@DhruvRatheNx न तो नग्न रहने से, न जटा रखने से, न शरीर पर मिट्टी मलने से, न उपवास करने से, न भूमि पर सोने से, न धूल-मिट्टी से शरीर ढकने से, और न ही कठोर तपस्याओं से उस व्यक्ति की शुद्धि होती है जिसके मन में अभी भी संदेह और भ्रम बने हुए हैं। धम्मपद – मलवग्ग (Mala Vagga) श्लोक 141
"किसी भी हिन्दू धर्म ग्रन्थ व साहित्य में सनातन का उल्लेख नहीं है, सनातन का उल्लेख बौद्ध साहित्य में मिलता है, ब्राम्हणों ने सनातन शब्द भी बौद्ध ग्रन्थ से चुराया है।"
राजकुमार भाटी
सपा प्रवक्ता
पुस्तक समीक्षा | जसिंता केरकेट्टा की किताब ‘औरत का घर’ नारीवादी दृष्टि से लिखित एक महत्वपूर्ण कहानी संग्रह है, जो आदिवासी स्त्रियों के जीवन को केंद्र में रखकर उनका अपनी अस्मिता के लिए प्रति दिन किए जाने वाले संघर्ष को सामने लाता है. https://t.co/z3meXNAwEG
राखी यादव✍️
मैं सही था
2016 में मैंने फेसबुक पर बाबासाहेब की फोटो डाल दी थी।
अरे साहब, बवाल मच गया था।
कमेंट आते थे
दलित reservation वाला
रिश्तेदार तक कहते थे हटा लो, सबको पता चल जाएगा।
और आज ऐसी कोई आर्ट गैलरी नहीं जहाँ बाबासाहेब की तस्वीर न मिलती हो।
ऐसी कोई राजनीतिक पार्टी नहीं जो बाबासाहेब के बिना चलती हो।
जाति इंसान की काबिलियत, सोच या मेहनत का पैमाना नहीं होती; यह केवल एक ऐसी बनाई गई दीवार है, जो इंसान को इंसान से अलग करने के लिए खड़ी की गई है।
जिस समाज में सम्मान जन्म से तय होता हो और अवसर जाति देखकर दिए जाते हों, वहाँ न्याय केवल शब्दों में ज़िंदा रहता है। जाति व्यवस्था न केवल बराबरी की दुश्मन है, बल्कि यह इंसानियत, लोकतंत्र और संविधान… तीनों के मूल विचारों के ख़िलाफ़ है।
जाति को बनाए रखना किसी परंपरा की रक्षा नहीं, बल्कि असमानता को ज़िंदा रखने की साज़िश है; और जाति के ख़िलाफ़ खड़ा होना कोई अपराध नहीं, बल्कि एक ज़िम्मेदार नागरिक होने की पहली शर्त है।
सामाजिक न्याय के रास्ते में कठिनाइयां आती है क्योंकि आप मनुवादी व्यव्स्था को तोड़ते हैं, मनुवादियों का गुस्सा उसी मानसिकता की देन है, हिन्दू कोड बिल के दौरान भी बाबासाहेब अंबेडकर का तीव्र विरोध हुआ था यहां तक कि उनको इस्तीफ़ा भी देना पड़ा था,
लेकिन आप लोग एक बात अच्छे से समझ लीजिए, सामाजिक न्याय की लड़ाई जारी रहना चाहिए, चाहे जान चली जाए या पद चले जाए, हम दोबारा कह रहे हैं IAS संतोष वर्मा ने सिर्फ़ रोटी बेटी संबंध की बात कही है,
मनुवादी व्यवस्था के लोगों का विरोध कोई नई बात नहीं है वह सदा से यह करते आए वह आदतन है, वो लोग सिर्फ़ और सिर्फ़ भ्रम फैलाकर अराजकता फैलाना चाहते हैं।