भगवान श्रीकृष्ण का जन्म केवल एक दिव्य घटना नही,बल्कि धर्म की स्थापना,अधर्म के विनाश और सत्य के मार्ग पर चलने का संदेश है श्रीकृष्ण ने अपने जीवन से प्रेम,करुणा,कर्म,नीति और भक्ति का अद्भुत मार्ग दिखाया उनका संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है कर्म करों,फल की चिंता मत करो #जयश्रीकृष्ण
प्रलये भिन्नमर्यादा भवन्ति किल सागराः ।सागरा भेदमिच्छन्ति प्रलयेऽपि न साधवः॥
अर्थ :- प्रलय (विनाश) के समय भी समुद्र अपनी मर्यादा (सीमा) को तोड़ देते हैं और उफनने लगते हैं,परंतु श्रेष्ठ और सज्जन पुरुष प्रलय काल में भी अपनी मर्यादा और स्वभाव का त्याग नहीं करते हैं ।
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