आज का दिन मेरे लिए निजी तौर पर आत्मसंतोष और प्रसन्नता का दिन है। मीडिया स्टडीज़ में पीएचडी पूरी करने के ठीक बाद मैंने एक और विषय अंग्रेज़ी साहित्य में एमए के पाठ्यक्रम में दाख़िला लिया। फाइनल इयर की परीक्षा निबट गई है, बेहतर नतीजे की उम्मीद है।
यह शुरू में मेरी भी, बाद में पिताजी की गहरी इच्छा थी कि मैं इसे पूरा करूं। यूं तो नियति में कभी विश्वास नहीं रहा, पर कोई काम आप करना चाहें, पर किसी न किसी वजह से अगर वह बीच में ही कई एक बार छोड़ना पड़े तो मन में कहीं बैठ जाता है कि शायद यह नहीं हो पाएगा। इस मामले में ऐसा ही हो रहा था। 2012 में बीएचयू में एमए इन इंग्लिश प्रोग्रैम में सेलेक्शन हुआ था, पर बिहार के विश्वविद्यालयों का सेशन लेट रहने के चलते तब तक बीए की ही परीक्षा पूरी नहीं हो पाई थी जिसके चलते काउंसलिंग के लिए बीएचयू नहीं जा पाया था। अगले साल 2013 में बीएचयू में इंग्लिश, डीयू में इंग्लिश और हिन्दी तथा जेएनयू में लिंग्विस्टिक्स में एमए प्रोग्रैम में एडमिशन के लिए सेलेक्शन हुआ था, पर आईआईएमसी के नतीजे पहले आने के चलते वहां नामांकन ले चुका था और एक बार फिर अंग्रेज़ी साहित्य में एमए करने की बात आई-गई हो गई। उस वर्ष डीयू के इंट्रेंस टेस्ट में बेहतर करने की बदौलत सेंट स्टीवेंस कॉलेज ने इंटरव्यू के लिए बुलाया और अंततः वहां भी दाख़िले का रास्ता साफ़ हुआ, पर आईआईएमसी में फ़ीस के रूप में बड़ी राशि जमा कर देने के चलते दुविधाग्रस्त होकर पत्रकारिता के कोर्स को छोड़कर स्टीवेंस जाने का निर्णय नहीं ले सका। फिर 2015 में तीसरी बार बीएचयू में इंग्लिश में एमए और डीयू में दूसरी बार अंग्रेज़ी और हिन्दी साहित्य में एमए के लिए चयन हुआ। डीयू में एडमिशन लिया, पर उसी वर्ष जेएनयू में मीडिया स्टडीज़ में एमफिल का कोर्स इंट्रोड्यूस हुआ था, भाई अविनाश चंचल जी के इसरार और राहुल दा के स्नेह की बदौलत उसका इंट्रेंस भी दिया था और फ़ाइनली एमफिल-पीएचडी के इंटीग्रेटेड कोर्स में दाख़िले के लिए चयनित हुआ, और हितचिंतक मित्रों की सलाह पर डीयू से एमए इन इंग्लिश के कोर्स से नाम कटा कर जेएनयू आ गया। इस तरह, अंग्रेज़ी साहित्य में एमए करने का मामला अटकता रहा। इसमें न मेरा दोष था, न किसी और का। पर, यह हुआ। आया था दिल्ली साहित्य पढ़ने, पढ़ ली पत्रकारिता, वह भी तब जबकि दूर-दूर तक आईआईएमसी का नाम भी कभी नहीं सुना था! इसको क्या कहेंगे! टिकट कटाते हैं आज़मगढ़ का, पहुंच जाते हैं बरेली! तो, जीवन में सब कुछ आप ही नहीं तय करते हैं, कुछ चीज़ें जीवन स्वयं आपके लिए तय करता है। इस यात्रा का बस लम्हा-ब-लम्हा आनन्द लेते रहा जाए। और, यथासंभव अपना सर्वश्रेष्ठ दिया जाए।
हालांकि, एक समय के बाद कुछ बातों का उस रूप में कोई अर्थ नहीं रह जाता। विह्वलता की जगह आश्वस्ति ले लेती है! सब्र तो यहां से आता है कि जो एमए 2015 में पूरा हो जाना चाहिए था, वह 2025 में हो रहा है।
जब हसरत ही न रही तो तलब पूछ रहे हो
कब पूछना था यार कब पूछ रहे हो।
एक दिलचस्प बात का उल्लेख करने का मन हो रहा है। राजस्थान में असिस्टेंट प्रफ़ेसर की एक वैकेन्सी आई। एक मित्र ने कहा कि अब तो पीएचडी भी हो गई है, आप अप्लाई कर दीजिए। मैंने कहा, ठीक है आता हूं, साथ-साथ करते हैं। उन्होंने पॉलिटिकल साइंस में किया। जब फ़ॉर्म भरने बैठे, तो पहले एडवर्टिज़मंट पढ़ना शुरू किया। देखा तो पता चला का जर्नलिज़म एंड मैस कम्युनिकेशन की कहीं कोई पोस्ट ही नहीं है। उस क्षण कैसा महसूस हुआ, बता नहीं सकता। सब कुछ एक फ़्यूटाइल एक्सरसाइज़-सा! तय किया कि हर हाल में अब अंग्रेज़ी में एमए कम्प्लीट करना है। तमाम तरह की मसरूफ़ियत को देखते हुए रेग्युलर कोर्स में दाख़िला व्यावहारिक नहीं था, तो इग्नू में एडमिशन लिया था। और, यह एक कथार्टिक एक्सर्साइज़ सा रहा!
डीयू के चंद कॉलेज में, सेंट्रल यूनिवर्सिटीज़ में इक्का-दुक्का पोस्ट होते हैं। स्टेट यूनिवर्सिटीज़ में पढ़ाई ज़रूर होती है पत्रकारिता की, मगर गेस्ट फ़ैकल्टी मेंबर्स के सहारे हिन्दी या अंग्रेज़ी विभाग के साथ जोड़-जाड़ के। विश्वविद्यालयों में सैंक्शन्ड पोस्ट नहीं हैं, और यह एक बड़ा कारण है कि बिना किसी सैद्धांतिकी से क़ायदे से गुज़रे लबरा-लबरी टाइप के पत्रकार हर गली-चौराहे पर किसी-न-किसी के मुंह में माइक खोचारने पर आमादा दीखते हैं।
पिछले दो वर्षों में कभी-कभार चिड़चिड़ापन भी आया, जिन मित्रों के साथ जाने-अनजाने रुखा व्यवहार किया हो, उन सबसे माफ़ी चाहता हूं।
कहते हैं, "यह दुनिया एक मदरसा है, और हम सब तालिब-ए-इल्म हैं"। रोज़ एक क़दम बेहतरी की ओर, बेहतर इंसान बनने की राह में थोड़ी कोशिश और!
I can’t express what I’m feeling today. I borrow words from Firdaus Gayavi:
इल्म की इब्तिदा है हंगामा
इल्म की इंतिहा है ख़ामोशी।
पशुपति कुमार पारस जी 1977 से राजनीति कर रहे हैं। सार्वजनिक जीवन में उन्हें 48 वर्ष हो गए। 7 बार विधायक, एक बार विधान पार्षद, 1 बार लोकसभा सदस्य, 4 बार बिहार सरकार के मंत्री व 1 बार केंद्रीय मंत्री रहे। लालू जी के मंत्रिपरिषद में वे पहली बार 1990 में वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री तथा 1995 में कारा एवं निबंधन मंत्री बने। अपनी व्यवहारकुशलता के लिए वे जाने जाते हैं। भले और भोले व्यक्ति हैं। उन्होंने जीवन भर मर्यादित राजनीति की है। उन्हें अभिनय करना नहीं आता।
सत्यमेव जयते!
आबरू-ए-सियासत लालू जी @laluprasadrjd के इस ऐतिहासिक भाषण को नई पीढ़ी को सुनना चाहिए। बिहार के उत्थान और स्वाभिमान की रक्षा हेतु उनके सत्प्रयास का यह एक ज़िंदा दस्तावेज़ है। संसदीय प्रणाली, संघीय ढांचे, पंचायती राज चुनाव व स्थानीय निकाय की स्वायत्तता, ब्यूरोक्रेसी के रेशे को ढीला कर लेजिसलेचर की प्रतिष्ठा को बहाल करने की दूरदर्शिता की एक झलक आपको इस तारीख़ी तक़रीर में मिलेगी।
इस भाषण को सुनते हुए दिग्भ्रमित लोग "सामाजिक न्याय" और "समरसता" में मौलिक और स्पष्ट अंतर को भी अच्छी तरह महसूस कर पाएंगे। साथ ही यह भी कि सामाजिक न्याय की अवधारणा में ही राजनैतिक न्याय, आर्थिक न्याय, सांस्कृतिक न्याय, लैंगिक न्याय, जलवायु न्याय व डिजिटल न्याय, सब कुछ समाहित है।
सत्यमेव जयते!
मुक्ति हमेशा समूह मे होगी, समाज मे होगी। हां उसके लिए स्वयं को समझना आवश्यक है, स्व का बचा रहना आवश्यक है। स्वत्व की रक्षा भी उतनी ही ज़रूरी है। राजनीति करने के लिए किसी स्वाभाविक रिश्ते को तजने की शर्त नही होती। वर्जनाओ से मुक्त होना बेहतर मनुष्य होने की शर्त है। सरल, सहज रहें!
हिट्स, लाइक, वायरल, ट्रेंडिंग, इन सब के चक्कर में मैं नहीं पड़ता। मुझसे जो अपेक्षा पार्टी, लीडर तेजस्वी जी @yadavtejashwi और वरिष्ठ साथी मनोज जी @manojkjhadu की है, उसी पर खरा उतरने की कोशिश करता हूं।
संजीदा बहस में यक़ीन रखता हूं और विचारधारात्मक राजनीति को कैसे बल मिले, उन आयडियाज़ को एसर्ट करता हूं।
राजद राज्यसभा सांसद संजय यादव जी से 20 करोड़ रूपये की रंगदारी मांगी गई है। नहीं देने पर पूरे परिवार को जान से मारने की दी धमकी मिली है।
बिहार सरकार और भारत सरकार से अनुरोध है कि जल्द से जल्द पूरे परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए।
मैंने संसद में कहा था कि जिस तरह एकलव्य का अंगूठा कटवाया गया था उसी तरह पेपर लीक करवाकर युवाओं का अंगूठा काटा जाता है।
इसका ताज़ा उदाहरण बिहार है। BPSC अभ्यार्थी पेपर लीक के ख़िलाफ़ आवाज़ उठा रहे हैं और एग्जाम को रद्द करने की मांग कर रहे हैं।
लेकिन NDA की सरकार अपनी नाकामी को छुपाने के लिए उल्टा छात्रों पर ही लाठी चार्ज करवा रही है।
यह बेहद शर्मनाक और निंदनीय है। छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हम उनके साथ हैं और उन्हें न्याय दिलाने के लिए लड़ेंगे।
देवेशचंद्र ठाकुर ही नही, बल्कि जितने भी ब्राह्मण को जानता हूं, उनमे अपवाद को छोडकर सभी श्रेष्ठता-बोध मे जीते हैं! शुक्र है, समाजवादी आंदोलन हुआ कि नाक-भौं सिकोड़ते हुए भी साथ मे बैठना पड़ता है, वरना ये अपने आगे किसी को कुछ बूझते नही! आप अच्छा कर रहे हैं तो आपके पीछे पालतू कुक्कुर
शानदार
#T20WorldCup में भारतीय क्रिकेट टीम ने पाकिस्तान के विरुद्ध शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए जीत हासिल कीI
भारतीय टीम के सभी खिलाड़ियों को बहुत-बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं।
आपने दिखाया - कैसे लड़ते हैं
आपने सिखाया - मुद्दों पर कैसे अड़ते हैं
आपने बताया - तानाशाहों से कैसे भिड़ते हैं
आपने जताया - अपना दर्द भूल कर जनता के दर्द की परवाह कैसे करते हैं
एक शानदार-जानदार-धारदार समाजवादी लड़ाई के लिए आपका शुक्रिया!💚
My Leader - My Pride :
#TejashwiYadav
वो आए घर में हमारे ख़ुदा की क़ुदरत है
कभी हम उन को कभी अपने घर को देखते हैं।
- ग़ालिब
नये बिहार की रचना के अग्रदूत व यशस्वी नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी जी खगड़िया लोकसभा क्षेत्र से महागठबंधन के उम्मीदवार कॉमरेड संजय कुशवाहा जी के पक्ष में प्रचार करने हमारे विधानसभा क्षेत्र अलौली आए थे
होश-ओ-हवास में बयान दो, नहीं तो सात पुश्तें गुंडागर्दी भूल जाएंगी!
बड़ी मुश्किल से हमने लोकतंत्र को अर्जित किया है। यह राजशाही नहीं, लोकशाही है। हमने ज़ुल्मों की ढेर पर जम्हूरियत को खड़ा किया है। हमारी पीढ़ियों ने क़ुर्बानी दी है। हमने पीठ नहीं दिखाए हैं! न तो परजीवी हैं, न शोषक
सारण लोकसभा क्षेत्र के मताधिकारियों से गुज़ारिश है कि यहां से मानवीय करुणा, गरिमा और मर्यादा से भरी लोकव्यवहार की धनी इंडिया ब्लॉक की उम्मीदवार @RohiniAcharya2जी को ईवीएम के क्रम संख्या 3 पर अपना बेशक़ीमती वोट देकर भारी मतों से विजयी बनाएं।
वे इस क्षेत्र का चतुर्दिक विकास करेंगी
हाजीपुर से INDIA के उम्मीदवार @ShivChandraRammजी की जीत अप्रत्याशित अंतर से होने जा रही है।
कुछ इलाक़े में जनसंपर्क करने के दौरान महसूस हुआ कि वे हर वर्ग से समर्थन पा रहे हैं। संसोपा के संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष व राज्यसभा सांसद रहे स्वतंत्रता सेनानी सीताराम सिंह जी के घर जाना हुआ