@AnilYadavmedia1 आरक्षण नहीं है इसीलिए कोई रोक भी नहीं रहा...
और वैसे भी 100 में 90 शोषित हैं और आपके हिसाब से बचे 10 ही भाग ले रहे 90 तमाशा देख रहे,आरक्षण की मलाई खा रहे..
तो और कितने मेडल की अपेक्षा है
साहिल फोन से नकल करते पकड़ा गया, प्रोफेसर ने उससे फोन ले लिया और वो उठकर चला गया,
सोशल मीडिया ने नकल करते पकड़ने वाले प्रोफेसर को हैवान बना दिया, साहिल के माता पिता ने खराब पैरेंटिंग का जिम्मा सिस्टम पर थोप दिया,
कोई भी व्यक्ति ऐसे भीड़तंत्र वाले देश में क्यूँ रहेगा? जहां सच से ज्यादा झूठ टिकता हो?
>दवा सैंपल में फेल हो जा रही है
>इंजेक्शन में पानी मिला के सप्लाई किया जा रहा है
>कहीं HIV ब्लड चढ़ा दिया जा रहा है
>90 से ज़्यादा अस्पतालों में कैंसर की फ़र्ज़ी दवाइयां बेच दी जा रही हैं
>कफ़ सिरप से बच्चे मर जा रहे हैं
> वेंटिलेटर और एक्सरे मशीन में घोटाला हो रहा है
> अस्पताल आयुष्मान योजना में घोटाला कर रहे
> डॉक्टर फ़र्ज़ी सर्टिफिकेट लगा के MBBS बन जा रहे
>मेडिकल स्टोर वाले दूसरों की डिग्री किराए पे लेके दवाईयां बेच रहे हैं
> एंबुलेंस कहीं टाइम पे नहीं पहुँच रही।
विच्छगुलू🤡🤡
@dromsudhaa Doctorate in casteism...
Go for unity with Muslims...कोई न रोक रहा
सपा सरकार ऐसे ही तो बनी थी...फिर से बनवाओ और गाँव-गाँव घूम के पता कर लेना कोन हक मार रहा और कौन सच में मार रहा दलितों की
Mirzapur फिल्म में त्रिपाठी परिवार और पंडित परिवार की कहानी को मल्टीप्लेक्स में दिखाया गया.
Haiwaan में अक्षय कुमार को मराठी ब्राह्मण परशुराम गोखले के किरदार में दिखाया गया.
Hanuman Ansh सिनेमा हॉल में चल ही रही है जो नीम करौली बाबा के जीवन पर आधारित है जिनका नाम लक्ष्मी नारायण शर्मा था.
कल रात प्राइम वीडियो पर Waiting Hai वेब सीरीज देखना शुरू किया, जिसमें लीड करैक्टर नाम सुगम मिश्रा है.
इस वेब सीरीज़ में सुगम मिश्रा का किरदार Divyenndu Sharma ने निभाया है. अन्य प्रमुख कलाकारों का नाम है Kumud Mishra, Yashpal Sharma और Dayashankar Pandey.
इस देश में अन्य जातियां रहती हैं या नही. फिल्मों और वेब सीरीज़ में केवल सवर्ण जातियों का सरनेम लीड करैक्टर में क्यों दिखाया जाता है ?
Family Man में श्रीकांत तिवारी ?
कैसे बिना आवाज उठाए आप लोगों को खाना हजम होता है. इसे ही कहते हैं Savarna Hegemony जिसे हम चुप रहकर स्वीकृति प्रदान करते आ रहे हैं.
यह National Emergency है.
लखनऊ के लूलू मॉल में फ़ूड डिपार्टमेंट ने छापा मारा,
मोती महल लुलु मॉल में कॉकरोच और तमाम कीड़े मकौड़े मिल गए।
इंसान ये सब खाने में ऐसे ही लपेट देता है इसके लिए छापेमारी की क्या ज़रूरत है??
आम आदमी के चुकाए टैक्स के पैसों का किस तरह से मिसयूज होता है उसका यह एक उदाहरण है।
जनता यह सब देख रही। बस इन्हीं चीजों को चलते उसे सरकार और अधिकारियों पर बार-बार अविश्वास होता है।
छत्तीसगढ़ वैसे भी कम राजस्व उत्पादन वाला राज्य है, वहां इस तरह से पैसों की बर्बादी बताती है कि सदाचार सिर्फ भाषणों में है, हकीकत में भ्रष्टाचार हावी है।
कानपुर का डिलीवरी बॉय रॉकेट बनके जा रहा था,
लेकिन नगर निगम इन सबका पूरा ख्याल रखता है।
सीधे गड्ढे में लांच कर दिया।
कुछ मूर्ख उसको अस्पताल भी लेके चले गए।
उत्तरप्रदेश के ललितपुर का सिलावन गांव। शाम का वक्त। करीब 44-45 साल का एक शख्स लंगड़ाते हुए चला जा रहा था। वो इधर-उधर देख रहा था, जैसे किसी को पहचानने को कोशिश कर रहा हो।
तभी उसे साइकिल से आता हुआ एक शख्स दिखा। उसने उसे रोककर कहा- ‘मेरा नाम विष्णु तिवारी है। क्या मुझे जानते हैं? मेरे घर का पता बता दो।’ उस शख्स ने हैरानी भरी नजरों से देखा और बोला- ‘भइया पागल हो क्या, तुम्हारा घर है और, मुझसे पूछ रहे हो।’
विष्णु ने एक के बाद एक, कई लोगों से अपने घर का पता पूछा, लेकिन सभी ने उन्हें पागल कहा। अब तक अंधेरा हो गया था। विष्णु थककर एक पेड़ के नीचे बैठ गए। तभी एक और शख्स वहां से गुजरा और विष्णु को देखते ही ठिठक गया। बोला- तुम विष्णु तिवारी हो न? पहचाना मुझे? तुम्हारा दोस्त सुरेश।
विष्णु फौरन बोल पड़े- ‘मेरे भाई तुमने तो मुझे पहचान लिया’ दोस्त बोला-'तुम तो जेल में थे ना।’ विष्णु ने जवाब दिया- ‘झूठा मुकदमा था। 20 साल बाद हाईकोर्ट ने रिहा कर दिया। मेरे घर का पता तुम्हें याद हो तो घर पहुंचा दो।’ दोस्त ने कहा- ‘तुम्हारा घर तो रहने लायक बचा नहीं, चलकर देख लो।’
विष्णु, दोस्त के साथ अपने घर की ओर चल दिए। कुछ कदम चलने के बाद बोले- ‘घर में तो मेरी राह देखने वाला कोई जिंदा ही नहीं बचा।’ दोस्त बोला- ‘चाचा जिंदा हैं। उन्हीं के घर चले जाना।’
कुछ ही देर में विष्णु अपने घर पहुंचे। दोस्त ने मोबाइल का टॉर्च जलाया तो देखा टूटे दरवाजे में जंग लगा ताला लटक रहा था। दीवारें भी गिर चुकी थीं। विष्णु ने पास ही पड़ा हुआ एक पत्थर उठाया और ताला तोड़ दिया।
अंदर जाकर देखा तो कचरे का ढेर लगा था। उसी ढेर में मां-पिताजी के वोटर आईडी मिले। कहीं दीवार गिर गई, तो कहीं मोटी-मोटी दरारें। विष्णु जमीन पर बैठकर फूट-फूटकर रोने लगे। दोस्त ने उन्हें संभाला और चाचा के घर ले गए।
चाचा को देखते ही विष्णु बोले-‘सब खत्म हो गया चाचा। न घर बचा, न मां-बाप।’ चाचा ने पूछा जेल से कैसे छूटे। विष्णु बोले- ‘रेप का केस भी झूठा था और SC-ST का मुकदमा भी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बाइज्जत बरी कर दिया।'
IPS दीपक गहलावत को फाँसी की सजा होनी चाइए ।
सुअर है ये!
उन fake मेडिसिन्स से बच्चे मरे होंगे ।
हरियाणा का है, हरियाणा का ही cadre मिला हुआ था। IPS ke liye home cadre se jyada swag kahin nhi hota.
कुछ चिल्लारो के लिए सौदा कर रहा था ।
पता न्ही कितने criminals को बचाया होगा!
Hope मत रखना, आगे चल के हरियाणा का डीजीपी बनेगा ये ।
■ आराम से सो जाइए।
■ अल्लाह #सर्वशक्तिमान है।
■ अल्लाह करता है पूरे कायनात की हिफाजत।
■ अल्लाह को इंसानी गुलामों की जरूरत नहीं।
■ यदि यह रहा तो समझना अल्लाह खुश है। थोड़ा और वक्त दे दिया है।
■ यदि यह गायब हुआ तो समझना अल्लाह ने अपने वादे के मुताबिक #ब्याजखोर_मोमिनों के खिलाफ सीधी जंग छेड़ दी है।
● कोई शक?
● कोई सवाल?