एक चीज़ तो साफ़ है…
पेपर लीक वाले मुद्दे पर…
जनता का भरपूर समर्थन मिला था…
और देश के कोने कोने से मिला था…
लेकिन चुनाव आयोग वाले मुद्दे पर जनता ख़ामोश हैं
आम जनता और यूथ की तरफ़ से वो करंट नज़र नहीं आ रहा….
ना धरातल पर… और ना सोशल मीडिया पर….
बाक़ी तो कल पता चलेगा….!!!
Exclusive With The Asian Revolution news, Journalist Rufaida Manzoor
کشمیر میں کوئی نہیں چاہتا کہ اُس کا بچہ پتھر بازی کرے، کوئی نہیں چاہتا کہ کسی بچے پر PSA لگے۔
राहुल गांधी और INDI अलायंस के झूठ, भ्रम व दुष्प्रचार के बावजूद प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी के नेतृत्व में भाजपा एक के बाद एक चुनाव जीत रही है। पश्चिम बंगाल, असम व पुडुचेरी के उपचुनावों और हाल ही में हुए राजस्थान व त्रिपुरा के निकाय चुनावों में NDA को मिली जीत बताती है कि जनता ने INDI अलायंस को पूरी तरह नकार दिया है।
जनाधार खो चुके ये दल हर हार के बाद संस्थाओं पर सवाल उठाते हैं, पर जनता इनका यह चरित्र पहचान चुकी है। इसीलिए एक बार फिर प्रचंड जनादेश देकर भाजपा पर अपना अटूट विश्वास व्यक्त किया है।
इस जीत के लिए पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री श्री @SuvenduWB जी, असम के मुख्यमंत्री श्री @himantabiswa जी, राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp जी, त्रिपुरा के मुख्यमंत्री प्रो. @DrManikSaha2 जी व पुडुचेरी के मुख्यमंत्री श्री एन. रंगासामी जी सहित सभी प्रदेश अध्यक्षों और परिश्रमी कार्यकर्ताओं को हार्दिक बधाई।
It's not surprising to see our colonial sepoy @rahulgandhi supporting @elonmusk in undermining our business ventures. After all, in ensuring the integrity of our country be it economic or territorial, the Nehru-Gandhi family has been acting against India for over 4 generations. From giving away PoK and Akshai Chin to distributing 2g spectrum license at decade old rates, the stories of anti-Indian activities of Nehru-Gandhi family are of course many
मोदी को हराने के लिए…
राहुल गांधी किसी की भी गोदी में बैठने को तैयार हैं
अंबानी अड़ानी को दिन रात कोसेंगे
लेकिन मस्क की गोदी में उछल कर बैठ जाएँगे
फिर कहते हो वोट चोरी हो गए
जनता को क्या बेवक़ूफ़ समझ रखा है…!!
आप बोले थे कि 'इंडियन इकॉनोमी डेड है.' हमारी अर्थव्यवस्था मुर्दा है तो क्या एलन मस्क यहां आकर घास छीलेगा?
अच्छा चल रहा है तभी तो सब आना चाहते हैं?
तीन कंपनियां लाइन में हैं. यहां भंडारा नहीं चल रहा है कि एलन आओ, खाकर जाओ?
नियम से आना पड़ेगा. नियम सबके लिए समान है.
यह असली समर्पण कहलाता है।
- मोदी ने पैट्रियट सिस्टम और एफ-16 जेट्स खरीदने के लिए अमेरिकी सैन्य-औद्योगिक परिसर के आगे समर्पण नहीं किया।
- मोदी ने फाइज़र वैक्सीन की अनुमति देने के लिए अमेरिकी फार्मा लॉबी के आगे समर्पण नहीं किया।
- मोदी ने रूसी तेल को खारिज करके अमेरिकी तेल लॉबी के आगे समर्पण नहीं किया।
- मोदी ने व्यापार सौदे में अमेरिकी खाद्य और कृषि कंपनियों के आगे समर्पण नहीं किया।
लेकिन कायर राहुल गांधी ने बस एक एलन मस्क ट्वीट में समर्पण कर दिया।
▪️ राष्ट्रीय सुरक्षा के बारे में सोचे बिना स्टारलिंक का स्वागत किया
▪️ नकली कुलीनतंत्र के आरोप को वैध ठहराया
▪️ एक और भारतीय कॉर्पोरेट को बस के नीचे धकेल दिया
यह राहुल का समर्पण है। जिस आदमी ने समर्पण का रोना रोया था, उसने अभी-अभी इसे कर दिखाया।
‘एक व्यक्ति, एक वोट’ की जमीनी सच्चाई! 🗳️
एक आम नागरिक ने अपनी जेब से यूपी और दिल्ली के दो अलग-अलग पहचान पत्र निकालकर राहुल गांधी की वोट बैंक की राजनीति की पोल खोल दी है।
उनका आरोप है कि AAP और कांग्रेस फर्जी व दोहरे वोटों के सहारे चुनाव जीतती हैं।
SIR के जरिए ऐसे मामलों की सफाई हो रही है, जिसका विरोध इन पार्टियों की चुनावी राजनीति से जुड़ा है और इसीलिए ये हुड़दंग मचा रहे हैं। सुनिए…
पहले शिक्षा मंत्री का इस्तीफा चाहिए था।
अब मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा चाहिए।
अमित शाह जी के इस्तीफे की मांग की बात पहले ही सामने आ चुकी है।
और अगला पड़ाव शायद प्रधानमंत्री मोदी जी का इस्तीफा?
लगता है “इस्तीफा एक्सप्रेस” चल पड़ी है स्टेशन बदलते जा रहे हैं,
लेकिन नारा वही है : “इस्तीफा दो!” 😂
कल कौन सा नया नाम इस लिस्ट में जुड़ेगा ,
ये भी शायद अगली वीडियो में पता चलेगा।
लोकतंत्र में सवाल पूछिए ,
सरकार से जवाब मांगिए ,
सबूत रखिए लेकिन हर राजनीतिक विवाद का आखिरी समाधान सिर्फ “इस्तीफा” बता देना भी अपने आप में एक सवाल है।
स्टारलिंक का मामला एलन मस्क vs अम्बानी का है ही नहीं।
ये मामला भारत के क्रिटिकल डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का कंट्रोल भारत के ही हाथ में रखने का है।
दुनिया मे हर देश के पास कोई ना कोई एक्स्पर्टीज़ हो सकती है तो इसका मतलब ये नहीं कि अपना तंत्र उनको सौंप दिया जाये, हाँ उनसे सीखकर अपने देश का वो इंफ्रा सुधारना चाहिए इसमें कोई दोराय नहीं।
अब अमेरिका में भारत के जैसा UPI सिस्टम नहीं है, तो क्या अमेरिका अपना पेमेंट मैकेनिज्म भारत को सौंप देगा??
बस ये मामला भी वैसा ही है।