@PMishra_Journo@SharmaKadambini अरे तो कोई ना पड़े, बस हम तो अब यह चाहते हैं कि सरकार हमारी सारी सैलरी ही अपने खाते में डलवा ले और बस हमें खाने पीने का सामान उपलब्ध करवा दे राशन के द्वारा हमें तो वेसे भी लाइन में लगने की आदत हो चली है
और इतनी भारी भरकम सैलरी है हमसे संभाली भी नहीं जा रही
सत्ता पक्ष हो या विपक्ष…
हर कोई अपनी अपनी राजनीति चमकाने में लगा है…
वहीं कुछ स्वयं सेवी ग्रूप ऐसे भी हैं…
जो राजस्थान की सरकारी स्कूलों को चमकाने में लगे हुए हैं…
लाडपुरा कोटा की एक स्कूल का कायाकल्प देखिए…
@amitmalviya भाई मूर्खता की भी हद होती है मर्चेंट क्या अपनी जेब से दे देगा क्या वो भी भारत जैसे देश में जहाँ जीएसटी 28 का 18 हुआ तो अखबार में धन्यवाद वाली फोटो देने के बाद आज उन्हीं वस्तुओं की कीमत फिरसे बड़ा दी वो भी उतनी जितनी 28% जीएसटी के बाद भी नहीं थी
मध्यप्रदेश के रतलाम जिले में खुदाई के दौरान मिला मेसोलिथिक काल का विद्यालय,
सरकार और पुरातत्व विभाग से पैर जोड़कर अपील है कि इसको संरक्षित किया जाये ताकि आने वाली पीढ़ी हमारा खंडहर में छिपा इतिहास देख सकें
This is a school for tribal children in Balaghat.
Would our politicians ever send their own children to a school like this?
The ASHA workers here have not received their salaries for last 6 months.
@8PMnoCM क्यूँ लोग सोचते हैं दूसरा हमारे हिसाब से जिए, क्या खाए क्या पहने क्या बोले,
यह सब बोलने से पहले थोड़ा सा तो खुद का इतिहास पड़ लेना चाहिए।
वहाँ चलता है इसलिए खाते हैं। यहाँ भी चलता था अब नहीं चलता तो नहीं खाते, हमने तो यहाँ भी बलि देते देखा है।
इन लौंडो को क्या पता कि कुछ अधिकारियों ने तो Before की फ़ोटो का स्क्रीनशॉट लेके टेंडर की प्रक्रिया भी शुरू कर दी होगी
2-4 करोड़ डकारने के बाद में साफ़ नदी की फ़ोटो अपलोड कर देंगे।
विश्वविद्यालय में आए दैनिक जागरण वालों के बैनर में रजनीगंधा का प्रचार देख के लड़के ने सवाल पूछ लिया!!
लगता है लड़के ने शेरनी का दूध ज़्यादा पी लिया था।
राजस्थान में महिलाएँ इतनी सुरक्षित हैं कि डर के कारण पिता के कपड़े पहनकर कोचिंग जाना पड़ता है ताकि किडनैपर पहचान ही न पाएँ और किडनैप न कर सकें!
और अगर किडनैपिंग की कोशिश हो भी जाए तो सरकार की ‘लो-प्रोफाइल मैनेजमेंट’ व्यवस्था से सुरक्षा की ऐसी ‘शानदार’ खबरें अखबारों तक पहुँचने ही नहीं दी जाती है। उन्हें डिजिटल मीडिया के किसी कोने में चुपचाप छुपा दिया जाता है।