@swati_mishr@Uppolice पुलिस जब अपराधियों को पकड़ने की ठान लें तो फिर अपराधी चाहे जितने रंग रूप बदले पुलिस की गिरफ्त से बच नही सकते, अयोध्या पुलिस को ढेर सारी शुभकामनाएं 🙏🙏
उमर खालिद 6 साल से ज्यादा जेल में, ट्रायल तक शुरू नहीं—फिर “जमानत नियम, जेल अपवाद” कहाँ गया?
पूर्व SC जज जस्टिस दीपक गुप्ता की कलम में आज भी रीढ़ सीधी है
पूर्व SC जज जस्टिस दीपक गुप्ता क्या लिखकर आए
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस दीपक गुप्ता ने The Tribune (7 ���ितंबर 2026) में लेख लिखा—“The True Meaning of Freedom”। आजादी सिर्फ विदेशी शासन से मुक्ति नहीं। नागरिक बिना डर सोचे, बोले और असहमति जताए, तभी देश सच में स्वतंत्र है। भ्रष्टाचार, पूर्वाग्रह, कट्टरता और असहिष्णुता से मुक्ति भी जरूरी है।
उन्होंने कहा—किसी देश को स्वतंत्र नहीं कहा जा सकता जब तक उसके पास स्वतंत्र और निडर न्यायपालिका न हो। इसके लिए जजों में ईमानदारी, बुद्धि और सबसे ऊपर रीढ़ चाहिए। शपथ है—“बिना भय या पक्षपात के”।
व्यक्तिगत स्वतंत्रता (अनुच्छेद 21) खुलेआम टूट रही है, कई मामलों में अदालतें मूक दर्शक बन गई हैं। सिद्धांत है “जमानत नियम है, जेल अपवाद”। व्यवहार में जेल नियम बन गई है। जेलों में करीब 75% अंडरट्रायल हैं, सजायाफ्ता करीब 24%। तीन अंडरट्रायल पर एक कैदी—यह चौंकाने वाला है। प्रक्रिया ही सजा बन गई है। लोगों को “देशद्रोही” कहकर जीवन बर्बाद किया जा रहा है।
उमर खालिद 6 साल से ज्यादा जेल में हैं, ट्रायल शुरू भी नहीं हुआ। स्वतंत्रता का क्या? शीघ्र सुनवाई का क्या? अगर आरोप इतने गंभीर हैं तो अभियोजन उतनी तेजी से क्यों नहीं चला? बाद में सुप्रीम कोर्ट की दूसरी बेंच ने खालिद वाले फैसले की वैधता पर खुद सवाल उठाए।
एलगार परिषद मामले में भी कई आरोपी सालों से बिना ट्रायल जेल में हैं। एक आरोपी हिरासत में चल बसा। सोनम वांगचुक से जुड़े हिरासत मामलों में भी देरी का जिक्र किया।
लोकतंत्र बहुमत पर चलता है, लेकिन बहुसंख्यकवाद—जहाँ दूसरी आवाज न सुनी जाए—लोकतंत्र का विरोधी है। अदालतें हर स्तर पर बह��संख्यकवाद की ओर बढ़ रही हैं।
राम जन्मभूमि मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि पूजा स्थलों से जुड़े अन्य विवाद नहीं खोले जाएँगे, न दोबारा विचार होगा। इस फैसले को लिखने वाले बताए जाने वाले जज ने बाद में ज्ञानवापी मस्जिद मामले में ASI को यह पता लगाने का आदेश बरकरार रखा कि जहाँ अब मस्जिद है वहाँ मंदिर था या नहीं—इस आधार पर कि यह केवल जाँच है, फैसला नहीं। गुप्ता के अनुसार इस आदेश ने मुकदमों का अंबार लगा दिया, समुदायों के बीच भाईचारे पर असर पड़ेगा। उनकी राय में यह फैसला बहुसंख्यक वर्ग को खुश करने के लिए लिया गया।
जब एक विशेष समुदाय के सदस्यों ने गंगा में नाव पर बैठकर मुर्गा खाया, उन्हें महीनों जमानत नहीं मिली। जब बहुसंख्यक समुदाय के सदस्यों ने उसी पवित्र नदी पर शराब पी, उन्हें कुछ घंटों में जमानत मिल गई। य�� संविधान का न्याय, स्वतंत्रता, समानता या बंधुत्व नहीं है।
कॉलेजियम व्यवस्था विफल और पूरी तरह अपारदर्शी हो गई है। बड़े फैसले बिना कारण दिए होते हैं। हाल की नियुक्तियों में लगभग सभी उच्च जातियों से हैं, बहुमत ब्राह्मण। अन्य समुदायों और धर्मों में प्रतिभा की कमी नहीं। सुप्रीम कोर्ट देश की अदालत है तो समाज के सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व होना चाहिए।
��ब कुछ जज सुझाव देते हैं कि प्रदर्शन कैसे रोके जाएँ। ऐसे जज नागरिक के असहमति के अधिकार की रक्षा करेंगे?
अधिकांश जज ईमानदार हैं, लेकिन ब्लैक शीप बढ़ रहे हैं। शीर्ष स्तर पर आत्ममंथन होना चाहिए। लोगों का विश्वास घट रहा है। विश्वास टूटा तो न्यायपालिका अप्रासंगिक हो जाएगी। वह लोकतांत्रिक भारत की मौत की घंटी होगी। जहाँ लोकतंत्र नहीं, वहाँ नागरिक कभी स्वतंत्र नहीं हो सकते।
असहमति और शांतिपूर्�� विरोध लोकतंत्र का हिस्सा हैं। सरकार और नीतियों की आलोचना देशद्रोह नहीं।
— जस्टिस दीपक गुप्ता, पूर्व न्यायाधीश, सर्वोच्च न्यायालय
स्रोत: The Tribune, 7 सितंबर 2026
आप लोग दिल्ली पुलिस की आईडी टैग करना। शायद @DelhiPolice तक मेरा नोटिफिकेशन नहीं पहुंच रहा।
इनको नफरत की खुली छूट है क्या ?
इनक��� नरसंहार के लिए उकसाने की भी आजादी है क्या ?
@ajeetbharti त���सरे नंबर पर तेरे जैसै हरआमी आते है जो मंडल के सलाहकार बनने पर छाती पीट पीट कर रो रहे है और सत्ताधारी दल की चाट चाट कर खुद की जीभ जख्मी कर चुके है लेकिन अभी तक सुना है 3 रूपए ट्विट से ज़्यादा नहीं मिल पाया है।
India didn’t lose because of the players they lost to Gambhir–Agarkar’s clueless selections. Their vision is just personal bias not team needs.
Stop picking favourites. Pick form.
India didn’t lose because of the players they lost to Gambhir–Agarkar’s clueless selections. Their vision is just personal bias not team needs.
Stop picking favourites. Pick form.
@sachingupta ऐसी नफ़रत फैलाने वाली बयानबाज़ी ये देते रहते है।
धर्म की आड़ में सिर्फ हिन्दू मुस्लिम, इस्लाम, को टारगेट करना इनका काम है
इस तरह की बयानबाजी पर कोई सख़्त कानूनी कारवाई ना होने से, इस तरह के लोगो को बढ़ावा मिल रहा है
@Ruksar_Khan_002 सच कहा आपने... 💔
हम अक्सर भूल जाते हैं कि दर्द सिर्फ इंसान को होता है
वो बेजुबान चीख भी नहीं सकता, बस तड़पता रहा
हमारी थोड़ी सी रहमदिली, थोड़ी सी सावधानी
किसी की ज़िंदगी बचा सकती है
@news24tvchannel क्या बात है सर तुम्हारी बीवी को मुस्लिम उठा ले जाते थे तो इसका बदला जज साहब पर जूता फेक कर लोगे,
पत्नी पढ़ी लिखी थी और तुम भी वकील थे उसके बाद भी ये ज़ुल्म सहते रहे ?
हिजड़ो पर शिलाजीत का असर नहीं होता @RatanRanjan_ , तू बेकार में इतनी मेहनत कर रहा है।
ट्रैफिक सिग्नल पर अपने असली धंधे पर लग जा, वरना रीच के लिए यही सब करना पड़ेगा।
जो भी जुबैर के खिलाफ है वह असली नाली का कीड़ा और देशद्रोही है।
आओ देखें इस भारत में
कौन बड़ा वीर बलिदानी है
किसकी धमनी में खून और
किसकी धमनी में पानी है।
सभी लोग फिर से #IStandWithZubair ट्रेंड करवाइए!
नफरती चिंटू तिल का ताड़ बनाकर सच्चे देशभक्त @zoo_bear को परेशान करने में लगें हुए हैँ... लिखिए, रिपोस्ट कीजिये,
पोस्ट कीजिये.. पर साथ जरूर दीजिये.
#IStandWithZubair