This guy is crossing all limits day by day and seems determined to create an emergency like situation again He needs to be arrested asap to set an example
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Maharashtra BJP election video is at a next level to unite Hindus. This time they have gone more direct. This message is not just for Maharashtra but for entire India. It is matter of our survival now. Must watch.
अलौकिक अयोध्या!
मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के अपने भव्य मंदिर में विराजने के बाद यह पहली दीपावली है। अयोध्या में श्री राम लला के मंदिर की यह अनुपम छटा हर किसी को अभिभूत करने वाली है। 500 वर्षों के पश्चात यह पावन घड़ी रामभक्तों के अनगिनत बलिदान और अनवरत त्याग-तपस्या के बाद आई है। हमारा सौभाग्य है कि हम सभी इस ऐतिहासिक अवसर के साक्षी बने हैं। मुझे विश्वास है कि प्रभु श्री राम का जीवन और उनके आदर्श विकसित भारत के संकल्प की सिद्धि में देशवासियों के लिए प्रेरणापुंज बने रहेंगे।
जय सियाराम!
Men get blamed for society's crimes every day, but rarely get credit for the sacrifices they make for their families, even at their own discomfort. Men are brave.
बटोगे तो कटोगे की बात सावधान करने के लिए हो रही है।हमारा तो यही मूलमंत्र है कि
“अनेकता में ऐक्य मंत्र को,
जन-जन फिर अपनाता है।
धीरे-धीरे देश हमारा,
आगे बढ़ता जाता है॥”
इसी भाव और देश की इसी प्रगति को छिन्न भिन्न करने के लिए आज भेद पैदा करने का प्रयास हो रहा है।
मगर जहां पर हिंदू कमजोर पड़ गया वहाँ सामाजिक न्याय तो भूल जाइए उल्टे वो हिस्सा देश से कट गय।
कहा जाता है कि विकास की बात करो पढ़ाई लिखाई काम पे ध्यान दो। तो याद रखिए।
1980’s तक कश्मीरी पंडित काश्मीर में सबसे पढ़ी लिखी बिज़नेस ओरिएंटेड कम्यूनिटी थी मगर आतंक के कारण 1990 में छः महीने में साफ़ हो गये।
लाहौर में 1947 तक हिंदू सिख बहूसंख्यक थे विकसित शांतिप्रिय और उसे लिखित मगर साफ़ हो गये।
कराची में हिंदू सिंधी और हिंदू पंजाबी दो अधिक जनसंख्या में थे मगर साफ़ हो गये।
काबुल में भी यही हाल था 1950’s तक एक तिहाई आबादी हिंदुओं और सिखों की थी विकसित शांतिप्रिय और बिज़नस पर कंट्रोल था मगर साफ़ हो गये।
पाकिस्तान के प्रथम क़ानून मंत्री जिन्हें पाकिस्तान का संविधान लिखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जोगेंद्र नाथ मंडल जो अनुसूचित जाति के हिन्दू थे उन्होंने यही सोचा था कि हिन्दू समाज की कुछ जातियों को अलग कर के अपने साथ लेकर मुसलिम्स के साथ सत्ता में रहेंगे मगर अंत में उन्होंने दलितों के साथ जो अत्याचार देखा और उसके बाद उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई तो थक हार का उन्हें अत्यंत पीड़ादायक परिस्थितियों में इस्तीफ़ा देना पड़ा।
इसलिए इतिहास के अनेक उदाहरण है जिनसे समझा जा सकता है कि बँटने पर कटना कितना दर्दनाक होता है।
जो लोग गोपाल मिश्रा के हत्यारे का समर्थन कर रहे हैं पहले उनका इलाज होना चाहिए .. बेशर्म ये लोग कन्हैया लाल के मौत पर 10 किलो गोबर खा लिये थे सर तन से जुदा पर नहीं बोल पाए कुछ अब क़ानून, इस्लामोफ़ोबिया सब याद आ रहा है |
#Behraich#GopalMishra