मैं किसी भी राजनैतिक पार्टी का समर्थन नहीं करता, मैं क्षत्रिय राष्ट्रवादी हुँ , राष्ट्रहित में सकारात्मक विचारधारा और क्षत्रित्व का कट्टर समर्थक हु और रहुंगा ।
@KraantiKumar अच्छा अभी तुम्हारे अब्बू @yadavtejashwi@laluprasadrjd को उपचुनाव में पतलून गिला किया न आने दो विधानसभा उसमें पता चल ही जाएगा...तुमलोग BJP,RJD,CONG और JDU खाली आपस में लोगों को लड़ाने और बाटने का काम करता है बिहार का कल्याण सिर्फ @jansuraajonline@PrashantKishor ही कर सकता है🙏
ठाकुर और सामंत।
बार बार हर पक्ष द्वारा बोला जाता की जातिवाद राजनीति में नही होना चाहिए और ये सिर्फ़ नेता अपने मतलब के लिए करते है लोकतंत्र में जातिवाद के लिए जगह नहीं होनी चाहिए। पर इसमें आड़े आता है की पहल कोन करे सब एक दूसरे पर जातिवाद फैलाने का आरोप लगाते है और ख़ासकर राजस्थान में तो ये चर्म पर है।
अभी जाट समाज खासकर जाट युवाओं के पाले में अभी गेंद है वो दिल पर हाथ रखकर सोचेंगे तो मानेंगे की माननीय @Barmer_Harish द्वारा करी गई टिप्पणी शुद्ध रूप से जातिवादी थी ठाकुर, ठाकुर का कुआ इन सब की जगह राजनीति में नही है।
बाड़मेर के सरकारी हॉस्पिटल, सड़क, बिजली, पानी और भी न जाने कितने आम जन से जुड़े मुद्दे है उन पर बात होनी चाहिए। एक इतने बड़े संभाग के जिला हॉस्पिटल की ऐसी दयनीय हालत पर इन्हे शर्म आनी चाहिए जबकि खुद कुछ समय पहले तक सरकार में थे गरीब लोग निजी हॉस्पिटल की सुविधाएं नही ले सकते इसलिए उनमें सुधार के लिए इन्हें प्रयास करने चाहिए पर ये एक कवि की विवादास्पद कविता पढ़ रहे है। समाज को अब जगना चाहिए ' वो भी करते है' इस सोच से बाहर निकल कर के नई शुरुआत करने का बेहतरीन मौका था पर अफ़सोस होता है ये देखकर की पढ़े लिखे युवा जो नेता बनने का सपना देख रहे है वो भी अजीब अजीब तर्क देकर इसको जस्टिफाई कर रहे है। और बजट में कुछ गलत हुआ है तो आंकड़ों और तथ्यों के साथ अपनी बात को रखना चाहिए था ना की सालो पहले लिखी गई कविता पढ़ कर। दो गलत मिलकर कभी एक सही नही होता। नेता दोनो तरफ़ के अपने मतलब के हिसाब से ऐसी बाते करते रहेंगे पर आम जन को इसका समर्थन नही करना चाहिए तभी ये ऐसा करने से बाज आएंगे।
गलत गलत रहेगा।
राम राम 🙏
@arvindchotia
@Aditya4BMR @JATbera1
@RJDforIndia इन्ही कुछ कारणों से तुम बिहार CM कभी नही बन सटके, फूट डालो और राज करो की राजनीति बाप भी किया और बेटा भी उसी रास्ते पर है तुम आजीवन कभी बिहार के मुख्यमंत्री नही बन सकते अपनी तशरीफ रगड़ते रहो।
बहुत ही बुरा दौर था बिहार मे मैं हरिजन स्कूल राजगीर मे पढता था ।
यह बात सही है कि क़ानून नाम की चीज नहीं रह गयी थी ।
माओवादि अँगड़ी जाती के किसानों की ज़मीने पर लाल झंडा लगा देते थे और फसल पर क़ब्ज़ा कर लेते थे।
एक्चुअली पिछड़ी जातियों के सर पर खून सवार था। जो भूमिहार या राजपूत अपनी ज़मीन नहीं छोड़ता मारा जाता था । समाचार में बताया जाता था कि नक्सलियों के द्वारा हत्या कर दी गई ।
सरकार मे लालू जी थे जो कि पिछड़ों को नक्सलि बना रखे थे। कोई थाना नहीं कोई पूलीस नही ।
कहा जाता है कि उसी के विरोध में रणबीर सेना बना था । न नक्सलि सही थे । न रणबीर सेना । पर लालू जी की राजनीति चमक रही थी।
आपको जानकर आश्चर्य होगा ति यह नक्सलि इतना मज़बूत थे कि रात मे जहाना बाद जेल का गेट उड़ा कर अपने साथियों को छुड़ा ले गये थे।
मरने बाले सभी जाति के थे। किया अँगड़ा क्या पिछड़ा।
माहौल ऐसा हो गया था कि अगडें अपने बच्चों के नाम से सिंह, पांडे हटा दिये थे।
आपको जीतना भी फ़ैंसी नाम मिले जैसे राजीव रंजन , उदित प्राशन , राज मोहन , ये सब उसी समय बिहार से शुरू हूए है ।
जनता इतना परेशान हो गई थी कि नितीश कुमार को जीता दिया ।
वरना लालू जी को स्वय इंद्र देवता भी बिहार में नहीं हरा सकते थे।
इस वर्ष मैंने खुद से कोई भी वादे नहीं किये हैं। कोई भी तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा नहीं किये। अब जीवन को बेहद निजी रखना चाहता हूँ। ऊब चुका हूँ इनसब चीजों से। इस पीढ़ी का होते हुए भी एक कश्मकश जीवन जीता हूँ। ऐसा लगता है सब कुछ मैंने ही बिगाड़ा है और सही मैं स्वयं ही करूँगा...!!
वाल्मिकी की रामायण हूँ,
मिथिला का संस्कार हूँ मैं,
पाणिनी का व्याकरण हूँ,
ज्ञान का भण्डार हूँ मैं।
अजी हाँ! बिहार हूँ मैं।
सीता की भूमि हूँ,
विद्यापति का संसार हूँ मैं।
जनक की नगरी हूँ,
माँ गंगा का श्रंगार हूँ मैं।
अजी हाँ! बिहार हूँ मैं।।