#SonamWangchuk
पत्रकार:- क्या हुआ आज ये सब क्या हुआ
अभिजीत दिपके:- नरेन्द्र मोदी एक तानाशाह है, और दिल्ली पुलिस उसकी गुण्डागर्दी को आगे बढा रही है...😳
60 साल का इन्सान को जो 20 दिनो से भूख हड़ताल पर है
उसके साथ गाली गलौज कर के घसीटते हुए यहां से जबरदस्ती उठाकर ले दिल्ली पुलिस ले गई
मुझे भी दिल्ली पुलिस द्वारा डिटेन किया गया मारा गया और मेरा मुह भी दबाया गया
#JantarMatar #DelhiPolice
"सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल अभी-भी जारी है"
◆ सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो ने कहा
◆ अनशन के 20 दिन बाद सोनम वांगचुक को उठाकर अस्पताल ले गई पुलिस
दिल्ली पुलिस | #SonamWangchuck | Delhi Police | #JantarMantar | Abhijeet Dipke | सफदरजंग अस्पताल | Safdarjung Hospital | पत्नी गीतांजलि
The core tenets of the Modi government are Asatya and Hinsa.
The removal of Sonam Wangchuk ji from Jantar Mantar while he was on a non-violent hunger strike is wrong.
Paper leaks, the rising cost of education, and student suicides are critical issues for India’s future.
No amount of force can deter India’s students, and those of us who love and believe in them, from raising these issues.
#ChhatronKiGoonj
रिया के पिता, राजेश जी बेटी को खोकर इस तरह टूटे कि उन्हें देखने वाले हर शख़्स की आँखें भर आईं।
यह सिर्फ़ एक परिवार का दर्द नहीं। पेपर लीक ने ऐसे कई परिवारों से उनका बच्चा छीन लिया।
हर नाम के पीछे एक माँ है, एक पिता है - जिनके लिए अब कोई कल नहीं।
इस System को नए सिरे से बनाना होगा - जहाँ बच्चों को तनाव नहीं, सुरक्षा मिले। और माँ-बाप को, उनके त्याग का फल मिले - आँसू नहीं।
Sonam Wangchuk has been picked up from Jantar Mantar. Abhijeet Dipke has been hit and detained outside my residence. This is a full-scale clampdown on a democratic protest.
How scared is the government?
He is not a criminal. Why did you drag him away hiding behind sheets?
He didn’t want to go to the hospital. He wanted to join the Parliament march. But what these police have done- he was not a criminal. The way they took him away hidden under sheets- if you were so concerned about his health, you should have taken him with respect.
In every state, in every district, set up a Jantar Mantar! And protest there just like it has been going on here for a month.
पिछले 10 साल में कुल 152 पेपर लीक हुए हैं यानी हर महीने एक पेपर लीक। इससे 7.5 करोड़ छात्रों को नुकसान हुआ है। लेकिन एक भी व्यक्ति को सजा नहीं हुई। ये देश युवाओं, उनके माता-पिता, उनकी कड़ी मेहनत और संघर्ष का अपमान है।
~ राहुल गांधी जी, नेता विपक्ष
#ChhatronKiGoonj
#WATCH | Delhi: Founding President of the Cockroach Janta Party, Abhijeet Dipke, says, "If they think that taking Sonam Sir away will end this movement, they are mistaken. We will remain here, and will march to Parliament on July 20."
He further said, "Until now, we were demanding Dharmendra Pradhan's resignation, but after this despicable act, we will now demand the resignation of Narendra Modi."
जनता बची नहीं है, जो थोड़ी बहुत है वह बचे होने का सबूत दिए जा रही है। दिल्ली में प्रदर्शन पर प्रहार है, दिल्ली से दूर के प्रदर्शन का तिरस्कार है। अच्छी बात है यह युवा लगातार कई दिनों से रिपोर्ट कर रहाहै। कोई नया चैनल मालूम होता है। भारत लोकतंत्र के नाम पर उसकी भावनाओं का बचा हुआ छोटा छोटा द्वीपसमूह बन कर रह गया है। बाकी सारे बडे़ मैदानों, पहाड़ों और नदियों को हर लिया गया है।
बहुत हुआ, चलो युवा,
हाथ से हाथ जोड़ के,
अन्याय का घड़ा फोड़ के।
युवा ख्वाब ये जल जाएंगे,
सिंहासन तब हिल जाएंगे,
छात्रों की गूंज, ये है छात्रों की गूंज।
शिक्षा Revolution की ओर देश के सभी छात्रों और युवाओं का उत्साह और जोश बढ़ाने के लिए #ChhatronKiGoonj Anthem.
बदलाव अब दूर नहीं।
5 साल रोज़ाना 10 घंटे की तैयारी और औसतन ₹9 लाख - हर छात्र की मेहनत और उसके परिवार का त्याग।
10 साल में 152 पेपर लीक, सीट-नौकरी का रेट कार्ड, 0 सज़ा, 7.5 करोड़ युवाओं का बर्बाद भविष्य - System की हालत।
इस भ्रष्ट Education System को जड़ से बदलना होगा - बनानी होगी 21वीं सदी की परीक्षा व्यवस्था, स्वतंत्र और जवाबदेह संस्था जहां छात्रों को मिले पूरी सुरक्षा।
#ChhatronKiGoonj
जब जनता अपनी आवाज़ उठाती है, तो वह सिर्फ़ अपने लिए नहीं, आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए भी लड़ती है।
हर लोकतांत्रिक आंदोलन की ताकत उसकी एकता, शांतिपूर्ण संघर्ष और सच के प्रति प्रतिबद्धता होती है।
आवाज़ को दबाया जा सकता है, लेकिन सच को नहीं।
#आंदोलन#लोकतंत्र#संविधान #जनआवाज़ #न्याय #एकता
इंकलाब ज़िंदाबाद के नारे से समस्या है क्योंकि इस रिपोर्टर को इस देश का इतिहास, राजनीति, समाज या आज़ादी के संघर्ष को जानने की ज़रूरत ही नहीं है।
इसको मालूम है नौकरी बचाने के लिये प्रोपेगंडा करना है पत्रकारिता नहीं। शर्म भी आ रही है, अफ़सोस भी हो रहा है