आज इस आवाज में दर्द है...
राजवीर सिंह चलकोई को हम सुनते रहे हैं। उनकी बोली में हमेशा एक खनक रहती है अल्हड़पन झलकता है। मैंने इस पूरे वीडियो में देखा कि वो बात कहीं भी नहीं है। क्यों?
क्योंकि हमारे आत्मसम्मान पर चोट ही हुई है
राज्यपाल महोदय ने एक आदेश जारी कर राजस्थान के सभी विश्वविद्यालयों में मराठी के केंद्र खोलने के लिए कह दिया है। दूसरी तरफ वर्षों से राजस्थानी भाषा की मान्यता के लिए संघर्ष कर रहे लोग अभी तक राजस्थान के विश्वविद्यालयों में राजस्थानी के केंद्र नहीं खुलवा पाए हैं। स्कूलों में राजस्थानी की पढ़ाई शुरू नहीं करवा पाए हैं। राजस्थान की राजभाषा नहीं बनवा पाए हैं। पीड़ा तो है। सच्ची है। झलकेगी ही। छलकेगी ही।
राजस्थान वालों के चेहरे पर ऐसा जोरदार झापड़ मारा गया है, जिसका अहसास तो हुआ है लेकिन आत्म गौरव खो चुके लोग यह तय नहीं कर पा रहे कि रिएक्ट क्या करना है और कैसे करना है। इस पीड़ा को सभी सुनें और और सोचें कि हम अभागे लोग कहां खड़े हैं?
वीडियो साभार @republic
रविंद्र ABVP से जुड़ा था, इसलिए उसने जोधपुर विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में टिकट मांगा, लेकिन टिकट नहीं दिया गया। फिर भी रविंद्र लड़ा और निर्दलीय ही चुनाव जीत गया। इतिहास रच गया।
कोई भी संगठन जीतने वाले कैंडिडेट पर दाव लगाती है लेकिन एबीवीपी के टिकट बाटने वालो को रविंद्र की ताकत समझ नही आई।
फिर अगले चुनाव में रविंद्र के पसंदीदा कैंडिडेट अरविंद सिंह भाटी ने एबीवीपी (ABVP) से टिकट मांगा। लेकिन उसे भी टिकट नहीं दिया गया। यहां ध्यान देने की बात है यह है की पहली बार रविंद्र को टिकट नहीं दिए जाने पर हम यह तर्क दे सकते हैं की टिकट देने वालो को उसकी छमता का अंदाजा नहीं था। लेकिन जब रविंद्र के कैंडिडेट ने टिकट की मांग की तब तक रविंद्र अपनी क्षमता दिखा चुका था। लेकिन फिर भी टिकट नहीं दिया गया । अब यहां पर वजह साफ दिख जाती है की संगठन रविंद्र को स्वीकार करना ही नही चाहता था। लेकिन रविंद्र अपने कैंडिडेट को एसएफआई SFI से चुनाव लड़वाकर उसे जितवा देता है।
अब वो विधानसभा चुनाव से कुछ समय पूर्व बीजेपी BJP में शामिल होता है टिकट मिलने के आश्वासन के बाद। लेकिन उसे फिर से टिकट नहीं दिया जाता। उसके साथ धोंका होता है। लेकिन रविंद्र एक बार फिर निर्दलीय लड़ गया और विधान सभा का चुनाव भी जीत लिया।
अभी तक रविंद्र ने बीजेपी और उसके शीर्ष नेताओं के विरुद्ध कुछ नही बोला था। विधायक बनते ही ओरण संरक्षण , स्थानीय लोगो को रिफाइनरी एवं उधोग में रोजगार सहित कई मांग उसने सीएम भजनलाल के सामने रखी और इसके साथ ही पानी की किल्लत वाले अपने इलाके के लिए हैंडपंप की भी मांग की। लेकिन रविंद्र जो विधायक है उसको दो हैंडपंप की स्वीकृति दी गई, वही उसी क्षेत्र के एक बीजेपी से जुड़े व्यक्ति को इक्कीस हैंडपंप उसकी सिफारिश पर दिया गया और इसका खूब प्रचार हुआ। कोई भी सामान्य समझ का व्यक्ति भी इसके पीछे छिपी सोच समझ सकता था। रविंद्र को समझ आ गया की ये मुझे काम नही करने देंगे।
अब समय आ गया था लोक सभा चुनाव का , तो रविन्द्र सिंह भाटी ने चुनाव लड़ने का निर्णय लिया। रविंद्र के चुनाव लड़ने की घोषणा के साथ ही राजपूत ही नही मूल ओबीसी जो की बीजेपी का वोटर था वो बीजेपी से दूर जाने लगा। रविंद्र ने कांग्रेस के वोट बैंक (मुस्लिम) में भी सेंध लगानी शुरू कर दी।रविंद्र बीजेपी और कांग्रेस दोनो के कोर वोटर को अपने पक्ष में करने लगा और यह देख दोनों पार्टी ने इसका पुरजोड़ विरोध करना शुरू कर दिया।
क्षेत्र में जिस तरह अमीन खान , केके विश्नोई को घेरा गया और बीजेपी के कैंडिडेट को हरा प्रियंका चौधरी को जिताया गया वो विश्नोई और मुस्लिम मतदाताओं के लिए भी खतरे की घंटी थी । लोग समझने लगे की क्या हो रहा है और इसी लिए गुड़ा मलानी में विश्नोई वोट और शिव में मुस्लिम वोट रविंद्र को गया। जिस तरह से पश्चिम राजस्थान में नए समीकरण बन रहे हैं वो राजस्थान की राजनीति को बदलने की ताकत रखता है।
पक्ष और विपक्ष दोनो ही छटपटा रहे हैं अभी और उसी का परिणाम है रविंद्र के खिलाफ हुई एफआईआर। लेकिन राजनीति में रविंद्र जिसकी अभी शुरुआत ही हुई है उसके लिए इस तरह की कार्रवाई वरदान ही है।
इसे छात्र संघ के चुनाव से मैं खुद नोटिस कर रहा हूं। यह लड़का पश्चिमी राजस्थान में धार्मिक विवाद कभी खड़ा नहीं होने देगा और आपको पढ़ के आश्चर्य भले लगे आज की स्थिति को देख सकते हैं। लेकिन ये जातीय टकराव को भी कम करने में अहम भूमिका निभाएगा। यह महत्वकांछि नहीं है और सभी को साथ लेकर आगे बढ़ना चाहता है। छात्र संघ चुनाव से अभी तक इसने खुद को पहले से बेहतर ही बनाया है।
राजपूत समाज को ऐसे लोगो के पीछे ही खड़ा होना चाहिए, जो जनता के बीच में जाकर समर्थन मांगता हो। जो पार्टी का मोहताज नहीं वही लीडर कहलाने लायक होता है। 🫡🔥🙏
@RavindraBhati__
पूज्य चुतरदास जी महाराज मंदिर की असमाजिक तत्वों द्वारा छवि खराब करने की नाकामयाब कोशिश के विरोध में पारदर्शी जांच और देवेन्द्रसिंह जी की मानहानि के विरोध में शाम 8 बजे #बुटाटी_धाम ट्विटर ट्रेंड का आयोजन किया जा रहा हैं सभी भाई इसमें ज्यादा से ज्यादा हिस्सा लें!
18 करोड़ चढ़ावे में 22 करोड़ घोटाला हो गया तो 3 साल में यहां खर्चा लगा है वो SDM साहब के पिताजी दे कर गए थे क्या????
ये जो निशुल्क सुविधाएं मिल रही है धाम में इनका खर्चा कहा से आया SDM साहब????
सिर्फ दुकान गेस्ट हाउस अवैध कब्जे वाले ही क्यों रो रहे हैं श्रद्धालु तो सब खुश हैं
गोवा और ढाका के मुक्तिदाता, नाथू ला के रक्षक भारतीय सैन्य इतिहास के अपराजित योद्धा लेफ्टिनेंट जनरल सगत सिंह राठौर जी की जयंती पर उन्हें सादर शत्-शत् नमन!
🙏💐
@PMOIndia@adgpi
माननीय मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा जी से विनम्र निवेदन।
यदि आपको और आपकी पार्टी कों राजपूत समाज से परेशान हों सकतीं हैं। लेकिन इसके कारण हमारे महलों, किलों और ऐतिहासिक धरोहरों को कभी उपेक्षित न होने दें।
ये केवल राजपूत समाज की पहचान नहीं, बल्कि ......... 🤔👇
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देवेंद्र सिंह बुटाटी के लिए यहीं से कुंठा बहुत अधिक गहराई थी... दुकानदारों ने यहां से खुली गुंडागर्दी शुरू कर दी...
जातिवादी लोगों के एक गुट ने अपने गोरखधंधे और दुकानें बंद होने पर नाटक करने और झूठा बदनाम करना शुरू कर दिया...
#बुटाटी_धाम@Butati_Dham_@DevendraButati
चतरदास जी मंदिर,बुटाटी धाम में देवेंद्र सिंह राठौड़ द्वारा श्रद्धालुओं के लिए की जा रही व्यवस्थाएँ सच में प्रशंसनीय हैं। दूर-दूर से आने वाले भक्तों के लिए नाश्ते, भोजन, पीने के पानी और विश्राम की व्यवस्था करना कोई छोटी बात नहीं है। जब कोई थका हुआ यात्री मंदिर पहुँचकर सम्मान के साथ बैठने की जगह, साफ़ पानी और भोजन पाता है, तो उसे केवल सुविधा ही नहीं, अपनापन भी महसूस होता है।
#बुटाटी_धाम @DevendraButati
श्रद्धालुओं की सेवा ही सबसे बड़ी पूंजी है, जो व्यक्ति बिना किसी स्वार्थ के श्रद्धालुओं की सुविधा का ध्यान रखता है, वह निश्चित रूप से सम्मान का पात्र है। देवेंद्र सिंह राठौड़ जी के इस प्रयास की जितनी सराहना की जाए, उतनी कम है।
#बुटाटी_धाम@DevendraButati
बुटाटी मंदिर ट्रस्ट द्वारा संचालित व्यवस्था से मंदिर के बाहर होटल,ढाबे, दुकानें लगभग बंद सी हो गई हैं सुबह चाय,पोहे से लेकर शाम के भोजन तक और रात में रहने की व्यवस्था भी मंदिर ट्रस्ट द्वारा नि:शुल्क की जाने लगीं हैं जिससे बाहर धरने प्रदर्शन और बेबुनियाद आरोपों की झड़ी लग चुकी थी
बुटाटी धाम मंदिर में कुछ लोगों की मिलीभगत से ऐसी चोरी की वारदातें सामने आने लगी जिस कारण देवेंद्र सिंह बुटाटी ने cctv कैमरे लगाए।
अब इनकी मांग है कि cctv हटाओ।
#बुटाटी_धाम@Butati_Dham_@DevendraButati
राठौड़ है , हार नहीं मानेगा ।
इस दुर्गादास के वंशज को तुम कितना भी जोर लगा लो , देश निकाला नहीं दे पाओगे।
यह शब्द उन अपनो के लिए जो छोटे लालच में देवेन्द्र सिंह के खिलाफ खड़े हैं।
@OnkarSinghRat92@KuldeepBadiyal@9noHall
लोगो को हाईलाइट होने के लिए करोड़ों खर्च करने पड़ते है
लेकिन हमारे #केसरी को बिना कोई लागत के मुख्य धारा में हाइलाइट कर दिया
अब वो ही #जातिवादी लॉबी अब #देवेंद्र_सा को #राजपूत_नेता बनाकर ही छोड़ेंगे
#बुटाटी
बुटाटी धाम प्रकरण...
मोहन चौधरी द्वारा फैलाया गया एक झूठा जातीय ईर्ष्या प्रपंच हैं...
देवेंद्र सिंह स्वयं कह रहे हैं कि जांच करो...
खैर ! जहां जहां राजपूत पुजारी हैं वहां एक विशेष ईर्ष्यालु जाति द्वारा प्रपंच रचा जाता हैं...
जैसे बुटाटी,खाटू श्याम,रामदेवरा..
चतुरदास जी महाराज मंदिर में बने मंदिर ट्रस्ट जितना ईमानदार ट्रस्ट ओर सेवा भावी ट्रस्ट आज भारत में कही पर भी नहीं है। मंदिर आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु के लिए मुफ्त में रहने,नहाने,खाने पीने की व्यवस्था दी जाती है।
अध्यक्ष को राजपूत होने के कारण परेशान किया जा रहा है।
#बुटाटी_धाम
महोदय का नाम देवेंद्र सिंह है
नागौर, राजस्थान में चतुरदास जी महाराज का मंदिर है
वर्तमान में ये उस मंदिर के अध्यक्ष है
इनके अध्यक्ष बनने के बाद वहाँ अपनी पीड़ा (लकवा ग्रसित समस्या) को लेकर पहुँचने वाले श्रद्धालुओं को फ्री नाश्ता,खाना और रहने का इंतज़ाम को और भी ज़्यादा कर दिया गया है
देवेंद्र सिंह ने अध्यक्ष बनते ही साफ़ निर्देश दिए कि कोई भी दान पात्र में चढ़ावा ना डाले ताकि दान की पारदर्शिता बनी रहे
ये कार्य एक जातिवादी मानसिकता से ग्रसित लोगों जो कि वहाँ अपनी दुकाने लगाके महंगा और घटिया खाना देते हैं उनको रास नहीं आया क्योकि उनकी दुकाने चलना बन्द हो गई
इसलिए उन्होंने देवेंद्र सिंह पर झूठे आरोप लगाना शुरू कर दिया
पहले उन पर 22 करोड़ के घोटाले का आरोप लगाया
फिर दारू का पव्वा ख़ुद के हाथ से रखकर देवेंद्र सिंह पर मंदिर परिसर में दारू पीने का झूठा आरोप लगाया
3-4 बार देवेंद्र सिंह के साथ मारपीट की कोशिश भी की गई थी उन पर गाड़ी चढ़ाने का प्रयास भी हुआ जो कि CCTV फुटेज में क़ैद है
रही बात दारू की तो मंदिर परिसर में लगे CCTV फुटेज में साफ़ दिखा कि दारू उन विधर्मियों के द्वारा ख़ुद ही रखी गई थी
देवेंद्र सिंह के पास पुख़्ता सबूत है कि उन्होंने कोई घोटाला नहीं किया है
लेकिन नागौर प्रशासन ना जाने किसके दबाव में है
एक ईमानदार व्यक्ति को परेशान किया जा रहा है
बुटाटी धाम: सेवा, पारदर्शिता और सत्य की मिसाल
बुटाटी धाम आज निःस्वार्थ सेवा, अनुशासित प्रबंधन और पारदर्शी व्यवस्था का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरा है। यहाँ प्रतिदिन हजारों श्रद्धालुओं के लिए निःशुल्क भोजन, चाय-नाश्ता, आवास और अन्य आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाती हैं।
मंदिर समिति अध्यक्ष देवेंद्र सिंह बुटाटी ने श्रद्धालुओं से मंदिर में नकद चढ़ावा न चढ़ाने तथा ऑनलाइन, बैंक या आवश्यक सामग्री के रूप में दान करने की अपील की है, ताकि प्रत्येक दान का पारदर्शी रिकॉर्ड उपलब्ध रहे।
समिति ने हालिया जांच रिपोर्ट पर आपत्ति जताते हुए निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की मांग भी की है। उनका कहना है कि सत्य की स्थापना केवल निष्पक्ष जांच और प्रमाणों के आधार पर ही होनी चाहिए।
धार्मिक स्थलों का संचालन सेवा, ईमानदारी, पारदर्शिता और जवाबदेही के सिद्धांतों पर होना चाहिए। यदि बुटाटी धाम जैसी पारदर्शी दान व्यवस्था अन्य मंदिरों में भी लागू हो, तो श्रद्धालुओं का विश्वास और अधिक मजबूत होगा।
॥ संत शिरोमणि श्री चतुरदास जी महाराज की जय ॥