एक जोरदार थप्पड़
क्योंकि राजस्थानी डिजर्व भी यही करते हैं...
राजस्थान के विश्वविद्यालयों में कभी राजस्थानी भाषा के केंद्र खुलने के आदेश नहीं ह��� पाए। भाषा की मान्यता के मुद्दे पर हम कभी एकजुट नहीं हो पाए। कौन-सी राजस्थानी जैसे सवाल पूछते रह गए और एक-दूसरे को नीचा दिखाने का प्लेजर लेते रहे गए। अब इस मराठी झापड़ का आनंद लीजिए। गाल बजाइए या सहलाइए, अपनी-अपनी सहूलियत, अपनी-अपनी मजबूरी, अपनी-अपनी जरूरत, अपने-अपने अहम् और अपने-अपने वहम के अनुसार।
राजस्थान के विश्वविद्यालयों में मराठी के केंद्र खुलेंगे। क्योंकि राजस्थान के प्रथम नागरिक मराठी मानुष हैं। लेकिन अन्य आठ करोड़ मूल नागरिकों की कोई भाषा राजस्थानी के केंद्र विश्वविद्यालयों में नहीं खुल पाएंगे। भले ही महाराष्ट्र में मराठी बोली के अलग-अलग स्वरूप हों, हमें इससे क���या? हमें तो राजस्थानी का विरोध करना है। पीढ़ियों से गुलाम रहे हैं, पीढ़ियों तक और गुलाम रह लेंगे। क्या ही फर्क पड़ता है। गुलामों का कोई आत्म सम्मान, कोई आत्म बोध, कोई आत्म गौरव वगैरह कुछ होता थोड़े ही है।
बधाई हो आप सभी को
इस घोषणा पर ऐसी हर्ष ध्वनि करें कि देवता भी आकाश से पुष्प वर्षा करने के लिए विवश हो जाएं
सत्ता संघर्ष के कोहराम के बीच कुछ खबरें भविष्य को लेकर आश्वस्त करती हैं..
तपती रेत, सिर पर चिलचिलाती थार के रेगिस्तान की सदियों पुरानी तस्वीर को बदलने के लिए भारत सरकार और राजस्थान सरकार ने मिलकर कारनामा कर दिखाया है। धोरों की इस धरती पर पानी का संकट दूर करने के लिए एक विशालकाय 28 किलोमीटर लंबी कृत्रिम झील का निर्माण किया गया है।
पानी को रेत में समाने से बचाने के लिए पूरी झील के नीच��� प्लास्टिक की विशाल चादर बिछाई गई है।
इसी महीने में इस महापरियोजना का भव्य लोकार्पण होने की उम्मीद है, जिससे जैसलमेर और बाड़मेर के करीब 50 लाख लोगों को निर्बाध पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित होगी।
बाकी जमीनी वास्तविकता स्थानीय मित्र बताएंगे।
@narendramodi
#Rajasthan #Jaisalmer #Barmer #WaterConservation #ArtificialLake
आदरणीय रेल मंत्री जी
मैं आज पहली बार रींगस जंक्शन स्टेशन पर आया हूं। अपनी गाड़ी का इंतजार कर रहा हूं। इसी दौरान इस दिव्यांग भाई को अपनी बैसाखियां उठाकर सीढियां चढ़ते देखकर मन व्यथित हो गया। यहां किसी लिफ्ट या एस्केलेटर की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में बुजुर्गों, बीमारों और दिव्यांगों को बड़ी परेशानी उठानी पड़त��� है। विकल्प कुछ भी नहीं है। मजबूरी में करना तो सब कुछ पड़ता ही है।
रेल मंत्री जी,
रींगस जंक्शन स्टेशन खाटू श्याम जी मंदिर के कारण अत्यंत महत्वपूर्ण स्टेशन है। बड़ी संख्या में यहां बुजुर्ग और ब���मार भक्त ट्रेनों से आते हैं। उनकी सुविधा के लिए यहां कम से कम एक लिफ्ट का होना बेहद जरूरी है।
हालांकि मैं इस बात से पूरी तरह सहमत हूं कि पिछले कुछ बरसों में बड़ी संख्या में रेलवे स्टेशनों का कायाकल्प हुआ है और बड़ी संख्या में ही लिफ्ट और एस्केलेटर भी लगे हैं। ऐसे में आपसे अपेक्षा भी बढ़ गई है। साइज में छोटे लेकिन धार्मिक महत्व के इस बड़े स्टेशन पर लिफ्ट जैसी सुविधा को उच्च प्राथमिकता पर लिय��� जाना चाहिए। यहां तीन ही प्लेटफॉर्म हैं इसलिए एक जोड़ी लिफ्ट भी पर्याप्त होगी।
मैं उम्मीद करता हूं कि इस विषय को आप गौर से खुद देखेंगे और खाटूश्यामजी के भक्तों की पीड़ा को समझकर दूर भी करेंगे।
जय श्री श्याम
@AshwiniVaishnaw @RailMinIndia
खाटूश्यामजी के सभी भक्त इस मांग को अपने अपने हिसाब से जरूर उठाएं। अधिक से अधिक रिट्वीट कर सरकार तक बात पहुंचाने में मदद जरूर करें।
सूखे पेड़ों के बीच पहली बारिश का पानी पीते हिरण
गॉंव का ओरण ही गॉंव का जंगल है।
सरकार ने हर गॉंव में मिनी फोरेस्ट की बजट में घोषणा की थी लेकिन धरातल पर कोई ठोस कदम नहीं उठाये गये हैं।
हमारे गॉंव के लोग स्वयं ध्यान रखते है।