मध्यप्रदेश में 27% ओबीसी आरक्षण कानून है, 52% ओबीसी समाज की आबादी का बड़ा हिस्सा है तो फिर उसकी हिस्सेदारी पर आपत्ति क्यों?
ओबीसी समाज किसी पर एहसान नहीं मांग रहा, बल्कि संविधान द्वारा प्रदत्त अपने अधिकारों की मांग कर रहा है।
आरक्षण दया नहीं, प्रतिनिधित्व का अधिकार है।
@AmitShah
#जबलपुर- 27% ओबीसी आरक्षण का मामला, सरकार ने याचिकाओं पर जवाब के लिए मांगा समय
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा शासन के वकीलों को करोड़ों रुपया फीस देने के बाद भी ओबीसी आरक्षण नहीं दिला पाई।
शर्म करो मोहन यादव सरकार
#27प्रतिशत_ओबीसीआरक्षण_लागू_करो#OBCReservation#ओबीसी_महासभा_
" @Hkhandelwal1964 जी, पिछड़े वर्ग के नाम पर गाल मत बजाइए"
पिछड़े वर्ग के नाम पर बड़ी-बड़ी बातें करना आसान है, लेकिन असली परीक्षा अधिकार दिलाने की होती है।
यदि सचमुच @BJP4MP सरकार को ओबीसी समाज की चिंता है तो 27% ओबीसी आरक्षण, होल्ड भर्तियों और 7 वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे ओबीसी युवाओं के सवालों पर जवाब दीजिए।
ओबीसी समाज अब भाषण, बयान और राजनीतिक नौटंकी नहीं, बल्कि अपने संवैधानिक अधिकारों का क्रियान्वयन चाहता है।
ओबीसी के नाम पर राजनीति बहुत हो चुकी, अब अधिकार और हिस्सेदारी की बात होनी चाहिए।
जो ओबीसी की बात करेगा, वही समाज का विश्वास जीतेगा।
MP में 27% आरक्षण केश बहुत ही प्रमुख मामला है।ओबीसी आरक्षण HC में यदि इस केश में 05 सदस्यीय पीठ सुनवाई करती तो बेहतर होता। जिसमे SC,ST,OBC,GEN और अल्पसंख्यक वर्ग के जज सम्मलित होते तो और बेहतर होता।
माननीय @CMMadhyaPradesh श्री @DrMohanYadav51 व श्री @ChouhanShivraj जी।
"डेली हियरिंग" का ऐलान हुआ है। कुछ लोग नियुक्ति पत्र खोज रहे हैं, कुछ मिठाई की दुकान।
मैं भी खुश हूं, लेकिन अपने जीते-जी यह "डेली हियरिंग" की गोली पांचवीं बार खा रहा हूं।
अब 24 जून को बड़ी उत्सुकता रहेगी। शायद उस दिन यह सुना जाएगा कि सुनवाई कैसे सुननी है, कौन पहले बोलेगा, कौन बाद में बोलेगा और कितने दिनों तक डेली हियरिंग चलेगी।
ओबीसी अभ्यर्थी नौकरी का इंतजार कर रहे हैं, जबकि व्यवस्था अभी भी प्रक्रिया की फिटनेस टेस्ट ले रही है।
खैर, इस बार उम्मीद करते हैं कि "डेली हियरिंग" का अर्थ डेली हियरिंग ही निकले, कहीं ऐसा न हो कि बाद में पता चले कि यह भी "अगली तारीख़" का प्रीमियम संस्करण था!
05 सदस्यीय बेंच बननी चाहिए जिसमे,SC,ST,OBC,GEN, और अल्प संख्यक सभी वर्गों के जज हों।
माननीय @CMMadhyaPradesh श्री @DrMohanYadav51 जी MP के OBC समाज पर कृपा करें।🙏💐
बेंच बदल गई है। अब WP 5901/2019 का मामला 16 जून 2026 को जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बी.पी. शर्मा की खंडपीठ के समक्ष सूचीबद्ध है।लेकिन ओबीसी युवाओं की चिंता अब भी बनी हुई है।
पिछले 7 वर्षों से लंबित इस मामले में लाखों OBC अभ्यर्थियों का भविष्य दांव पर लगा है। हर नई तारीख़ के साथ उम्मीदें भी जुड़ती हैं और आशंकाएँ भी।
अब सबकी निगाहें जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बी.पी. शर्मा की बेंच पर हैं। सवाल सिर्फ सुनवाई का नहीं, बल्कि उस न्याय का है जिसका इंतज़ार लाखों ओबीसी अभ्यर्थी वर्षों से कर रहे हैं।
16 जून को यह तय होगा कि न्याय की दिशा में ठोस कदम बढ़ेगा या इंतज़ार का एक और अध्याय जुड़ जाएगा।
बेंच बदल गई है। अब WP 5901/2019 का मामला 16 जून 2026 को जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बी.पी. शर्मा की खंडपीठ के समक्ष सूचीबद्ध है।लेकिन ओबीसी युवाओं की चिंता अब भी बनी हुई है।
पिछले 7 वर्षों से लंबित इस मामले में लाखों OBC अभ्यर्थियों का भविष्य दांव पर लगा है। हर नई तारीख़ के साथ उम्मीदें भी जुड़ती हैं और आशंकाएँ भी।
अब सबकी निगाहें जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बी.पी. शर्मा की बेंच पर हैं। सवाल सिर्फ सुनवाई का नहीं, बल्कि उस न्याय का है जिसका इंतज़ार लाखों ओबीसी अभ्यर्थी वर्षों से कर रहे हैं।
16 जून को यह तय होगा कि न्याय की दिशा में ठोस कदम बढ़ेगा या इंतज़ार का एक और अध्याय जुड़ जाएगा।
ओबीसी आरक्षण के खिलाफ 87:13 का विवादित अभिमत देकर @drmohanoffice51 सरकार को गुमराह करने वाले महाधिवक्ता प्रशांत सिंह को तत्काल पद से हटाया जाए।
27% ओबीसी आरक्षण को वर्षों से लटकाने में यदि किसी की सबसे बड़ी भूमिका रही है,
तो वह @BJP4MP , @BJP4India सरकार की गलत कानूनी रणनीति और उसके सलाहकारों की है। 87:13 जैसे विवादित अभिमत के आधार पर ओबीसी समाज के संवैधानिक अधिकारों को रोकने का प्रयास किया गया, जिससे लाखों ओबीसी युवाओं के रोजगार और भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।
मुख्यमंत्री @DrMohanYadav51 जी से ओबीसी समाज पूछना चाहता है कि आखिर किस कानून, किस संवैधानिक प्रावधान और किस न्यायिक आदेश के आधार पर ऐसा अभिमत तैयार किया गया, जिसने 27% ओबीसी आरक्षण को लागू होने से रोके रखा?
यदि @narendramodi जी,@AmitShah जी वास्तव में सामाजिक न्याय के प्रति प्रतिबद्ध है, तो उसे इस पूरे प्रकरण की जवाबदेही तय करनी होगी। जिन अधिकारियों और कानूनी सलाहकारों के कारण ओबीसी युवाओं के अधिकार प्रभावित हुए हैं, उनके विरुद्ध कार्रवाई होनी चाहिए।
लाखों ओबीसी युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को जवाब देना होगा।
27% ओबीसी आरक्षण हमारा संवैधानिक अधिकार है, किसी की कृपा नहीं।
"ओबीसी का हक़ दबाओगे, तो संघर्ष और तेज़ होगा!"
#OBCReservation #JusticeForOBC #SocialJustice #CasteistCollegium #maritmyfoot #obcrepresentation
" @drmohanoffice51@BJP4MP सरकार बताए कि OBC आरक्षण कोई नल का पानी है क्या, जिसे कभी 27% खोल दिया जाए और कभी 13% बंद कर दिया जाए?
यदि 27% आरक्षण वैध है तो वर्षों तक नियुक्तियां क्यों रोकी गईं, और यदि अवैध था तो परिणाम 27% के आधार पर क्यों घोषित किए गए?
मुख्यमंत्री @drmohanoffice51 और उसके विधि
@minlaw5 , @GADdeptmp अधिकारी अपनी प्रशासनिक एवं कानूनी असफलताओं का बोझ लाखों OBC बेरोजगार युवाओं पर नहीं डाल सकते।"
"OBC युवाओं के भविष्य को सांप-सीढ़ी का खेल बना दिया गया है।
कभी 27% आरक्षण का ढोल पीटो, कभी 13% होल्ड कर दो, कभी प्रोविजनल सूची निकाल दो। सरकार और उसके वकील स्पष्ट करें कि भर्ती नियम कानून से चल रही है या मनमर्जी से?
इस खींचतान में सबसे बड़ा नुकसान उन लाखों OBC अभ्यर्थियों का हुआ है जिनकी उम्र,अवसर,रोजगार के वर्ष बर्बाद हुए।