आज निशांत कुमार का जन्मदिन है। सुबह-सुबह अपने पिता नीतीश कुमार के साथ पटना के महावीर मंदिर पहुंचे और भगवान का आशीर्वाद लिया।
Happy B’dy Nishant Kumar 🎂
@Nishantjdu
🔔 का प्रोफेसर ... टूटी फूटी अंग्रेजी बोलने में भी मुंह टेढ़ा होकर 360 डिग्री घूम जा रहा है।
इससे ज्यादा फर्राटेदार अंग्रेजी तो श्री प्रशांत किशोर जी बोलते हैं।
चार चार विश्वविद्यालय के कुलपति रहे हैं। लेकिन छात्र हित में एक भी काम नहीं किया।
खाली गणित गणित करने से नहीं होता।
के.सी. सिन्हा (Sir) जी, आपकी बहुत इज़्ज़त करते थे, लेकिन जो लरचटई का फ़ॉर्म आपने "राष्ट्रहित" का नारा देकर भरा है, उसे लोग लंबे समय तक याद रखेंगे।
जो आज शिक्षा-शिक्षा चिल्ला रहे हैं, शिक्षा व्यवस्था का बेड़ा गर्क किसने किया? पेपर लीक कौन करवा रहा है? शिक्षा को बाज़ार बनाने वालों की गोद में बैठकर आप राष्ट्रहित की बात करेंगे?
क्या आप देश को चूतिया समझते हैं?
@TheInnocentMonk ये ढोंगी 🤡पांडे को बिहार के जनता ने 2025 में ही थूक चटा दिया। इलेक्शन के पहले खाली माहौल बनाता है, वोट झांट भर भी नहीं मिलता है और ये दो कौड़ी का नेता बनल फिरता है 🤣🤣
बंटी यादव का ह*त्या कोई आम ह*त्या नहीं है इसमें बड़े-बड़े लोगो के शामिल होने का शक जा रहा क्युकी आप ही सोचो पटना जंक्शन से उठाने का हिम्मत कौन करेगा..!!
जहाँ एक से एक हाईटेक कैमरा लगा है और सब आरोपी का फेस भी दिख रहा फिर भी पुलिस 5 दिन तक पता नहीं लगा पाई !
#Bantiyadav#patna
पटना: LNJP अस्पताल के निरीक्षण के बाद स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार का बयान. कहा- अस्पताल में कुछ गड़बड़ियां मिली हैं. रोस्टर के अनुसार, एक डॉक्टर की ड्यूटी दोपहर 2 बजे से थी, लेकिन 3 बजे तक भी वह नहीं पहुंचे. डॉक्टर को विभाग में बुलाया गया है और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
उन्होंने आगे कहा कि अस्पताल के उपकरण ठीक हैं, लेकिन AC, व्हीलचेयर जैसी कुछ कमियां मिली हैं. अधिकारियों को इन्हें जल्द दूर करने का निर्देश दिया गया है.
#Patna #NishantKumar #HealthNews #BiharNews #PrabhatKhabar @Nishantjdu@BiharHealthDept
मेरा जन्म 1997 में हुआ, उसी साल जिस साल 5 जुलाई को पार्टी की स्थापना हुई।
छोटी थी, जब कभी-कभी पापा घर के आए मेहमानों के सामने अक्सर दो ही चीज़ें पूछा करते थे~“बेटा, अंग्रेज़ी में कुछ बोलकर दिखाओ” और दूसरा, “बिहार की मुख्यमंत्री कौन हैं?” मैं हमेशा गर्व से कहती, “Rabri Devi is the CM of Bihar.” गर्व का भाव इसलिए क्योंकि एक महिला मुख्यमंत्री थीं और गर्व इसलिए भी क्योंकि अपने आस-पास ही देखती थी कि छोटी उम्र में बच्चियों की शादी कर दी जा रही है, पढ़ाने-लिखाने में पूंजी सिर्फ़ बेटों पर खर्च की जा रही है उस वक़्त एक महिला को CM देखना एक बच्ची के कोमल मन को शीतलता देता था।
जब JNU पहुँची, तो धीरे-धीरे राजनीति और विचारधाराओं को समझने की शुरुआत हुई। जब बटलर, सिमोन द बुवार, रोज़ा पर्क्स, रोज़ा लक्ज़मबर्ग, हन्ना अरेंड्ट, सावित्री बाई, माया एंजेलू इत्यादि को पढ़ रही थी, तब पता चला कि बिहार में लालू जी ही वे नेता हुए जिन्होंने महिलाओं को महावारी के दौरान दो दिन का अवकाश दिया, जो दुनिया में बहुत कम देशों में है। जिस जातिगत सच्चाई और आर्थिक बेबसी से निकली थी, ख़ुद को राजद से जोड़ पाई और छात्र राजद से जुड़ी और राष्ट्रीय प्रवक्ता का सफ़र तय किया, जिसमें सबसे बड़ी भूमिका मेरे नेता तेजस्वी जी की रही।
हमेशा इस बात पर गर्व महसूस करती हूँ कि स्थापना दिवस से ही पार्टी ने महिला CM दिए। राबड़ी जी को जब मौक़ा मिला, पहली बार बिहार का बजट सरप्लस हुआ। जब से पार्टी की स्थापना हुई, तब-तब जब-जब हमारी सरकार रही, चाहे मंत्रिमंडल हो, विधायक हों, संसद हो या राज्यसभा, हर जगह सामाजिक और आर्थिक, दोनों स्तर पर विविधता देखने को मिली। राष्ट्रीय जनता दल की स्थापना के बाद इसके पहले 3 प्रदेश अध्यक्ष कमल पासवान जी, उदय नारायण चौधरी जी और पीताम्बर पासवान जी दलित वर्ग से रहे। अल्पसंख्यक समुदाय से अब्दुल बारी सिद्दीक़ी जी रहे। पिछड़े वर्ग से रामचन्द्र पूर्वे जी रहे, जगदानंद सिंह जी रहे और अभी अतिपिछड़े वर्ग से मंगनीलाल मंडल जी हैं। राष्ट्रीय जनता दल इस देश का पहला दल है जिसने 2019 में अपने सांगठनिक चुनावों में कुल 45% आरक्षण लागू किया, 28% पिछड़ों-अतिपिछड़ों के लिए और 17% दलितों-आदिवासियों के लिए।
राजद ने शोषितों की सोई हुई चेतना को झकझोरने का काम किया, वही काम जो कर्पूरी ठाकुर जी ने, जगदेव प्रसाद जी ने, कांशीराम जी ने किया। वही, जिसे लालू जी ने मज़बूती से धरातल पर उतारा। राष्ट्रीय जनता दल ने विचारों से लैस कर वंचितों को सशक्त किया। अन्याय का प्रतिकार करना सिखाया और हक़ व आत्मसम्मान के लिए लड़ना सिखाया। राजद करोड़ों लाचार, वंचित, उपेक्षित, बेबस लोगों की पार्टी है, जो उनकी आकांक्षाओं के लिए काम करती है।
जिस बिहार में मेरा जन्म हुआ, वहीं दो तरह के CM देखे- एक घुटना टेक मुख्यमंत्री और दूसरे सीना तान मुख्यमंत्री। एक परिस्थितिओं के मुख्यमंत्री दूसरे संभ्रांत वर्चस्वादी ताकतों को चुनौती देने वाले मुख्यमंत्री।
नीतीश जी हमेशा वर्चस्वशाली शक्तियों के आगे घुटने टेकते रहे, वहीं लालू जी उस संघर्ष के प्रतीक हैं, जिसमें लड़ाई आर-पार की रही और विचारों से कोई समझौता नहीं हुआ, और उस धारा को तेजस्वी जी आगे बढ़ा रहे हैं। ये कारवाँ निरंतर बढ़ता रहे।
राष्ट्रीय जनता दल ज़िंदाबाद रहे।
समाजवाद ज़िंदाबाद रहे।
सामाजिक न्याय ज़िंदाबाद रहे।
निशांत बाबू, मुझे माफ़ करें। मैंने भी आपकी कद-काठी और आपके खड़े होने के अंदाज़ का मज़ाक उड़ाया था।
लेकिन आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस ने बता दिया कि आप योग्य पिता की योग्य संतान हैं।
अब उम्मीद जगी है कि शायद आप बिहार के स्वास्थ्य मंत्रालय को सुधार देंगे..
@TheInnocentMonk तोरो पता है निशांत cm बन सकता है।
तोरा ट्रोल करे से झांट कुछ न होना जाना है गोबर🤡।जिसका पिता 2 दशक से cm हो उसको ट्रोल किया तो झांट फर्क न पड़ा ,तो बेटा को क्या फर्क पड़ेगा🤣। यही डर बनल रहना चाहिए तुसब गोबर 🤡के।