#JusticeForTeachers
RTE से पहले राज्यों की योग्यता पर नियुक्त शिक्षक वर्षों से निष्ठापूर्वक पढ़ा रहे हैं। RTE के बाद TET/नई अर्हता थोपना सरासर अन्याय है।
#JusticeForTeachers
वर्षों से बच्चों का भविष्य सँवारने वाले शिक्षक आज स्वयं असुरक्षा में खड़े हैं।टीईटी की बाध्यता ने अनुभव, सेवा और समर्पण पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।सम्मान की जगह संशय, स्थिरता की जगह भय ने ले ली है।यह दर्द नौकरी का नहीं,आत्मसम्मान के आहत होने का है।