एक सावरकर थे। अंग्रेज़ों ने उन्हें जेल में डाल दिया। कुछ वर्ष जेल में रहने के बाद उन्होंने अंग्रेज़ों से माफी मांगी और खुद स्वतंत्रता आंदोलन से अलग कर लिया। इसके एवज में अंग्रेज़ उन्हें साठ रुपया महीना वेतन दिया करते थे। एक मौलाना मोहम्मद अली जौहर थे। मौलाना जौहर की माता जी से लेकर उनका पूरा परिवार स्वतंत्रता सेनानी था। इतिहास ने उन्हें ‘अली बंधु’ का नाम दिया है। वो अपनी आखिरी सांस तक आज़ादी के लिए संघर्ष करते रहे। मौलाना को मालूम नहीं था कि जिस वतन की आज़ादी के लिए वो संघर्ष कर रहे हैं, उसी वतन में एक रोज़ नफ़रत की सियासत के फायर ब्रांड नेता उन पर भी लांछन लगा देंगे।
जब पड़ा वक्त वतन पर तो लहू हमने दिया
अब आई है बहार तो कहते हैं तेरा काम नहीं!
कोई मुझें बता रहा था कि उमर खालिद ने देश तोड़ने की बात की थी।
इसलिए जेल में है।
तो मुझें ये भी समझाओ यति नरसिंहानंद का ये बयान क्या था जिसमें ये एक और बंटवारे
और अलग राष्ट्र की मांग कर रहा था।
क्या ये सोच टुकड़े करने वाली नहीं है ?
#UmarKhalid
मूल बात क्या है? मूल बात है कि गोदी मीडिया लोकतंत्र का हत्यारा है।
आप अगर-मगर के सहारे इससे नहीं बच सकते। कुछ अच्छे लोग हमेशा हैं, रहेंगे।उन्हें निशाना मत बनाइये, हिंसा और हुड़दंग नहीं होनी चाहिए। तब भी गोदी मीडिया की सच्चाई नहीं बदल जाएगी। जनता को हर दिन जागना होगा। आज इस मीडिया पर आप गर्व नहीं कर सकते. इसके न्यूज़ रूम के लोग भी शर्म से सहमे रहते हैं। अभी भी ज़रूरत है कि देश की हर पंचायत में पोस्टर लगना चाहिए कि गोदी मीडिया लोकतंत्र का हत्यारा है।हर पार्टी के दफ्तर के बाहर यह पोस्टर लगा होना चाहिए। एयर पोर्ट पर स्पेस ख़रीद कर यह नारा लिखा जाना चाहिए। लोगों को अपनी कार के पीछे लिखना चाहिए। इस गोदी मीडिया ने लोकतंत्र के हर कोने में सड़न पैदा कर दी है। इसके कारण कुर्सी पर बैठा हर शख़्स ख़ुद को ख़ुदा समझ बैठा है। सांसद तक लूटे जा रहे हैं। विपक्षी पार्टियाँ लूट ली जा रही हैं। वोट का अधिकार छीना गया है। इसी मीडिया के सामने। इसलिए मूल बात है कि गोदी मीडिया लोकतंत्र का हत्यारा है।
प्रिय दिल्ली पुलिस कुछ पता चला इनका। वर्ना लोग प्रदर्शनों में इनकी तरह कपड़े में जाने लगेंगे और लाठी लेकर भी। आपको लगेगा कि पुलिस ही पुलिस आई है। जनता तो आई नहीं। सोशल मीडिया में इस तरह के पोस्टर चल रहे हैं।