राजनीति और जातिवाद का चश्मा जब इंसान की आंखों पर चढ़ जाता है, तो उसे नायक और खलनायक का अंतर दिखना बंद हो जाता है। समाज में कुछ लोग अपनी संकीर्ण मानसिकता और एजेंडे के तहत ऐसे अजीबोगरीब और बेतुके कयास लगाने लगते हैं, जिससे समाज की मुख्यधारा के असली नायकों का अपमान होता है।
हाल ही में अनिल यादव जैसे लोगों द्वारा की जा रही तुलनाएं इसी घटिया और दोगली मानसिकता का जीता-जागता उदाहरण हैं।
एक तरफ भरत तिवारी जैसे व्यक्तित्व हैं, जिन्होंने कभी जाति-पाति का भेद नहीं किया। वे हिंदू समाज की हर जाति को एक साथ लाने, उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने और अपने क्षेत्र के विकास के लिए दिन-रात खड़े रहे। उनका मकसद समाज को तोड़ना नहीं, बल्कि जोड़ना और आगे बढ़ाना था।
दूसरी तरफ शाहरुख पठान जैसे लोग हैं, जो मजहबी नफरत की आग में जलकर सरेआम पुलिस पर पिस्तौल तानते हैं और समाज में दंगा भड़काने का काम करते हैं।
कड़वा सच: एक राष्ट्रभक्त, विकास पुरुष और सर्वसमाज को साथ लेकर चलने वाले भरत तिवारी की तुलना एक दंगाई और कानून के दुश्मन शाहरुख पठान से करना सिर्फ बेवकूफी नहीं, बल्कि एक गहरी मानसिक बीमारी और सोची-समझी साजिश है।
फूलन देवी को 'देवी' मानने वालों का दोगलापन
ये वही लोग हैं जिनकी नजर में हजारों बेगुनाह लोगों के खून से हाथ रंगने वाली फूलन देवी 'आजादी की लड़ाई' लड़ रही थीं। जिस अपराधी फूलन देवी ने मासूमों को मौत के घाट उतारा, उसे ये नायक बताते हैं और जो समाज की भलाई के लिए लड़ता रहा, उसे ये कठघरे में खड़ा करते हैं।
यह सवर्ण समाज और सर्वसमाज की उदारता ही है जो हमेशा हर वर्ग के हक के लिए खड़ा रहता है, लेकिन बदले में इन्हें ऐसी दोगली और जातिवादी मानसिकता का सामना करना पड़ता है।
आखिरी बात...
इतिहास गवाह है कि जो लोग अपराधियों को महिमामंडित करते हैं और असली समाजसेवियों को बदनाम करते हैं, वे कभी समाज का भला नहीं कर सकते। ऐसी मक्कार और दोगली सोच पर केवल थूका जा सकता है, क्योंकि शेर की तुलना कभी गीदड़ों से नहीं की जा सकती।
योगी जी वीर बलिदानी भरत भूषण तिवारी क्रांतिकारी आपको सर्वाधिक सम्मान देता था.. हिंदू राष्ट्र की बातें छोड़ भीं दें तो भी वैचारिक संक्रमण आपका ही दृष्टांत हो रहा है।
पूरे देश को ऐसा ही नेता चाहिए था, उसे भी आप लोगों के भ्रष्टाचार ने बलिदान कर दिया, उसकी हत्या कर दी गई।
ये डकैत थी, तोरे जैसे अंडू पंडु ही इस डकैत को क्रांतिकारी मानेंगे जिसने 5 साल के बच्चे को भी लाइन में लगा के गोली मार दिया था, ऐसे ही नाम तेरा लटकन थोड़े पड़ा है तू कभी भी किसी की भी पकड़ के लटक जाता है 🫣😂😂😂
आठ वर्ष पूर्व हमारें यहाँ एक भूमिहार RTI एक्टिविस्ट की हत्या हुई थी। जब RTI एक्टिविज्म पीक पर था तब वह सरकारी कार्यों पर RTI डाला करते थे। कोई पुत्र नहीं था , सामाजिक और गर्म मिज़ाज आदमी थे। ख़ुद के भाई से भी ज़मीनी विवाद था।
हालाँकि एक अफ़वाह यह भी थी कि RTI डाल के बाद में वह पचास हज़ार - लाख रुपये में डील कर लेते हैं। मगर फिर भी वह पचास के आसपास जनकार्यों के मुकदमे लड़ रहे थे।
उनके RTI के वजह से प्रखंड के शिक्षा विभाग में उथल-पुथल मचा हुआ था। कई सारे नियुक्त शिक्षकों को नौकरी गंवानी पड़ी थी। कई राशन डीलरों के लाइसेंस कैंसिल हुए थे।प्रखंड के ढेर सारे मुखिया सब के ऊपर भी उन्होंने RTI डाला हुआ था।
मृत्यु के पंद्रह दिन पहले उनके भाई से झगड़ा हुआ और भाई घर में घुसकर उनके कागजातों की सारी फाइल्स लेकर भाग आया। वह FIR का प्रयास करते रहे लेकिन थानाध्यक्ष और डीएसपी पंचायती बैठा के मामला को हल कर पर अड़े रहे। अंततः उन्हें फाइल नहीं मिली।
फाइल नहीं मिला तो उन्हें खतरे का अंदेशा होने लगा। एक नेवता में घबराये हुए लग रहे थे तो कुछ करीबी लोगों ने कारण पूछा तो उन्होंने कहा कि मेरा हथियार ले लिया है सब, अब कभी भी मेरी हत्या हो सकती है।
उसी शादी के न्योता से लौटते हुए अगले दिन उनकी हत्या हो गई। पत्नी ने कहा कि हत्या सुनियोजित ढंग से हुई इसमें पहले थानाध्यक्ष की मिलीभगत से घर से फाइल निकलवाया गया और बाद में गोली मरवा दी गई।
मरने पर हंगामा हुआ , कई लोगों पर नामजद FIR हुआ। उनकी मूर्ति उनके ही ज़मीन में बना दी गई। आज वे सभी नामज़द अभियुक्त जेल से बाहर हैं और सामान्य जीवन जी रहे हैं। थानाध्यक्ष - डीएसपी भी किसी और जगह बैठकर ऐश कर रहे होंगे।
भोजपुर की घटना पर पूर्व विधायक राजन तिवारी ने सिटी लाइव पे कहा है कि भरत तिवारी जब एसडीएम के यहाँ जब अपने गांव की माँग को लेकर पहुंचा तो एसडीएम ने उससे अभद्र व्यवहार किया। उसके बाद उसने ईगो में आकर असलहा ख़रीदा।
लोग सही बता रहे हैं कि उसका असलहा ख़रीदना , पुलिस पर फायर खोलना ग़ैर-क़ानूनी कृत्य है। मगर एसडीएम का जनता से दुर्व्यहवार करना कौन सा संवैधानिक कृत्य है? अगर वह उनके ऑफिस की मर्यादा ही तोड़ रहा था तो संवैधानिक रास्ते तो यही बताता है कि एसडीएम को FIR दर्ज कराना चाहिए था बजाय उसके साथ अभद्रता करने।
दरअसल यूपीएससी और पीएससी के परिणाम के जश्न के नाम पर हम हर साल संविधान पढ़के देश को दीमक के तरह चूसने वाले गुंडे पैदा कर रहे हैं। जबतक इन दीमकों का स्थाई इलाज नहीं होता तबतक कहीं से कोई युवा फ्रस्ट्रेट होकर भरत तिवारी बनने को निकलता रहेगा। अपनी आवाज अंग्रेजों से लड़ने वाले क्रांतिकारियों में ढूंढता रहेगा। इस को रोकना है तो स्टेट को किसी भरत तिवारी से नहीं ऐसे दीमकों से बचने का उपाय ढूँढना पड़ेगा।
आज़ादी के पचहत्तर वर्ष हो गए, अब तो नागरिक को नागरिक समझों सालों। तुम्हारे पास पॉवर है तो ईगो दिखाओगे और जिस दिन पॉवरलेस आदमी अपना ईगो दिखाने लगेगा। वह तुम्हें सनकी लगने लगेगा।
माँ बाप ने पुलिस से बेटे का पंगा देखकर सरेंडर के बाद उसे डाँट डपटकर आख़िर में पुलिस की गाड़ी में बिठा दिया. जो आदमी आपके क़ब्ज़े में है उसका एनकाउंटर कैसे बिहार पुलिस? यह हत्या नहीं है? @bihar_police#bharattiwari#bhojpuri#bihar#murder
सही कहा। अभी तक आंबेडकर इनका भगवान था जैसे ही उसकी पोल खुली कि दसवीं 37 परसेंट से पास की थी और संविधान BN Rau ने लिखा था,तुरंत फुले को बाप बना लिया।वो गालीबाज निकला तो बुध के चांप लिया। वो काम नहीं आया तो अब कोई सम्राट अशोक के हरम में माँ ढूंढ लिया,कोई नागवंशी हो गया कोई मौर्य
@raviparmarIN गुदापुत्र प्रसन्न है और कह रहा है क्योंकि भरत तिवारी के पास अवैध हथियार था,उसने पुलिस अधिकारी को धमकी दी इसीलिए बिहार पुलिस ने उसकी हत्या कर दी। सभी गुदापुत्र याद रखें कि ना उसकी खुशी बचेगी न उसको खुश करने वाली सरकार। धूल में मिला deंगे। भीम टा नहीं हैं हम।
@LakhanmeenaIND गूवर्ण बेगानी शादी में अब्दुल्ला ना बनें। ना उनके दान से मंदिर बना है ना उन्हें किसीने चौकीदारी सौंपी है। हमारा अपना घर है,हम अपनेआप सुलझा लेंगें।
@MukeshMohannn ये लोग जो जिसकी थाली में खा रहे हैं उसी में छेद कर रहे है, जिनके दिए टैक्स से मिली भीख पर जिंदा है उन पर ही भोंक रहे हैं। उनका आरक्षण बंद कर उनका पिछवाड़ा सुजा कर दफा करो।
@Youth_Army_IN पुलिस की वर्दी फाड़ना कबसे संगीन अपराध हो गया? पुलिस की लिखी FIR कबसे कानून हो गई? पुलिस कबसे जज हो गई? Pुलिस को किसने अधिकार दिया कि वो किसी निहत्थे पर गोली चलाकर हत्या कर दे? ये सोची समझी नृशंस हत्या है जिसकी सजा फांसी है। फांसी दिलवाकर रहेंगे।
भरत तिवारी ने स्पष्ट बोला था कि न्याय के लिए वो किसी को क्षति नहीं पहुंचायेगा बल्कि खुद का बलिदान देगा। और उस बलिदान के बाद एक ऐसी चिंगारी निकलेगी जो प्रदेश और देश के भ्रष्ट तंत्र को सुधारने का काम करेगी।
#अमर_क्रांतिकारी_भरत_तिवारी
आत्मा को भावुक कर देने वाला दृश्य.....
भरत तिवारी की माँ,
माँ आपने ही नहीं "भारत माँ" ने अपना लाल, सच्चा सेवक खो दिया है! आज भारत मां भी रो रही होंगी 😓🙏
वीर शहीद भरत तिवारी जी कोटि कोटि नमन 🙏
भरत तिवारी एनकाउंटर करने वाले थाना प्रभारी का कहना है कि भारत तिवारी ने 10, 15 राउंड फायरिंग की इस बयान को सुरक्षित रखने की जरूरत है।
कितनी सफाई से झूठ कह दिया कि 10 से 15 राउंड फायरिंग।
क्या सच्च में भरत तिवारी के पास जो बंदूक थी उससे 10, 15 राउंड फायरिंग की जा सकती थी?
भरत तिवारी एनकाउंटर करने वाले थाना प्रभारी का कहना है कि भारत तिवारी ने 10, 15 राउंड फायरिंग की इस बयान को सुरक्षित रखने की जरूरत है।
कितनी सफाई से झूठ कह दिया कि 10 से 15 राउंड फायरिंग।
क्या सच्च में भरत तिवारी के पास जो बंदूक थी उससे 10, 15 राउंड फायरिंग की जा सकती थी?
भारत भूषण तिवारी निर्दोष थे, यह केवल एक मृत्यु नहीं बल्कि हत्या है न्याय व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न है। इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। किसी भी दोषी को उसके पद, प्रभाव या वर्दी के आधार पर संरक्षण नहीं मिलना चाहिए। जो भी इस घटना के लिए जिम्मेदार पाया जाए, उसे कानून के तहत कड़ी से कड़ी सज़ा दी जानी चाहिए। निर्दोष का खून किसी भी कीमत पर अनदेखा नहीं किया जा सकता। न्याय में देरी भी अन्याय के समान है।
Voice For Justice
भरत तिवारी