@NayabSainiBJP याद रखिए कि हरियाणा की जनता ने आपको नफरत फैलाने के लिए नहीं, बल्कि कानून का राज स्थापित करने के लिए चुना था। क्या अब हरियाणा में रोटी कमाने के लिए भी इन स्वयंभू ठेकेदारों से अनुमति लेनी होगी? अगर आपके राज्य में एक रेहड़ी वाला सुरक्षित नहीं है, तो आपकी पुलिस की वर्दी पर लगा सितारा किस काम का?
अगर कानून सबके लिए बराबर है, तो कार्रवाई का पैमाना भी बराबर होना चाहिए।और अगर कार्रवाई में भेदभाव का सवाल उठ रहा है, तो इसकी जवाबदेही कौन लेगा—प्रशासन, सरकार?
@UPGovt से सवाल है—
क्या चुनावी राजनीति के लिए हिन्दू-मुस्लिम मुद्दे ही अब आपकी सबसे बड़ी उपलब्धि हैं?
@SaharanpurDm
सहारनपुर के DM साहब इस बात का खुलासा करें कि
सहारनपुर
मे
सिर्फ #मस्जिदे ही सरकारी भूमि पर बानी है
बाकि कोई और #धर्मस्थल सरकारी ज़मीन पर नहीं बना है
#DM साहब आपने जिस संविधान की शपथ ली है
वही संविधान ये कहता है
कि आजादी से पहले
बने हर धर्मस्थल का वजूद
बरकरार रक्खा जायेगा
फिर कैसे आपने मस्जिद शहीद कर दी
#योगी जी आपने पिछले 10 साल मे कोई ऐसा काम नहीं किया है जिसके बल पर चुनाव मे जा सके
इसलिए हिन्दू मुस्लिम कि राजनीती के बल पर चुनाव जीतना चाहते है
लेकिन ऐसा होगा नहीं
इस बार जनता Rahul Gandhi जी
के साथ है
Syed Asim Waqar
@SwarajForIndia Haq marne ki baat aapke muh se achhi nhi lagti mohtarma.... Aapke jati vishesh k log bhi EWS k name pe reservation lete hain. Aur dusro k haq ka paisa to tum log aaj bhi kha rhe ho mandiro me baith k, hypocrisy ki bhi seema hoti hai.
खुलेआम गोली मारने की धमकी का वीडियो वायरल है, लेकिन पुलिस-प्रशासन अब भी कुंभकर्णी नींद में है।
अपराधी बेखौफ हैं, पुलिस बेखबर—और कानून-व्यवस्था सिर्फ कागज़ों में जिंदा है।अपराधी खुलेआम धमका रहे हैं और पुलिस चुप है—आखिर धमकी देने वालों पर कार्रवाई कौन करेगा?
नगीना सांसद @BhimArmyChief चन्द्रशेखर आजाद को खुलेआम गोली मारने की धमकी देते हुए कुछ लड़कों का यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है 👇🏻
स्वतंत्र भारद्वाज भी इनके साथ खड़ा दिख रहा है
यह वीडियो गवाह है कि देश में कानून व्यवस्था धराशाही हो चुकी है, गुंडागर्दी का राज चल रहा है!!
नगीना सांसद @BhimArmyChief चन्द्रशेखर आजाद को खुलेआम गोली मारने की धमकी देते हुए कुछ लड़कों का यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है 👇🏻
स्वतंत्र भारद्वाज भी इनके साथ खड़ा दिख रहा है
यह वीडियो गवाह है कि देश में कानून व्यवस्था धराशाही हो चुकी है, गुंडागर्दी का राज चल रहा है!!
देश में श्रीरामजी के भक्त और गाय की रक्षा करने वाले लोग हिन्दू राष्ट्र बनाएंगे....दिन रात कॉमेंट बॉक्स में गालियां देते हैं.... यह है इनके संस्कार और नरेन्द्र मोदी ऐसे लोगों को सपोर्ट करते हैं जिनके रंग रंग में ही नफरत भरा है,गाली गलौज और महिलाओं के प्रति हिंसा की भावना है वो संस्कार और देश को भला बनाएगे???
शिक्षा और Student प्राथमिकता कब होगी?
Delhi के Satya Niketan में पेड़ से दबकर 3 बच्चों की जान गई। पहले भी दिल्ली में इस तरह के हादसे होते रहे हैं। 4 दिन के तमाशे के बाद सब भूल जाते हैं।
शिक्षा व्यवस्था और Student देश की प्राथमिकता में ही नहीं हैं। नेता आपस में लड़ते हैं और आप लड़ते हो और भोगते आपके बच्चे हैं।
@nehafolksinger आखिर पुलिस की कार्रवाई का पैमाना क्या है?
अपराध देखकर कार्रवाई होगी या धर्म और पहचान देखकर?
अगर कानून सबके लिए बराबर है, तो फिर कार्रवाई में ये फर्क क्यों?
क्या पुलिस बताएगी कि एक मामले में उसकी आँखें बंद क्यों रहीं और दूसरे में कानून की सारी धाराएँ जाग गईं?
आखिर पुलिस की कार्रवाई का पैमाना क्या है?
अपराध देखकर कार्रवाई होगी या धर्म और पहचान देखकर?
अगर शिकायत और सबूत मौजूद होने पर भी हिंसा के मामलों में कार्रवाई नहीं होती, लेकिन नमाज़ पढ़ने के मामले में FIR इतनी तेजी से दर्ज हो जाती है, तो जनता इसे दोहरा मापदंड क्यों न माने?
एक दंगाई महीनों से खुलेआम दूसरे का सिर फोड़ कर घूमता रहा तब FIR नहीं दर्ज़ हुई! एक बुज़ुर्ग आदमी ने नमाज़ पढ़ ली तो FIR दर्ज़ हो गई? क्या धाराएँ लगी होंगी? देशद्रोह का मुक़दमा तो नहीं चलाएँगे? ये कैसी सरकार है जिसे दंगाई नहीं दिखते लेकिन चुपचाप नमाज़ पढ़ता आदमी अपराधी दिखता है?
दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत ढहने की खबर बेहद दर्दनाक और चिंताजनक है। कई लोगों के मलबे में दबे होने की खबर है, जिनमें दिल्ली यूनिवर्सिटी के कई छात्र भी शामिल हैं।
मेरी अपील है कि NDRF, दिल्ली फायर सर्विस और सभी बचाव दल हर संभव प्रयास करके हर एक छात्र तक पहुँचें, घायलों को तुरंत सर्वोत्तम संभव इलाज मिले, ताकि किसी को भी बचाने में कोई कसर न छोड़ी जाए।
कांग्रेस और NSUI कार्यकर्ता मौके पर मौजूद हैं और हर संभव मदद के लिए तैयार हैं। इस मुश्किल घड़ी में हम सभी पीड़ितों और उनके परिवारों के साथ खड़े हैं।
छात्रों का जीवन पहले ही संघर्षों से भरा था - अब हालात जानलेवा हैं। कॉलेज या विश्वविद्यालय में अच्छे हॉस्टल न होने के कारण छात्र PG में एक छत के नीचे 40-40 की संख्या में, अमानवीय परिस्थितियों में रहने को मजबूर हैं।
हर छात्र की जान कीमती है और उसकी रक्षा हर हाल में होनी चाहिए।
It is alarming to see Abhishek Thakur openly issuing death threats to sitting MP Chandrashekhar without facing strict legal action. The apparent inaction from the authorities raises serious questions about public safety and law enforcement. What message does this send to the youth when open intimidation goes unpunished?
@DelhiPolice@BhimArmyChief@AzadSamajParty
चंद्र शेखर आज़ाद जी को ऑन कैमरा मारने की धमकी दी जा रही है जबकि इस अपराधी पर भी कई संगीन धाराओं में मुकदमे दर्ज है!
लेकिन यूपी पुलिस और दिल्ली पुलिस ये वीडियो जरूर देखा होगा फिर भी कोई कार्यवाही नहीं कर रहे क्या ये लोग खुद चाहते हैं की चंद्र शेखर आज़ाद जी को मार दिया जाए?
ग्राउंड ज़ीरो से सत्य निकेतन हादसे का सच! जानिए राहत कार्य में जुटे NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने प्रभावितों की मदद और कैंपस की सुरक्षा व्यवस्था पर क्या कहा...
🆘 NSUI 24x7 सत्य निकेतन हेल्पलाइन:
मदद या रेस्क्यू के लिए तुरंत कॉल करें:
📲 89999 99115 | 88758 33833 | 7248354696 | 7355577090
न्यायपालिका का सम्मान सर्वोपरि है, लेकिन एक सवाल जायज़ है—
किसी धार्मिक स्थल से जुड़े विवाद में, अंतिम न्यायिक उपचार का रास्ता खुला रहते हुए, इतनी जल्दबाजी में की गई कार्रवाई से किसी समुदाय की आस्था को ठेस पहुँचाना कहाँ तक उचित है?
#Justice#RuleOfLaw#ReligiousFreedom
सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद के भूमि विवाद में जिला जज की अदालत द्वारा 3 सितंबर को सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश (बेदखली, ध्वस्तीकरण और 6 करोड़ रुपये से अधिक की क्षतिपूर्ति) को बरकरार रखते हुए मस्जिद पक्ष की याचिका खारिज करने के बाद 4 सितंबर, शुक्रवार को एसडीएम और सिटी मजिस्ट्रेट का भारी पुलिस बल के साथ मस्जिद को सील कर आज सुबह 5 बजे अंधेरे में ध्वस्त करने का कार्य न केवल जल्दबाजी में लिया गया कदम है बल्कि मस्जिद पक्ष को उपलब्ध न्यायिक उपचार के अवसर को कमजोर करने और न्यायिक प्रक्रिया के अगले चरण तक पहुंचने से पहले ही कार्रवाई कर देने वाला कदम है।
हम न्यायपालिका का सम्मान करते हैं, लेकिन यह मामला बेहद संवेदनशील है। मस्जिद पक्ष का कहना है कि न्यायालय ने उनके द्वारा प्रस्तुत महत्वपूर्ण साक्ष्यों और ऐतिहासिक दस्तावेजों पर समुचित विचार नहीं किया। उन्होंने पुराने राजस्व अभिलेखों, वक्फ पंजीकरण, 1947 से पहले के अस्तित्व और पूजा स्थल अधिनियम, 1991 से जुड़े प्रावधानों के साथ 1 जनवरी 1911 का बिजली बिल, नगर पालिका परिषद में दर्ज नाम सहित अन्य ऐतिहासिक दस्तावेज अदालत के सामने प्रस्तुत किए हैं।
मस्जिद पक्ष का दावा है कि संबंधित मस्जिद सुन्नी वक्फ बोर्ड में पंजीकृत है और भूमि वक्फ संपत्ति का हिस्सा है। खेवट नंबर 10/1 का उल्लेख करते हुए यह भी दावा किया गया है कि राजस्व रिकॉर्ड में भूमि वाहिद खान और याकूब खान के नाम दर्ज है तथा संपत्ति 1947 से पहले की है। मस्जिद पक्ष ने जिला अदालत के फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती देने की बात कही है।
अब जबकि मस्जिद को ध्वस्त किया जा चुका है, सवाल यह है कि उच्च न्यायालय में कानूनी चुनौती के विकल्प के बावजूद प्रशासन ने इतनी जल्दबाजी में कार्रवाई क्यों की? जिले के वरिष्ठ अधिकारियों ने आश्वासन दिया था कि वे अभी कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं, इसके बावजूद सुबह 5 बजे इस कार्रवाई को अंजाम देने की क्या आवश्यकता थी? यह कार्रवाई भाजपा सरकार की साम्प्रदायिक राजनीति और अपने समर्थकों के तुष्टीकरण का एक और उदाहरण है।
यह अन्याय याद रखा जाएगा!
सत्य निकेतन में इमारत गिरी है,
लेकिन सवाल सिर्फ मलबे का नहीं—उस व्यवस्था का भी है, जो हादसे के बाद जागती है।
अब देखना यह है कि जिम्मेदारी भी सामने आएगी या फिर वह भी मलबे में दब जाएगी।@CMODelhi@DCPSouthDelhi@gupta_rekha
सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक बयान के आरोपों पर कार्रवाई की मांग के लिए हजारों लोगों को सड़क पर उतरना पड़ा।
अगर शिकायत और सबूत मौजूद थे, तो सवाल जायज़ है—
क्या कानून तक पहुँचने के लिए जनसैलाब भी जरूरी है?
पुलिस को भीड़ के दबाव से नहीं, कानून के आधार पर कार्रवाई करनी चाहिए।
सोशल मीडिया पर चमार समाज के प्रति आपत्तिजनक बयानबाजी के चलते दलित में भारी आक्रोश। भीम आर्मी व आजाद समाज पार्टी के हजारों कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे 🚨
अंततः कौशांबी पुलिस द्वारा विक्रांत तिवारी नामक युवक के खिलाफ SC-ST एक्ट में मुकदमा दर्ज किया गया!!
वीडियो में कथित तौर पर कॉलर पकड़ना, थप्पड़ और धमकी साफ़ दिखती है। शिकायत और वीडियो सबूत 28 जुलाई से @delhipolice के पास हैं—फिर भी FIR नहीं।
शायद अब FIR के लिए सबूत नहीं, ‘मुहूर्त’ चाहिए।
कानून का सम्मान तभी होगा, जब उसका इस्तेमाल व्यक्ति देखकर न हो।
@DCPNewDelhi@CPDelhi