फरवरी 2002 में यूपी में चुनाव हुए। समाजवादी पार्टी ने अपने इतिहास का सबसे बेहतरीन चुनाव लड़ा। कुल 143 सीटें हासिल हुईं। बीएसपी को 98 और बीजेपी को 88 सीटें हासिल हुईं। भाजपा के समर्थन से मायावती मई में मुख्यमंत्री बनीं। उन्हें राष्ट्रीय लोकदल और कुछ निर्दलीय विधायकों का भी समर्थन था।
राजा भैया ने अक्टूबर में उनकी सरकार के खिलाफ बगावत कर दी। उनके साथ आठ विधायकों ने मायावती से समर्थन वापस लेने की घोषणा की, लेकिन तत्काल सरकार नहीं गिरी। मायावती ने उसके बाद राजा भैया, उनके भाई रघुराज प्रताप सिंह के परिवार के सदस्यों और उनके पिता के खिलाफ POTA की कार्रवाई की तथा उन्हें जेल में डाल दिया। इसका चौतरफा विरोध हुआ। सपा से लेकर बीजेपी तक में इस कार्रवाई का विरोध हुआ, लेकिन अंततः मायावती नहीं झुकीं।
2003 में ताज कॉरिडोर विवाद के बीच भाजपा ने मायावती से समर्थन वापस ले लिया। उसके बाद मुलायम सिंह ने सरकार बनाने का दावा पेश किया। मुलायम सिंह को बसपा के बागी गुट के करीब 17 विधायकों का समर्थन मिला, जिसमें राजपूत बड़ी संख्या में थे।
बाद में विश्वास मत हासिल करने तक बसपा के कुल 37 विधायकों ने अलग गुट बनाया और मुलायम सिंह की सरकार को समर्थन दिया। इस पूरे घटनाक्रम में राजा भैया की बड़ी भूमिका थी।
उस समय उनकी लोकप्रियता चरम पर थी। अगर वे सपा की सरकार बनवाने के बजाय अपनी पार्टी बना लेते, तो आज यूपी की तस्वीर ही कुछ अलग होती। सामान्य वर्ग के मुद्दों को भी राजनीति में जगह मिलती।
खैर, अब उनसे कुछ भी उम्मीद करना बेकार है। जब तक भाजपा मजबूत है, तब तक राजा भैया अपनी दो सीटों से बाहर नहीं निकलने वाले। उनके समर्थक कितनी भी कोशिश कर लें, अब उनकी राजनीति में वो धार नहीं रहने वाली।
सुबह के 4 बजे। जब दुनिया सो रही थी, तब अंकिता भंडारी के माता-पिता को हिरासत में ले लिया गया।
उनका गुनाह? वे इंडिया गेट पर चुपचाप बैठे थे - बोझिल कंधों के साथ, बिना किसी हंगामे के और सिर्फ़ इतना माँग रहे थे कि CBI जाँच पूरी होने तक दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल न बनाया जाए।
कल मैं और प्रियंका इन माता-पिता से मिले थे।
जिस जाँच का नतीजा आया नहीं, उसके पहले ही नियुक्ति की जल्दी और सवाल पूछने वाले माँ-बाप को रात के अंधेरे में उठा लिया गया।
इस सरकार की पहचान यही है: पीड़ितों की आवाज़ दबा दो, सवाल करने वालों को हटा दो।
पर न्याय की लड़ाई न दबेगी, न रुकेगी।
कांग्रेस अंकिता भंडारी के परिवार के साथ खड़ी है, और खड़ी रहेगी - जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता।
#JusticeForAnkitaBhandari
दिल्ली : अंकिता भंडारी मामले में प्रदर्शन कर रहे कांग्रेस नेता पवन खेड़ा समेत कई कांग्रेसी हिरासत में लिए गए
◆ दिल्ली पुलिस ने CRPF के साथ मिलकर सुबह 3.45 बजे इन लोगों को हिरासत में लिया
◆ सभी प्रदर्शनकारियों को तिलक मार्ग पुलिस स्टेशन में रखा गया है, अंकिता के माता-पिता को भी दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया था, लेकिन 2 घंटे बाद सुबह 6 बजे उन्हें रिहा कर दिया गया
#AnkitaBhandari | Ankita Bhandari | Pawan Khera | #PawanKhera
अंकिता भंडारी के माँ-बाप हिरासत में,
और VVIP दुष्यंत सीधा राजभवन में।
अगर दुष्यंत गौतम की राज्यपाल के पद से बर्खास्तगी नही हुई, तो अब कुछ इसी तरह पूरे देश की सड़कों पर Justice के लिए Democracy का तांडव होगा। और ये तांड़व तुम रोक नही पाओगे अमित शाह।
मैं महामहिम राष्ट्रपति से विनती करता हूं कि जब तक CBI की जांच पूरी न हो जाए, तब तक दुष्यंत गौतम को राज्यपाल के तौर पर नियुक्त न किया जाए।
BJP नेता दुष्यंत गौतम को CBI बचाने की कोशिश क्यों कर रही है?
: अंकिता भंडारी के पिता
नरेंद्र मोदी ने सुबह 4 बजे पुलिस भेजकर अंकिता के माता-पिता को गिरफ्तार करवा दिया.
'VIP' दुष्यंत गौतम को बचाने के लिए नरेंद्र मोदी ने हद पार कर दी है.
पहले उसे राज्यपाल बना दिया, अब जब अंकिता के माता-पिता इंसाफ मांग रहे हैं तो उनकी आवाज को कुचला जा रहा है.
शर्मनाक!
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में दूसरे दिन भी प्रदर्शन जारी है। इस बीच सड़क एक सफेद गाड़ी दिखाई दी। जिसमें लाठियां रखी हुई थीं। जब पुलिस को इस बारे में जानकारी दी गई तो उसने गाड़ी को चेक किए बिना जाने दिया।
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#CJPProtest#GyaneshKumar #Jantarmantar #HindiNews #AbhijeetDipke #AISA #NehaBohra
पिछले साल राहुल गांधी ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि राजुरा, महाराष्ट्र में 6800 फर्जी वोट जोड़े गए।
BBC ने इसकी पड़ताल की और पाया कि यह सही है। इसे लेकर जो FIR हुई उसपर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
2022 मे वेस्ट UP की 136 सीटों मे BJP अपने दम पर 93 सीट जीती थी,
इस बार RLD से गठबंधन के बाद इसमे 10-12 सीट बढ़ने की उम्मीद थी,
पर हाल ही मेराष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के मेरठ मुजफ्फरनगर सहारनपुर दौरे ने भाजपा का ग्राफ बढ़ाने के बजाय घटा दिया है!
अब 2024 रिपीट होने का अंदेशा है
चुनाव आयोग में कैसी गड़बड़ी चल रही है, इस पर दो चुनाव आयुक्तों ने लगातार आपत्तियां दर्ज कराईं. लेकिन उनकी बात को दरकिनार किया जाता रहा. पढ़िए इंडियन एक्सप्रेस की इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट.
https://t.co/oo73RxvLCr
#ECI#GyaneshKumar
इंडियन एक्सप्रेस की एक और इन्वेस्टिगेशन.
चुनाव आयोग में क्या है गड़बड़? क्यों हो रही है आयुक्तों की आपसी अनबन? किसको रखा जा रहा है अंधेरे में? और कौन लगातार कर रहा है किसकी शिकायत?
सारे जवाब पाएं हमारी लेटेस्ट इन्वेस्टिगेशन में.
इंडियन एक्सप्रेस हिंदी के यूट्यूब चैनल और फ़ेसबुक पेज पर.
23 सितम्बर, सुबह 7 बजे.
🎯चुनाव आयोग के अंदर किसकी मनमर्जी चल रही है?
🎯दो चुनाव आयुक्तों ने नियम पालन न होने की शिकायत क्यों की?
🎯नए वोटर जोड़ने की प्रक्रिया में कैसे अड़चन पैदा की गई?
🎯फ़ॉर्म 6 के मामले में सरकार की शक्तियों को ठेंगा क्यों दिखाया गया?
🎯आयोग के जिन अधिकारियों को वोटर जोड़ने और हटाने का हक़ है, उनके हाथ क्यों बांध दिए गए?
🎯देशभर के वोटरों के डेटा को दिल्ली से कंट्रोल करने का चलन क्यों शुरू किया गया?
🎯क्यों 10 महीनों में कम से कम 14 बार और एक ही दिन में चार बार आपत्ति दर्ज करनी पड़ी?
🎯आपत्तियों के बाद फैसले कैसे ले लिए गए?
🎯और ऐसी नौबत क्यों आई कि चुनाव आयुक्तों के कैबिनेट सेक्रेटरी से शिकायत करनी पड़ी?
जानिए इन सभी सवालों के जवाब. हमारी इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट में. वीडियो देखने के लिए आएं इंडियन एक्सप्रेस हिंदी के यूट्यूब चैनल पर.
12 सितंबर को लखनऊ में बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन महासचिव बी एल संतोष ने प्रदेश कार्यालय में एक गुप्त बैठक ली जिसमें लगभग 29 पदाधिकारी थे
इस बैठक में युवा मोर्चा से आये और नए नवेले प्रदेश महामंत्री बने अभिजात मिश्रा ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर जातिवाद के आरोप लगाये
ये आरोप तब लगाए गए जब प्रदेश में चारों तरफ ब्राह्मणों का बोलबाला है.. सर्वाधिक एमपी, सर्वाधिक एमएलए, सर्वाधिक मंत्री, सर्वाधिक केबिनेट मंत्री, सर्वाधिक जिलाध्यक्ष, क्षेत्रीय अध्यक्ष, युवा मोर्चा अध्यक्ष, संगठन से लेकर शासन प्रशासन तक यत्र तत्र सर्वत्र ब्राह्मण ही ब्राह्मण है... अभिजात मिश्रा को खुद ब्राह्मणवाद के चलते महामंत्री बनाया गया है..
राम मंदिर ट्रस्ट की तो बात ही क्या करनी वो तो हैं ही ब्राह्मण ट्रस्ट..
बाकी सवर्ण एकता जिंदाबाद थी और जिंदाबाद रहेगी..
Here is the payment schedule of compensation money under SC/ST act:
25%: On filing FIR (within 7 days)
50%: When police chargesheet is sent to court
25%: When accused is convicted by court
Means 75% money is given, before accused are even convicted.
Remember:
1. Conviction rate under this act is very low
2. There is no mechanism to recover 75% compensation money already paid, when the case is proven fake in court
So basically we are distributing free money under this scheme!!
& Destroying lives of many innocent people in this process!!
यह स्वतंत्र भारद्वाज है
शान से बता रहा है कि स्टूडेंट प्रोटेस्ट में प्रदर्शनकारी के पिता पर हमला किया - उन्हें 60 टांके लगे और वह मौत के कगार पर थे
307 के अंतर्गत हाफ मर्डर का मामला बनता था. लेकिन वह जेल नहीं गया - रात भर बेख़ौफ़ घूमता रहा
कपिल मिश्रा के एक फोन के बाद उसे राहत मिल गई
आगे बताता है कि कपिल मिश्रा, चिराग पासवान ही नहीं मोदी जी भी उसके “बड़े भाई” हैं, सबका समर्थन प्राप्त है
राम मंदिर ट्रस्ट का सीईओ बनाया गया है रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को। वैसे पहले नाम चल रहा था पुलिस अधिकारी राजेश पांडेय का। राम मंदिर ट्रस्ट में सीईओ नियुक्त करने की मांग उठाई थी निर्पेन्द्र मिश्रा ने। ट्रस्ट में पहले से ही बहुत सारे मिश्रा हैं, लेकिन सीईओ के रूप में एक और मिश्रा चाहिए था।
लेकिन इससे कुछ ब्राह्मण विरोधियों के पेट में दर्द शुरू हो गया है, क्षत्रियो को भड़का रहे हैं तुम्हे तो कोई पूछता ही नहीं । तो उन्हें बता देना चाहता हूँ कि मैं तो सनातन का रक्षक हूँ। मेरे काम केवल सनातन की तरफ नज़र उठाकर देखने वालो की आँखे नोच लेना है। पद वद से हमें क्या लेना ? ये सारे निर्णय तो हमारे मार्गदर्शक पूजनीय गुरु जी लेते हैं। ख़बरदार किसी ने भी ब्राह्मण देवता के लिए एक शब्द बोला तो मेरी तलवार से गुजरना पड़ेगा। तलवार चलाना छोड़ा है भूला नहीं हूँ। और वैसे भी मंदिर मेरे ही पूर्वज का है इससे बड़ी भागीदारी और क्या होती ? ये सीईओ वीईओ क्या मायने रखते हैं ?
सनातन सर्वश्रेष्ठ था, सर्वश्रेष्ठ है और सर्वश्रेष्ठ रहेगा। हमें जाति में बाँटने की तुम्हारी कोशिश कभी सफल नहीं होगी। हर सच्चा सनातनी केवल सनातनी होता है। वैसे भी कंधे से ऊँची छाती नहीं होती और धर्म से बड़ी जाती नहीं होती।
जय सनातन।
श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO बने पं जीतेंद्र मिश्रा,
चंपत राय की जगह गोविंद देव गिरि महासचिव बनाए गये ||
“क्षत्रियों के लिए ट्रस्ट में कोई जगह नहीं है”😷
• राम मंदिर ट्रस्ट के 15 सदस्यों में 9 स्थाई और 6 पदेन सदस्य है, सभी स्थाई सदस्य “ब्राम्हण” हैं एक भी क्षत्रिय, OBC या दलित नहीं है |
आखिर क्यों....?
• राममंदिर ट्रस्ट के 9 स्थाई सदस्य :—
1. के परासरण — ब्राह्मण
2. जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वतीजी महाराज —ब्राह्मण, बद्रीनाथ स्थित ज्योतिष पीठ शंकराचार्य
3. जगतगुरु मध्वाचार्य स्वामी विश्व प्रसन्नतीर्थ जी महाराज — ब्राह्मण, कर्नाटक के उडुपी स्थित पेजावर मठ के 33वें पीठाधीश्वर हैं.
4. युगपुरुष परमानंद जी महाराज — ब्राह्मण, अखंड आश्रम हरिद्वार के प्रमुख |
5. स्वामी गोविंद देव गिरि जी महाराज — ब्राह्मण, महाराष्ट्र के अहमद नगर में 1950 में जन्म हुआ |
6. विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्रा — ब्राह्मण, अयोध्या राजपरिवार के वंशज हैं |
7. महंत दिनेंद्र दास — ब्राह्मण, अयोध्या के निर्मोही अखाड़े के प्रमुख हैं ...
8. अनिल मिश्र — ब्राह्मण, मूलरूप से अंबेडकरनगर निवासी अनिल अयोध्या के प्रसिद्ध होम्योपैथी डॉक्टर हैं ।
9. श्री कामेश्वर चौपाल — दलित, अयोध्या आंदोलन से जुड़े रहे हैं. कारसेवक ....
9 स्थाई सदस्य में 8 ब्राम्हण व 1 दलित (कामेश्वर चौपाल) थे, जिनका 68 वर्ष कि आयु में 07/02/25 को स्वर्गवास हो गया.. अब सिर्फ 8 स्थाई सदस्य बचे हैं और सभी 100% ब्राम्हण है |
• Question — क्षत्रिय, OBC और दलित सिर्फ राममंदिर में चढ़ावा चढ़ाने के हकदार हैं, राममंदिर ट्रस्ट में सहभागिता के हकदार नहीं हैं ..?
ट्रस्ट के अधिकार क्षेत्र, स्थाई सदस्यों के अधिकार क्षेत्र कि जानकारी :—
ट्रस्ट के डीड में ही साफ कर दिया गया है कि इसके गठन के बाद सरकार की इसमें कोई भूमिका नहीं होगी यानी यह सरकारी दखल से पूरी तरह मुक्त होगा।
• Notes - अर्थात, राममंदिर ट्रस्ट में सरकार कि कोई भी दखल नहीं है, सर्वेसर्वा स्थायी सदस्य ही सब कुछ है |
साथ ही, ट्रस्ट को राम मंदिर निर्माण और उसके रखरखाव के लिए धन जुटाने और उसके प्रबंधन की पूरी छूट होगी। इसमें भी सरकार का कोई दखल नहीं होगा...
• पदेन सदस्य (Ex-officio member) कि जानकारी:—
पदेन दो सदस्यों का चयन ट्रस्ट करेगा, ट्रस्ट के दो सदस्यों के चयन का अधिकार ट्रस्ट के स्थाई सदस्यों को दिया गया है । जो मतदान के बाद बहुमत के आधार पर इनका चयन करेंगे।
लेकिन ध्यान योग्य बात यह है कि 🤔 इन दोनों सदस्यों के चुनाव में सरकार की ओर से मनोनीत आइएएस अधिकारी व अयोध्या के जिला मजिस्ट्रेट के रूप में पदेन सदस्य भाग नहीं ले सकेंगे। सिर्फ स्थाई सदस्य ही लेंगे ...
(स्थाई सदस्य कौन है आपको पता ही है, वह किनका चयन करेंगे यह भी आप समझ ही सकते हैं )😭
इसका 15वां सदस्य भी पदेन होगा, जो ट्रस्ट द्वारा राम मंदिर कांप्लेक्स के विकास और प्रशासनिक देखरेख के लिए बनने वाली कमेटी का अध्यक्ष होगा। इसका चयन भी ट्रस्ट के सदस्य ही करेंगे।
खैर, अब आप लोग समझ ही गये होंगे कि राममंदिर ट्रस्ट कि कार्यप्रणाली किसके हाथों में है, और किसे श्रेय या किसे दोष देना है |
सरकार से मांग है कि राममंदिर ट्रस्ट को भंग कर नया ट्रस्ट का निर्माण करें, उस ट्रस्ट में क्षत्रिय, ब्राम्हण, अहीर, कुर्मी, जाट, दलित, कुम्हार, राजभर, लोधी व अन्य वर्ग को भी शामिल करें..
इससे सभी वर्गों में राम मंदिर ट्रस्ट के प्रति विश्वास भी बना रहेगा और ट्रस्ट के कार्यों में ईमानदारी और सहभागिता भी रहेगा।
अभी मेरे पास एक फ़ोन आया। बंदा बोला मिश्रा जी को सीईओ बना दिया। राम मंदिर का दान भी मिश्रा लोग ही चोरी कर रहे थे , अनुकल्प मिश्रा लवकुश मिश्रा। पहले ही ट्रस्ट में ढेर सारे मिश्रा थे।
मैंने कहा वो छोड़ तू ये बता तूने राम मंदिर में कितना दान दिया। बोला जब निर्माण की पर्ची कट रही थी तब 100 रूपये दिए थे। मैंने कहा 100 रूपये देकर पंचायत लाखो की करेगा। अबे तू होता कौन है ये पूछने वाला। मंदिर मिश्रा जी का, ट्रस्ट मिश्रा जी का, दान का पैसा गिनने वाले मिश्रा जी। अब मिश्रा जी चोरी करें या कुछ भी करे। तू कौन होता है पूछने वाला। करोडो दान करने वाले तो बोल नहीं रहे।
और सुन मेरे सामने मत आ जइयो नहीं तो तलवार चलाना छोड़ा है भूला नहीं हूँ। मिश्रा जी तक पहुंचने से पहले मेरी तलवार से गुजरना पड़ेगा।