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#कविता
असंभव स्थितियों की उपज है कविता_!
चाहें न चाहें, हर्फ_ हर्फ बिखर जाती है
औराक पर दिल के, अश्कों के माफिक___
जो बह आते हैं, गम हो या खुशी, कभी भी कहीं भी_!
शायद जज़्बात के पर्वत,
मन के आँगन में पिघलते हैं__
___राधा श्रोत्रिय"आशा"
#WorldPoetryDay
#कविता
शायद ख़ुद में ख़ुद की खोज ही कविता है..
अगर पूरी हो जाये तो..
मिल जाता है वो..
जिसे हम, अल्लाह, ईश्वर, जीसस या गुरुनानक कहते हैं..
_राधा श्रोत्रिय"आशा"
#WorldPoetryDay