वैसे, मोदी जी का आभार कि उन्होंने तिलचट्टों के ही स्तर के नकारा व्यक्ति क�� अपना प्रतिनिधि बनाया है। सेम बैंडविड्थ हो तो वार्तालाप में सहजता होती है।
तीन तिगाड़े, तीनों नकारे!
अब मुझे यह समझ में नहीं आ रहा कि सरकार ने UGC पर इंगेज नहीं किया, CBSE/NEET पर जब बोलना था, तब एक शब्द नहीं बोला, आज कैसे थूक चाटने लगे?
यही बात तो पार्टी के समर्थक सात महीने से बोल रहे थे। पूरा कम्यूनिकेशन ब्लैकआउट किया, मीडिया में अपने प्रवक्ताओं को भेजना बंद किया, हाउस अरेस्ट कराया, सुप्रीम कोर्ट से स्टे के बाद से ऐसे जताया कि उपकार कर दिया हो, आज घुटनों पर आ गए?
यही इस सरकार का पैटर्न बन चुका है। फोड़े को बवासीर बनने देते हैं, फिर जब लगता है कि अब मामला हाथ से निकल गया, तब झुक कर बात मानने को तैयार हो जाते हैं।
सुबह के 11 ब��े तक यह आंदोलन सरकार के हिसाब से चल रहा था, नियंत्रण में था। अब यह स्पष्ट है कि नड्डा के घर बुलाने और तीन माँगें सुनने के बाद, तिलचट्टों का विश्वास आकाश पर है और वो CAA, किसान आंदोलन की तरह, भारत को नया, फर्जी आंदोलन देने जा रहे हैं।
अब मुझे देखना है कि माँगों पर सरकार करती क्या है! आत्महत्या करने वालों के परिजनों को एक करोड़ की माँग उचित है, क्योंकि अधिकांश पेपर लीक के कारण ही ‘सॉरी’ लिख कर मरे। दो अन्य माँगों में से एक प्रधान के त्यागपत्र की है, जो होना तो जनवरी में ही था, पर ईगो के कारण आज तक खींच लाई सरकार।
प्रधान अब इनके गले की फाँस बन चुका है।ये हर वो चीज करते हैं, जिसका इन्होंने पहले विरोध किया पर वामपंथी इनसे करवाते हैं। ‘कास्ट सेंसस’ ये राहुल के कहने पर करा रहे हैं, और प्रधान अब तिलचट्टों के कहने से जाएगा।
इनकी पुलिस आज फिर पिटी है, जैसे लाल किला वाले आंदोलन में पिटी थी। आईटीसेलिए फिर से विक्टिम बने घूम रहे हैं और यह पूछ रहे हैं कि ‘क्या ऐसे लोग विद्यार्थी हैं’? फिर अपने मालिक से पूछो न कि क्यों नड्डा से मीटिंग को तैयार हो गए?
जब सरकार अपने समर्थकों पर थूकती है तब उन्हें दूसरों का थूका चाटना ही पड़ता है।
> NEET Paper leaks
> Messed up CBSE results
> Brought UGC Regulations
> Turned campuses into battlegrounds
> Minus 40 marks cutoff for NEET PG
> Caste conferences in IITs
> Thousands of students protested
Forget resignation - not even a word of apology from him !
We have seen that nearly every third examination paper has been compromised.
Remove Dharmendra Pradhan and Dilip Mandal to restore public confidence in the education system.
Otherwise, this will become a daily affair.
कान��ुर से बीटेक के गोल्ड मेडलिस्ट आनंद ने इसलिए आत्महत्या कर ली क्योंकि 50 बार सरकारी परीक्षा देने के उपरांत भी उसे नौकरी नहीं मिली। केवल 23 वर्ष का लड़का था, कौन-सी नौकरियों के फॉर्म उसने भरे कि 50 हो गए, यह जाँच का विषय है।
प्राइवेट जॉब कर रहा था, लेकिन सरकारी की ऐसी इच्छा कि 50 में एक भी क्लियर न होने पर अवसाद में आ कर आत्महत्या कर ली।
@PMOIndia से आग्रह है कि हर 40-42 मिनट में मरते छात्र-छात्राओं के लिए (47% लड़कियाँ) @EduMinOfIndia के माध्यम से हर विद्यालय में स्टूडेंट काउंसलर की व्यवस्था करें।
या आत्महत्याओं पर एक समग्र चर्चा कराएँ। पर आप लोग नकारे हैं, इससे वोट मिलेगा नहीं तो आपको कितना अंतर पड़ जाएगा। फिर भी, मैं बस लिख रहा हूँ क्योंकि टूटी घड़ी भी जो बार सही रहती है। आप लोगों से भी अनायास ही कुछ हो जाए।
General Category demanded Dharmendra Pradhan's resignation right after UGC guidelines
But what happened?
> We were denied permission to protest
> Personal attacks by IT Cell
> SC/ST Act notices
Had the government listened to us then, this entire mess could've been avoided!
वैसे तो आम जनमानस को गाड़ियों में बम्पर गार्ड लगावाना गैर कानूनी है और 5000 तक जुर्माना भी है,
लेकिन आप IPS अधिकारी हैं तो लगवा सकते हैं किसी के बाप की औकात नहीं कि कोई जुर्माना भी लगे
भारत सरकार से अपील है कि इन निहंग भाईयों को तालिबान लड़ाकों के खिलाफ लड़ने के लिए भेजा जाये,
ताकि भविष्य में किसी भी सिख भाई को सर पर गुरुवाणी रख कर अफगानिस्तान से वापस भारत न आना पड़े।
रत्ती भर भी लज्जा नहीं आई ये ट्वीट लिखते हुए? कब तक इस पतित को बचाते रहोगे? कौन सी विवशता है सिवाय इस ईगो बैटल के कि जनता के दवाब में तो नहीं हटाऊँगा?
समाज में इस व्यक्ति को ले कर जो भाव हैं, और @narendramodi का जो यह इंडोर्समेंट है, वह बताता है कि इस सरकार ने शिक्षा को अपनी ��ंतिम प्राथमिकता बना रखा है।
Indian Army drops colonial-era dress traditions and introduces bandi jackets in new uniform code.
Meanwhile, this is the uniform code of the Chief Justice of the Calcutta High Court.
When will our Judiciary finally move beyond the colonial era?
While the world focused on missiles, tankers, and military tensions near Oman, one seafarer was fighting a different battle.
35-year-old Second Officer Nishanth Uirthanathan reportedly fell seriously ill while serving aboard MT Celestial.
According to seafarers' representatives, repeated efforts were made to secure medical assistance, but delays during the ongoing regional crisis allegedly prevented timely treatment.
Nishanth never made it home.
His death has now sparked calls for an investigation into whether more could have been done to save him.
For seafarers working thousands of miles from home, access to emergency medical care is not a luxury.
It can be the difference between life and death.
Rest in peace, Second Officer Nishanth Uirthanathan.
#WaveWatchers #Seafarers #MaritimeNews #ShippingIndustry
@dgshipping_IN@shipmin_india
E20 के खिलाफ अब देशभर के वाहन स्वामियों को एकजुट होने की जरूरत है अगर E20 ईंधन से पुराने वाहनों की माइलेज घट रही है, इंजन पर असर पड़ रहा है, मेंटेनेंस खर्च बढ़ रहा है और उपभोक्ताओं को आर्थिक नुकसान हो रहा है, तो इसकी जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
पेट्रोलियम मंत्रालय, ऑय�� कंपनियां, वाहन निर्माता कंपनियां और बीमा कंपनियां—सभी को अपने-अपने दायित्व स्पष्ट करने होंगे।
जनहित याचिका (PIL) के माध्यम से यह मांग उठ सकती है कि:
वाहन मालिकों के नुकसान का आकलन हो
स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए
उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा हो
किसी भी आर्थिक क्षति पर जवाबदेही तय हो
कॉर्पोरेट मुनाफे से पहले आम नागरिक का हित सर्वोपरि होना चाहिए।
यह उपभोक्ता अधिकारों और पारदर्शिता की लड़ाई है।
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