We are just asking what is RSS and what is its source of income.
If taxpayers’ money is being used to provide them security then people have the right to know about RSS.
— Karnataka HM Priyank Kharge Ji
If RSS has nothing to hide, why they are scared of registration.
मैं आपसे कह रहा था कि पवन खेड़ा जी @Pawankhera को राज्यसभा भेजकर कांग्रेस ने संघ और बीजेपी का पूरा इंतजाम कर दिया है। सुनिए केवल 1 मिनट 59 सेकेंड में इन्होंने संघ की पूरी बखिया उधेड़ दी है। पवन जी का ग़ुस्सा वाजिब है। कैसे तुमने ठेकेदारी ले ली ह���ंदू धर्म की भाई? कौन हो तुम? सुनिए सुनिए और तेवर देखिए -
भागवत जी के बयान से लगता है कि @RSSorg को संविधान और जवाबदेही से चिढ़ है @narendramodi के सत्ता में कब्जा करने के बाद पूरे देश में करोड़ों रुपये खर्च कर संघ के आलीशान दफ्तर खड़े किए गए, पानी की तरह पैसा बहाया गया। जनता को जानने का हक़ है कि @RSSorg के पास अकूत धन कहां से आया है।
RSS chief Mohan Bhagwat claims that, unlike the Army, the @RSSorg can prepare a force and raise an army within three days to fight at the border.
If an “NGO” claims it can mobilise an army faster than the armed forces of India, shouldn’t a State Government have the right to know its legal status, structure, training, funding, command chain and accountability?
This is not just a statement.
It raises serious questions of national security, public order and constitutional accountability.
Dear Shri Mohan Bhagwat ji,
My letter will reach you shortly. However, I thought it was important to draw your attention to this matter early.
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Firstly, congratulations to the RSS on completing 100 years.
An organisation that claims over 60,000 shakhas and crores of swayamsevaks must also uphold transparency and constitutional accountability.
As per RSS’ highest and most important decision making body Akhil Bharatiya Pratinidhi Sabha’s 2025–26 Karnataka report, the RSS has 4,127 daily shakhas, 1,389 weekly milans, 60 monthly mandalis, 2,194 Samajotsavas with 19.61 lakh participants and held 562 route marches with 2.21 lakh uniformed participants in the state.
With such scale and influence, the RSS must clarify its legal status, registration, office bearers, funding, expenditure, taxation and permissions for public activities.
If citizens, labour, NGOs, trusts, temples and companies are expected to register, disclose and comply with the law, why should the RSS remain exempt?
In its centenary year, the RSS must responsibly abide by the Constitution and register, disclose, pay applicable taxes and function transparently within the Constitution.
As suggested in my letter, I am looking forward to hearing from @RSSorg soon.
@DrMohanBhagwat@RSSorg
"ये (पीएम मोदी) नेहरू को कैसे पछाड़ सकते हैं? नेहरू ने तो इतनी किताबें लिखी, इतने ज्ञानी थे। देश के नींव रखी, नेहरू 17 साल पीएम रहे, जबकि मोदी को अभी 12 साल हुए हैं"
-प���रोफेसर राम पुनियानी (लेखक)
@rpuni
अमेरिकी हमलों में तीन भारतीय नाविकों की हत्या के चंद दिन बाद - न अफ़सोस, न माफ़ी। उल्टा, अमेरिका ने आदेश देना जारी रखा है।
उनके शब्द पढ़िए: “अमेरिकी सेना के आदेश तुरंत मानें।” कोई उल्लंघन “बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
एक आज़ाद देश इस तरह की भाषा कभी नहीं सहेगा। लेकिन हमारे Compromised PM? चुप। एक आज्ञाकारी नौकर की तरह सुनते हैं, और आदेश मान लेते हैं।
Compromised PM देश के सम्मान की रक्षा नहीं करेगा - क्योंकि जो देश का अपमान करते हैं, वो उन्हीं के वश में हैं।
असम में वायुसेना की विमान दुर्घटना में हमारे पाँच वीर जवानों के शहीद होने का समाचार अत्यंत दुःखद है।
इस दुख की घड़ी में मेरी गहरी संवेदनाएं शहीदों के शोकाकुल परिजनों के साथ हैं। देश इन बहादुर जवानों का सर्वोच्च बलिदान हमेशा याद रखेगा।
राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन जी का नामांकन निरस्त किया जाना लोकतंत्र पर हमला है। जिस मामले का आधार बनाकर नामांकन निरस्त किया गया, उसमें न कोई प्रकरण दर्ज है, न कोई दोषसिद्धि हुई है और न ही कोई न्यायिक निर्णय आया है। केवल एक नोटिस को आधार बनाकर इतनी बड़ी कार्रवाई करना लोकतांत्रिक प्र��्रिया की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगाता है।
: नेता प्रति��क्ष श्री उमंग सिंघार जी.
कितनी सत्ता चाहिए BJP को?
कितनी सीटों से इनका पेट भरेगा?
कितना और नीचे गिरेंगे?
कितना और कलंकित होंगे?
कितनी और संस्थाओं का दम घोटेंगे?
मध्यप्रदेश से काँग्रेस की राज्यसभा प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन जी का नामांकन रद्द करना BJP का एक और कुत्स���त पैंतरा है
उनके नामांकन में किस�� गलती या गैर-खुलासे का आरोप कोरी बकवास है और कांग्रेस से एक सीट छीनने की घटिया कोशिश है
जब हमारे MLA नहीं तोड़ पाये तो नामांकन खारिज कराने की नीचता पर उतर आए
संविधान को ताक पर रख कर यह लोकतंत्र की दिनदहाड़े हत्या है
अगर आपकी लोकतंत्र में ज़रा सी भी आस्था है तो इसका विरोध कीजिए - क्योंकि BJP के लालच का कोई अंत नहीं है - और इसका ख़ामियाज़ा मेरा देश उठा रहा है
The U.S dropped charges against Adani the same week Modi was in Norway. I asked Norway’s sovereign wealth fund how they view Adani’s companies in light of this development. They did not respond to the question.
हमने वीडियो यूँ ही नहीं बनाया था। सवाल किसी एक चैनल, एक पत्रकार या एक खबर का नहीं था। सवाल उस nature का था जिसमें पूरी तस्वीर दिखाने के बजाय उसका एक हिस्सा दिखाया जाता है।
2016 में subsidised cylinder - 12/yr
2025 में subsidised cylinder - 9/yr
2026 में subsidised cylinder- 4/yr
जब 12 सिलेंडर से 9 और फिर 4 सिलेंडर तक की यात्रा को बड़ी राहत बनाकर पेश किया जाता है, तब समझ आता है कि आईना दिखाने की ज़रूरत क्यों पड़ती है।हमारा उद्देश्य किसी की मानहानि नहीं, बल्कि उन सवालों को उठाना था जिन्हें आम नागरिक महसूस करता है लेकिन अक्सर TV पर नहीं देख पाता।
आईना दिखाना अगर अपराध है, तो फिर सवाल पूछना भी अपराध मान लीजिए।
आज लोग मानहानि के मुकदमे को स���ी ठहरा रहे हैं, लेकिन कोई यह नहीं पूछ रहा कि आखिर वह वीडियो बना क्यों था। आईना चुभता इसलिए कि वह सच दिखा रहा होता है।
व्यक्तिगत रूप से Khan Sir को नहीं जानता पर उन्हें देख सुनकर हमेशा एक सकारात्मक एहसास हुआ। उनके पढ़ाने की शैली और कमज़ोर तबके से आए छात्रों में आत्मविश्वास भरने का उनका तरीक़ा कमाल का है।
आज Khan Sir थोड़ी मुश्किल में हैं। उनपर तमाम तरह के आरोप लग रहे हैं। मैं हक़ीक़त नहीं जनता लेकिन अदालत से पहले किसी को दोषी भी नहीं मानता।
किसी युवा ने अगर कोचिंग में पढ़ाकर सामान्य घरों के बच्चों को सिर्फ़ सरकारी नौकरी पाने में मदद ही नहीं की बल्कि अपनी कमाई से एक अस्पताल भी खोला है तो मैं ऐसे व्यक्ति को क्रिमिनल नहीं मानता। Khan Sir से उन्हें एक रात में Faisal बना देने वाले लोग ऐसा मानने के लिए आज़ाद हैं।
मैं Khan Sir से कहूंगा ���ि सामने आइये और सामना कीजिये। तपकर कुंदन बने हैं। मानिये कि अग्नि परीक्षा बाक़ी है। छात्र समुदाय को न बंटने दीजिये और न पढ़ाई से उनका ध्यान हटने दीजिये।
पटना और मुंबई नहीं देशभर में ऐसे लोगों की कमी नहीं जो ये मानते हैं कि समाज के प्रति आपका जो दायित्व है उसके एक बड़े हिस्से का पूरा किया जाना अभी बाक़ी है। आपको रोकने की कोई साज़िश सफ़ल नहीं होगी।
रिटायरमेंट के बाद भी, पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के फ़ैसले से मैं अभिभूत हूँ जिसमें मुझे भारत सरकार में अपर सचिव और सचिव के तौर पर मनोनयन किया है। यह स्वतंत्र संस्थाओं की मज़बूती की एक बड़ी मिसाल है।
एप्सटीन फाइल्स के बारे में जो ख़बरें आ रही हैं, अगर वह सही साबित हुईं तो भूकंप आ जाएगा।
हो सकता है कि राहुल गाँधी की भविष्यवाणी अभी ही सही साबित हो जाएगी।