“नहीं हम में कोई अनबन नहीं है,
बस इतना है कि अब वो मन नही है!
मैं अपने आप को सुलझा रहा हूँ,
तुम्हें लेकर कोई उलझन नहीं है…!”
~मंगल नसीम🌻
#poetry#Gazal 🫶
#सफर_ए_ज़िंदगी 🤌✨❤️
मैं बिहार हूँ,
गंगा की धार हूँ,
छठ का त्योहार हूँ,
मांझी की हुंकार हूँ,
हां, मैं बिहार हूं
संघर्ष की पुकार हूँ,
नालंदा का संस्कार हूँ,
बुद्ध का उपहार हूँ,
महावीर का प्रचार हूँ,
जी हां, मैं बिहार हूं।
वीरता का सार हूं,
इतिहास का आधार हूँ,
भविष्य का आकार हूँ,
हाँ… मैं बिहार हूँ।
पर अब मैं थोड़ा सा खो गया हूं,
प्रगति की राह में थोड़ा स्लो सा हो गया हूं,
गलत नहीं, फिर भी एक गाली सा हो गया हूं
बिहार हूं, पर विकास की बहार को रो सा गया हूं
बदहाली, बेरोजगारी के दलदल में फंस सा गया हूं
अपराध, भ्रष्टाचार के सांप से डंस सा गया हूं,
दौड़ना था मुझको पर अब एक छोर पर बस सा गया हूं,
मगर मैं फिर से एक दिन बिहार बनूंगा,
उज्ज्वल सा संसार बनूंगा,
गाली नहीं, मैं प्यार ब���ूंगा,
चमन एक गुलज़ार बनूंगा,
भारत का उपहार बनूंगा,
हां, मैं फिर से बिहार बनूंगा।
"In a knowledge society, we have to make innovations continuously.
Innovations come through creativity.
Creativity comes from beautiful minds,"
~A.P.J. Abdul Kalam