जिस तरह से सभी संस्थाओं का प्राइवेटाइजेशन किया जा रहा है आउट सोर्सिंग के जरिए लोगों कि भर्ती की जा रही है हमारी मांग है कि अनुच्छेद 15(05) का प्रयोग करके सरकारें सरकारी और गैर सरकारी संस्थाओं में SC,ST,OBC के साथ साथ महिलाओं कि भागीदारी सुनिश्चित करें।।
संविधान का अनुच्छेद 15
जाति,धर्म,मूलवंश,लिंग,जनस्थान के आधार पर विभेद का निषेध करता है अगर कोई जातीसूचक शब्द का प्रयोग करता है तो उसके खिलाफ कार्यवाही की जानी चाहिए ।।
आज दिनांक 11-08-2026 को बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व सांसद माननीया बहन कु. मायावती जी द्वारा कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर मीडिया बाइट।
#बहनजी_का_संदेश#जयभीम#मिशन_2027#BSP#lucknow
1. बहुजन समाज पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव व वरिष्ठ अधिवक्ता, उत्तर प्रदेश के पूर्व महाधिवक्ता, बार काउन्सिल, उत्तर प्रदेश के पूर्व अध्यक्ष, बी.एस.पी. सरकार में कैबिनेट मंत्री एवं कई बार बी.एस.पी. के राज्यसभा सांसद रहे श्री सतीश चन्द्र मिश्र जी को अब वकालत के पेशे में 50 वर्ष (स्वर्ण जयंती) पूरे होने के इस शुभ अवसर पर हार्दिक बधाई एवं ढेरों शुभकामनाएँ।
2. माननीय न्यायालय के गलियारों से लेकर जनसेवा की राजनीति तक, इनका यह सफर सदैव सत्य, न्याय और संविधान के प्रति अटूट निष्ठा से संचालित रहा है। न्याय को केवल अदालतों की चौखट तक सीमित ना रखकर समाज के अन्तिम व्यक्ति तक पहुँचाने का जो संकल्प इन्होंने निभाया है, विशेषकर दृष्टिबाधित एवं अन्य दिव्यांगजनों के अधिकारों के लिए किए गए इनके ऐतिहासिक कार्य भी अनुकरणीय हैं।
3. परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर द्वारा रचित भारतीय संविधान के मूल्यों और लोककल्याण के इस संकल्प को वे आगे भी इसी ऊर्जा और समर्पण के साथ समृद्ध करते रहें, यही कामना है।
आर एस एस और भाजपा आरक्षण पर राजनीति करना बंद कर दें और हमें प्राइवेट संस्थानों में आरक्षण देने की वकालत करें इसका प्रावधान संविधान में है जो अभी तक लागू नही हुवा है ।।
1. जैसाकि सर्वविदित है कि बी.एस.पी. ने यूपी में अपनी सरकार के दौरान पुलिस व पंचायती राज विभाग में लगभग सवादो लाख नये सरकारी पद सृजित करके तथा नौकरियों की भर्ती पर लगी रोक को भी हटाकर सर्वसमाज के कई लाख लोगों की सरकारी नौकरियों में बहाली की और फिर उसके बाद सरकार में ना रहने पर काफी लम्बे समय से देश में व ख़ासकर यूपी, उत्तराखण्ड व पंजाब अदि राज्यों में व्याप्त ज़बरदस्त महंगाई, अति-ग़रीबी, बेरोज़गारी, अशिक्षा, बदतर स्वास्थ्य व्यवस्था, पिछड़ापन एवं उनके मजबूरी के पलायन, महिला असुरक्षा, पेपरलीक व भ्रष्टाचार आदि से त्रस्त लोगों के दुखी जीवन जैसे ज्वलन्त मुद्दों एवं गंभीर समस्याओं के निदान हेतु प्रभावी कदम उठाने की माँग केन्द्र व राज्य सरकारों से बार-बार करती रही है, लेकिन सभी सरकारें, पूर्व की कांग्रेसी सरकारों की तरह ही, ज़्यादातर मामलों में उदासीन व लापरवाह ही बनी हुई हैं, जो देश के बिगड़ते हुये राजनीतिक, आर्थिक, संसदीय व सामाजिक हालात के मद्देनज़र अति-दुखद एवं अत्यन्त चिन्तनीय।
2. और अब जबकि कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नाम से विशेषकर बेरोज़गारी व अंधकार भविष्य आदि से पीड़ित व आहत शिक्षित युवा-युवतियों ने ख़ासकर दिल्ली में जंतर मंतर के 36 दिन तक चले अपने बहु-चर्चित आन्दोलन के ज़रिये इन ज्वलन्त मुद्दों को वास्तव में राष्ट्रीय महत्व का विशेष व गंभीर चर्चा का मुद्दा बना दिया है और जिसको लेकर देश के शिक्षा मंत्री को भी अपनी कुर्सी गवानी पड़ी है, केन्द्र व राज्य सरकारों को देश के क़रीब सवासौ करोड़ ग़रीबों, श्रमिकों, युवाओं, महिलाओं व अन्य मेहनतकश लोगों तथा ख़ासकर बेरोज़गारी की मार से पीड़ित लाखों परिवारों की वास्तविक चिन्ता, सब कुछ भुलाकर, तत्काल शुरू कर देनी चाहिये।
3. ऐसे में, अन्य बातों के अलावा, सरकारी नौकरियों पर खा़स ध्यान देने की ज़रूरत है और इस क्रम में राष्ट्रीय सम्पत्तियों को निजी हाथों में बेचना बंद करके तथा सभी सरकारी विभागों में रिक्त पड़े लाखों पदों पर पेपरलीक व भ्रष्टाचार-मुक्त समयबद्ध भर्तियाँ तत्काल प्रारम्भ करके समस्या के फौरन निदान के प्रति गंभीर प्रयास शुरू कर दें तो यह उचित होगा।
4. इस प्रकार एक परिवार में अगर एक को भी सरकारी नौकरी मिल गयी तो लाखों परिवारों का सीधे तौर पर भला होगा और साथ ही इससे एससी, एसटी व ओबीसी समाज को भी वह सुरक्षा मिल पायेगी जो आरक्षण के काफी हद तक निष्प्रभावी व निष्क्रिय बना दिये जाने के कारण, संविधान प्रदत्त आत्म-सम्मान की ज़िन्दगी जीने के बजाय, ग़रीबी व लाचारी का त्रस्त जीवन जीने को ही मजबूर हैं।
5. कुल मिलाकर, सभी सरकारों को हर हाल में मुनाफाखोरी/लाभ कमाने वाली व्यापारिक सोच/प्रवृति को त्याग कर संविधान की सही मानवतावादी व कल्याणकारी नीति एवं सिद्धान्त को पूरी ईमानदारी व निष्ठा के साथ अमल करके आगे बढ़ाना होगा, जो ’हर हाथ को काम’ देने वाली व्यापक देश व जनहित में लाख दुखों की एक दवा है, यही सभी सरकारों से अपील।
6. इसके साथ ही, जंतर मंतर में आन्दोलित छात्र-छात्राओं व बेरोजगार युवाओं आदि के मुद्दों को लेकर संसद के वर्तमान सत्र में अब तक लगातार जारी गतिरोध को भी समाप्त किया जाना ज़रूरी है, ताकि बिना समुचित बहस/चर्चा के सरकारी विधेयकों को पारित होकर कानून बनने की प्रक्रिया पर विराम लग सके।
आज हाथरस के सादाबाद विधानसभा में डॉ. अविन शर्मा जी के समर्थन में बीएसपी के समर्पित कार्यकर्ताओं के बीच आदरणीय बहन कु. मायावती जी का संदेश लेकर पहुंचा।
आदरणीय बहन जी को पांचवीं बार मुख्यमंत्री बनाने के संकल्प के साथ जुटे सभी बीएसपी कार्यकर्ताओं का हृदय से आभार।
फिर वापस लाना है शासन, प्रशासन, अनुशासन
जय भीम, जय भारत
जब बुवा बोलकर तंज कसा था तो कुछ लोगों को बहुत मजा आया था आज आकाश ने अंकल बोल दिया तो मिर्ची लग गई अंकल को अंकल न बोले तो क्या बोलें हमारे संस्कार है बड़े को अंकल ही बोला जाता है ।।
आरक्षण देश का मुद्दा नही है देश का मुद्दा यह है कि 1950 के बाद SC,ST,OBC की भागीदारी आरक्षण के अनुरूप हुई है कि नही सरकार को इसका डाटा संसद में रखना चाहिए जिससे लोगों को पता चले कि किसकी कितनी भागीदारी है ।।
आरक्षण को भीख कहना केवल एक शब्द नहीं, बल्कि आपके अधिकार को छोटा दिखाने का प्रयास है आरक्षण कोई दया या खैरात नहीं, बल्कि सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन तथा समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए संवैधानिक व्यवस्था है यह आपका अधिकार है शर्म नही गर्व करो ।।
राष्ट्रीय स्तर पर एक ही पार्टी है जो धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ कभी नहीं जायेगी।कभी भी संविधान को खत्म नहीं करेगी।लोकतंत्र को खत्म नहीं करेगी। संवैधानिक आरक्षण को खत्म कभी नहीं करेगी।वैज्ञानिक सोच कभी खत्म नहीं करेगी।पार्टी का नाम आप जानते हैं।
क्या भाजपा और कांग्रेस में कुछ भी अंतर है जो भाजपा में हैं वही कल कांग्रेस में होंगे मीडिया अभी से ही कांग्रेस के लिए माहौल तैयार करने लगी है और राहुल गांधी छात्रों का इस्तेमाल करके फिर से सत्ता के सिंहासन पे विराजमान होना चाहते हैं इससे कुछ भी बदलाव होने वाला नही है।।
1. जैसाकि मीडिया की ख़बरों से सर्वविदित है कि यूपी की वर्तमान सरकार ने, बी.एस.पी. सरकार द्वारा भदोही को राज्य मुख्यालय का दर्जा देते हुये संत रविदास नगर के नाम से नया ज़िला बनाया था और जिसे समाजवादी पार्टी (सपा) की सरकार ने अपनी संकीर्ण जातिवादी मानसिकता के तहत् बदल दिया था, इसे अब फिर से संत रविदास नगर ज़िला स्थापित कर दिया है, जिसके लिये पार्टी राज्य सरकार की आभारी है।
2. वास्तव में बी.एस.पी. की यूपी में रही चारों सरकारों में प्रशासनिक व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने व आम जनहित को बेहतर बनाने के मद्देनज़र अनेकों नये ज़िले, तहसील, विकास खण्ड तथा पुलिस ज़ोन व रेंज आदि बनाये गये और उनमें से कई ज़िलों के नाम दलित व अन्य पिछड़े वर्गों (ओबीसी) में समय-समय में जन्मे महान संतों, गुरुओं व महापुरुषों के नाम पर रखे गये और इसी क्रम में संत रविदास नगर व छत्रपति शाहूजी महाराज नगर व भीम नगर आदि अनेकों नये ज़िले बने, जिनके नाम सपा सरकार ने केवल अपनी जातिवादी सोच, द्वेष व संकीर्ण राजनीति के कारण बदल दिये, जिसको लोग कभी भी भुला नहीं पायेंगे।
3. इतना ही नहीं बल्कि ब्रज क्षेत्र में कासगंज इलाके़ के समुचित विकास हेतु कासंगज को ज़िला मुख्यालय का दर्जा देते हुये मान्यवर श्री कांशीराम जी के नाम पर नया ज़िला बनाया गया, जिसका भी नाम सपा सरकार ने अपने पीडीए-पिछड़ा दलित व अक्लि़यत विरोधी रवैयों के कारण बदल दिया।
4. ऐसे में यूपी सरकार संत रविदास नगर की तरह ही, मान्यवर श्री कांशीराम जी व अन्य महापुरुषों के नाम पर बनाये गये नये ज़िलों के भी असली नाम बहाल कर दे तो यह उचित होगा और यह कार्य अगर मान्यवर श्री कांशीराम जी की दिनांक 9 अक्तूबर के परिनिर्वाण दिवस से पहले कर दिया जाये या उसी दिन ही कर दिया जाये तो बी.एस.पी. इसके लिये आभारी रहेगी।