हिमाचल की जनता अब सिर्फ बयानबाजी नहीं, बल्कि काम देखना चाहती है। विपक्ष का काम केवल सरकार की आलोचना करना नहीं, बल्कि प्रदेश के हित में अच्छे सुझाव देना भी है। लेकिन आपसी खींचतान और सही रणनीति की कमी के कारण विपक्ष जनता के मुद्दों को मजबूती से उठाने में सफल नहीं हो पाया।
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पंचायतीराज चुनाव के पहले चरण और नगर निकाय चुनावों के नतीजों से हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस के पक्ष में सकारात्मक माहौल नजर आ रहा है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू सरकार की नीतियों और कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों को जनता का अच्छा समर्थन मिलता दिखाई दे रहा है।
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पिछली सरकार के समय शिक्षा व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक थी। पाँचवीं कक्षा का विद्यार्थी दूसरी कक्षा की किताब पढ़ने में भी कठिनाई महसूस करता था और हिमाचल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा में देशभर में 21वें स्थान पर पहुंच गया था।
हमारी सरकार ने शिक्षा की बुनियाद को मजबूत करने पर काम किया। सरकारी स्कूलों में पहली कक्षा से अंग्रेज़ी माध्यम में पढ़ाई शुरू की और CBSE पैटर्न लागू किया।
हमारे इन प्रयासों से आज हिमाचल PGI रैंकिंग में 13वें से 6वें स्थान पर पहुँचा है और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा में 21वें से 5वें स्थान पर आया है।
हिमाचल प्रदेश की पावन धरा पर माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी का पुष्पगुच्छ प्रदान कर आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया।
माननीय राष्ट्रपति जी को ससम्मान पारंपरिक हिमाचली टोपी, शॉल एवं स्मृति चिह्न भेंट किए।
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आज शिलाई विधानसभा के रोनहाट में आमजन के बीच पहुंचकर उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना।
जनहित को सर्वोपरि रखते हुए प्रत्येक समस्या के शीघ्र व प्रभावी समाधान हेतु संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए।
हिमाचल विधानसभा में 54,928 करोड़ का बजट ध्वनि मत से पारित; सीएम सुक्खू बोले- 'वित्तीय अनुशासन से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा प्रदेश!
हिमाचल प्रदेश विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 54,928 करोड़ रुपये का बजट ध्वनि मत से पारित हो गया। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि सरकार ने पहली बार प्रदेश की वास्तविक वित्तीय स्थिति को पारदर्शिता के साथ प्रस्तुत किया है और वित्तीय अनुशासन अपनाते हुए संतुलित बजट तैयार किया गया है।
सीएम ने बताया कि केंद्र से मिलने वाले राजस्व घाटा अनुदान में कमी के चलते राज्य को अपनी आर्थिक रणनीति में बदलाव करना पड़ा है। बावजूद इसके, आम जनता और मिडिल क्लास पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं डाला जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि नीतिगत सुधारों के जरिए प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम जारी है।
सरकार पूंजीगत व्यय बढ़ाने और राजस्व खर्च में संतुलन बनाए रखने पर जोर दे रही है। वहीं, एंट्री टैक्स को लेकर सीएम ने स्पष्ट किया कि यह नया टैक्स नहीं है और छोटी गाड़ियों पर कोई अतिरिक्त भार नहीं डाला गया है।
पेंशनरों के विरोध पर उन्होंने कहा कि सरकार उनके हितों के प्रति प्रतिबद्ध है और बजट सीमाओं के भीतर भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा।
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भारत का संविधान विश्व के सबसे व्यापक और प्रगतिशील संविधानों में से एक है। यह हमारे लोकतंत्र की आधारशिला है। यह केवल कानूनी दस्तावेज़ नहीं, बल्कि हमारे राष्ट्र के आदर्शों, मूल्यों और आकांक्षाओं का प्रतीक है।
संविधान के शिल्पकार डॉ. भीमराव अंबेडकर जी ने हर नागरिक के लिए समानता, न्याय और स्वतंत्रता सुनिश्चित की। हमारे लिए अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्य भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। यदि हम अपने अधिकारों का सही लाभ उठाना चाहते हैं, तो अपने कर्तव्यों का पालन करना आवश्यक है।
प्रदेशवासियों की सुविधा के लिए ई-राजस्व न्यायालय प्रणाली लागू की गई है, जिसके माध्यम से राजस्व मामलों का निपटारा आसान और पारदर्शी बन गया है। इसके साथ ही, राजस्व लोक अदालतों का आयोजन कर प्रदेश सरकार ने लगभग पाँच लाख पचास हजार लंबित मामलों का निपटारा किया है, ये कई वर्षों से लंबित थे।
न्याय व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए तीन अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं नए सब-जज न्यायालय भी स्थापित किए गए हैं।
भाजपा के अध्यक्ष सिरमौर से हैं। मैं उनसे कहना चाहता हूँ कि आप और आपकी पार्टी हमारी सरकार के अधिकार की नहीं, जनता के अधिकारों की लड़ाई लड़े। लेकिन ये लोग जनता के अधिकारों की लड़ाई लड़ने से कतराते हैं।
हम जनता के हक और सम्मान के लिए मजबूती से खड़े हैं और खड़े रहेंगे। भारतीय जनता पार्टी के नकली मुखौटे को हम जनता के सामने बेनकाब करेंगे।
ये लोग जितनी भी अड़चनें डाल लें, हिमाचल प्रदेश को आत्मनिर्भर और समृद्ध राज्य बनने से नहीं रोक पाएंगे।
जब भी जनता के अधिकारों पर आंच आती है, लोकतंत्र की मजबूती इसी में है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष मतभेद भुलाकर एकजुट होकर आवाज उठाएँ। मुद्दा किसी एक दल का नहीं, बल्कि जनहित का होता है चाहे सरकार कांग्रेस की हो या भाजपा की, जनता के अधिकार सर्वोपरि होने चाहिए।
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हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से RDG पर लाए गए सरकारी संकल्प का भाजपा द्वारा विरोध करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है।
केंद्र सरकार का RDG बंद करने का फरमान हिमाचल के 75 लाख लोगों के हक़ पर सीधा हमला है। प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा केंद्र सरकार के जनविरोधी फैसले के साथ खड़े होकर हिमाचल की जनता के साथ अन्याय कर रही है।
भाजपा की अन्यायपूर्ण राजनीति को हम बेनकाब करेंगे और हर मोर्चे पर प्रदेश के अधिकारों की लड़ाई लड़ेंगे।