जब कांग्रेस पार्टी की केन्द्र में सरकार थी तो तब सर्वप्रथम बीजेपी (BJP) द्वारा इसका (EVM), यह कहते हुये विरोध किया गया था कि ईवीएम (EVM) एक मशीन है जिसमें लगी हुई इलेक्ट्रॉनिक चिप (Chip) को आसानी से हैक (Hack) किया जा सकता है। और इसका प्रमाण देते हुए उनके द्वारा एक किताब भी प्रकाशित की गई थी।
तथा उनका यह भी कहना था कि इस ईवीएम (EVM) की मशीन का दुरुपयोग करते हुये कांग्रेस पार्टी चुनाव जीत जाती है। यह भी कहा गया कि इन्हीं कारणों से ईवीएम (EVM) ज्यादातर देशों में इस्तेमाल नहीं होती है। और अधिकांश बैलेट पेपर का ही इस्तेमाल होता है। इसलिए, इसे अपने देश में भी रोक देना चाहिये। परन्तु हैरानी की बात यह है कि जब BJP चुनाव जीतकर केन्द्र की सरकार में आ गई तो अब उसने ईवीएम (EVM) को समाप्त करने की जगह उसी के द्वारा Voting करवाने की और गिनती कराने की भी प्रक्रिया को चालू रखा है।
~ आदरणीय बहन मायावती जी
मायावती ने UPI की नई व्यवस्था को बताया जनता पर दोहरा बोझ, बोलीं- पहले बुनियादी सुविधाएं सही करें, फिर स्मार्ट स्कूल की बात करें https://t.co/ix0HY8xkPf
जब बात जनता के टैक्स के पैसों और बुनियादी सुविधाओं की आती है, तो आकाश आनंद जी का निडर अंदाज़ हमेशा सच सामने लाता है!
प्रचार पर हज़ारों करोड़ और अस्पतालों में बदहाली? यही तीखे सवाल उनकी असली पहचान हैं। #AkashAnand#YouthLeader#BSP#JanAwaaz
1. यूपीआई डिजिटल लेनदेन को पहले ख़ूब बढ़ावा देने के बाद अब सरकार द्वारा उस लेनदेन पर शुल्क वसूलने की नई व्यवस्था लोगों की नज़र में प्रथमदृष्टया मुनाफाख़ोरी के पूंजीवादी रवैये के तहत जनता से दोनों हाथों से टैक्स वसूली है, जिससे जनता में बेचैनी व आक्रोश स्वाभाविक है।
2. वैसे तो जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने की इस व्यवस्था को ’कर’ मानने को तैयार नहीं है, किन्तु दिनांक 15 अक्तूबर से लागू हाने वाली इस व्यवस्था को चाहे जो भी नाम दिया जाये जेब तो अन्ततः आमजनता की ही कटेगी, उसका ही ख़र्च बढ़ेगा।
3. साथ ही, यह भी सर्वविदित है कि देश की बहुसंख्यक जनता अपार ग़रीबी व ज़बरदस्त महंगाई आदि की मार से त्रस्त है व उनके बच्चे अशिक्षा, बेरोज़गारी व अव्यवस्था आदि से पीड़ित हैं, ऐसे में सरकार की नीति व कार्ययोजना लाभ कमाने वाली व्यावसायिक कम व कल्याणकारी ज़्यादा हो तो यह उचित होगा। जनता की तंगी, दुख-तकलीफ की अगर सरकार चिन्ता नहीं करेगी तो फिर कौन करेगा?
4. इसके साथ ही, यूपी सरकार द्वारा करीब 300 करोड़ रुपये की लागत से प्रदेश के कीरब 14,500 स्कूलों को ’स्मार्ट स्कूल’ बनाने की घोषणा अच्छी बात है, लेकिन बच्चों को कथित ’स्मार्ट पढ़ाई’ से पहले उन्हें बुनियादी शिक्षा आदि की ज़रूरतें अर्थात स्कूली बच्चों के सर पर छत, उनके लिये बेंच, कुर्सी, किताब, शौचालय, मैदान, साफ-सफाई आदि की सही व्यवस्था पूरी की जायें और यह सब प्रति स्कूल क़रीब दो लाख रुपये में क्या संभव हो पायेगा, इस पर भी सरकार सहानुभूतिपूर्वक ज़रूर विचार करे।
आकाश आनंद बसपा के रास्ते का सबसे नरम कांटा था।
आवाज़ धीमी, वार गहरा।
भाजपा की जड़ें हिलाईं, कार्यकर्ताओं में वो आग भरी कि “हाँ, सरकार बन सकती है”, और सबको ये अहसास दिलाया कि पार्टी में तुम अनाथ नहीं हो—तुम्हारा युवा नेता साथ है।
फिर रामजी गौतम एंड कंपनी ने आकर वही कांटा जड़ से उखाड़ दिया।
अब पार्टी में कांटे नहीं, सिर्फ कुर्सियाँ हैं।
और कुर्सी जितनी गद्देदार, आंदोलन उतना ही बेजान।
जो युवा पीढ़ी को जगाने आया था, उसे “अनुशासन” के नाम पर सुला दिया गया।
जो मैदान में लड़ रहा था, उसे दफ्तर की कुर्सी ने निगल लिया।
अब हाथी नहीं दौड़ता, कुर्सी घूमती है।
बहिनजी, अब और इंतज़ार मत करिए।
रामजी गौतम को उत्तराधिकारी बनाने की घोषणा तुरंत कर दीजिए।
ताकि रामजी गौतम जैसी “जड़-उखाड़ू” प्रतिभाओं को भी सम्मान मिल सके।
वरना अगली बार कांटा नहीं, पूरा बाग कट जाएगा।
और तब इतिहास लिखेगा—
हाथी तो था, लेकिन बागवान कुर्सी पर सो गया।
@ramjigautambsp@Mayawati
#तीखाव्यंग्य #बसपा #आकाशआनंद #रामजीगौतम #बहिनजीअबबोलिए
एक घटना #राजूपाल हत्याकांड की ब दूसरी घटना प्रशासन के सामने #अतीक_अहमद की हत्या की दोनों में फर्क क्या है गुंडागर्दी अभी भी चरम पर है अपनी नाकामी को जाति विशेष के पीछे छुपाने की कोशिश......
मैंने एक आम नागरिक होने के नाते हिमांचल प्रदेश के विधान सभा चुनाव मैं देखा की special covrage news जो मुद्दा काफी समय से चला रही थी.. #शिक्षास्वस्थ्यरोजगारऔरमहगाई यह सारे मुद्दे चुनाव मैं चले और सरकार परिवर्तन हुआ...