शुभचिंतक होने के नाते बता रहा हूँ PM @narendramodi जी, ये गुंडे जितना बढ़ेंगे,और सरकार इन्हें संरक्षण देगी,आपकी सरकार का इक़बाल उतना कमज़ोर होता चला जाएगा।
Gen-Z बच्चों को आपने Friends बोला,उन्हें ��तंकित करने वाला खुला घूम रहा। @DelhiPolice Show some spine‼️
आज तारीफ़ उन लोगों की हो रही है जो सच में #jantarmantar ज़मीन पर उतरकर अपना काम कर रहे थे।
जिन्होंने AC Studio से नहीं, पसीने से तर-बतर होते हुए, पुलिस और छात्रों के बीच सत्य की सीमा बनकर उनकी आवाज़ पूरे देश तक पहुँचाई।
आज वे #Reporters लाखों युवाओं के दिलों में रहेंगे, क्योंकि उन्होंने सिर्फ़ ख़���र नहीं दिखाई... बल्कि एक पीढ़ी के संघर्ष को देश के हर घर और हर मोबाइल तक पहुँचाया।
और TV की Main Stream Media से बस इतना कहना है,,,,
दिल में उनके लिए कोई घृणा मत रखिए।
आपने वह खो दिया, जिसे कभी आपने ही कमाया था-जनता का भरोसा।
और इन्होंने वह हा���िल कर लिया, जिसे पैसे से नहीं खरीदा जा सकता
देश का प्यार, युवाओं का विश्वास और सच के साथ खड़े होने की पहचान।
समय बदलता है...
आज कई #Socialmedia Reporters की Credibility उन बड़े TV चैनलों से कहीं ज़्यादा है, जो कभी पत्रकारिता की पहचान हुआ करते थे।......
(Video sent by a student)*
अभिजीत- कल आप लोगो ने 12-12 साल की बच्चियो का सर फोडा है😠
दिल्ली पुलिस- अभी का इश्यू बताइए
अभिजीत- हम भूल जाए वो चीजे🥺
लडकियो की छाती पर पैर रखकर मेल पुलिस ने उन्हे पीटा है उसके बाद भी आप लोगो का मन नही भरा
दिल्ली पुलिस- आइए ऑफिस मे बात करते है
अभिजीत- अब बैठकर कोई बात नही होगी
जो बात करनी है यही मीडिया के सामने करिए
इतने दिनों तक सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल और शिक्षा व्यवस्था व पेपर लीक को लेकर, खासकर सोशल मीडिया पर बने माहौल के कारण अधिकांश नौजवान छात्र प्रदर्शन में पहुंचे थे। वे ऑर्गेनिक तरीके से आए थे।
प्रदर्शन में शामिल लोगों का केवल एक छोटा-सा हिस्सा ही चंद्रशेखर रावण की पार्टी, आम आदमी पार्टी और वामपंथी संगठनों द्वारा मोबिलाइज़ किया गया था। आंदोलन मूलतः स्वतःस्फूर्त था।
CJP के दो-तीन कथित नेतृत्वकर्ता जे.पी. नड्डा को ज्ञापन देने के नाम पर प्रोटेस्ट और मार्च छोड़कर चले गए।
प्रोटेस्ट लगभग नेतृत्वविहीन हो गया था, लेकिन उसके बाद भी युवाओं में खूब जोश था।
बड़ी संख्या में Gen Z युवा पहली बार किसी प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे थे। वे रचनात्मक तरीके से विरोध दर्ज करा रहे थे।
"बांग्लादेश बना देंगे ,नेपाल बना देंगे" जैसे नारे लगाने वाले दो-चार लोग रहे होंगे। उसके आधार पर पूरे आंदोलन को उसी नज़र से देखना या वैसा ठप्पा ��गा देना उचित नहीं है।
भीड़ द्वारा पुलिस वाहनों में तोड़फोड़ और हिंसा की घटनाएं आंदोलन के बिल्कुल अंत में हुईं। उससे पहले पुलिस लगातार लाठीचार्ज करती रही और आंसू गैस के गोले छोड़ती रही।
एक लड़का प्रोटेस्ट कर रहा था पत्रकारों से बातें कर रहा था.
तभी मोदी भक्तों ने कहा कि ये हिंदू आस्था का मजाक बना रहा है.
तभी लड़के ने अपना जनेऊ निकाल कर भक्तों को हैरत में डाल दिया.
एक कहावत तो सुनी होगी ऊंट के मुंह में जीरा...!!!
रेलवे की भर्ती का यह विज्ञापन देख लो...सही साबित होती है.
कितना ही चिल्ला लेना, ट्रेंड करवा लेना...सरकार के कानों में जूं तक नहीं रेंगने वाली है.
#railway_jawab_do#RailwayLevel1_1Lakh_VacancyDo