सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जल भुयान के हैदराबाद में दिए गए इस वक्तव्य के पाँच मिनट के इस हिस्से को सुनिए जो उन्होंने मतदान के अधिकार पर बोला है।
एक एक पंक्ति ऐसी है मानो बग़ीचे से चुन चुन कर सुर्ख गुलाब लाए हों। ज्ञानेश के SIR के ख़िलाफ़ प्रदर्शनकारियों के पथ पर बिछाने के लिए भी और ज्ञानेश का बचाव करने वालों के मुँह पर मारने के लिए भी।
वोटिंग राइट छीने जाने के संदर्भ में वे कहते हैं “यह उस संवैधानिक व्यवस्था को नकारना है जिसे हमने भारत के संविधान के आधार पर अपनाया है। भारतीय नागरिकों का वोट देने का अधिकार विदेशी शासन के ख़िलाफ़ भारत के लंबे सालों के संघर्ष से जुड़ा हुआ है… आर्टिकल 326 के साथ बिल्कुल भी छेड़छाड़ नहीं की जा सकती। कोई भी अथॉरिटी ऐसा नहीं कर सकती। कोई भी कोर्ट इसका समर्थन या समर्थन नहीं कर सकता… कोई भी संविधान से ऊपर नहीं है।"
@ishita_9529 लोग पार्टी के नाम पर जीत जाते है और कहीं भी chadi बन जाते है। तुरंत चुनाव कराए तब पता चले कि क्या औकात है। छी छी छी रे नुनु छी। जितना नेता लोग ने gamka दिया है छी