#StopacademicKillingof_SC_ST_OBC
प्रदेश और देश के शैक्षणिक संस्थानों और नौकरियों में पिछड़ों, दलितों और वंचितों के साथ हो रहे भेदभाव और एक दलित छात्र शिवम सोनकर के साथ हुए अन्याय के खिलाफ आज बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में संविधान के सच्चे सिपाहियों के साथ 'भीम शिक्षा अधिकार मार्च' के तहत शांतिपूर्ण प्रदर्शन में।।
#StopacademicKillingof_SC_ST_OBC
ये शिवम सोनकर है। 8 बार NET क्वालीफाई कर चुका है। BHU में पीएचडी प्रवेश परीक्षा में सामान्य वर्ग में दूसरा स्थान प्राप्त कर चुका है। BHU में इसे प्रवेश से वंचित कर दिया गया और प्रशासन द्वारा कहा जाता है कि "जाकर जूता साफ करने का काम करो", केवल इसलिए क्योंकि वह एक दलित समुदाय से आता है। इससे अधिक दुर्भाग्यपूर्ण क्या हो सकता है कि एक मेधावी छात्र, जिसने अपनी मेहनत से यह मुकाम हासिल किया, आज विश्वविद्यालय के द्वार पर खुले आसमान के नीचे अन्याय के खिलाफ बैठने को मजबूर है।
2017 में CM आवास को जब गंगाजल से धोया गया था तो अखिलेश यादव खुद को 'शुद्र' बताकर रो रहे थे।
आज आप इस घटिया इंसान की भाषा देखिए।
इसे पानी पीने एवं सावर्जनिक जगहों पर पानी पीने के अधिकार में अंतर नहीं पता। इसीलिए मैं इन्हें बैलबुद्धि कहता हूँ। कुछ आता न जाता, चुनाव चिन्ह छाता।🤣
Misinformation Alert!
मथुरा की घटना के संबंध में प्रसारित की जा रही खबर पूर्णतः दुष्प्रचार है एवं जमीनी वास्तविकता से परे है।
सच्चाई यह है कि लठैतों ने मासूम बेटियों की शादियां तुड़वा दी, बाप-चाचा की पगड़ी गिरा दी और सरेआम जातिसूचक गालियां देते हुए दलितों पर हमले किए।
जिस गांव में ये घटना हुई है, वह यादव बाहुल्य गांव है। वहां लगभग 70% यादव हैं। दलितों के पास बारात घर भी नहीं है। उन्हें दूसरों के खेतों में बारात बिठानी पड़ती है। अतः ऐसी घटनाएं अक्सर होती रहती है।
आज हम लोग जब देश भर में घटना को लेकर शासन प्रशासन पर दबाव बना रहे हैं तो कुछ लोग पीड़िता बहनों को न्याय दिलाने की बजाए ऐसी झूठी खबरें प्रसारित कर रहे हैं जिससे लोग उनकी वाहवाही करें।
पहली बात- गांव में किसी भी हमलावर को समाज से बहिष्कृत नहीं किया गया है। दूसरी बात- अगर हमलावरों के खिलाफ आप बोलते भी तो क्या आप पीड़ित परिवार या दलित समुदाय पर कोई एहसान करते? अच्छा इंसान होना हर किसी का कर्तव्य होना चाहिए। इसमें अपनी या अपनी जाति की मक्खन पॉलिश क्यों कर रहे हैं? किसी भी परिवार को समाज से बहिष्कृत करना न तो कभी दलितों की मांग रही है और न ही ये उचित है।
तीसरी बात- कोई समाज इस बात पर गर्व कैसे कर सकता है कि उसके ही लोग दलितों पर हमले किए, बेटियों की शादियां तुड़वाई, बाप की जमा पूंजी नष्ट कर दी, भरे समाज में उन्हें बेइज्जत किया.... और अब आप चाहते हैं कि हम आपको फूल माला पहनाकर स्वागत करें क्योंकि कुछ लोग पीड़िता के पक्ष में खड़े हैं? मतलब चित भी मेरी और पट भी मेरी। वो भी दुष्प्रचार की बुनियाद पर? इतनी छोटी सोच? शर्म आनी चाहिए।
मैं किसी जाति या समाज के खिलाफ नहीं हूँ लेकिन यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि यादव समुदाय के चिंतक misinformation फैलाकर दलितों को मूर्ख बनाना और उन्हें गुमराह करना बंद करें। बेहतर होगा कि आप अपने समाज में जागृति लाएं कि वो दलितों पर जातिगत अत्याचार करना बंद करें। तभी सही मायने में सामाजिक एकता बनेगी। अगर आप दलितों पर लाठी बरसाने और अधूरी खबरें प्रसारित करने को अपना सामाजिक न्याय समझते हैं तो हम तुम्हारे झूठ का पर्दाफाश करते रहेंगे। दलितों को मूर्ख समझना बंद करो।
1. सपा मुखिया ने मथुरा जिले के एक भाजपा विधायक को उनके गलत आरोपों का जवाब देकर बी.एस.पी. प्रमुख के ईमानदार होने के बारे में सच्चाई को माना है, उसके लिए पार्टी आभारी है। 1/4
@KraantiKumar क़ानून के हाथ लम्बे होते है इसको साबित करना पड़ेगा
इतना आसान नहीं है ये मामला क्यों की बिना राजनीती और मेडिकल कॉलेज के संरक्षण के होही नहीं सकता सबको पता होगा कॉलेज में रैकेट .
@KraantiKumar प्यार करना इतना तो इतना घटिया नहीं हो सकता जितना रेप मर्डर होता है अगर ये सजा प्यार की है तो समझो हम भारत देश में नहीं है... जिसने ऐसा की उसकी mk bh...