राष्ट्रवादी नही राष्ट्रप्रेमी || नगरपालिका पार्षद || पूर्व सदस्य : बीस सूत्रीय कार्यक्रम || पूर्व सदस्य : सरस डेयरी || पूर्व AYC अध्यक्ष || Repost निजी राय नही
@ElectionMP2028 जैसे ही मध्यप्रदेश सीमा आई जीतू जी ने मेरी बुलेट पर राहुल जी को बिठाया और उसी समय पुलिस ने चाबी निकाल ली। आप चाहोगे तो पूरी घटना के फोटो उपलब्ध करवा दूंगा। इसके माध्यम से मेरा कहना सिर्फ इतना है कि सिर्फ एक फोटो के आधार पर किसी को सारा श्रेय दे देना गलत है।
@ElectionMP2028 आप 2017 के जिस किसान आंदोलन का जिक्र कर रहे है उसमें राजस्थान बोर्डर(निम्बाहेड़ा) से मध्यप्रदेश बोर्डर(नया गांव) तक मैं अपनी बुलेट पर बिठाकर ले गया था जीतू जी को, राहुल जी धीरज जी गुर्जर के साथ लाल डीलक्स पर बैठे थे और हमारी दोनों मोटरसाइकिल साथ साथ चल रही थी।
सत्ता के अहंकार में डूबी मोदी सरकार अब इस मुकाम पर पहुँच गई है कि अपने अधिकारों, निष्पक्ष परीक्षाओं और सुरक्षित भविष्य की मांग करने वाले छात्रों को ही शिक्षा मंत्री “आतंकवादी” कह रहे हैं।
ज़रा सोचिए - जिसकी नाकामी से इतने पेपर लीक हुए, जिसके राज में 20 बच्चों ने जान दे दी, जिसने करोड़ों युवाओं का भविष्य अंधेरे में धकेल दिया - वो आज पीड़ित बच्चों और उनकी आवाज़ उठाने वालों को “दहशतगर्द” बता रहा है।
पर यह कोई नई बात नहीं: अन्नदाता किसानों को "आंदोलनजीवी और परजीवी" कहा। सवाल पूछने वाले को “Anti-National” कहा। और अब युवाओं को “दहशतगर्द।”
जो भी सरकार से सवाल पूछे - उसे देशद्रोही बता दो, यही इनकी पूरी राजनीति है।
धर्मेंद्र प्रधान जी, देश के करोड़ों युवाओं से तुरंत माफ़ी माँगिए और अपनी नाकामियों के लिए इस्तीफ़ा दीजिए।
और रही मेरी बात - आप मुझ पर जितने चाहें हमले कर लीजिए। मैंने कोटा में कहा था, और फिर कहता हूँ: यह शिक्षा व्यवस्था आज सिर्फ़ एक वसूली तंत्र बन गई है। मैं इसे ऐसे ही नहीं रहने दूँगा।
हर बच्चे को सस्ती, अच्छी शिक्षा और निष्पक्ष परीक्षा मिले - इस आवाज़ को उठाना मैं कभी बंद नहीं करूँगा।
#ChhatronKiGoonj
#ChhatraJodo
“भाईयों और बहनों कल दिल्ली में भ्रष्टाचार पर बड़े बड़े भाषण होते रहे थे। बहुत बड़ी बड़ी बातें सुनाई जा रही थी। जब वैसे लोग भ्रष्टाचार पर बोलते हैं न तो मुंह में से दुर्गंध आती है” : नरेंद्र मोदी, 2011
आदर्श प्रकरण में अशोक चव्हाण की सास के नाम पर फ़्लैट होने का आरोप लगा तो इस्तीफा हुआ, लेकिन मोहन यादव से जुड़े मामले में मीडिया पर सन्नाटा है।
अरुणाचल प्रदेश से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लिया, लेकिन मुख्यमंत्री अब भी कुर्सी पर बैठे हैं। वही हाल अब MP में भी है।
इसका कारण गैर-रजिस्टर्ड RSS है, क्योंकि ये सब उसी से जुड़े हैं और अयोध्या के मामले में भी इन्हीं के लोग शामिल हैं।
: AICC मीडिया एवं पब्लिसिटी विभाग के चेयरमैन @Pawankhera जी
📍 दिल्ली
2014 के पहले की स्थिति होती तो
किसी मुख्यमंत्री के कुनबे के बारे में ऐसे खुलासे के बाद चैनलों ने मिट्टी खोद दिया होता . उस मुख्यमंत्री की जीना हराम कर दिया होता . चैनलों के रिपोर्टर माइक और कैमरा लेकर उसका पीछा कर रहे होते . उसकी पार्टी को सवालों के घेरे में लाया गया होता . पीएम तक से सवाल पूछे जा रहे होते .
इस्तीफा मांगा जा रहा होता
2014 के बाद क्या बदल गया
ग़ैर बीजेपी राज्य के मुख्यमंत्री या मंत्री पर आरोप लगे तो चैनलों पर चीख पुकार मचती है . बीजेपी प्रवक्ता से ज्यादा तेवर एंकर और एडिटर दिखाने लगते हैं . इस्तीफे के लिए मुहिम चलने लगती है लेकिन जब बीजेपी का कोई बड़ा नेता फंसता है तो सन्नाटा छा जाता है . सब चुप्पी साध लेते हैं , जैसे कुछ हुआ ही न हो .
मध्य प्रदेश के CM मोहन यादव और उनके परिवार ने महाकाल की नगरी उज्जैन में जमीन से जुड़ा करोड़ों रुपए का भ्रष्टाचार किया है।
मोहन यादव के करीबी रिश्तेदारों ने सरकारी प्रोजेक्ट्स के आसपास करोड़ों की जमीनें खरीदी हैं और खूब पैसा बनाया है।
देखिए पूरी रिपोर्ट 👇
जादू देखिए 👇
मोहन यादव मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बने. इसके बाद उनके परिवार ने उज्जैन में धड़ाधड़ जमीनें खरीद लीं.
खास बात है कि ये जमीनें सरकारी प्रोजेक्ट के आस पास थीं.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट बताती है- मोहन यादव की पत्नी, बहू, भाई, उनके लड़के और तमाम रिश्तेदारों ने जमीन खरीदी.
खबरदार- अगर किसी ने भ्रष्टाचार कहा, ये तो जादू है.
अगर मैं मुख्यमंत्री होता तो पूरे राज्य में जमीनें खरीदता. पहले अपने लोगों से जमीन खरीदवाता, फिर वहां से सड़क निकाल देता. खूब भ्रष्टाचार करता, जमकर पैसा बनाता.
अभी वाले मुख्यमंत्री तो देवता हैं, उनको बदनाम करने को ये सब किया जा रहा है.
शर्म आनी चाहिए आप लोगों को 😡
नागपुर का एक बच्चा एक महीने से NEET re-exam की तैयारी कर रहा था।
कल परीक्षा से ठीक एक दिन पहले उसने admit card डाउनलोड किया। उसका सेंटर निकला - अबू धाबी।
न पासपोर्ट, न परिवार के पास विदेश भेजने के पैसे, न अब कोई वक़्त बचा है। वो रातभर रोता रहा, और परीक्षा देने से ही मना कर रहा है - क्या इस तनाव की कल्पना भी की जा सकती है?
आखिर ऐसा हुआ भी कैसे? कल किसी भी छात्र को सेंटर तक न पहुँच पाने की शिकायत नहीं होनी चाहिए। NTA असल में देश के बच्चों और उनके माता-पिता का सिर्फ़ धीरज test कर रही है।
जो system एक बच्चे को अपने ही शहर में एक centre नहीं दे सकती, उल्टा विदेश भेज सकती है - उसे परीक्षा करवाने का कोई हक़ नहीं।
कोटा में मैंने यही कहा था - यह अब शिक्षा व्यवस्था नहीं रही। यह एक पूरी पीढ़ी के पैसे, समय और मानसिक शांति की वसूली है।
हमारे बच्चों के भविष्य के साथ जुआ खेलना बंद कीजिए। वो एक संवेदनशील, ज़िम्मेदार और जवाबदेह शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा के अधिकारी हैं - और हम ये उन्हें दिलवा कर रहेंगे।
#ChhatronKiGoonj
#ChhatraJodo
कोटा, आप कमाल थे।
यकीन मानिए, कल हमने मिलकर इतिहास की शुरुआत की।
हज़ारों छात्र मैदान में थे, लाखों लोगों ने ऑनलाइन देखा - और देश को पहली बार खुलकर पता चला कि शिक्षा के नाम पर कितनी बड़ी वसूली चल रही है।
लेकिन यह तो सिर्फ़ शुरुआत है। कोटा में जो लौ जली है, उसे अब पूरे देश में बदलाव की मशाल बनाना है। और इस सफ़र में आपकी जगह तय है।
अपने सुझाव भेजिए। Petition पर अभी Sign कीजिए।
#ChhatronKiGoonj
पता है, भारत की सिर्फ़ 5 परीक्षाओं - NEET, JEE, SSC, UPSC और RRB की तैयारी पर छात्र और उनके परिवार हर साल कितना ख़र्च करते हैं?
₹3.5 लाख करोड़।
यानी भारत सरकार के पूरे शिक्षा बजट का लगभग तीन गुना। शिक्षा, स्वास्थ्य, श्रम, विज्ञान और महिला-बाल विकास - इन पाँच मंत्रालयों के कुल बजट के बराबर।
और बदले में करोड़ों युवाओं को क्या मिलता है? तनाव, अनिश्चितता, बेरोज़गारी, और टूटते सपने।
जो ख़र्च सरकार की ज़िम्मेदारी है, उसका बोझ आज परिवार उठा रहे हैं।
#ChhatronKiGoonj
I am very happy and honoured to stand in front of you in Kota.
I want to make it clear: this is not a political meeting. This is about you, about your future. This evening is about you, what you are facing, and the challenges you deal with every single day.
: LoP Shri @RahulGandhi
📍 Kota, Rajasthan
#ChhatronKiGoonj
कोटा के लिए निकल चुका हूँ पर दिल में दो नाम गूंज रहे हैं: उमेश और रिया।
कल, सीकर में उमेश और देहरादून में रिया - दोनों ने Re-NEET के दबाव में अपनी ज़िंदगी ख़त्म कर ली।
22 और 23 साल के बच्चे - जिन्हें सपनों के खुले आसमान में उड़ना था वो इस अन्यायी व्यवस्था से हार गए।
ये मौतें एक टूटी, भ्रष्ट व्यवस्था की देन हैं। और इसके ज़िम्मेदार हैं मोदी सरकार और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान जिन्होंने छात्रों की रक्षा करने के बजाय, बार-बार पेपर लीक, परीक्षा कुप्रबंधन, और भविष्य के सदागरों को संरक्षण दिया।
आज कोटा से हम वो लड़ाई शुरू करेंगे जिसका एक ही मक़सद है - किसी बच्चे के सपने ऐसे टूटने न पाएं, किसी माँ-बाप को फिर कभी अपने बच्चे को इस तरह खोना न पड़े।
हर परिवार की यह पीड़ा अब ‘छात्रों की गूंज’ बनकर पूरे देश में गूंजेगी।
#ChhatronKiGoonj
"सावरकर ने अंग्रेजों के सामने 10 दया याचिकाएं दायर की थीं, जबकि भगत सिंह जैसे क्रांतिकारियों ने समझौता करने से इनकार कर दिया था"
◆ पुणे कोर्ट में जिरह के दौरान सावरकर के प्रपौत्र सत्यकी सावरकर ने कहा
◆ राहुल गांधी के ख़िलाफ़ दायर आपराधिक मानहानि के मामले में सत्यकी सावरकर ने बयान दिया कि, "दया याचिकाओं का रिकॉर्ड सरकार के पास मौजूद है"
#Savarkar | #SatyakiSavarkar | #RahulGandhi | #PuneCourt
इस वीडियो ने मुझे झकझोर दिया।
ये उस भारत के लाचार युवा हैं - जिसकी सरकार अपने अरबपति दोस्तों पर लाखों करोड़ लुटा देती है, पर अपने ही छात्रों को एक सुरक्षित सफ़र तक नहीं दे सकती।
चुनाव के वक़्त यही सरकार पूरी-पूरी ट्रेनों का इंतज़ाम कर लेती है। और परीक्षा देने जा रहे छात्रों के हिस्से में आती है - भीड़, घुटन, और बेबसी।
इससे बड़ा सबूत क्या होगा कि मोदी सरकार छात्रों की गूंज सुनना ही नहीं चाहती।
पर मैं वादा करता हूँ - हम यह आवाज़ उन बहरे कानों तक पहुँचाएँगे। हर छात्र को उसका हक़ मिलेगा, उसका न्याय मिलेगा।
17 जून, कोटा। यही गूंज, अब हुंकार बनेगी।
#ChhatronKiGoonj
I lost my father to the politics of hate and division. I will not lose my beloved country to it too.
Love will conquer hate. Hope will defeat fear. Together, we will overcome.
कई साथियों ने INDIA गठबंधन की बैठक में मेरे भाषण का हिंदी अनुवाद मांगा था - यह रहा, ज़रूर सुनें।
8 जून को INDIA गठबंधन की बैठक में 20 से भी ज़्यादा नेताओं के भाषणों और बातों को सुनने के बाद आखिर में मैंने इस भाषण से उन्हें संबोधित किया।
जब भारत की सोच, देश की आत्मा पर संकट हो... जब संस्थाओं पर कब्ज़ा हो... जब जनता की आवाज़ दबाई जाए...तब सिर्फ़ एकता के साथ प्रतिरोध काम आता है।
मैं फिर से कह रहा हूँ - 2024 का चुनाव हम हारे नहीं थे और 2029 का चुनाव हम जीत चुके हैं।
हम एकजुट रहेंगे, जन-जन को संगठित करेंगे और प्रतिरोध की ताकत से BJP और उसके भारत के संस्थानों पर कब्ज़े को हराएंगे।
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