस भी तरह तुमने समझौता कर लिया हो लेकिन वो एक ऐसा बदनुमा दाग़ है जो कभी तुम्हारा पीछा नहीं छोड़ेगा। डीडी पर कभी उस क्लिप की बात भी करो। और हां। लाइव इंडिया में रहते हुए कैसे तुमने स्कूल टीचर को लेकर फर्ज़ी ख़बर चलायी वो भी पत्रकारिता जगत नहीं भूला है आज तक। जिनको नहीं पता वे गूगल का ग्रोक कर सकते हैं। दो बार जेल भी गए तुम। कोई तिहाड़ी शब्द का ज़िक्र करता है तो सभी समझ जाते हैं कि तुम्हारे बारे में कुछ कहा जाता है। और तुम हो कि समोसे जलेबी वाली स्टोरी का ज़िक्र कर महान बनने की कोशिश करते हो! बनो। और क्योंकि तुमने मेरी स्टोरी का ज़िक्र किया है, अगर क़ूवत है तो किसी दिन मुझे इसी डीडी के प्लेटफ़ॉर्म पर बहस के लिए आमंत्रित करो। तुम्हारी और मेरी पत्रकारिता का अंतर तुम्हारे प्रोग्राम के ज़रिए ही पता चल जाएगा। उन दर्शकों को जिनको तुम एक तरफ़ा तरीक़े से गुमराह कर रहे हो। ये मेरा हक़ भी बनता है क्योंकि तुमने मेरी स्टोरी का ज़िक्र किया।
तुम्हारे जवाब का इंतज़ार रहेगा
उमाशंकर सिंह
(पुनश्च: प्रिय पाठकों, सुधीर चौधरी को संबोधित करते हुए मैंने ‘आप’ लिखने की बहुत कोशिश की, लेकिन सहज मानवीय मूल्यों और व्यवहार कुशलता का अनुपालक होते हुए भी ऐसा नहीं कर पाया हूं। इसके लिए मैं पाठकों से बहुत माफ़ी चाहता हूं)
रामचन्द्र कह गए सिया से..
नई दिल्ली टेलीविजन, याने एनडीटीवी वो नर्सरी रहा, जहां से हिंदुस्तान के सबसे बड़े टीवी पत्रकार निकले।
रविश कुमार, राजदीप सरदेसाई, अर्नब गोस्वामी, दिबांग, राहुल कंवल, निधि कुलपति, बरखा दत्त, श्रीनिवास जैन, निधि राजदान, सर्वप्रिया सांगवान-प्रणब रॉय की संस्था ने नर्चर किये।
लंबे समय तक यह चैनल गम्भीर- शांत डिस्कशन, और सादे रंगों के साथ, देंखने सुनने योग्य बना रहा।
अगर आपको शोर के बीच प्रमाणित खबर, या उसका विश्लेषण सुनना हो, तो एनडीटीवी अकेला स्टॉप था।
और यही गुण उसका काल बन गया।
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इसके मालिक, प्रणव और राधिका रॉय पर छापे पड़े, कम्पनी के शेयर टूटे, इन्वेस्टर ने हाथ खींचा। सरकारी माल बेचकर बड़े हुए व्यापारी ने चैनल जबरन खरीद लिया।
बिकते ही सारे मामले बन्द हो गए, और केस खत्म हो गया। राधिका-प्रणव बरी हो गए।
लेकिन इसके साथ एनडीटीवी नाम के चैनल का म्यार भी खत्म हो गया। अब जो है, दर्जनों सरकारी भोंपुओं के बीच एक और भोपू है।
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भारत, अकूत प्रतिभाओं से भरा देश है। विज्ञान, अर्थशास्त्र, आईटी, इंजीनियरिंग, बायोटेक में भारत के लोगों की वैश्विक मांग है। लेकिन वे सुंदर पिचाई बन सकते है, बिल गेट्स नही।
नौकर बन सकते है, मालिक नही।
उद्योग नही शुरू कर सकते, संस्थान नही खड़े कर सकते। अनलेस, कि सरकार (नेता) आपको फैसिलिटेट करे। यह तभी होगा, जबकि आप उसके साथ विविध प्रकार के लेनदेन में भागीदार हों।
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इसका चरम स्तर पर पहुँचा,
जब मामला आपके फेसिलिटेशन से बढ़कर, आपके प्रतिस्पर्धी को क्रश करने तक आ गया। याने आप शुरू करें, लेकिन जैसे ही बड़े बनेंगे- पूर्वस्थापित की नजर में खटकेंगे।
वे पहले से नेता के साथ है, सरकार का अनौपचारिक हिस्सा है। तब लूट लिए जाएंगे। मिटा दिए जाएंगे, बेचने को मजबूर कर दिये जायेंगे। तब क्या आश्चर्य की भारत मे बड़े उद्यम खड़ा करना टैलेंट का नही..
राजनीतिक सेटिंग का मसला है।
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प्रणब रॉय का मसला, इस विधा का क्लासिक केस है। सैकड़ो करोड़ का संस्थान, और पचासों सम्मानित पेशेवर पत्रकार पैदा करने वाला मेंटर, आज एक मोबाइल और माइक लेकर, सत्तर पार की उम्र में कवरेज कर रहा है।
पांव पांव चल रहा है।
पेशे का फर्ज निभा रहा है।
उसकी पांव की धूल बराबर चेले, रंगीन स्टूडियो में बैठकर पैकेज ले रहे हैं। और उनके कर्मों से पत्रकारिता की रैंकिंग, दुनिया के देशो में डेढ़ सौ वे पायदान पर उतर गई है।
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उन्हें देखता हूँ, और फिर इस तस्वीर को-
जहां प्रणव एक माइक, और एक मोबाइल लिए किसी अनाम डिजिटल चैनल के लिए कवरेज कर रहे है। तो मुंह से "हे राम" निकलता है।
और वो फिल्मी गाना भी याद आता है- रामचन्द्र कह गए सिया से, ऐसा कलयुग आएगा। हंस चुगेगा दाना दुनका
कौआ मोती खायेगा।
🙏
"मैं अपनी लाइफ में अच्छा नहीं कर पाया. बहुत परेशान हूं.
मेरे मरने के बाद लोन भरने की जरूरत नहीं, मेरा डेथ सर्टिफिकेट बैंक में जमा करवा देना."
- 35 साल के अंकित ने ये बात लिखकर फांसी लगा ली
अंकित यूपी के हमीरपुर में जनसेवा केंद्र चलाते थे. हाल ही में लोन लेकर घर बनाया, लेकिन इसकी EMI भरने जितनी भी कमाई नहीं हो रही थी.
घर के कर्ज के अलावा भी कई कर्ज थे, क्योंकि कमाई थी नहीं और जरूरतें बढ़ती गई.
बच्ची के इलाज में ही बहुत पैसा जा रहा था. आर्थिक तंगी और कर्ज ने ऐसा फंदा बनाया कि अंकित की जान चली गई.
इतना ही नहीं... 10 महीने पहले अंकित के छोटे भाई ने भी बेरोजगारी से तंग आकर आत्महत्या कर ली थी.
ये वो असल भारत की कहानी है, जो आपको IMF के आंकड़ों में नजर नहीं आएगी.
ये वो असल भारत है, जहां कर्मचारी 10-12 साल से 9-10 हजार में काम करने को मजबूर है.
आपसे बात चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था की होगी, लेकिन इस सच्चाई को छिपाया जाएगा, जहां अंकित जैसे कितने ही लोग रोज जान दे रहे हैं.
सरकार के आंकड़ों के मुताबिक- 2023 में आर्थिक तंगी और बेरोजगारी से 9,619 लोगों ने आत्महत्या की.
ध्यान रहे.. ये सरकारी आंकड़ा है, और आप जानते हैं सरकारी आंकड़ा कैसा होता है.
असल हालात बहुत भयावह हैं.
सबकी महंगा मशरूम खाने की हैसियत नहीं. देश के 80 करोड़ गरीब तो सरकारी राशन पर पल रहे हैं.
नामर्द लड़कियों को पीट कर मर्दानगी दिखा रहा है
यह हैं बागेश्वर कपकोट की घटना, जहां नाबालिक लड़कियों को कमरे में बंद करके मारा जा रहा हैं..!
क्या लोगो की बच्चियां मार खाने के लिए हैं, ऐसे खुले आम गुंडागर्दी चल रही हैं, अगर कुछ हो जाता तो इसके जिम्मेदार कोन रहता..!
मामले को गंभीरता से ले, कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए, कल के दिन और किसी महिला या बेटियों के साथ घटना न हो..!
@pushkardhami@PyaraUKofficial@aajtak@ANINewsUP@mahendrabhatbjp
पूरे गल्फ में तेल और गैस का प्रोडक्शन बंद हो गया है।
इधर भी कुर्सी की पेटी बांध लीजिए क्योंकि
अगले के पास कोई प्लान है नहीं, फौरन कह देगा
"जो उचित समझो वही करो"
पिछले ग्यारह बरस में ब्राह्मणों का जितना नुक़सान भाजपा ने किया है उतना सत्तर बरस में किसी ने भी नहीं किया,फिर भी कुछ ग़ुलाम ब्राह्मण आज भी भाजपा की ग़ुलामी के लिए तैयार बैठे हैं यह देख कर हँसी आती है।
“गोधरा ना हो गुजरात ना हो ,इंसान ना नंगा हो” ओठों पर गंगा हो,हाथों पे तिरंगा हो।
कभी “जुम्मन” ये गीत गाया करता था लेकिन आज वो पैसे कमाने के लिए ख़ुद “नंगा” हो गया है। #kumarvishwas