📍 दिल्ली
एक तरफ शाहरुख पठान जेल में हैं, दूसरी तरफ उनके परिवार के सामने रोज़मर्रा की जिंदगी का संकट खड़ा हो गया है।
अधिवक्ता सैफ आलम के मुताबिक, कमाई का सहारा छिन जाने के बाद परिवार बिजली का बिल तक नहीं भर सका, जिसके चलते घर की बिजली काट दी गई। शाहरुख की मां ने मदद के लिए उनसे संपर्क किया।
सैफ आलम ने बताया कि उन्होंने मदद के लिए लो���ों से संपर्क किया, लेकिन अब तक कोई आगे नहीं आया। उन्होंने दिल्ली के जिम्मेदार लोगों से परिवार तक पहुंचकर राशन और जरूरी सामान सहित मदद करने की अपील की है।
अल्लाह परिवार की मुश्किलें आसान करे।
BBC न्यूज की पत्रकार रह चुकी हुदा जरीवाला का ये बयान सुनकर पूरे भारत के लोग उनके फैन हो जायेंगे ,
" हम कुरान को भी मानते है और संविधान को भी मानते है , मेरा कुरान सिखाता है मुल्क की हिफाज़त करो , मुल्क में हो रहे जुल्म के खिलाफ़ आवाज उठाओ ",
फिरोजाबाद में चोर को ढूढ़ने के चक्कर में एक घर में घुसे पुलिस वालों ने रात में एक प्रेगनेंट महिला को लात मार दी,
फिर क्या?? महिला निपट गई।
अब उसका पति रोना गाना कर रहा है!
इसको लग रहा है पुलिस वालों के ख़िलाफ़ इसका केस दर्ज कर लिया जाएगा।
rapperwithspine 💥🔥
One uncomfortable question ,, Why does justice look different depending on who you are?
When bail is a right for some but years of undertrial detention for others, equality before law becomes more than a constitutional promise it becomes a test of democracy
#JaiBhim #JaiSamvidhan #Justice #Accountability
जिस देश में वर्दीधारी गदा लेकर भगवाधारी भीड़ के साथ शोभायात्रा में शामिल होते हों , वर्दी में जमीन पर बैठकर कांवड़ियों के पैरों का मसाज करते हों , अपने दफ्तर में पंडितों और पुरोहितों को बुलाकर धार्मिक अनुष्ठान करते हों , उसी देश में एक मुस्लिम महिला आईपीएस अधिकारी को 'अस्सलाम वालेकुम' और ' इंशा अल्लाह' कहने की सजा दे दी जाती है . उसका तबादला कर दिया जाता है . पश्चिम बंगाल कैडर की IPS अधिकारी बुशरा बानो के साथ ये सरासर नाइंसाफी है .
🔥Breaking New🧯
सैलरी कमाओ → Income Tax दो 💸
सैलरी खर्च करो → GST दो 💸
ब��ंक में पैसा रखो → Bank Charges दो 💸
अपना पैसा निकालो → Withdrawal Charges दो 💸
UPI से भुगतान करो → अब UPI/MDR Charges भी? 💸
यानी कमाओ तो टैक्स, खर्च करो तो टैक्स, अपना पैसा इस्तेमाल करो तो चार्ज!
मध्यम वर्ग न तो मुफ्तखोरी मांगता है, न कोई विशेष सुविधा।
बस चाहता है कि ईमानदारी से कमाए हुए पैसे पर हर कदम पर नया बोझ न डाला जाए।
मिडिल क्लास कोई ATM नहीं है।
सरकार से सवाल है — आखिर मध्यम वर्ग कितना और सहेगा?
🇮🇳 टैक्स दो, लेकिन बदले में जवाबदेही और बेहतर सुविधाएं भी दो।
#मध्यमवर्ग #MiddleClass #भारत #UPI #Tax #GST #Accountability
📍 नॉर्थ दिल्ली
मोहम्मद समीर का आरोप है कि पुलिस की कथित पिटाई के बाद उसके दोनों हाथों में इतनी सूजन और दर्द है कि वह पिछले 4 दिनों से ई-रिक्शा तक नहीं चला पा रहा।
ई-रिक्शा चलाकर घर चलाने वाला समीर अब अपनी बुज़ुर्ग मां की जिम्मेदारी भी नहीं उठा पा रहा है।
पुलिस पर लगे इन गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच कब होगी?
यह यूपी का बहराइच है
गौशाला में न भूसा है, न चारा-पानी
गायें बदहाल और केयरटेकर तक अपने मेहनताने को तरस रहा है
‘गाय’ के नाम पर राजनीति करने वाली योगी सरकार के राज में गौशालाएं ‘मृत्युशाला’ बन गईं हैं
गौशालाओं के नाम पर जारी ���ैसा आखिर जा कहाँ रहा है?
मो. समीर दिल्ली में ई-रिक्शा चलाते हैं.
उनका आरोप है कि 6 सितंबर को जब वो सड़क किनारे खाना खा रहे थे तो एक चोर उनका ई-रिक्शा लेकर भागने लगा.
उन्होंने एक दूसरे ड्राइवर की मदद से जब उस चोर को पकड़ा और उसे लिबासपुर पुलिस चौकी ले गए तो पुलिस वालों ने चोर के बजाए उन्हें ही बेरहमी से पीट दिया.
सुनिए 👇
विश्वविद्यालय में आए दैनिक जागरण वालों के बैनर में रजनीगंधा का प्रचार देख के लड़के ने सवाल पूछ लिया!!
लगता है लड़के ने शेरनी का दूध ज़्यादा पी लिया था।
सच बोलना इतना बड़ा गुनाह हो गया जहाँ सड़कें गड्ढों और कीचड़ में तब्दील हैं वहाँ विकास की बातें सिर्फ दीवारों पर रह गई हैं।
जब एक आम इंसान ने सच्चाई सामने रखनी चाही तो उसे सच की कीमत जेल जाकर चुकानी पड़ी
यह दर्द सिर्फ एक इंसान का नहीं
पूरे UP की खामोशी का है💔🥺
"haji salman" lo
ये समीर है, ��ॉर्थ दिल्ली के यादव नगर निवासी समीर अपनी मां के साथ रहता है और ई-रिक्शा चलाकर परिवार का खर्च उठाता है। उसका कहना है कि हाल ही में उसका ई-रिक्शा चोरी हो गया, उसने खुद तलाश कर ई-रिक्शा और कथित चोर को पकड़ लिया और दोनों को लेकर पुलिस के पास पहुंचा।आरोप है कि चोरी की शिकायत पर कार्रवाई करने के बजाय पुलिसकर्मियों ने उसके साथ ही मारपीट की, जिसमें उसके हाथों को चोट आई। समीर के इन आरोपों कि निष्पक्ष जां��� जरूरी है।
गाजा के एक शख्स की चीखें जो मुसलमानों को पुकार रही है पढ़िए:-
ऐ दुनिया! हम भी इंसान हैं... हमें भी जीने का हक़ है।
ऐ अरब के हुक्मरानों, क्या तुम मेरी चीख़ नहीं सुन सकते?
मैं तुम्हारा ही हूँ... मेरा ख़ून तुम्हारा ख़ून है, मेरी ज़मीन तुम्हारी ज़मीन है।
फिर क्यों मैं ���केला मर रहा हूँ?
और ऐ इसराइल के हुक्मरानों :-
क्या तुम्हारी ताक़त सिर्फ़ हमारे बच्चों की लाशों पर चमकती है?
क्या तुम्हारा इंसाफ़ सिर्फ़ हमारे खंडहरों पर टिका है?
हम भी इंसान हैं... हमें भी अपनी औलाद की ख़ुशबू चाहिए, बारूद की नहीं।
यह कोई सियासी बयान नहीं है यह एक माँ की चीख़ है, जिसका बच्चा मलबे में दब गया।
यह एक बुज़ुर्ग की कराह है, जो अपनी ही राख पर बैठा है।
यह एक जवान की पुकार है, जिसके हाथ टूट गए, मगर हौसला नहीं टूटा।