Abhinay Sir ने आज मीडिया की धुलाई फिर से कर दी है,
खैर जब गलती करोगे तो भुगतेंगे,
पूरा देश जानता है कि आज क्या स्थिति है,
मीडिया ने अपना स्तर खुद ही खराब किया है।
अगर सो कर जाग गए हैं तो इन्हें राष्ट्रीय बेरोजगार दिवस की बधाई दे और बधाई के पात्र बने!
ये वही शख्स है जिनके राज में लाखों कंपनियां बंद होकर करोड़ो लोग बेरोजगार हो गए या न्युनतम मजदूरी पर काम कर रहे हैं।
#राष्ट्रीय_बेरोजगार_दिवस
प्रोडक्ट ₹11 का, MRP ₹325: अस्पतालों में कैसे चल रहा 'बढ़े हुए बिल' का खेल, तुकाराम मुंढे ने समझाया
अस्पताल का बिल देखते समय मरीज आमतौर पर दवाओं और इलाज के खर्च पर ध्यान देता है, लेकिन मेडिकल कंज्यूमेबल्स की कीमत भी बड़ा सवाल खड़ा कर सकती है. महाराष्ट्र FDA के एक सर्वे में कुछ मेडिकल सामान की ट्रेड प्राइस ��र MRP के बीच भारी अंतर सामने आया है.
महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के प्रमुख तुकाराम मुंढे ने एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस सर्वे से जुड़े आंकड़े साझा किए हैं. उनके मुताबिक, अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाले कई मेडिकल प्रोडक्ट्स की खरीद कीमत और उन पर छपी MRP में काफी बड़ा अंतर मिला. उदाहरण के तौर पर, ₹11.05 में खरीदे गए IV इन्फ्यूजन सेट पर ₹325 का MRP दर्ज था. इसी तरह ₹6.75 की लागत वाली एक सिरिंज क��� MRP ₹57.20 मिला. एक कैथेटर का ट्रेड प्राइस ₹29.41 था, जबकि उस पर ₹310 का MRP छपा था. यानी कुछ मामलों में मेडिकल सामान की ट्रेड प्राइस और MRP के बीच कई गुना का अंतर देखा गया
नई दिल्ली | हैरान करने वाला मामला। 22 हजार करोड़ का लोन। सेटलमेंट सिर्फ़ 6.5 करोड़ में। ₹22,006 करोड़ का दावा... भुगतान सिर्फ ₹6.5 करोड़! सुभाष चंद्रा के मामले में 99.97% का ‘हेयरकट’। देश की insolvency व्यवस्था से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। Zee Group के संस्थापक सुभाष चंद्रा के खिलाफ लेनदारों के करीब ₹22,006.57 करोड़ के admitted claims हैं, लेकिन मंजूर repayment plan में कुल भुगतान महज ₹6.5 करोड़ का है।
यानी लेनदारों की रिकवरी करीब 0.03% और कथित तौर पर 99.97% का haircut।
NCLT के Judicial Member नीलेश शर्मा ने IBC की धारा 114 के तहत repayment plan को मंजूरी ��ी। प्रस्ताव में ₹6.25 करोड़ creditors के लिए और ₹25 लाख process cost के लिए रखे गए हैं।
मामले की गंभीरता का अंदाजा LIC Housing Finance के आंकड़े से लगाया जा सकता है। उसका admitted claim करीब ₹1,322.39 करोड़ है, जबकि repayment plan में उसे लगभग ₹38.09 लाख मिलने की बात है। यानी करीब 0.028% की recovery।
कुछ बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने इस repayment plan का विरोध किया था। लेकिन योजना को creditors के 80.81% voting share का समर्थन मिला। NCLT ने कहा कि वह creditors की commercial wisdom की जगह अपना फैसला नहीं रख सकता।
₹22,006 करोड़ → ₹6.5 करोड़
यही इस पूरी कहानी का सबसे हैरान करने वाला आंकड़ा है।
अब बड़ा सवाल यह है कि ₹22 हजार करोड़ से अधिक के admitted claims वाले मामले में सिर्फ ₹6.5 करोड़ की repayment तक स्थिति आखिर पहुंची कैसे? और 99.97% haircut का वास्तविक आर्थिक बोझ कौन उठाएगा।
@FinMinIndia @IncomeTaxIndia @LICIndiaForever @MCA21India @subhashchandra @TheOfficialSBI @EsselGroup_
“सर पर कफन बाँधकर निकले हैं, क्योंकि शिक्षा व्यवस्था की लड़ाई लड़नी है। डरने वाले नहीं हैं। देश की शिक्षा व्यवस्था और सरकारी स्कूलों की हालत ठीक हो��र रहेगी।”
— सीजेपी प्रवक्ता @AshutoshRanka
लड़ाई किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं,
देश की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए ��ै।
स्कूल ठीक होंगे, तभी देश का भविष्य मजबूत होगा।
#SchoolThikKaro
#CJP_is_back