@ranvijaylive 1950 में जन्म।
हाल की आयु 76 साल।
30 साल पहले न्यूजीलैंड।
यानि 76- 30= 46 साल
35 साल भीख मांगके खाया।
यानि 46- 35 = 11 साल की उम्र में घर छोड़ा।
तो शादी कब की? डिग्री कब ली? चाय कब बेची? बहुत ही कंफ्यूजवा हे साला।😄😄😄
સમાજમાં ડાયરો એક લોકવાચા આપતો કાર્યક્રમ કહેવતો પણ હાલ ડાયરાના કલાકારો સત્તાની પડખે બેસીને જે ધંધા માંડ્યા છે તેને જોતા કલાકારો કહેવા ના જોઈએ.
"એજન્ટ" શબ્દ સારો બેસે છે.
ऐसे सम्मानित व्यक्तित्व को इस स्थिति में देखकर मन व्यथित हो जाता है।🥺
लोकतंत्र की पहचान संवाद और जवाबदेही से होती है, उपेक्षा से नहीं।😳
इस्तीफा मिलने तक यही डटे रहेंगे।🤯
સરકારી શાળામાં અવનવા કાર્યક્રમો લાવીને શિક્ષણની ગુણવત્તા બગાડી નાખી છે તો પછી શાળાઓને તાળા વાગે જ ને.
વાલીઓ પણ એવા ડાહ્યા છે કે ગુણવત્તા સુધારા માટેના પ્રયત્નો કરાવાને બદલે ખાનગી શાળાની વાટ પકડે છે.
सोनम वांगचुंग आज भी सिस्टम को ठीक करने को डटे हुए हे।
दुख की बात ए हे कि सिस्टम को कोई फर्क नहीं पड़ता।
क्या इस देश में जनता की आवाज सुनी नहीं जाती?
क्या इतनी खुदगर्ज हे ? ए सिस्टम?
1 થી 5 માં શિક્ષકોની ભરતી પ્રક્રિયા ખૂબ ઝડપી પૂર્ણ થવી જોઈએ.
કુલ 17000 જેટલી ખાલી જગ્યાઓ ખાલી છે જેમાં હાલ 11000 સુધીની ભરતીની જાહેરાત કરેલ છે.
પણ ભરતી ક્યારે એ પ્રશ્ન હજી ગૂંચવાયેલ છે.
मैं 10-12 साल से कार चला रहा हूँ और पहली बार करीब एक महीने पहले ऐसा हुआ कि मेरी कार अचानक बंद हो गई। कोई नोटिफिकेशन भी नहीं आया, जबकि बात-बात पर नोटिफिकेशन देने वाली XC90 Car बस अचानक बंद हो गई।सर्विस सेंटर फोन किया तो उन्होंने कहा कि आजकल ऐसे इश्यू आ रहे हैं। आप 30 मिनट रुक जाइए, उसके बाद धीरे-धीरे सेंटर ले आइए। वैसा ही हुआ... 30 मिनट बाद स्टार्ट हो गई और सेंटर आ गई।वहाँ उन्होंने कहा कि इंजन में कुछ इश्यू है। हमने पूछा क्यों हुआ, तो बोले कि शायद खराब पेट्रोल डल गया होगा, क्योंकि कार 36 जगह जाती है, कहीं भी डल गया होगा।अब मैं सोच रहा हूँ... माइलेज तो कम हुआ है, इसमें कोई दो राय नहीं, लेकिन उतना हम लोग नोटिस भी नहीं करते। मगर सोचिए... अगर इतनी अच्छी, सबसे सुरक्षित कही जाने वाली कारों के इंजन पर भी खतरा आ सकता है, तो भविष्य में हमारे पूरे ट्रांसपोर्ट सिस्टम का क्या होगा?गडकरी जी की गलती हो या पेट्रोलियम मंत्रालय की... लेकिन अगर ईंधन की क्वालिटी या नई फ्यूल पॉलिसी की वजह से लोगों को इंजन का नुकसान, कम माइलेज और लाखों की गाड़ी पर अतिरिक्त खर्च उठाना पड़े, तो इसका जवाब कौन देगा? आखिर आम लोगों की गाड़ियों पर ये कैसा प्रयोग हो रहा है?