राम जी से घात का पैसा
धर्म-दान पात्र का पैसा
भाजपा के पाप का पैसा
नहीं चाहिए ~ नहीं चाहिए
ऐसा पैसा ~ नहीं चाहिए
नहीं चाहिए ~ नहीं चाहिए
ऐसा पैसा नहीं फलेगा
ज़्यादा दिन नहीं चलेगा
जो लेगा ~ उसको पाप लगेगा
नहीं चाहिए ~ नहीं चाहिए
ऐसा पैसा ~ नहीं चाहिए
नहीं चाहिए ~ नहीं चाहिए
तो समझे…
जब भाजपा से कोई आए
पैसे का लालच दिखलाए
तो बैठाके पूछो क्यों चुराया
मंदिर का मान क्यों गिराया
कहना
नहीं चाहिए ~ नहीं चाहिए
ऐसा पैसा ~ नहीं चाहिए
नहीं चाहिए ~ नहीं चाहिए
तो समझे…
जिस पैसे से पड़ेगा पाप
उसको नहीं लगाना हाथ
वरना लग जाएगा श्राप
पाप कर देगा सब नाश
इसीलिए
राम जी से घ���त का पैसा
धर्म-दान पात्र का पैसा
भाजपा के पाप का पैसा
नहीं चाहिए ~ नहीं चाहिए
ऐसा पैसा ~ नहीं चाहिए
नहीं चाहिए ~ नहीं चाहिए
आज फिर से अखिलेश यादव जी ने आगामी चुनाव के लिए अपनी प्रा��मिकता जाहिर कर दी है जो आम जनमानस के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है।
उत्तर प्रदेश में ग्रामीण आबादी लगभग 78% है यानि कि कुल 15 करोड़ से अधिक लोग आज भी गांव में निवास करते हैं।
अखिलेश जी ने कहा कि
"आज स्वतंत्रता दिवस है मैं अपने उत्तर प्रदेश के लोगों से ये कहना चाहता हूं कि समाजवादी सरकार बनने पर सबसे ज्यादा प्राथमिकता में
किसान, गरीब और गांव में रहने वाले लोग होंगे।"
भाजपा सरकार में किसानों को यू���िया नहीं, पानी की समस्या और गरीबों को महंगाई साथ ही गांव में रहने वाले लोगों को बहुत सारी परेशानियां उठानी पड़ी थीं।
समाजवादी पार्टी किसान, जवान, छात्र, गांव और गरीब सबको साथ लेकर चलने का काम करेगी।
स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ!
संविधान से ही स्वाधीनता है। आइए हम सब मिलकर इस स्वतंत्रता दिवस पर संविधान की रक्षा एवं निरंतरता का संकल्प लें���
समाचार : भाजपा का एक और जुमला यूपी की महिलाओं को देंगे 20000
विचार : भाजपा के पास चुनाव जीतने के लिए पैसे के सिवा कुछ नहीं बचा है। वो भी भाजपा की पाप की कमाई है, जिसे उप्र की धार्मिक महिलाएँ कभी नहीं लेंगी। उप्र की जागरूक महिलाएं पूछ रही हैं जिन दूसरे राज्यों में महिलाओं को पैसे देने की घोषणा करके चुनाव जीता था, वहाँ एक तरफ़ तो देने से आनाकानी कर रहे हैं, दूसरी तरफ़ पैसे वापस माँग रहे हैं, और जो लौटा नहीं पा रही हैं, उन महिलाओं पर भाजपा थाने-कचहरी, पुलिस-मुक़दमे की निंदनीय कार्रवाई कर रही है।
देखा ज���ए तो आज जिस 50000 रुपये सालाना पैसे देने की बात भाजपा सरकार कर रही है वो पैसे पिछले 10 साल में भी दे सकती थी, पर दिया नहीं। मुख्यमंत्री जी ने उप्र की महिलाओं के हक़-अधिकार के हजारों करोड़ रुपये अपने प्रचार पर ख़र्च करके सबको ठेंगा दिखा दिया।
50 हज़ार रुपये हर साल के हिसाब से भाजपा की भ्रष्ट सरकार पिछले 10 साल में महिलाओं के हिस्से का 5 लाख रुपया खा गई और अब केवल 20 हज़ार देने का जुमला परोस रही है। 20 हज़ार रुपया तो 5 लाख रुपये का केवल 4% हुआ, इसका मतलब ये भाजपाई महिलाओं के हक़ का 96% डकार गये। 80:20 की बात करनेवालों ने तो 96:4 करके भ्रष्टाचार का सुपर रिकॉर्ड बना दिया।
अगर जुमले वाले 15 लाख रुपये छोड़ भी दें और भाजपा चुनाव में लड़ता दिखने के लिए 20 हज़ार दे भी दे, तो भी जनता का भाजपा सरकार पर 4,80,000 रुपये का बकाया निकलता है।
जनाक्रोश के डर से आज भाजपा के नेता, संगी-साथी, कार्यकर्ता, समर्थक, झंडे-बैनर सब डर के मारे भूमिगत हो गये हैं। यहाँ तक कि भाजपा से अब कोई टिकट भी नहीं लेना चाहता है। मंदिर में चोरी और बच्चों पर हमले के बाद भाजपा के पास न तो नैतिकता बची, न साहस इसीलिए वो पैसे का सहारा ले रहे हैं।
हम 40000 से करेंगे शुरुआत
जिसमें ‘बढ़ोतरी’ होगी हर साल!
आज का युवा समझदार और संवेदनशील है , वो अपना हक लेकर रहेगा।
युवाओं को गुमराह करने की जगह सरकार को सरकारी नौकरी या सम्मानित नौकरी उपलब्ध करवाना चाहिए।
बेरोज़गारी- गरीबी मुक्त भारत अभियान के तहत जनपद गोण्डा के ब्लाक #कटरा में भ्रमण किया गया।
#Gonda#Job#unemployment
जनपद गोण्डा के प्रसिद्ध वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता एवं प्रधान प्रतिनिधि बृजेश कुमार मिश्रा जी को बेरोजगारी-गरीबी मुक्त भारत अभियान का गोण्डा प्रभारी नियुक्त किया गया।
बृजेश जी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
साथियों समय आ गया है सरकार को नौजवानों के हितों को ध्यान में रखते हुए 18 वर्ष से अधिक आयु वाले नौजवानों के लिए Right To Dignified Employment का कानून बनाना चाहिए।
100% सम्मानित रोजगार हमारा संवैधानिक अधिकार होना चाहिए।
प्रिय कलाकारों-रचनाकारों
भारतीय जनता पार्टी ने जिस प्रकार एक मजबूर और बेबस कलाकार की प्रतिभा का दुरुपयोग अपना राजनीतिक स्वार्थ साधने के लिए किया वो बेहद निंदनीय है। सबको मालूम है कि कुछ दिनों पहले, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के लखनऊ आगमन पर, उनके रथ के आगे एक कलाकार को हनुमान जी के रूप में नृत्य करवाया गया था। जिससे संपूर्ण विश्व के बजरंगबली जी के उपासकों में आज तक गहरा आक्रोश है।
इसमें किसी ग़र��ब कलाकार का कोई दोष नहीं है क्योंकि भाजपा सरकार में कलाकारों के लिए कोई स्थान नहीं है, इसीलिए वो अपने परिवार को चलाने के लिए विवश हैं। नकारात्मक भाजपाई सदैव सृजनात्मकता के विरोधी रहे हैं क्योंकि सृजनात्मकता रूढ़ियों और रूढ़िवादिता के विरुध्द ही अपना नया रास्ता निकालती है, जो भाजपा की पुरातनपंथी-दक़ियानूसी सोच को तनिक भी रास नहीं आता है क्योंकि उनके अंदर रचनात्मकता की अभिव्यक्ति से ‘सत्���ा विरोधी लहर’ के और भी बलवती होने का डर समाया रहता है। इसीलिए चाहे साहित्यकार हो, ईमानदार पत्रकार हो या कोई भी कलाकार, ये भाजपाई और उनके संगी-साथी चाहते ही नहीं हैं कि वो मुखर हो या उनकी कलात्मक अभिव्यक्ति को किसी भी तरह का कोई मंच मिले। अगर भाजपाई कलाकारों को कभी मौका देते भी हैं तो अपने सम्मान के लिए, न कि कलाकारों के सम्मान के लिए।
आज हम सबने मिलकर आर्थिक तंगी झेल रहे कलाकार की सहायता की और ���गे भी करेंगे जिससे वो अपने परिवार में चल रह�� बीमारी और बदहाली का सामना कर सके।
‘कलात्मकता’ मानवता का परिष्कार करती है। कला सहिष्णुता, सद्भाव, सौहार्द, समानता बढ़ाती है, इसीलिए जो लोग बंटवारे की नकारात्मक राजनीति करते हैं वो कलाकारों के विरोधी होते हैं।
आज हम हर कलाकार से वादा करते हैं कि जिस प्रकार हमने अपनी सरकार के दौरान कलाकारों को हर तरह से मान-सम्मान और आर्थिक सहयोग किया था, नई सरकार के आने पर भी रचनात्मकता की उस स्वस्थ परंपरा को और भी आगे बढ़ाएँगे और उप्र से संबद्ध विशेष प्रतिभावानों के सामाजिक योगदान को ‘यश भारती सम्मान’ व 1 लाख रूपये प्रतिमाह देकर उनका आजीवन अभिनन्दन करेंगे।
सकारात्मकता ही सृजनात्मकता का सम्मान करती है।
आपका
अखिलेश
अपनी किताब #जाति_जनगणना पर काम करते हुए मैंने मंडल आंदोलन के दौर को बहुत क़ायदे से समझाना चाहा, तो एक सवर्ण की बड़ी अहम भूमिका उभरकर सामने आई. उनका नाम था- विश्वनाथ प्रताप सिंह. समाजवादी पाठशाला के वे ऐसे ईमानदार लोगों का दौर था, जिनके लिए जाति नहीं, समता बड़ी चीज़ थी.
#UGCRegulations2026 लाने वाली भाजपा सरकार को पता था कि पिछड़ों दलितों को न्याय देना नहीं, समाज में तनाव पैदा करना है. इसलिए अधकचरा दस्तावेज़ बनाया. सड़क पर विरोध करवाया. कोर्ट से रुकवा दिया. या यों कहें कि भाजपा को पता था कि ये सब होगा. क्योंकि मंशा ही समता न्याय की नहीं थी.
मंडल के दौर को क़ायदे से पढ़िएगा. जाति जनगणना हमारा असली मुद्दा है, जिसके बाद न्याय और समता की सबसे अहम लड़ाई का आग़ाज़ होगा.
क्या अद्भुत समाजवादी लोग थे. रीढ़ वाले लोग, खाँटी समाजवादी, खाँटी वैचारिक; जिनका तेवर ऐसा था कि वे झुके नहीं और जिनकी ज़िद ऐस��� थी कि वे कभी ख़ामोश नहीं रहे. वे सत्ता से आँख मिलाकर बात करते थे, सच के सामने सिर झुकाना गुनाह समझते थे; समझौते उनके शब्दकोश में नहीं थे और डर उनके स्वभाव में नहीं. आज जब चारों तरफ़ सुविधाएँ तो हैं, लेकिन साहस नहीं, तब उनकी याद और भी तीव्र होकर लौट आती है. मुश्किल वक़्त में उनकी याद और बढ़ जाती है.
'ये (OBC, SC, ST) डर और तकलीफ़ में भरे हुए हैं, इनके पास ज़बान नहीं है, ये बोल नहीं पाते हैं, आपकी सरकार आपकी व्य���स्था इनके ख़िलाफ़ रोज़ षड्यंत्र करती है.' - मरहूम शरद जी
'ये मत समझना. ये गरीब हों, पिछड़े हों, मुसलमान हों, दलित हों; इनको बहुत दिनों तक दबाया नहीं जा सकता. अब इनमें जागृति आ गई है. आपको जीतना मुश्किल हो जाएगा.' - मरहूम मुलायम सिंह जी
"चेतावनी कहिये या सलाह कहिये...यह मैं निश्चित रूप से बता ���ेना चाहता हूँ कि जिलाधिकारी हो या मुख्य चुनाव आयुक्त हो, अगर लोकतंत्र का चीरहरण करेंगे, लोकतंत्र का गला घोटेंगे, मतदाता का अधिकार छीनेंगे, तो यह हम होने नहीं देंगे"
: सपा सांसद राजीव राय जी
यही जज़्बा चाहिए इन बेईमानों से लोकतंत्र को बचाने के लिये!
@RajeevRai भैया 🙏