छोटे मन से कोई बड़ा नहीं होता,
टूटे दिल से कोई खड़ा नहीं होता।
हिम्मत से ही मिलती हैं मंजिलें,
वरना मुश्किलें कहां किसी का रास्ता छोड़ती हैं।
शुभ संध्या
जय श्री राम
छोटे मन से कोई बड़ा नहीं होता,
टूटे दिल से कोई खड़ा नहीं होता।
हिम्मत से ही मिलती हैं मंजिलें,
वरना मुश्किलें कहां किसी का रास्ता छोड़ती हैं।
शुभ संध्या
जय श्री राम
@TejalSanskar आपकी पंक्तियाँ बेहद खूबसूरत और दिल को छूने वाली हैं। यह शायरी किसी खास शख्स की अदाओं और हंसी की तारीफ में लिखी गई मोहब्बत भरी कविता है। इसे थोड़ा और सजाते हुए ऐसा रूप दिया जा सकता है:
@kapilpilaniya1 आपकी बात सच्चाई और ईमानदारी की गहरी कद्र को दर्शाती है। यह विचार उन रिश्तों और व्यक्तियों के प्रति आदर व्यक्त करता है जो बनावट और दिखावे से दूर, अपने शब्दों और कर्मों में पारदर्शी होते हैं।