*मैं #बसपा के लिए सोचता हूँ क्योंकि मुझे #विश्वास है संविधान सम्मत #लोकतांत्रिक शासन बसपा ही दे सकती हैं।मैं जानता हूँ कि बसपा ही बुद्ध कबीर,फुले, शाहू जी, अम्बेडकर,पेरियार और #मान्यवर के सपनों का भारत बना सकती है इसलिए मैं बसपा के साथ हूँ।*
✍️ @RamnivassagatAmbedkarUP
बस इतना बता दीजिए कि 2000 के नोट में जो चिप लगी थी, उसका क्या करना है? निकाल कर गोदी मीडिया के मालिक को दे देना है या अपने पास रख लेना है? बेहतर है घर ��ें अनाज से लेकर तसला, बेलन, पर्दा, टेबल-कुर्सी, पुराने कपड़े जो भी हैं, खुद ही वापस कर आइये, वरना एक दिन घर आकर ले जाएँगे।
बीएड डिग्री धारक शिक्षकों के 6 माह के ब्रिज कोर्स के लिए @niostwit द्वारा जो क्लास चलाई जा रही है,यूपी के 34000 शिक्षकों के साथ धोखा किया जा रहा है ,अगर समय रहते विभागीय प्रशिक्षण न हुआ तो 34000 शिक्षक @NCTE_Official व @niostwit के गेट पर धरना देंगे।
@JoshiPralhad@UPGovt
समस्त बीएड डिग्री धारक शिक्षक उत्तर प्रदेश ब्रिज कोर्स को विभागीय प्रशिक्षण में बदलवाने , ब्रिज कोर्स की विसं��तियों को तत्काल दूर करने हेतु। कल रविवार शाम 4 बजे से 6 बजे तक अपनी एकता का परिचय अवश्य दें।
#BridgeCourseToDepartmentalTraining
@niostwit @NCTE_Official @UPGovt
1. दिल्ली के जंतर मंतर पर संविधान में एस.सी., एस.टी. व ओ.बी.सी. समाज को दिये गये आरक्षण के ���िरुद्ध अभी हाल ही में जमा हुये कुछ लोगों द्वारा आर्थिक आधार पर आरक्षण को लागू करने की उठाई गई यह नई माँग कतई भी उचित व देशहित में नहीं है। उन्हें आरक्षण के सम्बंध में ऐसा कोई कार्य नहीं करना चाहिये जिससे समतामूलक समाज, विकसित व सम्मानित देश बनाने के संवैधानिक कार्यों को आघात पहुँचे।
2. वैसे भी देश में सदियों से जातिवाद की अमानवीयता का शिकार रहे एस.सी., एस.टी. व ओबीसी समाज के लोगों ��ेतु संविधान में की गई आरक्षण की व्यवस्था के बारे में परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर का यह कहना था कि ’जातिवाद का परित्याग ही सबसे बड़ी देशभक्ति है’। अतः लोग सही देशभक्ति का परिचय ज्यादा दें तो यही उचित होगा।
3. जहाँ तक आर्थिक आधार पर आरक्षण देने की बात है, तो केन्द्र व राज्य सरकारों द्वारा भी ग़रीबी उन्मूलन के एक नहीं बल्कि अनेकों कार्यक्रमों पर काफी सरकारी धन हर वर्ष ख़र्च किया जाता है, किन्तु उसमें व्याप्त भ्रष्टाचार आदि के कारण इसका सही लाभ अगर देश के लोगों को नहीं मिलता है तो यह तो सरकारी व्यवस्था का सीधा-सीधा दोष है।
4. इसके अलावा, आर्थिक आधार पर आरक्षण की नई व्यवस्था भी देश में लागू है, जिसका भी सही लाभ अपरकास्ट समाज के ग़रीब परिवारों को नहीं मिल पा रहा है बल्कि इसमें छलावा अधिक है।
5. वास्तव में ख़ासकर यही वह भ्रष्ट व जातिवादी सरकारी ��्यवस्था है जिसने आरक्षण के संवैधानिक रचनात्मक प्रावधान को कभी सही से ज़मीन पर लागू ही नहीं होने दिया है, जिस कारण एससी, एसटी व ओबीसी समाज के लोग, आज़ादी के इतने लम्बे अरसे के बाद आज तक भी, ग़रीबी, जातिवादी द्वेष, शोषण, अत्याचार व जातिवाद के ज़हर का दंश हर दिन हर स्तर पर लगातार झेलते रहते हैं।
6. अतः सभी सरकारें भी आरक्षण विरोधी तत्वों को शरण व संरक्षण बिल्कुल भी ना दें तो यह व्यापक देश व जनहित में होगा। लोगों से भी अपील है कि वे आरक्षण जैसे अहम् एवं संवेदनशील मुद्दे पर सस्ती राजनीति ना करें और ना ही होने दें।
7. हालाँकि उसी ही दिन पार्लियामेन्ट थाना के बाहर एक पीड़ित व्यक्ति के मामले में एफआईआर दर्ज कराने के लिए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता श्री राहुल गाँधी कई घन्टों तक धरने पर बैठे रहे, जिसका पार्टी को कोई ऐतराज़ नहीं है।
ऽ लेकिन उसके बग़ल में जंतर-मंतर पर दलित व शोषितों के जातीय आधार पर दिये जाने वाले आरक्षण को ख़त्म करवाने के लिए धरना-प्रदर्शन भी चल रहा था, वहाँ पर वे व उनका कोई भी कांग्रेसी साथी उन्हें समझाने तक के लिये भी नहीं गये, जिससे इन वर्गों के प्रति इनकी आरक्षण विरोधी मानसिकता अभी भी साफ झलकती है।