अगर भरत भूषण तिवारी की जगह कोई और होता, तो शायद अब तक सत्ता और विपक्ष दोनों के नेताओं की प्रेस कॉन्फ्रेंस हो चुकी होती। टीवी डिबेट में चीख-पुकार मची होती। निष्पक्ष जांच की मांग पूरे देश में गूंज रही होती।
लेकिन यहां सवाल किसी जाति का नहीं, सवाल न्याय का है।
जिस देश में माओवादी और नक्सली तक हथियार डालकर सरेंडर करते हैं तो उन्हें कानून के तहत सुनवाई का मौका दिया जाता है, पुनर्वास की बात होती है…
तो फिर अगर भरत भूषण तिवारी ने वास्तव में हथियार छोड़ दिए थे, तो उन्हें अदालत तक पहुंचने का मौका क्यों नहीं मिला?
यह सवाल इसलिए भी बड़ा है क्योंकि आज मामला सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि कानून के राज पर भरोसे का है।
और हां, एक बात और…
अगर भरत तिवारी की जगह कोई भरत पासवान, भरत मांझी, भरत यादव, भरत पटेल या भरत खान होता, तो शायद न्याय की मांग करने वालों की कतार कहीं लंबी होती।
24जून भोजपुर के एसपी पुलिस बल के साथ भरत तिवारी के घर पहुंचे। पूरे परिवार को भरोसा दिलाया गया कि संविधान के अनुसार निष्पक्ष कार्रवाई होगी, न्याय मिलेगा और परिवार पर दर्ज मामलों को भी जल्द वापस लेने की प्रक्रिया होगी। यह दृश्य पूरे देश ने देखा।
लेकिन… @iamluckybisht के अनुसार परिवार का दावा है कि पर्दे के पीछे तस्वीर कुछ और थी।
परिजनों के अनुसार, एसपी ने भरत तिवारी के छोटे भाई चंदन तिवारी को अलग ले जाकर कहा कि जो आंदोलन और न्याय की मांग चल रही है, उसे जल्द से जल्द बंद करो। परिवार का यह भी आरोप है कि उनसे कहा गया कि “भरत तिवारी अपराधी था, उसने पुलिस पर हथियार ताना था, इसलिए मारा गया।”
अगर परिवार का यह आरोप सही है, तो कई बड़े सवाल खड़े होते हैं—
•जब जांच पूरी भी नहीं हुई, तब किसी अधिकारी ने ऐसा निष्कर्ष कैसे सुना दिया?
•यदि निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया गया था, तो पर्दे के पीछे ऐसी बातें क्यों कही गईं?
•क्या यह सिर्फ एक अधिकारी की व्यक्तिगत राय थी, या फिर वह किसी उच्च स्तर के निर्देश का पालन कर रहे थे?
इन सवालों के जवाब निष्पक्ष जांच से ही सामने आ सकते हैं।
#JusticeForBharatTiwari #BharatTiwari #Bhojpur
रीवा की रहने वाली 20 वर्षीय गोल्डी साकेत अपने परिवार के सपनों के साथ हैदराबाद कमाने गई थी। वहां एक बिस्किट फैक्ट्री में काम करते हुए उसकी मुलाकात इंस्टाग्राम पर एक युवक से हुई। युवक ने अपना नाम प्रिंस बताया। बातचीत शुरू हुई, दोस्ती हुई और फिर यह रिश्ता प्यार में बदल गया।
गोल्डी की मां बेबी देवी के मुताबिक, करीब तीन साल तक दोनों के बीच बातचीत चलती रही। गोल्डी को विश्वास था कि वह प्रिंस नाम के युवक से प्रेम करती है। करीब छह महीने पहले दोनों ने हैदराबाद के एक मंदिर में शादी भी कर ली। लेकिन कहानी में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब गोल्डी को पता चला कि जिस प्रिंस पर उसने भरोसा किया, उसका असली नाम साहिल खान है।
बताया जाता है कि इस सच्चाई के सामने आने के बाद दोनों के बीच विवाद भी हुआ। सवाल उठे, बहस हुई, लेकिन फिर साहिल ने गोल्डी को मना लिया। इसके बाद मस्जिद में निकाह भी कराया गया। परिवार का आरोप है कि साहिल के घरवाले इस शादी से खुश नहीं थे और गोल्डी को लगातार ताने दिए जाते थे।
इधर रीवा के गोविंदगढ़ थाना क्षेत्र के तमरी गांव में बैठे माता-पिता को अपनी बेटी की दुनिया के बारे में कुछ भी पता नहीं था। मां बेबी देवी बताती हैं कि गोल्डी उनसे बात करती थी, अपने सुख-दुख साझा करती थी, लेकिन फिर अचानक उसकी आवाज आना बंद हो गई। परिवार परेशान था, बेटी की तलाश कर रहा था, लेकिन उन्हें यह तक नहीं बताया गया कि उनकी बेटी अब इस दुनिया में नहीं रही।
गोल्डी के पिता तीरथ साकेत बताते हैं कि उन्हें अपनी बेटी की मौत की जानकारी तक नहीं दी गई। वे लगातार उसकी तलाश करते रहे। बाद में बड़ी बेटी की एक परिचित से पता चला कि गोल्डी की मौत हो चुकी है और उसका अंतिम संस्कार भी कर दिया गया है।
यहीं से कई सवाल खड़े होने लगे।
अगर गोल्डी की मौत हुई थी तो उसके माता-पिता को सूचना क्यों नहीं दी गई?
आखिर ऐसी क्या वजह थी कि परिवार अपनी बेटी की आखिरी झलक तक नहीं देख पाया?
मौत की परिस्थितियों को लेकर स्पष्ट जानकारी क्यों नहीं मिल सकी?
परिवार जब पुलिस के पास पहुंचा तो उन्हें संतोषजनक जवाब क्यों नहीं मिला?
परिजनों का कहना है कि जब वे पुलिस के पास पहुंचे तो वहां भी मौत की स्पष्ट जानकारी दर्ज नहीं मिली। इसी बात ने उनके मन में और ज्यादा सवाल खड़े कर दिए।
परिवार की मांग और प्रशासनिक प्रक्रिया के बाद करीब 35 दिन बाद गोल्डी के शव को कब्र से बाहर निकाला गया। सोचिए उस मां-बाप पर क्या बीती होगी, जिन्हें अपनी बेटी को आखिरी बार देखने के लिए 35 दिनों तक इंतजार करना पड़ा। जिस बेटी को उन्होंने बड़े अरमानों से पाला, उसके अंतिम दर्शन भी उन्हें समय पर नसीब नहीं हुए।
इसके बाद हिंदू रीति-रिवाजों से गोल्डी का अंतिम संस्कार किया गया और उसकी अस्थियों का विसर्जन किया गया। परिजनों का कहना है कि यह उनके जीवन का सबसे दर्दनाक दिन था।
आज गोल्डी नहीं है, लेकिन उसके पीछे कई ऐसे सवाल छोड़ गई है जिनके जवाब उसका परिवार मांग रहा है। परिवार ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी न्याय की मांग की है, क्योंकि साहिल खान प्रयागराज का रहने वाला बताया जा रहा है।
एक बेटी की मौत हो गई, लेकिन उसके साथ जुड़े सवाल अब भी जिंदा हैं।
क्या गोल्डी को पूरी सच्चाई शुरू से बताई गई थी?
मौत की असली परिस्थितियां क्या थीं?
परिवार को सूचना क्यों नहीं दी गई?
और आखिर एक मां-बाप को अपनी बेटी का अंतिम संस्कार करने के लिए 35 दिन तक इंतजार क्यों करना पड़ा?
इन सवालों के जवाब सिर्फ गोल्डी का परिवार नहीं, बल्कि पूरा समाज जानना चाहता है।
भरत तिवारी चंद्रशेखर आजाद और भगत सिंह नहीं
भरत तिवारी गुंडा था -नागमणि कुशवाहा
क्या यही संवेदनशीलता होती अगर पीड़ित किसी दूसरे जाति या राजनीतिक या सामाजिक समीकरण से जुड़ा होता?
क्या बिहार में न्याय का पैमाना सबके लिए एक जैसा है, या फिर पहचान या जाति देखकर बयान दिए जाते हैं? भरत तिवारी की मौत के बाद पूरा परिवार न्याय की गुहार लगा रहा है। हजारों लोग सड़कों पर हैं। ऐसे समय में नागमणि कुशवाहा का ‘वो गुंडा था’ वाला बयान कई सवाल खड़े करता है एक माँ अपने बेटे के लिए रो रही है, एक परिवार इंसाफ मांग रहा है, और नेता फैसला सुना रहे हैं। आखिर इतनी जल्दी किस बात की है?
भरत तिवारी का कहना था कि जो मैं कार्य कर रहा हूँ वो क्या सिर्फ जनरल के लिए कर रहा हूँ ?
नहीं मै सिर्फ जनरल के लिए नहीं कर रहा हूँ मैं जनरल भी हूँ ,ओबीसी भी हूँ SC ST भी हूँ मेरे लिए सब बराबर है।
बस इसी चीज का इनाम मिला है भरत तिवारी को नेताओं को ये बात हजम नहीं हो रही थी कि कोई लड़का समाज को एक करने का काम कैसे कर रहा है।
भरत तिवारी को न्याय दिलाने महापंचायत गरजी
सम्राट चौधरी को भी जमकर सुनाया गया
न्याय नहीं तो आंदोलन जारी रहेगा
हर हिंदू तक पहुंचाओ ये आवाज शेयर करना न भूले
भरत तिवारी की मौत हो गई। पूरा देश उसके लिए न्याय माँग रहा है
लेकिन इस व्यक्ति की कुटिल मुस्कान देखिए….उम्र में बुड्ढे हो चुके ये व्यक्ति बेहद असंवेदनशील है
प्रिय @IndianOilcl@DirHR_iocl@DirMktg_iocl@DirR_iocl@onlinservice@IOCDelhiIDO@Bhopal_IDO@PetroleumMin@MoPNG_eSeva@cpgrams
मेरी शिकायत स्वीकार किए जाने के बाद भी आज तक उसका कोई संतोषजनक समाधान नहीं किया गया है। हैरानी की बात यह है कि कार्रवाई करने के बजाय संबंधित गैस एजेंसी से जुड़े लोगों द्वारा लगातार शिकायत वापस लेने के लिए संपर्क किया जा रहा है।
अलग-अलग नंबरों से बार-बार कॉल किए जा रहे हैं:
📞 9425194917
📞 8819994965
📞 8733003291
ट्रूकॉलर पर इन नंबरों के साथ अजय द्विवेदी एवं अनिल द्विवेदी नाम प्रदर्शित हो रहा है।
इसके अतिरिक्त 📞 +91 70006 87030 नंबर से कॉल करने वाला व्यक्ति स्वयं को गैस एजेंसी संचालक बता रहा है। शिकायत के संबंध में लगातार संपर्क कर बिना किसी ठोस कार्रवाई एवं समाधान के शिकायत वापस लेने का आग्रह किया जा रहा है।
एक उपभोक्ता के रूप में मेरा सीधा प्रश्न है—
क्या इंडियन ऑयल की शिकायत प्रणाली का उद्देश्य समस्या का समाधान करना है या शिकायतकर्ता से शिकायत वापस करवाना?
जब शिकायत का निस्तारण ही नहीं हुआ, तब उसे वापस लेने के लिए बार-बार संपर्क क्यों किया जा रहा?
कृपया कॉल डिटेल, शिकायत रिकॉर्ड एवं संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई सुनिश्चित करें। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि बिना समाधान के शिकायत वापस लेने के लिए उपभोक्ता से संपर्क क्यों किया जा रहा है।
@CMMadhyaPradesh@DrMohanYadav51@MPPoliceDeptt से भी निवेदन है कि मामले का संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करें, ताकि भविष्य में किसी भी उपभोक्ता को अपनी शिकायत दर्ज कराने के कारण इस प्रकार की परिस्थितियों का सामना न करना पड़े।और हमको किसी भी प्रकार दबाव और असुरक्षित महसूस नहीं हो !
@RavendrakumarMP प्रिय शुभम, हम आपको सूचित करना चाहते हैं कि आपकी समस्या संबंधित टीम के साथ साझा कर दी गई है, और वे आगे की सहायता के लिए आपसे संपर्क करेंगे।
“मेरे परिवार के किसी सदस्य के साथ ऐसा हो तो क्या मैं उस वक़्त भी कह दूँगा कि मर गया तो मर गया? आप संवेदना नहीं जता सकते तो कम से कम जले पर नमक मत छिड़किए।”
यह कहकर Chirag Paswan ने Jitan Ram Manjhi के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी।
एनकाउंटर से ठीक पहिले का Video है भरत जी का
माँ बाप के कहने पर पुलिस के गाड़ी मे बैठ गया था ...
एक पीता जो अपने बेटा का जान बचाने केलिए मा*र मा*र के पुलिस के गाड़ी मे बैठा रहें थे ,,
उनको सायद लगा होगा की कुछ दिन जेल होगा और
कुछ नही ,,
उनको क्या पता था उनका बेटा का एनकाउंटर हो जायेगा आत्मसमर्पण करने के बाद भी ...
माँ बाप को इस दुःख के समय मे हिम्मत देना भगवान ... 🙏
यह सिर्फ एक गैस डिलीवरी का मामला नहीं है… यह एक आम उपभोक्ता के साथ हो रहा मानसिक उत्पीड़न और दबाव है।
सिलेंडर डिलीवरी स्वीकार करने के बाद मुझे लगातार अलग-अलग नंबरों से कॉल आ रहे हैं…
और मुझ पर शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है।
📞 कॉल करने वाले नंबर:
94251 94917
8819994965
8733003291
कॉलर आईडी पर नाम “अजय द्विवेदी / अनिल द्विवेदी” दिख रहा है। कॉल्स का तरीका पूरी तरह दबाव बनाने वाला, असहज और डराने वाला है।
क्या एक आम उपभोक्ता अपनी शिकायत भी दर्ज नहीं कर सकता बिना डर और धमकी के?
👉 यह पूरा मामला गंभीर जांच और तत्काल कार्रवाई की मांग करता है।
👉 संबंधित एजेंसी/कर्मचारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
मैं @PetroleumMin@MoPNG_eSeva तुरंत संज्ञान लेकर कार्रवाई और सुरक्षा की मांग करता हूँ।
प्रिय @IndianOilcl@DirHR_iocl@DirMktg_iocl@DirR_iocl@onlinservice@IOCDelhiIDO@Bhopal_IDO@PetroleumMin@MoPNG_eSeva@cpgrams आपकी टीम हमसे संपर्क लेकिन एक्सेप्ट करने के बाद भी की इन्होंने ने ही दिया है सिलेंडर और उसके बाद बहुत घटिया तरीके से बात कर रहे है साथ ही धमकी भी दे रहे है कंप्लेन वापस करने का दबाव बना रहे हैं अलग अलग नंबर से कॉल कर रहे हैं जिनका नंबर 94251 94917 , 8819994965, 8733003291 जिसमे नाम अजय द्विवेदी या अनिल द्विवेदी ट्रू कॉलर में आ रहा हैं कृपया संज्ञान में लेकर कार्यवाही करे इसमें आपके एजेंसी संचालक का भी पूर्ण समर्थन दिख रहा है
@RavendrakumarMP प्रिय शुभम, हम आपको सूचित करना चाहते हैं कि आपकी समस्या संबंधित टीम के साथ साझा कर दी गई है, और वे आगे की सहायता के लिए आपसे संपर्क करेंगे।
भरत तिवारी के पिता की आंसू की कीमत - तुमसे नहीं चुक पाएगी
तुम्हारी बर्बादी निश्चित है
मुझे किसी और का पता नहीं - मगर ब्राह्मणों सच में ब्राह्मण हो तो कभी इन्हें माफ मत करना
रात शायद बहुत भारी रही होगी उस माँ के लिए…
कहते हैं, एक माँ अपने बच्चे को नौ महीने पेट में रखती है।लेकिन सच तो यह है कि वह उसे पूरी जिंदगी अपने दिल में रखती है।
उस दिन भी शायद उसने अपने बेटे से यही कहा होगा—
“बेटा, जो भी है… कानून पर भरोसा करो।”
बेटे ने माँ की बात मान ली।
क्योंकि बेटा चाहे कितना भी बड़ा हो जाए, माँ की बात उसके लिए आख़िरी सच होती है।
लेकिन कौन जानता था कि जिस दिन वह माँ अपने बेटे को आख़िरी बार देख रही है, वह दिन उनकी जिंदगी का सबसे लंबा और सबसे दर्दनाक दिन बन जाएगा।
आज ज़रा एक पल के लिए राजनीति भूल जाइए।
जाति भूल जाइए।
समर्थन और विरोध भूल जाइए।
बस एक माँ की जगह खुद को रखकर देखिए…
सुबह जिस बेटे की आवाज़ सुनी हो, शाम को उसकी तस्वीर के सामने बैठना पड़े…
जिस बेटे के लिए सपने देखे हों, उसकी यादों के सहारे जीना पड़े…
जिसे बचपन में उंगली पकड़कर चलना सिखाया हो, उसकी अर्थी को कंधा देना पड़े…
उस माँ पर क्या बीतती होगी?
कहते हैं समय हर घाव भर देता है।
लेकिन कुछ घाव ऐसे होते हैं जो भरते नहीं, बस इंसान उनके साथ जीना सीख जाता है।
जवान बेटे की मौत भी शायद ऐसा ही एक घाव है।
आज लोग अपने-अपने तर्क दे रहे हैं।
कोई सही बता रहा है, कोई गलत।
कोई पक्ष में है, कोई विपक्ष में।
लेकिन इन सब शोर के बीच एक माँ की सिसकियाँ हैं…
जो किसी टीवी डिबेट में सुनाई नहीं देतीं।
जो किसी सरकारी फाइल में दर्ज नहीं होतीं।
जो किसी प्रेस कॉन्फ्रेंस का हिस्सा नहीं बनतीं।
वो बस रात के सन्नाटे में अपने बेटे का नाम लेकर रोती हैं।और शायद बार-बार खुद से एक ही सवाल पूछती हैं“काश… उस दिन मैंने उसे जाने से रोक लिया होता।”
इस दुनिया में बहुत दर्द हैं…
लेकिन एक माँ का अपने जवान बेटे को खो देना शायद उन दर्दों में सबसे बड़ा दर्द है।
इसीलिए जब भी ऐसी कोई खबर पढ़ें…
फैसला करने से पहले एक बार उस माँ के बारे में ज़रूर सोचिएगा।क्योंकि कई बार एक माँ के आँसू, हजारों बहसों से ज़्यादा बड़े सवाल छोड़ जाते हैं।
“मैं ब्राह्मण हूं, अगर गोली मारना है तो आओ यहाँ गोली मारो… जिसने हत्या की है उसे ब्रह्महत्या का पाप लगेगा।” — अश्विनी चौबे
सवाल यह है कि जब सत्ता में उनकी ही पार्टी की सरकार है, तब एक वरिष्ठ BJP नेता को न्याय की मांग के लिए मीडिया के सामने इस तरह भावुक अपील क्यों करनी पड़ रही है?
अगर एक मृतक के मामले में निष्पक्ष जांच और जवाबदेही सुनिश्चित कराने के लिए सत्ताधारी दल के नेताओं को भी कैमरों के सामने गुहार लगानी पड़े, तो यह व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि होता हुआ दिखना भी चाहिए।
कौन कहता है कि बिहार में सिर्फ़ जातिवाद है…..?
भरत तिवारी के एनकाउंटर के बाद जो तस्वीरें सामने आ रही हैं, वो एक अलग कहानी कहती हैं।
•पासवान समाज के लोग रो रहे हैं
•भुइयां, मुसहर, सहनी समाज के घरों में मातम है
•यादव समाज के लोग न्याय की मांग को लेकर सड़कों पर हैं
•सामान्य वर्ग भी इसे अन्याय और अत्याचार बता रहा है
ये चाचा पासवान समाज से हैं। कैमरे पर बोलते-बोलते उनकी आंखें भर आईं।
सवाल यह है कि अगर कोई व्यक्ति सिर्फ़ अपनी जाति का नेता होता, तो क्या उसकी मौत पर हर समाज के लोग इस तरह आंसू बहाते?
शायद भरत तिवारी जाति से ऊपर उठकर गरीबों, वंचितों और आम लोगों की आवाज़ बन गए थे। यही वजह है कि आज उनका जाना सिर्फ़ एक परिवार का नहीं, बल्कि हजारों लोगों का व्यक्तिगत दुख बन गया है।
#JusticeForBharatTiwari #Bihar #Bhojpur #BharatTiwari
News18 कह रहा है कि भरत तिवारी के भाई और उनके पिता पर भी FIR हुई है।
पुलिस को मेरी एक सलाह है—
जो लोग सोशल मीडिया पर सवाल पूछ रहे हैं, आवाज उठा रहे हैं, न्याय की मांग कर रहे हैं, उन सब पर भी FIR दर्ज कर दीजिए।
सबको गिरफ्तार कर लीजिए।
फिर प्रेस कॉन्फ्रेंस करके बता दीजिए कि ये सब “उपद्रवी”, “भ्रमित” या “पागल” हैं।
क्योंकि जब सवालों का जवाब देना मुश्किल हो जाए, तब सवाल पूछने वालों को ही कटघरे में खड़ा कर देना सबसे आसान तरीका होता है।
लेकिन याद रखिए, FIR से आवाज़ें दबाई जा सकती हैं, सवाल नहीं।
लोकतंत्र में नागरिक का सबसे बड़ा अपराध सवाल पूछना नहीं, बल्कि सत्ता का सवालों से भागना होता है। #JusticeForBharatTiwari
भरत भूषण तिवारी कैसे इंसान थे, इसका अंदाज़ा उनकी अंतिम यात्रा में उमड़ी भीड़ देखकर लगाया जा सकता है।
हज़ारों आँखें नम थीं, हजारों लोग उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचे थे। कोई यूँ ही लोगों के दिलों में जगह नहीं बना लेता। कहा जाता है कि उन्होंने अपना जीवन गाँव, समाज, दलितों, वंचितों और गरीबों की आवाज़ उठाने में लगा दिया था।
आज वे इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके जाने का दर्द उन लोगों की आँखों में साफ़ दिखाई दे रहा है जिनके लिए वे लड़ते रहे।
किसी व्यक्ति की असली पहचान उसके जाने के बाद उमड़ने वाले जनसैलाब से होती है, और भरत तिवारी की अंतिम यात्रा ने बहुत कुछ कह दिया। 🙏
#BharatTiwari #JusticeForBharatTiwari #Bhojpur #Bihar #BharatBhushanTiwari