20 साल पहले जब सरदार सरोवर परियोजना बन रहा था तब मेघा पाटकर विदेशी मीडिया से कहती थी कि यह बेकार परियोजना है इससे गुजरात को कुछ फायदा नहीं होगा
और यह पता नहीं कौन सी ग्रेविटी गणित लगा कर कहती थी कि नर्मदा का पानी ना तो सौराष्ट्र में जा पाएगा न कच्छ में जा पाएगा और ना ही सूखे एरिया बनासकांठा क्या साबरकांठा या राजस्थान तक जा पाएगा
दुनिया भर के एवार्ड इसको मिलते थे पूरे विश्व की मीडिया इसे सर आंखों पर बिठा दी थी और आज उसी नर्मदा का पानी सौराष्ट्र कच्छ से लेकर राजस्थान के सांचौर होते हुए बाड़मेर जिले तक जा रहा है
आज इससे कोई मीडिया वाला नहीं पूछ रहा कि तुम तो कहती थी कि नर्मदा का पानी कच्छ पहुंची नहीं सकता अब कैसे पहुंच गया