🚨 हमीरपुर में खाकी पर गंभीर आरोप: पीड़ित परिवार न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर!
🚨मामला: थाना सुमेरपुर, ग्राम - देवगांव, जिला - हमीरपुर (उत्तर प्रदेश)ग्राम देवगांव के निवासी पीड़ित छोटे लाल और उनकी पत्नी के साथ हुई बर्बरता और लूटपाट के मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि स्थानीय पुलिस और विवेचक ने अपराधियों से सांठगांठ कर मामले को दबाने का प्रयास किया है।
घटना का विवरण:तारीख और समय:
दिनांक 19-08-2025 की रात लगभग 12:30 बजे।अपराध: 6 हथियारबंद बदमाश घर में घुसे। पीड़ित और उनकी पत्नी के सिर पर तमंचा (असलहा) तानकर लाठी-डंडों से जानलेवा हमला किया।लूटपाट: बदमाशों ने पत्नी के कान के सोने के बाले, चांदी की चैन और कमरे में रखे ₹20,000/- नगद लूट लिए। यह पैसे पीड़ित ने अपनी पत्नी के हृदय (Heart) के इलाज के लिए रखे थे।पहचान और FIR:पीड़ित दंपत्ति ने सूझबूझ से दो मुख्य आरोपियों को पहचान लिया था:इस संबंध में दिनांक 21-08-2025 को FIR संख्या – 259/2025 के तहत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया था:
धारा 310(2)
धारा 115(2)
धारा 351(2)
धारा 351(3)
📌पुलिस की भूमिका पर सवाल (Final Report का खेल):
पीड़ित का आरोप है कि मुल्जिमान बेहद शातिर, रसूखदार और असरदार व्यक्ति हैं। इसी प्रभाव के चलते स्थानीय पुलिस और विवेचक ने आरोपियों के साथ मिलकर खेल कर दिया। विवेचक ने आरोपियों के ही करीबियों के झूठे बयान दर्ज किए और रंजिश का बहाना बनाकर केस में अंतिम रिपोर्ट (Final Report) लगा दी, जबकि पूरे गांव को इस घटना की सच्चाई पता है। पीड़ित दंपत्ति को गंभीर चोटें आई थीं, जिसके मेडिकल साक्ष्य भी मौजूद हैं।उच्चाधिकारियों से न्याय की गुहार:पीड़ित छोटे लाल ने पुलिस अधीक्षक (SP) हमीरपुर से लिखित गुहार लगाई है कि इस मामले की जांच वर्तमान विवेचक से हटाकर किसी अन्य निष्पक्ष विवेचक/अधिकारी को सौंपी जाए, ताकि सच सामने आ सके और अपराधियों को सजा मिले।📌
महोदय,
➡️ सबसे बड़ा सवाल पहले तो FIR नहीं दर्ज की जा रही थी FIR दर्ज हो गई तो जांच में ही गड़बड़ी कर दिया
13 महीने हो गए पुलिस आज तक एक भी अपराधी को नहीं पकड़ा।
➡️ कोई जांच अधिकारी से नहीं है पूछने वाला।
➡️ सभी देश वासियो से निवेदन है कि न्याय दिलाने में मदद करे।
➡️ CRPF जवान के वृद्ध माता पिता को न्याय दिलाने में मदद करे।
कृपया बुजुर्ग पीड़ित दंपत्ति की चीख सुनें और मामले की पुनः निष्पक्ष जांच के आदेश दें।
👉 @myogiadityanath👉 @ChiefSecyUP👉 @dgpup👉 @adgzonekanpur👉 @igrangechitrakoot👉 @Hamirpurpolice👉 @UppoliceHashtags:#HamirpurPolice #UPPolice #JusticeForChhotuLal #YogiAdityanath #UPCrime #LawAndOrderUP #BundelkhandCrime #HumanRights💡
@News18UP, @BharatSamachar, @NavbharatTimes, @InkeshNews
@AdmnReforms@CMOfficeUP@ChiefSecyUP महोदय, उत्तर प्रदेश RTI ऑनलाइन पोर्टल पर दायर मेरी आरटीआई (पंजीकरण: DOCMO/R/2025/80136) की 30 दिनों की वैधानिक समय सीमा समाप्त हो चुकी है। जन सूचना अधिकारी मनीष कुमार सिंह द्वारा कोई जवाब न मिलने पर मैंने आज प्रथम अपील (First Appeal) दर्ज कर दी है। कृपया इस पर तुरंत संज्ञान लेकर मुझे नियमानुसार मुफ्त सूचना उपलब्ध कराने के निर्देश जारी करें। #RTI @AdminUP @UPGovt
@CMOfficeUP@ChiefSecyUP महोदय, उत्तर प्रदेश RTI ऑनलाइन पोर्टल पर दायर मेरी आरटीआई (पंजीकरण: DOCMO/R/2025/80136) की 30 दिनों की वैधानिक समय सीमा समाप्त हो चुकी है। जन सूचना अधिकारी मनीष कुमार सिंह द्वारा कोई जवाब न मिलने पर मैंने आज प्रथम अपील (First Appeal) दर्ज कर दी है। कृपया इस पर तुरंत संज्ञान लेकर मुझे नियमानुसार मुफ्त सूचना उपलब्ध कराने के निर्देश जारी करें। #RTI
@AdminUP
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छत्तीसगढ़ के महान स्वतंत्रता सेनानी एवं अमर शहीद मींधू कुम्हार जी के बलिदान दिवस पर उन्हें कोटि-कोटि नमन व विनम्र श्रद्धांजलि। 🙏🇮🇳
राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए उनका त्याग और बलिदान सदैव स्मरणीय रहेगा।
@pmo
🚨🚨 **#BREAKING_NEWS: हमीरपुर पुलिस की विवेचना का बड़ा खेल बेनकाब, खुद के बुने कानूनी जाल में फंसी सुमेरपुर पुलिस!** 🚨🚨
**#भ्रष्ट_विवेचना_हमीरपुर#JusticeForChhotelal**
📍 **बड़ी खबर (हमीरपुर):** थाना सुमेरपुर के मु.अ.सं. 259/2025 में जांच अधिकारी (I.O.) का एक ऐसा कारनामा सामने आया है, जिसने उत्तर प्रदेश पुलिस की निष्पक्षता और कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ा कर रख दी हैं। अपराधियों को बचाने के चक्कर में विवेचक खुद अपने ही कागजी जाल में फंस गए हैं।
💥 **क्या है पूरा मामला और पुलिस का खेल?**
पुलिस ने कोर्ट में फाइनल रिपोर्ट (FR) दाखिल कर दावा किया है कि पीड़ित के घर में घुसकर बलवा/दंगा (**धारा 191(2), 191(3) व 333 BNS**) की घटना पूरी तरह सच है। लेकिन, नामजद मुख्य आरोपियों (शिवम सिंह और अभय सिंह) को "साक्ष्य के अभाव" में क्लीन चिट दे दी गई है!
❓ **'ब्रेकिंग न्यूज' बने वो 3 सवाल, जिससे महकमे में मचा हड़कंप:**
1️⃣ **अपराधी हवा में गायब हो गए?:** जब पुलिस खुद मान रही है कि पीड़ित के घर में जबरन घुसकर बलवा और मारपीट की संगीन वारदात हुई है, तो उन अपराधियों को पकड़ा क्यों नहीं गया? वे जेल में क्यों नहीं हैं?
2️⃣ **4 लोग मिलकर बलवा कैसे कर सकते हैं?:** कानून के मुताबिक 'बलवा' (Rioting) के लिए कम से कम 5 लोगों का होना अनिवार्य है। पुलिस ने 2 नामजद आरोपियों को छोड़ दिया, तो बचे सिर्फ 4 अज्ञात। कानून के जानकारों का सवाल है कि 4 लोग मिलकर बलवा कैसे कर सकते हैं?
3️⃣ **सरकारी रिकॉर्ड को ही झुठलाया:** घटना के दिन **UP 112 के आधिकारिक सरकारी कॉल लॉग** में साफ दर्ज था—*"मारपीट कर कान की बाली छीन कर भाग गए, पहचान कर ली है।"* इसके बावजूद डकैती/लूट की धारा 310(2) BNS को आरोपियों से सांठगांठ कर हटा दिया गया।
🔥 **सीधा हमला:** क्या हमीरपुर पुलिस में अपराधियों को 'सेफ़ एग्ज़िट' दिलाने के लिए खुद पुलिस के ही 112 नंबर के सरकारी रिकॉर्ड और विधिक नियमों को बदला जा रहा है?
📢 **ट्विटर/सोशल मीडिया पर उठी मांग:**
@hamirpurpolice महोदय, इस हास्यास्पद और संदिग्ध विवेचना का तत्काल संज्ञान लें। दोषी विवेचक को कार्यालय में तलब (Line Hazir) कर दंडित किया जाए और मामले की निष्पक्ष जांच किसी **सर्किल ऑफिसर (CO)** को सौंपी जाए।
**पीडित परिवार को न्याय दिलाने और यूपी पुलिस को पारदर्शी बनाने के लिए इस खबर को ज्यादा से ज्यादा शेयर और रीट्वीट करें!** 🙏
@hamirpurpolice@Uppolice@dgpup@112UttarPradesh@ADGZonPrayagraj@myogiadityanath@homeupgov@rangechitrakoot@AmitShah
**विषय:** जनपद हमीरपुर के थाना सुमेरपुर के विवेचक उप-निरीक्षक सुरेन्द्र प्रसाद यादव के निलंबन, विभागीय जांच एवं मुकदमे की पुनः निष्पक्ष जांच कराने के संबंध में।
**महोदय,**
जनपद हमीरपुर के थाना सुमेरपुर पर पंजीकृत **मु०अ०सं० 259/2025** की विवेचना में विवेचक उप-निरीक्षक सुरेन्द्र प्रसाद यादव द्वारा कानून का सरेआम मखौल उड़ाने, आरोपियों से कथित साठगांठ करने और केस डायरी में फर्जीवाड़ा करने का अत्यंत गंभीर मामला सामने आया है। पीड़ित पक्ष को न्याय से वंचित करने के उद्देश्य से की गई यह विवेचना पूरी तरह पक्षपातपूर्ण, विधिक रूप से त्रुटिपूर्ण और भ्रष्टाचार से प्रेरित प्रतीत होती है।
विवेचना में की गई गंभीर विधिक अनियमितताएं निम्नलिखित हैं:
1. **विधिक विरोधाभास (दंगे की धारा का दुरुपयोग):** विवेचक ने 6 मुख्य नामजद आरोपियों में से 2 (शिवम सिंह और अभय सिंह) को क्लीन चिट देकर उनके नाम विलोपित कर दिए और केवल 4 अज्ञात आरोपियों की जांच खुली रखी। इसके बावजूद केस में दंगे की धारा **191 BNS** जोड़ दी गई। भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 189 के अनुसार, दंगा या विधिविरुद्ध जमाव के लिए **न्यूनतम 5 व्यक्ति** अनिवार्य हैं। मात्र 4 लोगों पर दंगे की धारा लागू करना विवेचक की विधिक अक्षमता और रिपोर्ट के संदिग्ध होने का सबसे बड़ा प्रमाण है।
2. **गंभीर धाराओं को हटाना:** FIR में हथियारों के बल पर लूटपाट और डकैती का स्पष्ट आरोप होने के बावजूद, विवेचक ने बिना किसी ठोस न्यायिक या फॉरेंसिक आधार के सबसे गंभीर धारा **310(2) BNS (डकैती)** को हटा दिया, जो कि उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर केस को हल्का करने का सीधा प्रयास है।
3. **साक्ष्यों की अनदेखी और एकतरफा कार्रवाई:** धारा **180 BNSS** के तहत वादिनी और चश्मदीद गवाहों द्वारा आरोपियों की स्पष्ट पहचान बताए जाने के बावजूद उनके बयानों को दरकिनार कर दिया गया। इसके विपरीत, आरोपियों के अधीन काम करने वाले कर्मचारियों के बयानों को तरजीह दी गई। साथ ही, भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 63 के वैध सर्टिफिकेट और FSL जांच के बिना, एक प्राइवेट कंपनी के मैनेजर के सादे कागज पर लिखे पत्र को अंतिम सत्य मानकर आरोपियों को राहत दे दी गई और एकतरफा अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर दी गई।
यह कृत्य शासकीय सेवा नियमावली का गंभीर उल्लंघन है और ऐसे पक्षपातपूर्ण अधिकारी के रहते पीड़ित पक्ष को न्याय मिलना असंभव है।
**अतः विनीत अनुरोध है कि:**
* दोषी विवेचक उप-निरीक्षक सुरेन्द्र प्रसाद यादव (थाना सुमेरपुर) को तत्काल प्रभाव से **निलंबित** किया जाए।
* उनके विरुद्ध भ्रष्टाचार एवं पदीय दुरुपयोग की **विभागीय अनुशासनात्मक जांच** शुरू की जाए।
* इस दूषित अंतिम रिपोर्ट को खारिज कर मुकदमे की पुनः निष्पक्ष जांच किसी **वरिष्ठ पुलिस उपाधीक्षक (CO)** या स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए।
📍जनपद हमीरपुर के थाना सुमेरपुर के मु०अ०सं० 259/2025 में विवेचक SI सुरेन्द्र प्रसाद यादव पर आरोपियों से साठगांठ व केस डायरी में फर्जीवाड़े का आरोप। 2 नामजद को क्लीन चिट देकर 4 लोगों पर दंगे की धारा (191 BNS) लगाई, जबकि कानूनन न्यूनतम 5 लोग अनिवार्य हैं! हथियारों के बल पर हुई डकैती (310(2) BNS) की धारा को भी अवैध रूप से हटा दिया गया।
गवाहों के बयानों को दरकिनार कर प्राइवेट मैनेजर के सादे पत्र पर अंतिम रिपोर्ट लगा दी गई। दोषी विवेचक को तत्काल निलंबित कर विभागीय जांच की जाए और मामले की पुनः निष्पक्ष जांच वरिष्ठ अधिकारी से कराई जाए।
@hampurpolice @Uppolice @adgzonechitrakoot @rangechitrakoot@CMOfficeUP@DGPUP@UPGovt
#HameerpurPolice #UPPolice #JanSunwai #CorruptionFreeUP #JusticeForVictim
सेवा में,
श्रीमान पुलिस अधीक्षक (SP) महोदय,
जिला - हमीरपुर, उत्तर प्रदेश।
विषय: थाना सुमेरपुर के मु.अ.सं. 259/2025 में विवेचक द्वारा अपराधियों को अनुचित लाभ पहुंचाने व साक्ष्यों से हेरफेर करने के संबंध में शिकायत !
महोदय,
सविनय अवगत कराना है कि उपरोक्त मुकदमे में विवेचक द्वारा घोर लापरवाही और कानून के नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए अंतिम रिपोर्ट (FR) प्रेषित की गई है, जिसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
1- विवेचक ने स्वीकार किया है कि घर में घुसकर बलवा (BNS 191(2), 191(3) 333 हुआ है, परंतु नामजद मुख्य (2) अभियुक्तों को साक्ष्य के अभाव में क्लीनचिट दे दी।
2- विधिक नियमानुसार बलवा के लिए कम से कम 5 व्यक्तियों का होना आवश्यक है। मुख्य अभियुक्तों को निकालने के बाद केवल 4 अज्ञात बचते हैं, जिससे विवेचक का कानूनी अज्ञान या जानबूझकर की गई बद्नीयती साफ झलकती है।
3- घटना के दिन UP 112 की सरकारी रिपोर्ट में स्पष्ट दर्ज था कि "पहचान कर ली गई है और कान की बाली छीनकर भागे हैं।" इसके बावजूद लूट/डकैती की धारा 310(2) BNS को द्वेषपूर्ण तरीके से विलोपित कर दिया गया।
प्रार्थना:
अतः श्रीमान से करबद्ध प्रार्थना है कि इस संदिग्ध विवेचना का संज्ञान लेते हुए दोषी विवेचक को तत्काल लाइन हाजिर/सस्पेंड कर विभागीय जांच बैठाई जाए, तथा इस मुकदमे की निष्पक्ष विवेचना किसी सर्किल ऑफिसर (CO) स्तर के अधिकारी को स्थानांतरित करने की कृपा करें।👇
@hamirpurpolice@Uppolice@dgpup@Rajeevkrishna69@myogiadityanath@myogioffice
@Hamirpurpolice@Uppolice महोदय, इस गंभीर मामले (राजमिस्त्री जितेंद्र कुमार पर जानलेवा हमला) में शिकायत किए हुए काफी समय बीत चुका है, लेकिन पीड़ित को न्याय मिलने या FIR दर्ज होने का कोई अपडेट नहीं मिला है।कृपया तत्काल संज्ञान लें और की गई कार्रवाई से अवगत कराएं।@ADGZonPrayagraj@dgpup@myogioffice
@Hamirpurpolice@Uppolice महोदय, इस गंभीर मामले (राजमिस्त्री जितेंद्र कुमार पर जानलेवा हमला) में शिकायत किए हुए काफी समय बीत चुका है, लेकिन पीड़ित को न्याय मिलने या FIR दर्ज होने का कोई अपडेट नहीं मिला है।कृपया तत्काल संज्ञान लें और की गई कार्रवाई से अवगत कराएं।@ADGZonPrayagraj@dgpup@myogioffice
@Hamirpurpolice@Uppolice महोदय, इस गंभीर मामले (राजमिस्त्री जितेंद्र कुमार पर जानलेवा हमला) में शिकायत किए हुए काफी समय बीत चुका है, लेकिन पीड़ित को न्याय मिलने या FIR दर्ज होने का कोई अपडेट नहीं मिला है।कृपया तत्काल संज्ञान लें और की गई कार्रवाई से अवगत कराएं।@ADGZonPrayagraj@dgpup@myogioffice
@hamirpurpolice@Uppolice मामले को संज्ञान लीजिये।
➡️ FIR दर्ज पीड़ित को न्याय दिलाए।
➡️ अभी तक प्राथमिकता दर्ज क्यों नहीं किया।
➡️ संबंधित थाने को FIR दर्ज करने की कृपा करें।
@hamirpurpolice@Uppolice मामले को संज्ञान लीजिये।
➡️ FIR दर्ज पीड़ित को न्याय दिलाए।
➡️ अभी तक प्राथमिकता दर्ज क्यों नहीं किया।
➡️ संबंधित थाने को FIR दर्ज करने की कृपा करें।
🚨🚨 **#BREAKING_NEWS: हमीरपुर पुलिस की विवेचना का बड़ा खेल बेनकाब, खुद के बुने कानूनी जाल में फंसी सुमेरपुर पुलिस!** 🚨🚨
**#भ्रष्ट_विवेचना_हमीरपुर#JusticeForChhotelal**
📍 **बड़ी खबर (हमीरपुर):** थाना सुमेरपुर के मु.अ.सं. 259/2025 में जांच अधिकारी (I.O.) का एक ऐसा कारनामा सामने आया है, जिसने उत्तर प्रदेश पुलिस की निष्पक्षता और कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ा कर रख दी हैं। अपराधियों को बचाने के चक्कर में विवेचक खुद अपने ही कागजी जाल में फंस गए हैं।
💥 **क्या है पूरा मामला और पुलिस का खेल?**
पुलिस ने कोर्ट में फाइनल रिपोर्ट (FR) दाखिल कर दावा किया है कि पीड़ित के घर में घुसकर बलवा/दंगा (**धारा 191(2), 191(3) व 333 BNS**) की घटना पूरी तरह सच है। लेकिन, नामजद मुख्य आरोपियों (शिवम सिंह और अभय सिंह) को "साक्ष्य के अभाव" में क्लीन चिट दे दी गई है!
❓ **'ब्रेकिंग न्यूज' बने वो 3 सवाल, जिससे महकमे में मचा हड़कंप:**
1️⃣ **अपराधी हवा में गायब हो गए?:** जब पुलिस खुद मान रही है कि पीड़ित के घर में जबरन घुसकर बलवा और मारपीट की संगीन वारदात हुई है, तो उन अपराधियों को पकड़ा क्यों नहीं गया? वे जेल में क्यों नहीं हैं?
2️⃣ **4 लोग मिलकर बलवा कैसे कर सकते हैं?:** कानून के मुताबिक 'बलवा' (Rioting) के लिए कम से कम 5 लोगों का होना अनिवार्य है। पुलिस ने 2 नामजद आरोपियों को छोड़ दिया, तो बचे सिर्फ 4 अज्ञात। कानून के जानकारों का सवाल है कि 4 लोग मिलकर बलवा कैसे कर सकते हैं?
3️⃣ **सरकारी रिकॉर्ड को ही झुठलाया:** घटना के दिन **UP 112 के आधिकारिक सरकारी कॉल लॉग** में साफ दर्ज था—*"मारपीट कर कान की बाली छीन कर भाग गए, पहचान कर ली है।"* इसके बावजूद डकैती/लूट की धारा 310(2) BNS को आरोपियों से सांठगांठ कर हटा दिया गया।
🔥 **सीधा हमला:** क्या हमीरपुर पुलिस में अपराधियों को 'सेफ़ एग्ज़िट' दिलाने के लिए खुद पुलिस के ही 112 नंबर के सरकारी रिकॉर्ड और विधिक नियमों को बदला जा रहा है?
📢 **ट्विटर/सोशल मीडिया पर उठी मांग:**
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कानूनी शिकायत: जनपद हमीरपुर, थाना कोतवाली
दिनांक 21.09.2026 को सुबह लगभग 09:00 बजे लल्ला बोस चौराहा, सुभाष बाजार पर राजमिस्त्री जितेंद्र कुमार पुत्र श्री प्रताप के साथ कुलदीप पुत्र रामनारायण एवं एक अज्ञात व्यक्ति द्वारा सामान फेंकने तथा तत्पश्चात डंडों से सिर एवं शरीर पर जानलेवा हमला किया गया। पीड़ित गंभीर रूप से घायल हुए।
112 पर सूचना दी गई। कोतवाली में लिखित प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करने के बावजूद FIR पंजीकृत नहीं की गई तथा पीड़ित को थाने से विदा कर दिया गया।
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 173 के अंतर्गत संज्ञेय अपराध होने के कारण तत्काल FIR दर्ज कर विवेचना प्रारंभ करने तथा आरोपियों के विरुद्ध विधिक कार्यवाही करने का अनुरोध है।
@Hamirpurpolice@Uppolice@dgpup@ADGZonPrayagraj@myogiadityanath
#हमीरपुर #FIRदर्जकरो #UPPolice
सेवा में,
श्रीमान पुलिस अधीक्षक (SP) महोदय,
जिला - हमीरपुर, उत्तर प्रदेश।
विषय: थाना सुमेरपुर के मु.अ.सं. 259/2025 में विवेचक द्वारा अपराधियों को अनुचित लाभ पहुंचाने व साक्ष्यों से हेरफेर करने के संबंध में शिकायत !
महोदय,
सविनय अवगत कराना है कि उपरोक्त मुकदमे में विवेचक द्वारा घोर लापरवाही और कानून के नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए अंतिम रिपोर्ट (FR) प्रेषित की गई है, जिसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
1- विवेचक ने स्वीकार किया है कि घर में घुसकर बलवा (BNS 191(2), 191(3) 333 हुआ है, परंतु नामजद मुख्य (2) अभियुक्तों को साक्ष्य के अभाव में क्लीनचिट दे दी।
2- विधिक नियमानुसार बलवा के लिए कम से कम 5 व्यक्तियों का होना आवश्यक है। मुख्य अभियुक्तों को निकालने के बाद केवल 4 अज्ञात बचते हैं, जिससे विवेचक का कानूनी अज्ञान या जानबूझकर की गई बद्नीयती साफ झलकती है।
3- घटना के दिन UP 112 की सरकारी रिपोर्ट में स्पष्ट दर्ज था कि "पहचान कर ली गई है और कान की बाली छीनकर भागे हैं।" इसके बावजूद लूट/डकैती की धारा 310(2) BNS को द्वेषपूर्ण तरीके से विलोपित कर दिया गया।
प्रार्थना:
अतः श्रीमान से करबद्ध प्रार्थना है कि इस संदिग्ध विवेचना का संज्ञान लेते हुए दोषी विवेचक को तत्काल लाइन हाजिर/सस्पेंड कर विभागीय जांच बैठाई जाए, तथा इस मुकदमे की निष्पक्ष विवेचना किसी सर्किल ऑफिसर (CO) स्तर के अधिकारी को स्थानांतरित करने की कृपा करें।👇
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📍 **बड़ी खबर (हमीरपुर):** थाना सुमेरपुर के मु.अ.सं. 259/2025 में जांच अधिकारी (I.O.) का एक ऐसा कारनामा सामने आया है, जिसने उत्तर प्रदेश पुलिस की निष्पक्षता और कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ा कर रख दी हैं। अपराधियों को बचाने के चक्कर में विवेचक खुद अपने ही कागजी जाल में फंस गए हैं।
💥 **क्या है पूरा मामला और पुलिस का खेल?**
पुलिस ने कोर्ट में फाइनल रिपोर्ट (FR) दाखिल कर दावा किया है कि पीड़ित के घर में घुसकर बलवा/दंगा (**धारा 191(2), 191(3) व 333 BNS**) की घटना पूरी तरह सच है। लेकिन, नामजद मुख्य आरोपियों (शिवम सिंह और अभय सिंह) को "साक्ष्य के अभाव" में क्लीन चिट दे दी गई है!
❓ **'ब्रेकिंग न्यूज' बने वो 3 सवाल, जिससे महकमे में मचा हड़कंप:**
1️⃣ **अपराधी हवा में गायब हो गए?:** जब पुलिस खुद मान रही है कि पीड़ित के घर में जबरन घुसकर बलवा और मारपीट की संगीन वारदात हुई है, तो उन अपराधियों को पकड़ा क्यों नहीं गया? वे जेल में क्यों नहीं हैं?
2️⃣ **4 लोग मिलकर बलवा कैसे कर सकते हैं?:** कानून के मुताबिक 'बलवा' (Rioting) के लिए कम से कम 5 लोगों का होना अनिवार्य है। पुलिस ने 2 नामजद आरोपियों को छोड़ दिया, तो बचे सिर्फ 4 अज्ञात। कानून के जानकारों का सवाल है कि 4 लोग मिलकर बलवा कैसे कर सकते हैं?
3️⃣ **सरकारी रिकॉर्ड को ही झुठलाया:** घटना के दिन **UP 112 के आधिकारिक सरकारी कॉल लॉग** में साफ दर्ज था—*"मारपीट कर कान की बाली छीन कर भाग गए, पहचान कर ली है।"* इसके बावजूद डकैती/लूट की धारा 310(2) BNS को आरोपियों से सांठगांठ कर हटा दिया गया।
🔥 **सीधा हमला:** क्या हमीरपुर पुलिस में अपराधियों को 'सेफ़ एग्ज़िट' दिलाने के लिए खुद पुलिस के ही 112 नंबर के सरकारी रिकॉर्ड और विधिक नियमों को बदला जा रहा है?
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@hamirpurpolice महोदय, इस हास्यास्पद और संदिग्ध विवेचना का तत्काल संज्ञान लें। दोषी विवेचक को कार्यालय में तलब (Line Hazir) कर दंडित किया जाए और मामले की निष्पक्ष जांच किसी **सर्किल ऑफिसर (CO)** को सौंपी जाए।
**पीडित परिवार को न्याय दिलाने और यूपी पुलिस को पारदर्शी बनाने के लिए इस खबर को ज्यादा से ज्यादा शेयर और रीट्वीट करें!** 🙏
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📍 **बड़ी खबर (हमीरपुर):** थाना सुमेरपुर के मु.अ.सं. 259/2025 में जांच अधिकारी (I.O.) का एक ऐसा कारनामा सामने आया है, जिसने उत्तर प्रदेश पुलिस की निष्पक्षता और कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ा कर रख दी हैं। अपराधियों को बचाने के चक्कर में विवेचक खुद अपने ही कागजी जाल में फंस गए हैं।
💥 **क्या है पूरा मामला और पुलिस का खेल?**
पुलिस ने कोर्ट में फाइनल रिपोर्ट (FR) दाखिल कर दावा किया है कि पीड़ित के घर में घुसकर बलवा/दंगा (**धारा 191(2), 191(3) व 333 BNS**) की घटना पूरी तरह सच है। लेकिन, नामजद मुख्य आरोपियों (शिवम सिंह और अभय सिंह) को "साक्ष्य के अभाव" में क्लीन चिट दे दी गई है!
❓ **'ब्रेकिंग न्यूज' बने वो 3 सवाल, जिससे महकमे में मचा हड़कंप:**
1️⃣ **अपराधी हवा में गायब हो गए?:** जब पुलिस खुद मान रही है कि पीड़ित के घर में जबरन घुसकर बलवा और मारपीट की संगीन वारदात हुई है, तो उन अपराधियों को पकड़ा क्यों नहीं गया? वे जेल में क्यों नहीं हैं?
2️⃣ **4 लोग मिलकर बलवा कैसे कर सकते हैं?:** कानून के मुताबिक 'बलवा' (Rioting) के लिए कम से कम 5 लोगों का होना अनिवार्य है। पुलिस ने 2 नामजद आरोपियों को छोड़ दिया, तो बचे सिर्फ 4 अज्ञात। कानून के जानकारों का सवाल है कि 4 लोग मिलकर बलवा कैसे कर सकते हैं?
3️⃣ **सरकारी रिकॉर्ड को ही झुठलाया:** घटना के दिन **UP 112 के आधिकारिक सरकारी कॉल लॉग** में साफ दर्ज था—*"मारपीट कर कान की बाली छीन कर भाग गए, पहचान कर ली है।"* इसके बावजूद डकैती/लूट की धारा 310(2) BNS को आरोपियों से सांठगांठ कर हटा दिया गया।
🔥 **सीधा हमला:** क्या हमीरपुर पुलिस में अपराधियों को 'सेफ़ एग्ज़िट' दिलाने के लिए खुद पुलिस के ही 112 नंबर के सरकारी रिकॉर्ड और विधिक नियमों को बदला जा रहा है?
📢 **ट्विटर/सोशल मीडिया पर उठी मांग:**
@hamirpurpolice महोदय, इस हास्यास्पद और संदिग्ध विवेचना का तत्काल संज्ञान लें। दोषी विवेचक को कार्यालय में तलब (Line Hazir) कर दंडित किया जाए और मामले की निष्पक्ष जांच किसी **सर्किल ऑफिसर (CO)** को सौंपी जाए।
**पीडित परिवार को न्याय दिलाने और यूपी पुलिस को पारदर्शी बनाने के लिए इस खबर को ज्यादा से ज्यादा शेयर और रीट्वीट करें!** 🙏
@hamirpurpolice@Uppolice@dgpup@112UttarPradesh@ADGZonPrayagraj@myogiadityanath@homeupgov@rangechitrakoot@AmitShah
🚨🚨 **#BREAKING_NEWS: हमीरपुर पुलिस की विवेचना का बड़ा खेल बेनकाब, खुद के बुने कानूनी जाल में फंसी सुमेरपुर पुलिस!** 🚨🚨
**#भ्रष्ट_विवेचना_हमीरपुर#JusticeForChhotelal**
📍 **बड़ी खबर (हमीरपुर):** थाना सुमेरपुर के मु.अ.सं. 259/2025 में जांच अधिकारी (I.O.) का एक ऐसा कारनामा सामने आया है, जिसने उत्तर प्रदेश पुलिस की निष्पक्षता और कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ा कर रख दी हैं। अपराधियों को बचाने के चक्कर में विवेचक खुद अपने ही कागजी जाल में फंस गए हैं।
💥 **क्या है पूरा मामला और पुलिस का खेल?**
पुलिस ने कोर्ट में फाइनल रिपोर्ट (FR) दाखिल कर दावा किया है कि पीड़ित के घर में घुसकर बलवा/दंगा (**धारा 191(2), 191(3) व 333 BNS**) की घटना पूरी तरह सच है। लेकिन, नामजद मुख्य आरोपियों (शिवम सिंह और अभय सिंह) को "साक्ष्य के अभाव" में क्लीन चिट दे दी गई है!
❓ **'ब्रेकिंग न्यूज' बने वो 3 सवाल, जिससे महकमे में मचा हड़कंप:**
1️⃣ **अपराधी हवा में गायब हो गए?:** जब पुलिस खुद मान रही है कि पीड़ित के घर में जबरन घुसकर बलवा और मारपीट की संगीन वारदात हुई है, तो उन अपराधियों को पकड़ा क्यों नहीं गया? वे जेल में क्यों नहीं हैं?
2️⃣ **4 लोग मिलकर बलवा कैसे कर सकते हैं?:** कानून के मुताबिक 'बलवा' (Rioting) के लिए कम से कम 5 लोगों का होना अनिवार्य है। पुलिस ने 2 नामजद आरोपियों को छोड़ दिया, तो बचे सिर्फ 4 अज्ञात। कानून के जानकारों का सवाल है कि 4 लोग मिलकर बलवा कैसे कर सकते हैं?
3️⃣ **सरकारी रिकॉर्ड को ही झुठलाया:** घटना के दिन **UP 112 के आधिकारिक सरकारी कॉल लॉग** में साफ दर्ज था—*"मारपीट कर कान की बाली छीन कर भाग गए, पहचान कर ली है।"* इसके बावजूद डकैती/लूट की धारा 310(2) BNS को आरोपियों से सांठगांठ कर हटा दिया गया।
🔥 **सीधा हमला:** क्या हमीरपुर पुलिस में अपराधियों को 'सेफ़ एग्ज़िट' दिलाने के लिए खुद पुलिस के ही 112 नंबर के सरकारी रिकॉर्ड और विधिक नियमों को बदला जा रहा है?
📢 **ट्विटर/सोशल मीडिया पर उठी मांग:**
@hamirpurpolice महोदय, इस हास्यास्पद और संदिग्ध विवेचना का तत्काल संज्ञान लें। दोषी विवेचक को कार्यालय में तलब (Line Hazir) कर दंडित किया जाए और मामले की निष्पक्ष जांच किसी **सर्किल ऑफिसर (CO)** को सौंपी जाए।
**पीडित परिवार को न्याय दिलाने और यूपी पुलिस को पारदर्शी बनाने के लिए इस खबर को ज्यादा से ज्यादा शेयर और रीट्वीट करें!** 🙏
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**#भ्रष्ट_विवेचना_हमीरपुर#JusticeForChhotelal**
📍 **बड़ी खबर (हमीरपुर):** थाना सुमेरपुर के मु.अ.सं. 259/2025 में जांच अधिकारी (I.O.) का एक ऐसा कारनामा सामने आया है, जिसने उत्तर प्रदेश पुलिस की निष्पक्षता और कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ा कर रख दी हैं। अपराधियों को बचाने के चक्कर में विवेचक खुद अपने ही कागजी जाल में फंस गए हैं।
💥 **क्या है पूरा मामला और पुलिस का खेल?**
पुलिस ने कोर्ट में फाइनल रिपोर्ट (FR) दाखिल कर दावा किया है कि पीड़ित के घर में घुसकर बलवा/दंगा (**धारा 191(2), 191(3) व 333 BNS**) की घटना पूरी तरह सच है। लेकिन, नामजद मुख्य आरोपियों (शिवम सिंह और अभय सिंह) को "साक्ष्य के अभाव" में क्लीन चिट दे दी गई है!
❓ **'ब्रेकिंग न्यूज' बने वो 3 सवाल, जिससे महकमे में मचा हड़कंप:**
1️⃣ **अपराधी हवा में गायब हो गए?:** जब पुलिस खुद मान रही है कि पीड़ित के घर में जबरन घुसकर बलवा और मारपीट की संगीन वारदात हुई है, तो उन अपराधियों को पकड़ा क्यों नहीं गया? वे जेल में क्यों नहीं हैं?
2️⃣ **4 लोग मिलकर बलवा कैसे कर सकते हैं?:** कानून के मुताबिक 'बलवा' (Rioting) के लिए कम से कम 5 लोगों का होना अनिवार्य है। पुलिस ने 2 नामजद आरोपियों को छोड़ दिया, तो बचे सिर्फ 4 अज्ञात। कानून के जानकारों का सवाल है कि 4 लोग मिलकर बलवा कैसे कर सकते हैं?
3️⃣ **सरकारी रिकॉर्ड को ही झुठलाया:** घटना के दिन **UP 112 के आधिकारिक सरकारी कॉल लॉग** में साफ दर्ज था—*"मारपीट कर कान की बाली छीन कर भाग गए, पहचान कर ली है।"* इसके बावजूद डकैती/लूट की धारा 310(2) BNS को आरोपियों से सांठगांठ कर हटा दिया गया।
🔥 **सीधा हमला:** क्या हमीरपुर पुलिस में अपराधियों को 'सेफ़ एग्ज़िट' दिलाने के लिए खुद पुलिस के ही 112 नंबर के सरकारी रिकॉर्ड और विधिक नियमों को बदला जा रहा है?
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@hamirpurpolice महोदय, इस हास्यास्पद और संदिग्ध विवेचना का तत्काल संज्ञान लें। दोषी विवेचक को कार्यालय में तलब (Line Hazir) कर दंडित किया जाए और मामले की निष्पक्ष जांच किसी **सर्किल ऑफिसर (CO)** को सौंपी जाए।
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@hamirpurpolice महोदय, इस हास्यास्पद और संदिग्ध विवेचना का तत्काल संज्ञान लें। दोषी विवेचक को कार्यालय में तलब (Line Hazir) कर दंडित किया जाए और मामले की निष्पक्ष जांच किसी **सर्किल ऑफिसर (CO)** को सौंपी जाए।
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@hamirpurpolice महोदय, इस हास्यास्पद और संदिग्ध विवेचना का तत्काल संज्ञान लें। दोषी विवेचक को कार्यालय में तलब (Line Hazir) कर दंडित किया जाए और मामले की निष्पक्ष जांच किसी **सर्किल ऑफिसर (CO)** को सौंपी जाए।
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