मदरसा चलाने वाले रहमान पर आरोप था कि वो स्कूल के जरिए ‘आतंकवाद से जुड़े कामों’ के लिए लोगों की भर्ती करते थे. साथ ही ‘दहशतगर्दी के लिए विदेशी फंडिंग’ भी जुटाते थे.
करीब 14 साल बाद रहमान को ओडिशा की एक अदालत ने बरी किया. कोर्ट ने कहा कि रहमान के किसी आतंकवादी संगठन से संबंध होने का कोई सबूत नहीं है. यह भी साबित नहीं हो पाया कि उन्होंने 'आतंकवाद' फैलाने के लिए कहीं से फंड जुटाया है.
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• बाबरी मस्जिद बनवाने का ढोंग रचवाया एक नीच इंसान हुमायूं को पैसों से खरीद कर , मुस्लिम वोट को तोड़ने की कोशिश की।
• जगह जगह धार्मिक दंगे फैलाने की कोशिश की गई, जिससे वोटों का ध्रुवीकरण हो।
•U.P, राजस्थान & गुजरात से लाखों लोगों को बंगाल प्रचार करवाया
#electionresult2026
Election commission of India @ECISVEEP is failing at all front, they are still not giving access to the details of counting.
And thus the people of India are relying fully on propaganda peddler i.e on #Godi_media#electionresult2026
@HardeepSPuri No govt. take any kind of hit or the brunt,on its own, it's always INDIAN nations each individual on behalf whom govt. takes decisions.... Indian nations GDP, or total capital it has , everything always belongs to citizens of India....
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...just a little clarification
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“वंदे मातरम्” को राष्ट्रीय गीत के रूप में सभी सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों, कॉलेजों और आयोजनों में इसकी समस्त पंक्तियों को अनिवार्य करना केंद्र सरकार का न केवल एक पक्षपाती और ज़बरदस्ती थोपा गया फैसला है, बल्कि यह संविधान में दी गई धार्मिक स्वतंत्रता पर खुला हमला और अल्पसंख्यकों के अधिकार छीनने का निंदनीय प्रयास है। मुसलमान किसी को वंदे मातरम् पढ़ने या उसकी धुन बजाने से नहीं रोकते, मगर क्योंकि उसकी कुछ पंक्तियाँ बहुदेववादी आस्था पर आधारित हैं और मातृभूमि को ईश्वर के रूप में प्रस्तुत करती हैं, जो एकेश्वरवादी धर्म की आस्था से टकराती हैं, इसलिए मुसलमान, जो केवल एक अल्लाह की वंदना करता है, उसको इसे पढ़ने पर विवश करना संविधान की धारा 25 और सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसलों का खुला उल्लंघन है।
आज इस गीत को अनिवार्य कर देना और नागरिकों पर थोपने का प्रयास वास्तव में देशप्रेम नहीं, बल्कि चुनावी राजनीति, सांप्रदायिक एजेंडे और जनता का ध्यान मूल समस्याओं से हटाने की सोची-समझी चाल है। मातृभूमि से प्रेम का आधार नारे नहीं, बल्कि चरित्र और बलिदान हैं, जिनका उज्ज्वल उदाहरण मुसलमानों और जमीयत उलमा-ए-हिंद का अभूतपूर्व संघर्ष है। इस प्रकार के फ़ैसले देश की शांति, एकता और लोकतांत्रिक मूल्यों को कमज़ोर करने के साथ-साथ संविधान का भी उल्लंघन हैं।
याद रखिए! मुसलमान केवल एक अल्लाह की इबादत करता है। हम सब कुछ बर्दाश्त कर सकते हैं, मगर अल्लाह के साथ किसी को शरीक करना कभी स्वीकार नहीं कर सकते। इसलिए वंदे मातरम् को अनिवार्य कर देना संविधान की आत्मा, धार्मिक स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर खुला हमला है।
#ArshadMadani
#vandematram
मुफ्ती शमाइल नदवी और नास्तिक जावेद के बीच ईश्वर को लेकर हुए डिबेट विडियो का निचोड़ देखिये
मुफ्ती साहब ने नास्तिक जावेद की बोलती बंद कर दी और नास्तिक जावेद के हर सवाल का जवाब तार्किक रूप से दिया … 🔥🔥🔥
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