China doesn't have a company valued >1T USD, because there is COMPETITION.
They don't have one Apple, they have Oppo, Xiaomi, Huawei
They don't have one Tesla, they have BYD, Nio, XPeng, Li Auto
They don't have one Amazon, they have Taobao, Douyin shops, JD.
US trillion dollar companies are protected monopolies.
Might be cool for the shareholders, but consumers have to put up with shitty Pixel phones, buggy Windows, overpriced mid Teslas, and Facebook bot-slop.
Chinese consumers get better products for less money.
🚨भारत में कारोबार शुरू करने का मतलब सिर्फ़ मेहनत नहीं,
हर दिन सिस्टम से लड़ाई है।🚨
🔻आप दुकान खोलते हैं, सिस्टम आपको संदिग्ध मान लेता है।
🔻आप फैक्ट्री लगाते हैं, सिस्टम मान लेता है कि आप कुछ “गलत” ज़रूर करेंगे।
>> GST विभाग को पहले से यकीन होता है कि व्यापारी टैक्स चुराएगा।
रिटर्न समय पर भरिए, टैक्स दीजिए, फिर भी नोटिस आएगा —
“रिकंसिलिएशन में अंतर है।”
>> इनकम टैक्स में एक कॉलम ग़लत भर गया, या किसी साल कैलकुलेशन बदल गई — तो अचानक पिछली कई सालों की फाइलें खुल जाती हैं। बात गलती की नहीं रहती, बात “सेटेलमेंट” पर आ जाती है।
>> सामान इंपो��्ट कीजिए — कस्टम्स तय कर लेता है कि वैल्यू गलत बताई गई है। अब दो रास्ते होते हैं:-
एक क़ानूनी — लंबा, महँगा, अनिश्चित।
दूसरा “व्यावहारिक” — तेज़ और ख़ामोश।
>> RTO में ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन रजिस्ट्रेशन या परमिट — सब कुछ नियमों में है, पर नियमों से काम नहीं चलता।
काम चलता है - “किसके ज़रिये आए हो?”
>> जमीन खरीदते ही राजस्व विभाग सक्रिय हो जाता है।
सीमांकन, नक्शा, आपत्ति,रिकॉर्ड में ग़लती — हर बार न�� फ़ीस, नया दलाल।
>> फैक्ट्री लगाइए — फायर NOC में सेफ़्टी से ज़्यादा फाइल का वज़न देखा जाता है।
>> पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड काग़ज़ों में पर्यावरण बचाता है, और ज़मीन पर व्यापारी को दमघोंटू शर्तों में फँसाता है।
नियम सीधे नहीं, घुमावदार रखे गए हैं।
>> श्रम विभाग — कम मज़दूर हों तब भी नोटिस, ज़्यादा हों तब भी निरीक्षण।कानून पालन करने वाला अक्सर ज़्यादा परेशान होता है।
>> रेस्टोरेंट खोलिए — नगर निगम, स्वास्थ्य विभाग, फूड सेफ्टी — हर विभाग अलग दिन आता है, पर इशारा एक ही करता है।
>> बिजली कनेक्शन में डिस्कॉम की फाइल तभी आगे बढ़ती है
जब “स्पीड मनी” मिल जाए।
>> पानी कनेक्शन? जल निगम बताता है लाइन है, पर लाइन में लगने के लिए लाइन से बाहर जाना पड़ेगा।
>> ट्रेड लाइसेंस, शॉप एक्ट, साइन बोर्ड अनुमति —
हर छोटी चीज़ बड़े उत्पीड़न में बदल जाती है।
•> RTI डाल दो, तो वही अफ़सर आपको “समस्या” समझने लगता है।
•> ऑनलाइन पोर्टल दिखाने को हैं — सर्वर अक्सर डाउन, लेकिन ऑफ़लाइन रास्ते हमेशा खुले रहते हैं।
यही भारत का असली विकास मॉडल है —
जहाँ ईमानदारी सबसे महँगी चीज़ है।
👉🏻यहाँ उद्यमी बनने का मतलब है या तो सिस्टम की मार सहो,
या धीरे-धीरे उसी सिस्टम का हिस्सा बन जाओ।
👉🏻देश स्टार्टअप चाहता है, रोज़गार चाहता है,निवेश चाहता है,
♦️लेकिन ज़मीन पर व्यवस्था अब भी पुराने सवाल पूछती है: - “काग़ज़ ठीक हैं… बाकी समझ रहे हो न?”
🚨 2026 की सबसे “ईमानदार” लूट की घोषणा हो चुकी है।
Jio, Airtel और VI — तीनों निजी टेलीकॉम कंपनियाँ
Prepaid और Postpaid टैरिफ 20% बढ़ाने जा रही हैं।
कोई शर्म, कोई बहाना, कोई सुधार का वादा नहीं — बस सीधा संदेश: अब ज़्यादा पैसे दो।
नेटवर्क वही रहेगा —
📶 कॉल ड्रॉप वही
🐢 इंटरनेट क��� रफ्तार वही
📞 कस्टमर केयर पर घंटों लटकना वही
लेकिन बिल?
💸 सीधा 20% भारी।
जिस देश में
▪️ सैलरी सालों से जमी हुई है
▪️ बेरोज़गारी रिकॉर्ड तोड़ रही है
▪️ टैक्स हर सांस पर वसूला जा रहा है
वहीं अब बात करना और इंटरनेट चलाना भी लग्ज़री बनाया जा रहा है।
👉🏻 और विकल्प?
❌ BSNL को जानबूझकर कमजोर रखा गया
❌ प्रतिस्��र्धा खत्म कर दी गई
❌ पूरा सेक्टर गिनती की कंपनियों के हवाले
जब विकल्प नहीं होते, तो इसे महंगाई नहीं — मजबूरी की वसूली कहते हैं।
डिजिटल इंडिया का नया मॉडल समझ लीजिए👇
📲 सिम आपकी
📡 नेटवर्क उनका
💰 मनमानी उनकी
और चुकता सिर्फ आम आदमी।
आज 20% बढ़े हैं, कल 30% बढ़ेंगे, और परसों कहा जाएगा -“यूज़ करना है तो सहना पड़ेगा।”
यह सुधार नहीं है। यह सेवा नहीं है।
यह खुलेआम कार्टेल राज है — और सबसे महंगी चीज़ अ��
👉 आपकी चुप्पी बन चुकी है।
जनरल कैटेगरी की फीस: ₹12.42 लाख प्रति साल।
कुल MBBS खर्च > ₹68.31 लाख
SC/ST फीस: ₹0 — बिल्कुल कुछ भी नहीं।
मतलब एक गरीब जनरल कैटेगरी छात्र अपनी कमर तोड़कर 12.4 लाख हर साल भरे ,
और एक अमीर SC/ST छात्र एक रुपये की भी ज़िम्मेदारी न उठाए।
फिर भी देश को यह सुनने की मजबूरी है कि आरक्षण गरीबी के लिए नहीं होता।
यानी मेरिट भी तुम्हारी, पढ़ाई भी तुम्हारी, बिल भी तुम्हारा… और सिस्टम की नैतिकता भी तुम्हीं पर टिकी।
यह मॉडल नहीं, एक क्रूर असमानता है , जहाँ मेहनत करने वाला भरता जाता है ,
और नीतियाँ वास्तविक आर्थिक हालत नहीं, सिर्फ कैटेगरी देखकर फैसला करती हैं।
लेकिन सवाल उठाओगे तो अपराधी आप ही बना दिए जाओगे।
यही है भारत का न्याय मॉडल — जितना योग्य हो , उतनी ही सजा झेलो।
यातल्या सर्व नाही पण बऱ्याचशा गोष्टी लॉजिकल वाटल्या, पटल्या म्हणून शेअर करीत आहे
“१४० वर्षे कसे जगावे?” – ChatGPT ने दिल��ले आश्चर्यकारक उत्तर
ChatGPT ला विचारले— “मी १४० वर्षे कसे जगू शकतो?”
उत्तर साधे होते आणि अनपेक्षितही.
ChatGPT ने “ब्लू झोन्स” मधील दीर्घायुषी लोकांचा डेटा विश्लेषित केला आणि स्पष्ट निष्कर्ष मांडला:
मुद्दा आहाराचा नाही,
मुद्दा व्यायामाचा नाही,
मुद्दा अनुवंशिकतेचाही (genetics) नाही.
👉 सर्वात महत्त्वाचा घटक: कमी प्रमाणातील दीर्घकालीन ताण (chronic stress).
उर्वरित सर्व गोष्टी दुय्यम!
तुम्ही कितीही चांगलं खाल्लं, व्यायाम केला, धूम्रपान टाळलं तरी —
जर तुम्ही सतत तणावाखाली जगत असाल, तर अकाली मृत्यू निश्चित आहे.
क्रॉनिक स्ट्रेस म्हणजे फक्त कामाचा ताण नाही
तो तुमच्या खऱ्या व्यक्तिमत्त्व आणि तुम्ही जगाला दाखवता त्या “आवृत्ती” यांच्यातील अंतर्गत संघर्ष आहे.
तुम्ही आपल्या मनासारखे न जगता जबरदस्तीचे ��ीवन जगलात तर शरीर २४ तास “survival mode” मध्ये राहते.
वाढलेला कॉर्टिसोल शरीरातील रक्तवाहिन्या, रोगप्रतिकारक शक्ती आणि मेंदू — सर्व नाश करतो.
ओकिनावा, सार्डिनिया आणि इतर ब्लू झोन्समधील लोक जास्त जगतात कारण ते मासे खातात म्हणून नव्हे—
तर ते स्वतःशी शांततेत, समतोलात, समाधानी राहतात म्हणून.
**दीर्घायुष्याचा पहिला नियम:
“ज्या गोष्टी तुमच्या अंतरात्म्याला विरोध निर्माण करतात, त्या करू नका.”**
नको असलेली नोकरी फक्त पैशासाठी करताय? → −१५ वर्षे
ज्याच्यावर प्रेम नाही अशा व्यक्तीसोबत भीतीपोटी राहात आहात? → −१० वर्षे
तुमची ऊर्जा शोषून घेणाऱ्या लोकांसोबत राहता? → −८ वर्षे
दररोज विषारी वातावरणात राहणे = पेशींचे झपाट्याने वृद्धत्व
दुस���ा नियम: “जीवन पुढे ढकलणे थांबवा.”
बहुतेक लोक असे म्हणतात— “निवृत्त झाल्यावर जगू…”
पण तेव्हा शरीर थकलेले, आजारी आणि ऊर्जाहीन असते.
ChatGPT च्या विश्लेषणानुसार—
४३% लोक निवृत्तीनंतरच्या पहिल्या ५ वर्षांतच मृत्यू पावतात.
का?
कारण शरीराने आयुष्यभर ‘जगण्याची परवानगी�� मिळण्याची वाट पाहिली… आणि जेव्हा ती मिळाली, तेव्हा खूप उशीर झाला होता.
तिसरा नियम: सामाजिक नाती — जीवनवर्धक औषध
एकटेपणा = दररोज १५ सिगारेट ओढण्याइतका घातक.
मजबूत सामाजिक नातेसंबंध असलेले लोक ५०% अधिक जगतात.
येथे मित्रांची संख्या नव्हे— नात्यांची गुणवत्ता महत्त्वाची.
चौथा नियम: स्वतःपेक्षा मोठा उद्देश शोधा
जपानमध्ये याला इकिगाई म्हणतात —
“दर सकाळी उठण्याचे कारण.”
स्पष्ट उद्देश असलेल्या लोकांचे आयुष्य सरासरी ७ वर्षांनी वाढते.
हा “मोठा सामाजिक मिशन” असायलाच हवा असे नाही—
तो बागकाम, नातवंडे, कला, सेवा, कोणालातरी मदत करणे… काहीही असू शकते.
महत्त्वाचे म्हणजे —
“मी इथे एका कारणासाठी आहे, माझी गरज आहे” असे वाटणे.
पाचवा नियम: आरोग्याच्या “over-optimization” चा अतिरेक टाळा
फिटनेसचे अति वेड असलेले लोकही कधी कधी कमी जगतात.
कारण: अति नियंत्रण = अति ताण = वाढलेला कॉर्टिसोल.
कॅलरी मोजणे, “वाईट अन्न” याची भीती, प्रत्येक पावलावर लक्ष…
हे जीवन नाही— ही कैद आहे.
सहावा नियम: व्यायाम नव्हे— नैसर्गिक हालचाल
ब्लू झोन्समधील लोक जिमला जात नाहीत.
ते चालतात, बाग सांभाळतात, शिड्या चढतात.
हालचाल त्यांच्या जीवनाचा भाग आहे, “वेगळा तासभराचा व्यायाम” नाही.
निष्कर्ष: दीर्घायुष्याचा सर्वात मोठा रहस्य म्हणजे
ताणमुक्त, नैसर्गिक, स्वतःशी प्रामाणिक जीवन.
( स्रोत व्हॉटसअप )
I am astonished that Amazon is incapable of tracking order numbers within its own system. Either their systems are grossly inefficient or their staff is downright incompetent. Amazon’s rigid insistence on providing details only through a single link reflects a customer-hostile attitude. The company clearly has no interest in making a customer’s life easier; instead, it imposes its own rules and dictates how customers should “behave” with Amazon.
@vskumar1972@JeffBezos@AmazonHelp@amazonIN Yes, all customer care executives are Chat-bots, they don't have any authority to take any action nor do they pass the call to the superior for a solution. Just repeating the same things. Because Amazon does not care about their customers & trained them to frustrate the callers.
20 km/l to 15 km/l, that’s the mileage drop my cousin saw in his diesel vehicle.
He visited the service center. After a full check, the technician shrugged and said, "Maybe it’s the fuel… could be adulteration, maybe bio-diesel blending… who knows."
This is the pathetic reality of fuel stations in India.
There’s no transparency. No accountability. Just blind trust in a system that’s designed to keep the customer clueless.
Even when I refuel my petrol vehicle, I have the same fear,
1. Is it really 1 liter or just 900ml?
2. What’s being mixed into it other then Ethanol?
3. Who’s watching?
Meanwhile, the government keeps singing the same tune, carbon footprint, farmer payments, forex savings, but stays completely silent on the impact of adulterated fuel on engines and mileage and cheating at pumps.
Welcome to the real India, where even fuel is a gamble.
वाह हमारा लोकतंत्र!
1.) No helmet… Fine ₹1,000/-
2.) Parking in a no-parking zone… Fine ₹3,000/-
3.) No insurance… Fine ₹1,000/-
4.) Drunk driving… Fine ₹10,000/-
5.) Driving in a no-entry zone… Fine ₹5,000/-
6.) Talking on a mobile phone while driving… Fine ₹2,000/-
6.) No pollution certificate… Fine ₹1,100/-
7.) Triple-seat riding… Fine ₹2,000/-
But:
1.) Malfunctioning traffic signals… No one is responsible!
2.) Potholes on the road… No one is responsible!
3.) Encroached footpaths… No one is responsible!
4.) No street lighting… No one is responsible!
5.) Garbage strewn all over the streets… No one is responsible!
6.) No streetlight poles on the roads… No one is responsible!
7.) Roads dug up and left un-repaired… No one is responsible!
8.) If you fall into a pothole and get injured… No one is responsible!
9.) If stray cows or animals collide with your vehicle or a dog bites you… No one is responsible!
10.) Sewage flowing all over the road… No one is responsible!
It feels like the public is the only criminal, and only they are liable to pay fines. The administration, the municipal corporation, and the government; none of them are ever held responsible.
No rules apply to them. They are never accountable for any negligence.
Shouldn’t they be held responsible too???
Citizens must work hard, endure suffering, pay taxes, pay fines, fill the government’s coffers, and then vote them back into power!
I request everyone to share this as widely as possible, so that even those who made these rules become aware of this truth.
Who filed the complaint against Sharmishtha Panoli for hurting religious sentiments?
Wazahat Khan, at the Garden Reach police station in Kolkata.
Now, look at Wazahat's posts hurting the religious sentiments of Hindus, which were made long before Sharmishtha's video.
Yet, no action was ever taken against him. Why?
Hello @KolkataPolice
You have registered a complaint against tribal Hindu girl Sharmistha on behalf of this person, Wazahat Khan Qadri.
When are you going to arrest him, as he has posted vulgar posts against Hindu gods?
Or do you work for Muslims only?