India’s declining economy. Since year 2020 it has been losing strength. A collapse this year in October may happen if strict economic reforms are not introduced. Modi is clueless and Finance Ministry is bewildered. Our Nation may soon be seen internationally as being led of economist clowns. Time for our patriotic scholars to suggest the way out.
ब्राह्मण बेटियों पर अभद्र टिप्पणी मामले में यूट्यूबर मनीष पटेल को हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली।
माननीय कोर्ट ने जमानत याचिका स्वीकार नहीं की, फिलहाल इसे 20 दिनों तक जेल में ही रहना पड़ेगा।
एकपत्नीव्रत, सत्य, दया, दान आदि सतयुग का साधारण धर्म है, जिसके पालन से धोबी आदि भी स्वर्ग चले जाते हैं।
Monogamy, truth, kindness, charity etc. are ordinary duties (dharma) of people in Satayuga, by following which even washermen etc. attain heaven.
बुद्धिमान पुरुष अपनी धर्मपत्नी के साथ ही विहार करे और मन में एकपत्नीव्रत धारण करे।
A wise man should enjoy only with his wife and should keep a vow of monogamy in his heart.
इस हरामखोर एम्बुलेंस चालक के अंदर दया धर्म नाम की कोई चीज नही😡,ये क्या किसी की जान बचाएगा🤔,इसको नौकरी से लात मार कर निकाला जाए ,वो भी तुरंत😡
क्यों कि ये एक इंसान कहलाने के लायाक भी नही,
जिसका पति बीमार है हॉस्पिटल में एडमिट है ,उससे तुम एम्बुलेंस धुलवा रहे हो नीच इंसान😡
इसको इतना शेयर करिये मित्रो की इसकी नौकरी चली जाए🙏✍️
@Uppolice
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🚨रिपोस्ट रुकना नहीं चाहिए 🖐️
अश्विनी पटेल द्वारा भगवान हनुमान जी पर आपत्तिजनक टिप्पणी किया गया है, जो न सिर्फ आस्था का अपमान है बल्कि समाज में नफरत फैलाने का भी काम करता है।
@varanasipolice ~ जल्द से जल्द कठोरतम कार्रवाई करें।
CC: @adgzonevaranasi@IgRangeVaranasi@Uppolice
अंकुर आर्या अंदर से ब्राह्मणो से बहुत नफरत करता है केवल वो इसीलिए ब्राह्मणों के खिलाफ बहुत कम बात घुमाकर बोलता है क्योंकि उसके ज्यादातर फ़ॉलोवर और सब्सक्राइबर ब्राह्मण है।
आर्य समाजी जो होगा वही हिन्दू धर्म से नफरत करता है क्योंकि आर्य समाज शैतानो का शुरू किया इस्लामिक कल्ट जैसा है जिसमे पंच देवो की पूजा और मूर्तियो की पूजा से शैतानो की शक्ति कमजोर होती है।
जितनी ज्यादा मूर्ति की पूजा होती है जितनी ज्यादा पंचदेवों की पूजा होती है उतनी ही ज्यादा शैतानो की शक्तियां कम होती है इसीलिए शैतान गुरु शुक्राचार्य समय समय अलग अलग माध्यमो से मूर्तियों और पंचदेवों की पूजा बंद करवाने के लिए छल करते रहते है और उसी में एक एक दयानंद सरस्वती भी हुआ है था तो ब्राह्मण लेकिन ये इसका संपर्क शुक्राचार्य से था जैसे ईसा मसीह और मोहम्मद का था।
मेरी सभी ब्राह्मणो से अपील है ज्यादे से ज्यादे पंचदेवों की।पूजा आराधना करें और जितना हो सके उतनी ज्यादा मूर्तियों की पूजा करे इससे शैतानी शक्तियां अपने आप तड़फ तड़फ कर नस्ट हो जाएंगी। जितना ज्यादा आप पंचदेवों और मूर्तियों की पूजा करोगे उतनी ही तेजी से शैतानी गुरु के चेले की शैतानी शक्तियां नस्ट होगी फिर वो चाहे आर्य समाज के भेष में छिपी हो या किसी अन्य पंत मजहब जे भेस में
एथेनॉल का 'पुत्र मोह' और इंजन की बर्बादी: गडकरी जी, यह ग्रीन फ्यूल है या 'फैमिली बिजनेस' का टूल?
भारत की सड़कों पर 'ग्रीन इकोनॉमी' का जो सपना बेचा जा रहा है, उसके पीछे का सच गन्ने के रस की मिठास जैसा नहीं, बल्कि कड़वा है। पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने का ड्राफ्ट देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए कम और कुछ खास राजनीतिक परिवारों की शुगर मिलों और डिस्टिलरीज़ के टर्नओवर के लिए ज़्यादा लाया गया लगता है।
1. जनता का इंजन और 'पुत्र मोह' की बलि
एथेनॉल की अधिक मात्रा (E20 और उससे ऊपर) सामान्य इंजन के लिए धीमा ज़हर है।
इंजन की बर्बादी: एथेनॉल पानी सोखता है, जिससे गाड़ियों के फ्यूल पंप और इंजन के पुर्जों में जंग (Corrosion) लगती है। आम आदमी अपनी गाढ़ी कमाई से गाड़ी खरीदता है, लेकिन सरकार 'पुत्र मोह' में उसे खराब ईंधन की ओर धकेल रही है।
सीधा लाभ: जब नीति बनाने वाले ही एथेनॉल उत्पादन से जुड़ी बड़ी कंपनियों और डिस्टिलरीज़ के मालिक हों या उनके परिवार के हित उससे जुड़े हों, तो 'कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट' का यह सबसे बड़ा उदाहरण है।
2. 'शून्य' रणनीतिक भंडार और एथेनॉल का शोर
एक तरफ भारत का रणनीतिक तेल भंडार चीन के 1,400 मिलियन बैरल के मुकाबले मात्र 21 मिलियन बैरल (0% विकास) पर खड़ा है।
क्या एथेनॉल ब्लेंडिंग इस गंभीर रणनीतिक विफलता को छिपाने का एक तरीका है?
प्राथमिकता का संकट: जिस ऊर्जा का उपयोग रणनीतिक भंडार बनाने में होना चाहिए था, उसे चुनावी चंदे और पारिवारिक बिजनेस को चमकाने वाली सब्सिडी में झोंका जा रहा है।
'एथेनॉल घोटाला' और मध्यम वर्ग की कमर
एक तरफ देश का मध्यम वर्ग महंगाई और 'ईएमआई' के बोझ तले अपना सोना गिरवी रख रहा है, और दूसरी तरफ उसे ऐसा पेट्रोल खरीदने पर मजबूर किया जा रहा है जो उसकी गाड़ी के इंजन की उम्र कम कर देगा।
यह "गन्ने से फ्यूल" का खेल दरअसल "आम आदमी की जेब से पारिवारिक तिजोरी" तक का रास्ता है। प्रधानमंत्री की 'लापता डिग्री' की तरह ही इस एथेनॉल नीति की निष्पक्ष जाँच की फाइलें भी कभी नहीं मिलेंगी।
गडकरी जी, देशहित का मतलब 'जनता का हित' होता है, 'परिवार की बैलेंस शीट' सुधारना नहीं। अब बहुत हुआ लफ्फाजी का खेल, जनता अब इस 'एथेनॉल ब्लफ' को समझ चुकी है!
पंजाब के गुरदासपुर शहर के एक चौँक ईसाई चौँक बन गया..... वहां पर क्रॉस भी गाड़ दिया गया...... ईसाई धर्म पंजाब में अपने पैर पूरे जोर शोर से फैला रहा है... कोई रोक जो नहीं, ना सरकार की ना कानून की 🤔
#NoConversion
Hindus were on backfoot from Mulla-Marxist-Missionaries. And now Neel-kabootars Bhim Army sampradaya is becoming too dangerous. After declaring Ambedkar as God, they are going around & thrashing Hindu kids in public & forcing them to pray before the statue of Ambedkar like the Hon'ble PM prayed before Ambedkar statue few weeks ago.
Incident of Maharashtra where Bheem Army barged into the house of a Hindu minor boy, thrashed him and abused his parents & dragged him to a nearby Ambedkar statue & forced him to pray and prostrate before him. While Hindu Deities are being abused daily & no action taken against Neel Kabootar's while Hindus are being publicly thrashed without any legal action against this Bhim Army
मोदी जी डमरू-त्रिशूल ले कर फोटो खिंचा रहे हैं। साल भर पहले हम नाचने लगते, अब वो दिन गए। अभी टाइमलाइन पर इसे ‘एक त्रिशूल वाली फोटो फेंक कर मारेंगे, सब हिन्दू हृदय सम्राट लिखने लगेंगे’ की याद दोहराएँगे।
अभी होली में भभूत लगा कर नाच भी लेंगे काशी में, तो भी लोग विश्वास नहीं करेंगे। वो दिन बीत चुके हैं। जलवा दिखाने के लिए दस-गुणा प्रयास होगा। नाकाम रहेगा।
Mamta Mishra, principal of Subeam School in Hardoi, has been booked under the SC/ST Act.
This is ridiculous. She may have been rude, ill-mannered, and unfit for the role of an educator, and people across castes rightly called out her conduct, I too did explicitly, but invoking the SC/ST Act here is an overreach. She absolutely did not use any casteist slurs against the parents.
Cases like these will push people to start viewing every controversy through a caste lens before speaking. Why would any GC call out any non-castist bad behaviour by another GC against a Dalit if there’s a risk it could be twisted and lead to disproportionate repercussions under the SC/ST Act?
Now some dedh-hoshiyar will say that her behaviour comes from her castist mindset. Absolute nonsense! By that standard, literally any interaction can be twisted into an SC/ST case, an argument, a scolding, failed in exam, rejected proposal, even an accident, just by claiming hidden bias.
Second, Law deals with actions, not mind-reading. Unless there is a clear caste-based act, like a slur, humiliation, or targeted discrimination, there’s no legal basis. Turning every bad behaviour into a caste issue only weakens genuine cases and makes the law look arbitrary.
नाम : ममता मिश्रा
अपराध : नीलम वर्मा के बच्चों को पढ़ाना
नतीजा : SCST Act में मुकदमा दर्ज
नीलम वर्मा अपने साथियों के साथ 3 घंटे से मिश्रा मैडम को परेशान कर रही थी..., मिश्रा मैडम को उकसा रही थी, भद्दी भद्दी गालियां दे रही थी..., और वीडियो भी बना रही थी, लेकिन नीलम वर्मा ने 3 घंटे के वीडियो में से सिर्फ 30 सेकंड का वीडियो वायरल किया..., अब क्योंकि प्रिंसिपल ब्राह्मण है और शिकायतकर्ता SC तो बीजेपी को इसमें ऑपर्च्युनिटी दिखाई दी, दलित वोट बैंक साधने के लिए...., RSS के ABVP के लड़के सैकड़ों के संख्या में टूट पड़े..., साफ समझ आ रहा है पूरा मामला सुनियोजित ढंग से सेट किया गया है..., बाकी दामोदर और भीम आर्मी (बीजेपी की दलित इकाई..) पहले ही कह चुके हैं ब्राह्मणों को भारत से खदेड़ कर दम लेंगे..., तो ब्राह्मणों अपना बोरिया बिस्तर लपेट लो ...