जब तक ममता सरकार थी, श्यामल मित्रा का रौब और आक्रामकता इलाके में चर्चा में रहती थी। लेकिन आज स्थानीय लोगों के गुस्से ने उनका सारा घमंड तोड़ दिया। बदलते राजनीतिक माहौल में जनता का जवाब सबसे भारी पड़ता दिखा।
#ShyamalMitra#TMC#WestBengal#BengalPolitics#PoliticalChange
क्रूज़ हादसे में मां-बेटे के शव एक-दूसरे से लिपटे मिले, दिल दहला देने वाली त्रासदी ने हर आंख नम कर दी। मां और बेटे के शव एक-दूसरे से लिपटे मिले। शुक्रवार सुबह तक 24 लोगों को बचाया गया, 17 अस्पताल में भर्ती हैं, जबकि पांच बच्चों समेत 9 लोग अब भी लापता हैं।
#CruiseTragedy
वरिष्ठ वकील और संवैधानिक विशेषज्ञ Menaka Guruswamy ने राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ लेकर इतिहास रच दिया। वह देश की पहली खुलकर LGBTQ+ पहचान रखने वाली सांसद बनी हैं।
#MenakaGuruswamy#LGBTQ#RajyaSabha
India mein Old Age Homes badh rahe hain… par kyun?
Kya hum apne hi parents ko akela chhod rahe hain? 😔
Watch this before judging 👇
link- https://t.co/88chL0xHi1
#OldAgeHome#India#Reality
भाजपा सरकार के कहर की वजह से उप्र में पीड़ित लोगों की एक नई श्रेणी बन गई है, जिसका नाम है : ‘प्रीपेड पीड़ित’।
‘प्रीपेड पीड़ित’ का मतलब ये है कि जो लोग बिजली के प्रीपेड मीटर लगाकर बैठे हैं वो स्मार्ट मीटर की ख़ामियों की वजह से बिजली कट जाने पर अंधेरे और गर्मी का संकट झेलने को मजबूर हैं।
जब बिजली खाते में बिजली के इस्तेमाल करने से पहले ही पैसा जमा हो जाता है तो फिर सरकार और कंपनी जनता को क्यों परेशान कर रही है। बिजली कंपनियों को तो पैसा पहले ही मिल जाता है, फिर उन्हें आम जनता की चिंता करने की क्या पड़ी है। बेचारी जनता दर-दर भटकने पर मजबूर है लेकिन सरकार और कंपनियाँ के सामने कोई सुनवाई नहीं है क्योंकि वो पहले से ही मिलीभगत करके पैसे कमा के बैठी हैं।
सच तो ये है कि भाजपा राज में अब जनता ‘उपभोक्ता’ नहीं रह गई है, ‘उपभुगता’ हो गई है क्योंकि वो हेराफेरी से बनी भाजपा सरकार के दुष्परिणामों को ‘भुगतने’ पर मजबूर है।
इसी कारण पीडीए की संख्या भी लगातार बढ़ रही है क्योंकि हम हमेशा कहते हैं और आज भी कह रहे हैं: जो पीड़ित, वो पीडीए!
अब पीडीए में जुड़े ये नये ‘प्रीपेड पीड़ित’ कह रहे हैं कि चिंता न करें : बुरे दिन जानेवाले हैं।
पीड़ित सरकार आएगी, सबको बिजली दिलवाएगी!
#बुरे_दिन_जानेवाले_हैं