a Guy who supports humanity, social justice wants equality and wants to bring change in the society where inequality and discrimination is the standard
हो गया एक और फ़्रॉड!
10,470 वोटरों के नाम फ़र्ज़ी तरीके से बदल दिए गए, जबकि पिछली बार जीत का अंतर सिर्फ़ 6,970 वोट था।
ये सिर्फ़ पीलीभीत की कहानी है या पूरे यूपी की?
फिर भी कहेंगे कि भारत का युवा गांवों में जाकर काम नहीं करना चाहते। डॉक्टर कस्बों में नहीं जाना चाहते हैं। जो जाएगा, ग़लत देखेगा, बोलेगा तो जेल में डालेंगे।
उत्तराखंड में 'मोदी-ज्ञानू' की 'वोट चोरी' का खेल 👇
⦿ किच्छा में BJP के BLA राजेश तिवारी ने वोटर लिस्ट से नाम कटवाने के लिए 5,359 फॉर्म-7 भरे, जिनमें ज्यादातर मुस्लिम वोटर थे
⦿ ERO ने थोक में आई इन आपत्तियों को स्वीकार करने से मना कर दिया और कहा- मैं ये फॉर्म Accept नहीं कर सकता, ये ECI के नियम के खिलाफ हैं
⦿ बस फिर क्या था... BJP के BLA ने इसे दिल पर ले लिया। गुस्से में तमतमाते हुए ECI में बैठे अपने आका को चिट्ठी लिख ERO की शिकायत कर दी
⦿ दो दिन के अंदर ERO के दफ्तर से BLA के पास फोन आया और बताया- हमने आपके फॉर्म-7 Accept कर लिए हैं
⦿ मतलब चुनाव आयोग ने 'वोट चोरी' के लिए नियमों को ठेंगा दिखाया और थोक में फॉर्म-7 Accept करने का ऑर्डर दे दिया
नतीजा- फाइनल वोटर लिस्ट से 4,390 नाम उड़ा दिए गए, जिनमें सैकड़ों नाम वही थे, जो BLA राजेश तिवारी ने भेजे थे।
गद्दार ज्ञानेश ने BJP को जिताने के लिए पूरे सिस्टम को काम पर लगा रखा है। किसी न किसी तरीके से आपके वोट चुराए जा रहे हैं।
लेकिन देश की जनता सब देख रही है- इन वोट चोरों का हिसाब होगा, किसी को बख्शा नहीं जाएगा।
नगीना सांसद @BhimArmyChief चन्द्रशेखर आजाद का बड़ा बयान🚨
"एक महीने के अंदर हम बताएंगे कि माहौल क्या है।दलित, पिछड़े, मुसलमान, किसान व मजदूरों का अलायंस ताकत बनाएगा, मेरी बात याद रखना"
चन्द्रशेखर आजाद के इस बयान यूपी में तीसरे मोर्चे की आहट सुनाई दे रही है..आपको क्या लगता है?👇🏻
BJP ने 'वोट चोरी' कर सरकारें चोरी कर लीं।
पश्चिम बंगाल, हरियाणा, बिहार, महाराष्ट्र में चोरी की सरकार है। हम इन चोरों को सबक जरूर सिखाएंगे।
📍पटना, बिहार
ECI is officially involved in Vote Chori. If everything is fine, what stopping them from being transparent.
Software information will reveal the master mind behind this treason. Seema Khanna passport should be put on hold.
पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस संजय किशन कौल की किताब ने मोदी सरकार के कार्यकाल में न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
न्यायाधीशों की नियुक्तियों में सरकार की दखलंदाज़ी, कॉलेजियम की बैठक से पहले ही सरकार की मंज़ूरी लेने की कोशिश और अल्पसंख्यक समुदाय के एक न्यायाधीश के नाम पर उनकी जाति को लेकर सरकार के बेतुके सवाल - जस्टिस कौल ने इन घटनाओं का ज़िक्र किया है। जिन बातों को लोग खुलकर कहने से कतराते थे, जस्टिस कौल ने वो सब बड़े सयंत शब्दों में दर्ज किया है।
हैरानी की बात यह है कि पूर्व चीफ़ जस्टिस ऑफ़ इंडिया ने नियुक्तियों से पहले सरकार के साथ चर्चा किए जाने की बात से इनकार नहीं किया है। जब पूर्व CJI जस्टिस चंद्रचूड़ कहते हैं कि सरकार की CJI से बातचीत और नियुक्तियों में भूमिका तो होती ही है, तो न्यायपालिका की स्वतंत्रता को लेकर सवाल और गंभीर हो जाता है।
जस्टिस कौल का यह ख़ुलासा कि PMLA मामले में उनकी अध्यक्षता वाली बेंच द्वारा कोर्ट के फ़ैसले के कुछ पहलुओं पर पुनर्विचार का सवाल उठाए जाने के बाद मामला बिना उनसे चर्चा किए दूसरी बेंच के सामने पहुँचा दिया गया, बेहद गंभीर है। इससे सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट के कामकाज में दैनिक दख़लअंदाज़ी का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।
अगर न्यायाधीशों की नियुक्तियों पर सरकार की मंज़ूरी का दबाव हो और संवेदनशील मामलों की सुनवाई करने वाली बेंच भी बदल दी जाए, तो लोकतंत्र की सुरक्षा के लिए पूछना ज़रूरी है: अगर यह न्यायपालिका पर दबाव और उसकी स्वतंत्रता को कमज़ोर करना नहीं है, तो फिर क्या है?
संविधान की रक्षा करने वाली संस्था को सत्ता के दबाव से मुक्त होना चाहिए। लोकतंत्र में न्यायपालिका की स्वतंत्रता कोई विकल्प नहीं, अनिवार्यता है।
Threat culture in full force inside IITB campus led by CSO Ambuj Khare. When students ask for returning Babasaheb's statue (which DCP Nalawade stole and handed it over to IIT Admins) he refuses to give them back!
#JusticeForSahil
One interview with @DrSYQuraishi has totally rattled the Modi ecosystem
They have no logical argument left anymore so they have fallen down to abusing him over his religion.