समस्त सनातनी भाईयों और बहनों को श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें🌹❤️🙏
बडी देर भई नन्दलाला, ग्वाल बाल इक इक से पूछे कहां है मुरली वाला रे।
संकट मे है आज वो धरती जिस पर तूने जन्म लिया।
कोई नही है तुझ बिन मोहन भारत का रखवाला रे।।
अब आ ही जाओ मोहन प्यारे 🙏
2014 में बेटी के ऑपरेशन के लिए AIIMS में जमा कराए पैसे और खून, 12 साल तक नहीं हुई सर्जरी; 2026 में 15 साल की बच्ची की मौत
नई दिल्ली: 2014 में एक पिता ने अपनी बेटी तन्वी के ऑपरेशन की उम्मीद में AIIMS में पैसे और खून जमा कराया था। उसे भरोसा था कि अब उसकी बेटी ठीक हो जाएगी। लेकिन पिता का आरोप है कि इसके बाद साल-दर-साल तारीखें मिलती रहीं, जांचें होती रहीं, शिकायतें की जाती रहीं और वह तन्वी को लेकर अस्पताल के चक्कर लगाता रहा। आखिरकार 2026 में उसकी 15 साल की बेटी की मौत हो गई।
मुकेश के मुताबिक, वह पहली बार 10 अक्टूबर 2012 को अपनी बेटी को लेकर AIIMS की OPD पहुंचे थे। उनका कहना है कि बच्ची को इलाज के लिए एक कमरे से दूसरे कमरे तक भेजा जाता रहा और शुरुआती जांचों में ही करीब एक साल का समय लग गया।
इसके बाद तन्वी को कथित तौर पर डॉ. सचिन तलवार के पास भेजा गया। पिता का दावा है कि डॉक्टर ने ऑपरेशन के लिए पैसे और खून जमा कराने को कहा। मुकेश के अनुसार, उन्होंने 4 अप्रैल 2014 को अस्पताल में ऑपरेशन के लिए जरूरी पैसे और खून जमा करा दिया। परिवार को उम्मीद थी कि अब बच्ची की सर्जरी जल्द हो जाएगी।
2 सितंबर 2015 को पहुंचे ऑपरेशन की उम्मीद में
मुकेश के मुताबिक, इसके बाद 2 सितंबर 2015 की तारीख दी गई। वह बेटी के ऑपरेशन की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचे, लेकिन उनका आरोप है कि उस दिन सर्जरी नहीं हुई और उन्हें बताया गया कि ऑपरेशन दिवाली के बाद किया जाएगा।
पिता का कहना है कि इसके बाद ऑपरेशन की तारीख लगातार आगे बढ़ती रही, लेकिन सर्जरी नहीं हुई।
PMO में की शिकायत, फिर अस्पताल से आया बुलावा
मुकेश का दावा है कि लंबे इंतजार के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय यानी PMO में शिकायत की। शिकायत के बाद उन्हें अस्पताल बुलाया गया।
पिता ने एक और गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि शिकायत के बाद संबंधित डॉक्टर ने कथित तौर पर उनसे शिकायत वापस लेने को कहा और शिकायत वापस लेने तक ऑपरेशन नहीं करने की बात कही।
2018 में फिर जांच, 2023 में दोबारा AIIMS पहुंचे
पिता के अनुसार, 2018 में बच्ची की फिर जांचें कराई गईं, लेकिन ऑपरेशन नहीं हुआ।
समय बीतता गया। मुकेश का कहना है कि वह 2023 में एक बार फिर अपनी बेटी को लेकर AIIMS पहुंचे, लेकिन तब भी इलाज का कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया।
इसके बाद 2025 में उन्होंने दोबारा शिकायत की।
मुकेश के अनुसार, शिकायत के बाद उन्हें 28 जुलाई 2025 को अस्पताल बुलाया गया, लेकिन जिस डॉक्टर से मुलाकात होनी थी, वह छुट्टी पर थे। बाद में परिवार को कथित तौर पर बताया गया कि बच्ची को दवाइयों के सहारे संभाला जा सकता है।
9 फरवरी 2026 को फिर शिकायत
पिता का कहना है कि उन्होंने 9 फरवरी 2026 को एक बार फिर शिकायत की। इसके बाद भी बच्ची की जांचें होती रहीं, लेकिन उनके मुताबिक जिस ऑपरेशन की बात वर्षों पहले कही गई थी, वह नहीं हुआ। और फिर वह दिन आया, जिसका डर किसी भी पिता को सबसे ज्यादा होता है।
2026 में मुकेश परियानी की 15 साल की बेटी की मौत हो गई।
करीब 12 वर्षों तक ऑपरेशन की उम्मीद लगाए बैठे पिता के सामने अब कई सवाल हैं।
तन्वी के पिता का सवाल है कि अगर 2015, 2016 या 2017 में ऑपरेशन किया जाता, तो क्या उनकी बेटी की हालत बेहतर हो सकती थी? आखिर इतने साल तक ऑपरेशन क्यों नहीं हुआ? क्या इलाज में किसी स्तर पर अनावश्यक देरी हुई? क्या समय पर सर्जरी से बच्ची की जान बचने की संभावना थी?
ऐसे में एम्स नई दिल्ली ने तन्वी के इलाज और मामले से जुड़ी परिस्थितियों की समीक्षा के लिए एक समिति का गठन किया है।
CJP Goons are harassing a woman journalist just because her channel has asked uncomfortable questions to their leaders?
These Marxists don't believe in freedom of expression.
If someone does the same to CJP goons, they will play the victim card.
Instagram is even restricting this video
Dedicated for #KrishnaJanmashtmi
So sharing it here:
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Kabhi kabhi Bhagwan ko dekhne ke liye jagah nahi… sirf nazar badalni padti hai. 💙
Is nanhe se Kanha ke saath ek bahut khoobsurat Janmashtami. 🦚🙏
Jai Shri Krishna!
Watch : Youtube https://t.co/zNzxEnMWU2
Instagram: https://t.co/9NGsrZCXkH
A family was denied entry to Qutub Minar just because their children were dressed as Radha Rani
Imagine denying entry to kids simply because of what they’re wearing
घटना- भावनगर (गुजरात)
आरोपी- फैज़ल खाटकी
गुजरात के #भावनगर से दिल दहला देने वाली घटना सामने आयी है
भावनगर के बस डिपो में जिहादी #फैजल ने दलित हिंदू महिला #काजल_बरैया की खुलेआम पीट पीटकर हत्या कर दी।
जब काजल के भाई ने अपनी बहन को बचाने का प्रयास किया तो #जिहादी_फैज़ल ने उसे भी बुरी तरह से मारा,
जब काजल का भाई जान बचाके भागा तो सड़क पर से उसको पकड़कर घसीटकर वापस लाया गया,
ISIS आतंकवादी स्टाइल में भाई के सामने बहन की हत्या कर दी गई
लोग तमाशा देखते रहे मगर किसी ने लड़की को नहीं बचाया,
नामर्द, अंधा, लंगड़ा और खोखला बन चुका है समाज, मानवता मर चुकी है
और दलित नेता ? वो भी मर चुके है, कोई भी दलित नेता इस दलित हिंदू लड़की के लिए आवाज़ नहीं उठा रहा।
ये वीडियो इस बात का प्रमाण है कि गुजरात में मुसलमानों ने आतंक की पराकाष्ठा पार कर दी है।
शर्मनाक।
कृपया संज्ञान लिजिए @Dev_Fadnavis जी, पुणे में जिहादियों का आतंक बढ़ता जा रहा है,
घर में घुसकर बेटियों को उठाया जा रहा है और हिंदुओं के खून पसीने की कमाई को लूटा जा रहा है
क्या हम मुग़ल काल में जी रहे है ?
@DGPMaharashtra@CPPuneCity@PuneCityPolice
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अजमेर इंस्टाग्राम केस क्या है?
इस मामले को जागरूकता के लिए सबके सामने लाना चाहिए।
एक स्कूली छात्रा, जो इस मामले की पीड़िता है, #अजमेर के एक कोचिंग सेंटर में एक दूसरी ख्वातिन_लड़की से मिली और उसकी दोस्त बन गई। कुछ दिनों बाद, उस लड़की ने पीड़िता से इंस्टाग्राम पर इरफ़ान नाम के लड़के से दोस्ती करने को कहा।
उसका भरोसा जीतकर और उसे अपने जाल में फंसाकर, इरफ़ान ने उसके इंस्टाग्राम अकाउंट का पासवर्ड हासिल कर लिया और उसकी कुछ तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ (मॉर्फ) भी की। फिर उसने पीड़िता को उसकी न्यूड क्लिप और तस्वीरें वायरल करने की धमकी देकर ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। उसने उससे पैसे की मांग की।
पीड़िता ने अपने घर से पैसे चुराना शुरू कर दिया। इरफ़ान ने पीड़िता को पैसे देने के लिए एक जगह बुलाया। इरफ़ान अपने दोस्त अरबाज़ को भी साथ लाया और उन्होंने पीड़िता के साथ गैंग-रेप किया। और, फिर से उसे ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया।
जब उसके परिवार वालों ने गायब हुए पैसों के बारे में पूछा, तो पीड़िता ने सब कुछ बता दिया।
अजमेर के SP देवेंद्र कुमार बिश्नोई ने बताया कि आरोपी एक गैंग के तौर पर काम करते हैं। वे इंस्टाग्राम का इस्तेमाल करके लड़कियों (खासकर स्कूल या कोचिंग सेंटर जाने वाली लड़कियों) से बातचीत शुरू करते हैं और दोस्ती का प्रस्ताव देते हैं। अब तक इस मामले में 6 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
आरोपी इरफ़ान को स्कूल और कॉलेज जाने वाली दूसरी लड़कियों के साथ भी देखा गया है, इसलिए पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या उसके गैंग ने कुछ और लड़कियों को भी अपना शिकार बनाया है।
पुलिस उस लड़की की भूमिका की भी जांच कर रही है जिसने पीड़िता को आरोपी से मिलवाया था।
जागरूकता के लिए इस मामले को शेयर करें।
#अजमेर #ajmer #राजस्थान #जयपुरशहर #जोधपुर #इंस्टाग्राम
The sheer fact that you have to go back to 1948 to bring up one stray incident of Godse to prove your point is a testament that Hindus don't indulge in terrorism.
अब देश का मियाँ समाज, थूक-चाट से ऊपर उठ चुका है, केवल पंचर नहीं लगाता, तुम्हारी जिंदगी की कीमत भी लगाने लगा है।
यूपी में "ऐज़ाज़" का नकली दवाइयों का ऐसा खेल सामने आया है, जिसे सुनकर तुम्हारे रोंगटे खड़े हो जाएंगे ।।
ऐज़ाज़ अपने घर के तहखाने से मौत की दास्ताँ लिख रहा था, नकली दवाइयों की बड़ी खेप, पैकिंग सामग्री और मशीनें बरामद हुई है। ।
बरामदगी में Defcort-6 की करीब 32.555 किलो स्ट्रिप्स, 973 प्रिंटेड कार्टन, Rosuvas F-10 के 472 कार्टन, करीब 6.950 किलो पीली और 4.900 किलो सफेद गोलियां, साथ ही दवाइयों के नाम वाली प्रिंटेड एल्युमिनियम फॉयल और 6.370 किलो सादा फॉयल शामिल बताया जा रहा है।
सोचिए…
OP राजभर ने कहा था कि 80% घटना मुस्लिम और यादव अंजाम दे रहे हैं।
माँ के निधन के बाद पैतृक गाँव लौटा बेटा, अब जान बचाने की गुहार, SC-ST Act की धमकियों से हालात ऐसे कि कह रहा है: “या तो गाँव छोड़ना पड़ेगा, या मेरी जान चली जाएगी!”
"मैं राजपूत ठाकुर जाति से संबंध रखता हूँ और मेरा जिला बुलंदशहर, उत्तर प्रदेश है। दरअसल, मैं काफी लंबे समय से दिल्ली में रह रहा था। अभी दो महीने पहले मेरी माता का निधन हुआ, तो मुझे अपने पैतृक गाँव में आकर रहना पड़ा।
तो यहाँ की स्थिति ये है कि मेरे पड़ोसी जो भीम आर्मी संगठन से जुड़े हुए हैं। उन लोगों ने मुझे इतना बुरी तरह से प्रताड़ित कर रखा है कि वे मेरे घर में जबरदस्ती घुसने का प्रयास करते हैं, मुझे हमेशा गालियाँ देते हैं, धमकियाँ देते हैं और आते-जाते हुए रास्ते में मुझे परेशान करते हैं।
मेरे पास वीडियो साक्ष्य भी मौजूद हैं, जिसमें मुझसे ये तक कहा गया है कि, तू हमारी तरफ देखता क्यों है? तू हमारी तरफ देखेगा नहीं और तू जमीन कि तरफ नीचे नज़र करके चलेगा, हमारे सामने।
मैंने पुलिस को भी इस संबंध में कई बार शिकायत दी है। एक महीने से मैं कई बार पुलिस को शिकायत दे चुका हूँ। पुलिस का हमेशा आश्वासन रहता है कि कार्रवाई की जाएगी।
इसी क्रम में आज सुबह मेरे साथ इन लोगों ने मारपीट की है, गाली-गलौज की है और मुझे धमकी दी है कि हम तुम्हें फर्जी एससी-एसटी एक्ट और महिला उत्पीड़न के केस में किसी न किसी तरह फँसाकर जेल भेजवा देंगे। तुम्हें आज के आज यहाँ से जाना पड़ेगा, या तो तुम यहाँ से कहीं बाहर चले जाओ, नहीं तो हम तुम्हें जेल भेज देंगे।
मेरे घर में बहुत सारे लोग नहीं हैं। दरअसल, मैं अकेला हूँ और मेरे वृद्ध पिता हैं। मेरा बहुत बुरी तरह से शोषण और उत्पीड़न किया जा रहा है।
तो मेरा सभी संगठनों से, जो भी सवर्ण संगठन हैं या जो भी इस तरह के कुकृत्यों के संबंध में हम जैसे लोगों की रक्षा करते हैं या सुरक्षा करते हैं, उनसे निवेदन है कि मेरी सुरक्षा की जाए।
आज जिस तरह से मेरे साथ मारपीट की गई है, मुझे अपनी हत्या तक किए जाने का डर है। अगर मुझे कुछ होता है तो यही लोग, जिनके खिलाफ मैंने शिकायत और प्रार्थना पत्र में नाम दिया है, वही लोग उसके जिम्मेदार होंगे।
इन लोगों के द्वारा गलियों में तलवारें लहराई जाती हैं, गली में नीला गमछा डालकर और तरह-तरह से मुझे उत्पीड़ित किया जाता है।
तो मेरा यही निवेदन है कि सभी लोग मेरी सुरक्षा सुनिश्चित करें, क्योंकि मैं पुलिस में भी कई बार कंप्लेंट दे चुका हूँ। आज पुलिस के द्वारा मुझे आश्वासन दिया गया है कि जो संबंधित लोग मुझे प्रताड़ित कर रहे हैं, उनके खिलाफ आज मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
परंतु मेरा कहना ये है कि अगर मुझे इसी तरह प्रताड़ित किया गया और मेरे बचाव में कोई संस्था या कोई लोग नहीं आते हैं, या मेरे ऊपर किसी तरह का फर्जी मुकदमा दर्ज होता है, तो मेरे पास दो रास्ते होंगे। एक रास्ता होगा कि मैं अपने प्राणों की आहुति दे दूँ या अपनी जीवन समाप्त कर लूँ, क्योंकि मैं एक पढ़ा-लिखा व्यक्ति हूँ और मुझे इस तरह प्रताड़ित करके या जेल भेजने का अगर काम किया जाएगा, तो मैं अपने प्राण देने के लिए मजबूर रहूँगा और मेरे पास इसके अलावा कोई रास्ता नहीं होगा।
इसके अलावा, मुझे पलायन करना पड़ेगा। मुझे समझ में नहीं आता कि मेरे कई पीढ़ियों से मेरे पूर्वज यहाँ पर रहे हैं, तो अचानक ऐसा क्या हुआ है कि मुझे यहाँ से भगाया जा रहा है।
चूँकि मेरा घर इस गाँव में अंतिम पंक्ति में है, ठाकुरों के गाँव में जो घर होते हैं, उसकी अंतिम पंक्ति में मेरा घर है। इन लोगों की कम्युनिटी ने चारों तरफ घर बनाकर हमें चारों तरफ से घेर रखा है।
तो अब इन लोगों का ये है कि इन्होंने मुझे वल्नरेबल समझ लिया है कि मैं इनके लिए बहुत ईज़ी टारगेट हूँ।
तो अगर मेरी किसी तरह हत्या हो जाती है या मुझे किसी केस में फँसाया जाता है, तो उसके लिए वही लोग जिम्मेदार होंगे।
मेरे पास दूसरा रास्ता ये भी है, जो मेरे दिमाग में आ रहा है, कि मुझे धर्म परिवर्तन कर लेना चाहिए, ताकि मेरे ऊपर से ये ठाकुर वाला दाग हट जाए। इसको मैं दाग कहूँगा।
एक्चुअली, मैं इस पर पहले गर्व महसूस करता था। गर्व इसलिए महसूस करता था कि हमारे पूर्वजों ने काफी वीरताएँ दिखाई हैं, युद्ध लड़े हैं और कई युद्ध जीते हैं। उन्होंने देश को आगे बढ़ाने में प्रयास किया है।
लेकिन अभी मुझे इस बात का भय है कि जिस जाति से मैं बिलॉन्ग करता हूँ, वही जाति मेरे प्राणों के लिए काफी कष्टकर साबित हो रही है।"
Vrinda Grover, who defended Nirbhaya’s rapists, was called the “Queen of Cockroaches” by Abhijeet Dipke.
The same advocate who rushed to the Supreme Court at 2 AM to try to stop terrorist Yakub Memon’s hanging.
What’s the dark history behind the “Queen of Cockroaches”? Find out from @VisheshtaA
मिनी माथुर: मेरे पिता कहते हैं कि खान और खन्ना में कोई फ़र्क नहीं है 😳
"मैं एक पारंपरिक माथुर परिवार से हूँ। मेरे पिता ने कहा था कि मुझे कबीर खान से शादी करनी चाहिए"
रिपोर्टर: आपके बच्चे किस धर्म को मानते हैं? 😳
मिनी: "हाँ? आप मुझसे यह सवाल क्यों पूछ रहे हैं? मैं अपने बच्चों, विवान खान और सायरा खान के धर्म की जगह 'ह्यूमैनिस्ट' (मानवतावादी) लिखती हूँ"
ये वाला कीड़ा आपको सिर्फ़ हिंदुओं में मिलेगा।
🚨 अयोध्या के बरगदिया गाँव से बेहद दर्दनाक तस्वीर सामने आई है…
अर्पिता पांडे अपने तीन मासूम बच्चों के साथ बेहद कठिन परिस्थितियों में जीवन गुजार रही हैं। बताया जा रहा है कि बच्चों की थाली में महीनों से दाल-सब्जी और दूध नहीं, बल्कि सिर्फ सूखे चावल, नमक और थोड़ा तेल है। 😢
टूटती दीवारें, जर्जर छत और खंडहर जैसे घर में यह परिवार मदद की आस लगाए बैठा है। 🥹💔
अगर आप इस परिवार की मदद कर सकते हैं, तो आगे बढ़कर जरूर सहयोग करें।
भूख से जूझते इन मासूम चेहरों को देखकर चुप रहना मुश्किल है।
Gulshan Pahuja, languishing in Jail for more than a month, for committing THE MOST HEINOUS CRIME OF MAKING "DISRESPECTFUL THUMBNAILS" that irked Delhi High Court Judges, is going on a HUNGER STRIKE inside Tihar Jail
He has been sentenced to 6 MONTHS IN PRISON for contempt of court
He was actively campaigning for Judicial Reforms, audio video recording in courts, for more than a decade
He had no personal interests.
Had no personal agenda.
He was just working for society and people who become victims of our totally broken justice system and he's paying such a huge price
His health has deteriorated a lot
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