मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी करना अब केवल पढ़ाई का खेल नहीं रह गया है, बल्कि यह ESB के 'अजीबोगरीब गणित' को सुलझाने की एक अंतहीन पहेली बन चुका है। राज्य सरकार ढोल पीटकर कहती है कि हमने अनुसूचित जनजाति (ST) को 20% आरक्षण का कवच दिया है, लेकिन जब ग्रुप-3 सब-इंजीनियर भर्ती का नोटिफिकेशन आता है, तो यह 'कवच' किसी छलनी जैसा नजर आने लगता है। ST वर्ग का 20% बनाम 'जीरो' का सच ESB की साइट पर मौजूद 42 विभागों के विस्तृत पदों के विवरण को यदि गौर से देखें, तो समझ आता है कि रोस्टर का पालन करना जैसे विभाग की जिम्मेदारी ही नहीं है। नियम के मुताबिक, यदि 100 पद निकलते हैं, तो 20 पद ST के हिस्से आने चाहिए। लेकिन कृषि विस्तार अधिकारी और पंचायत समन्वय अधिकारी की तरह यहाँ भी कई महत्वपूर्ण विभागों के 'नियमित पदों' में ST का कॉलम ऐसा सूना पड़ा है जैसे किसी रेगिस्तान में हरियाली। कई विभागों के नियमित और उच्च पदों (Direct Recruitment) में ST के पद कुल पदों के 5% तक भी नहीं पहुँच पा रहे हैं। आखिर वह 20% का संवैधानिक हक किस फाइल की धूल चाट रहा है? ESB की ग्रुप 3 भर्ती विज्ञापन में फिर रोस्टर विवाद, पीडब्ल्यूडी के 225 में एसटी को केवल 5 पद https://t.co/6uI60mD7QN
एक आदिवासी युवक द्वारा सोशल मीडिया पर शिक्षा मंत्री की आलोचना करने के बाद उसके घर जाकर कथित रूप से धमकाने, जबरन माफी मंगवाने, वीडियो बनाने और जातिसूचक अपमान के आरोप बेहद गंभीर हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार पुलिस ने शिकायत के आधार पर दो आरोपियों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किया है।
यदि किसी नागरिक ने कानून का उल्लंघन किया है तो कार्रवाई का अधिकार केवल कानून और पुलिस को है, किसी संगठन या व्यक्ति को नहीं। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और नागरिक की गरिमा की रक्षा करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
@mandsaur_sp से आग्रह है कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष, त्वरित और सख्त जांच कर दोषियों पर कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करें। किसी भी व्यक्ति को धमकी, दबाव या भय के वातावरण में जीने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। कानून का राज ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है।
दिल्ली में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में नगीना सांसद चंद्रशेखर भाई आजाद संसद परिसर में धरना दे रहे हैं, जिनके साथ आज मैं स्वयं और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल जी धरने में शामिल हुए।
लोकतंत्र में अपने हक़ और भविष्य की लड़ाई लड़ रहे युवाओं की आवाज़ को लाठियों से नहीं दबाया जा सकता। छात्रों पर बल का दुरुपयोग बेहद निंदनीय है।
मेरी प्रधानमंत्री @narendramodi से मांग है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तत्काल बर्खास्त किया जावे। साथ ही, छात्रों पर बल का दुरुपयोग करने वाले सभी दोषियों पर सख्त कार्यवाही हो।
@narendramodi@RahulGandhi@BhimArmyChief@hanumanbeniwal@ANI@PTI_News@ndtv@TOIIndiaNews
दिल्ली पुलिस का आदर्श वाक्य ‘शांति, सेवा, न्याय’ है, लेकिन कल जंतर-मंतर पर वर्दीधारी द्वारा मासूम बेटियों की अस्मिता पर किया गया हमला इस आदर्श वाक्य को विडंबना बना देता है।
शांतिपूर्ण विरोध एक अटूट और मौलिक अधिकार है।
भारत के निर्दोष छात्रों पर हमला करने के आदेशों का आँखें बंद करके पालन करने वाले हर पुलिस अधिकारी और सरकारी कर्मचारी ये बात ध्यान रखें:
संविधान ही आपका मालिक है।
सत्ता हमेशा के लिए नहीं रहती।
जवाबदेही ज़रूर तय की जाएगी।
Peaceful protest is a sacred and fundamental right.
Every police officer and govt official blindly following orders to attack India’s innocent students should keep in mind:
The Constitution is your master.
Power is not permanent.
Accountability will follow.
111 दिन तक माँ गंगा को बचाने के लिए आमरण अनशन पर बैठे प्रो॰ जी डी अग्रवाल हों या हरियाणा की ओलिंपिक रेसलर हों,
हमारे 750 अन्नदाता किसान हों, दलित-आदिवासी हों, या फ़िर पेपर लीक की बलि चढ़े 25 बच्चे और उनके परिजन,
इस तानाशाह सरकार ने किसी को नहीं बख़्शा…
इनकी नज़र में कोई भी अगर आवाज़ उठाता है तो वह "Anti-National" है, "परजीवी" है !
जंतर-मंतर पर आज जो हुआ वह लोकतंत्र और संविधान के ऊपर एक और काला धब्बा है।
कोटा और देहरादून से "छात्रों की गूँज" का आगाज़ हो चुका है…दिल्ली की दहलीज़ तक ज़रूर पहुँचेगी !!
सोनम वांगचुक को अनशन स्थल से जबरन हटाना केवल एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध के संवैधानिक अधिकार पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
लोकतंत्र में असहमति का उत्तर संवाद, संवेदनशीलता और जवाबदेही से दिया जाता है, दमन से नहीं। यदि कोई नागरिक शांतिपूर्ण और अहिंसक तरीके से अपनी बात रख रहा है, तो उसकी आवाज़ सुनना लोकतांत्रिक व्यवस्था का दायित्व है।
परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और युवाओं के भविष्य जैसे मुद्दों पर उठ रही चिंताओं का समाधान बल प्रयोग से नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच और सार्थक संवाद से होना चाहिए।
लोकतंत्र की असली ताकत यही है कि सत्ता सवालों का सामना करे, न कि सवाल पूछने वालों को हटाने का प्रयास करे।
ऐसे सम्मानित व्यक्तित्व को इस स्थिति में देखकर मन व्यथित हो जाता है।🥺
लोकतंत्र की पहचान संवाद और जवाबदेही से होती है, उपेक्षा से नहीं।😳
इस्तीफा मिलने तक यही डटे रहेंगे।🤯
धरती आबा बिरसा मुंडा की जन्मभूमि खूंटी में आज आदिवासी समाज बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहा है। महिलाएं मीलों दूर से पानी ढो रही हैं, बच्चे गंदे तालाब-नालों का पानी पीने को मजबूर हैं। यह सिर्फ जल संकट नहीं, बल्कि व्यवस्था की निर्ममता और सत्ता की असफलता का जीवित प्रमाण है।
महंगाई मानव मोदी का फिर से हमला।
पेट्रोल-डीज़ल के दाम किश्तों में बढ़ाते हैं - ताकि चुपके-चुपके आपकी जेब कटती रहे।
मैं महीनों से आर्थिक तूफान आने की बात कह रहा था। पर मोदी जी तब हमेशा की तरह चुनाव में व्यस्त थे - और चुनाव खत्म होते ही पेट्रोल-डीजल ₹8 महंगा कर दिया।
और, ये बढ़त होती ही जाएगी।
महंगाई मानव मोदी का एक ही काम है - चुनाव में वादे, और बाक़ी समय जनता की जेब पर वार।
NEET 2024:
पेपर लीक हुआ। परीक्षा रद्द नहीं हुई। मंत्री ने इस्तीफ़ा नहीं दिया। CBI ने जांच बिठाई। एक कमेटी बनी।
NEET 2026:
पेपर लीक हुआ। परीक्षा रद्द हुई। मंत्री ने फिर इस्तीफ़ा नहीं दिया। CBI फिर जाँच कर रही है। एक और कमेटी बनेगी।
मोदी जी, देश आपसे कुछ सवाल पूछ रहा है - जवाब दो!
बार-बार पेपर लीक क्यों हो रहे हैं?
बार-बार इस "परीक्षा पे चर्चा" पर आप चुप क्यों हैं?
बार-बार फेल हो रहे शिक्षा मंत्री को आप बर्खास्त क्यों नहीं कर रहे हैं?
#SackPradhan
मध्यप्रदेश की सरकार @DrMohanYadav51 जी और #MPESB की यह कैसी संवेदनहीनता है?
#MPESB द्वारा #MPSI मुख्य परीक्षा की तिथि 9 अप्रैल घोषित करना सीधा-सीधा अभ्यर्थियों के साथ अन्याय है।
जिस परीक्षा का पाठ्यक्रम MPPSC और UPSC जैसा विस्तृत हो, उसके लिए मात्र 15 दिन देना युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं तो और क्या है?
क्या सरकार को बिल्कुल भी अंदाज़ा नहीं कि इतने कम समय में तैयारी तो दूर, रिवीजन तक संभव नहीं है? 8 साल से जल्दबाजी नहीं थी अब इतनी जल्दबाजी..!!
8 साल बाद भर्ती आई है इस तरह जल्दबाजी और अव्यवस्था का शिकार बनाया जाएगा, तो यह साफ दर्शाता है कि सरकार को युवाओं की मेहनत और उनके भविष्य की कोई परवाह नहीं है।
सरकार तुरंत संज्ञान ले और परीक्षा तिथि बढ़ाकर अभ्यर्थियों को उचित समय दे, अन्यथा यह मुद्दा और बड़ा रूप लेगा।
@NEYU4INDIA@CMMadhyaPradesh@DGP_MP@PEB_Bhopal@BJP4MP@jitupatwari@UmangSinghar@TheSootr@MPYuvaShakti
मैं मध्यप्रदेश शासन और मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग से यह स्पष्ट मांग करता हूँ कि स्टेट इंजीनियरिंग सर्विस परीक्षा में पदों की संख्या तत्काल बढ़ाई जाए। वर्तमान में केवल 32 पदों पर परीक्षा आयोजित की जा रही है, जबकि लोक निर्माण विभाग, जल संसाधन विभाग और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) जैसे प्रमुख विभागों में सैकड़ों पद रिक्त बताए जा रहे हैं। नियमों के अनुसार परिणाम घोषित होने से पूर्व ही पदों की संख्या बढ़ाई जा सकती है, अतः 20 अप्रैल से पहले सभी विभाग अपने वास्तविक रिक्त पदों का मांगपत्र आयोग को भेजें।
तथ्य यह है कि पिछले तीन वर्षों में केवल 55 पदों का ही विज्ञापन निकला है। इस बार कम पदों के कारण आवेदनों की संख्या 8 हजार से घटकर 2500 रह गई है। यह स्थिति प्रदेश के तकनीकी युवाओं के साथ अन्याय है। जब विभागों में 400 से अधिक पद रिक्त होने का दावा है, तो मात्र 32 पदों पर भर्ती करना औपचारिकता प्रतीत होता है।
मैं मांग करता हूँ कि कम से कम 200 पद तत्काल जोड़े जाएँ, ताकि पारदर्शी, न्यायसंगत और प्रभावी भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित हो सके।