तथागत बु���्धने प्रथम धमचक्क पवत्तन करके दुनिया के लिए धम्म दिया।5 भिक्खू ब्राह्मण नहीं थे बल्कि मूलनिवासीही थे।बुद्धने बहुजन हिताय बहुजन सुखाय का प्रथम धम्मोपदेश दिया।बुद्ध दुनिया के मुक्ति दाता है।बुद्ध को इसी वजहसे गुरु कहते हैं।इसे ��ी गुरु पूर्णिमा कहते है।आजसे ही वर्षवास आरंभ।
"भारत में ढाबे पर मुसलमान अपना नाम तो छोड़ो, अगर दलित अपनी जाति लिख दे तो उसे पता चल जाएगा कि ये लंपट उन्हें कितना हिंदू मानते हैं?"
- प्रशांत कनौजिया, कांग्रेस नेता
बहुजन समाज पार्टी के तमिलनाडु प्रदेश अध्यक्ष, वकील श्री पी. मैं श्री आनंदन और श्रीमती पोल्कोडी आर्मस्ट्रांग के राज्य समन्वयक के रूप में चयन का तहे दिल से स्वागत और बधाई देता हूं!
दिवंगत समानता नेता अन्नान आर्मस्ट्रांग के निस्वार्थ क्षेत्र कार्य की तरह, मैं दिल से चाहता हूं कि वे बिना किसी समझौते या पीछे हटने के दलित लोगों की मुक्ति, अधिकारों और आत्म-सम्मान के लिए वैचारिक स्पष्टता के साथ बाबा साहेब अम्बेडकर के सपनों को आकार दें और खोजें। दलित लोगों के कल्याण की चिंता वाला क्षेत्र।
#जयभीम
दुर्घटना में घायल रामलाल चौबे को A+ ग्रुप के खून की सख्त जरूरत है।
रक्तदान में दिया मो0 हनीफ का A+ ग्रुप का खून अस्पताल में उपलब्ध है।
श्यामलाल दुबे का O+ ग्रुप का खून भी उपलब्ध है।
ऐसे हालातों में रामलाल चौबे किसका खून लेगा?
विकास दिव्यकीर्ति ने स्मिता प्रकाश के पॉडकास्ट पर इंटरव्यू में आरक्षण की समीक्षा करने की मांग की.
दिव्यकीर्ति एक SC परिवार का उदाहरण प्रस्तुत कर कह रहे थे पूरा परिवार सिविल सर्विस में है, बच्चे भी सिविल सर्विसेज में हैं. उन्होंने सवाल उठा��ा क्या ऐसे परिवार को आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए ?
सवर्ण हमेशा बुद्धिजीवी बनकर आरक्षण पर सवाल उठाते हैं.
मैं दिव्यकीर्ति साहब से कहना चाहता हूँ हज़ारों सवर्ण परिवार हैं जो कई पी��़ियों से सिविल सर्विसेज में हैं. उनके बच्चे और दामाद हैं, और रिश्तेदार हैं सिविल सर्विसेज में.
सवर्ण परिवारों पर कभी कोई सवाल नही उठाता. सवाल हमेशा आरक्षण पर क्यों उठाया जाता है ?
मैं विकास दिव्यकीर्ति साहब से पूछना चाहता हूँ.
सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में सवर्ण जातियों के ओवर रिप्रजेंटेशन पर सवाल क्यों नही उठाया जाता.
मीडिया, कला, शिक्षा का क्षेत्र, कॉरपोरेट, सीबीआई, ED, चुनाव आयोग, फ़िल्�� उद्योग और अन्य क्षेत्रों में सवर्ण जातियों के ओवर रिप्रजेंटेशन पर सवाल क्यों नही उठाया जाता ?
ब्यूरोक्रेसी में भी उच्च पदों पर कुछेक जातियों का ओवर रिप्रजेंटेशन है. PMO दफ्तर, कैबिनेट सेक्रेटरी, आर्मी, नेवी वायु सेना आदि में भी उच्च पदों पर सवर्ण जातियों का ओवर रिप्रजेंटेशन पर सवाल क्यों नही उठाया जाता ?
बहस हमेशा आरक्षण पर क्यों ?
सवर्ण जातियों के ओवर रिप्रजेंटेशन पर बहस क्यों नही ?
सवाल विकास दिव्यकीर्ति और आप लोगों से भी है ?
अम्बेडकरवादी और संविधानवादी डरते नहीं। झूँठ, पाखंड, ढोंग-ढकोसला का पर्दाफाश करते रहेंगे।
मनु के पिट्ठुओं तुम हमें कितनी भी गालियां देते रहो, तुम्हारी गंदी जुबान तुम्हे ही कमजोर करेगी।
हम अपने हक के लिए लड़ रहे हैं, लड़ते रहेंगे, एक दिन हम भीमकोरेगांव की तरह जीतेंगे।
#i_support_nirdesh_singh
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*संविधान डायमंड जुबली वर्ष 2024 -2025;*
संविधान का पालन करो।
वरना कुर्सी खाली करो।।
-- हम भारत के लोग,
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🇮🇳🌹
*भारत का संविधान,*
अनुच्छेद 41: राज्य अपनी आर्थिक सामर्थ्य और विकास की सीमाओं के भीतर, काम पाने के, शिक्षा पाने के और बेकारी, बुढ़ापा, बीमारी और निः शक्तता तथा अन्य अनर्ह अभाव की दशाओं में लोक सहायता पाने के अधिकार को प्राप्त कराने का प्रभावी उपबंध करेगा।