मासिक शिवरात्रि जैसे दिन में निशित काल का महत्त्व और भी बढ़ जाता है क्योंकि:
इस समय चंद्रमा और सूर्य की दृष्टि अलग हो जाती है.
ग्रहों का प्रभाव कम हो जाता है.
माया और द्वंद्व की आवाज कम हो जाती है.
शिव जी की निष्काम ऊर्जा सीधे आपके हृदय तक पहुँच जाती है.
रक्षा और आशीर्वाद के लिए:
ॐ नमो भगवते रुद्राय — मैं दिव्य रुद्र (शिव जी) को नमन करता/करती हूँ, जो दुखों को विलीन करने वाले और ग्रहों के अंधेरे प्रभावों को भी विलीन करने वाले हैं.
यह पवित्र 41 मिनट का समय है..
इस रात क्या करें:
• आँखें बंद करें और शिव जी का नाम जपें
ॐ नमो भगवते रुद्राय 108 बार
• घर में शिवलिंग हो तो जल और बेलपत्र समर्पित करें
• दिल में जो भी भारी है दर्द, भय, भ्रम या कुछ भी शिव जी से कहें
09 09
अधिकमास समाप्ति की ओर... आज 13 जून की रात कोई साधारण रात नहीं है.
यह मासिक शिवरात्रि है और 13 जून की रात 11:46 बजे IST से 14 जून की सुबह 12:27 बजे IST तक का निशित काल शिव जी से जुड़ने के लिए अत्यंत शक्तिशाली माना जाता है.
श्रद्धा-विश्वास!
मार्कण्डेय महादेव मंदिर:
वाराणसी से गाजीपुर राजमार्ग पर स्थित है. मान्यता है कि इस मंदिर में दर्शन करने और रुद्राभिषेक या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है, गंभीर रोगों से मुक्ति मिलती है और संतान प्राप्ति की मनोकामना पूर्ण होती है.
उज्जैन की पावन धरती पर क्षिप्रा तट के समीप विराजमान भूखी माता का मंदिर श्रद्धा, रहस्य और शक्ति का अद्भुत संगम है। यह वही देवी हैं जिनका संबंध प्राचीन अवंतिका और सम्राट विक्रमादित्य की लोककथाओं से जोड़ा जाता है।🧵
श्रीहनुमानस्तोत्रम्
नीतिप्रवीण निगमागमशास्त्रबुद्धे
राजाधिराज रघुनायक मन्त्रीवर्य ।
सिन्दूरचर्चितकलेवर नैष्टिकेन्द्र
श्री रामदूत हनुमन् हर सङ्कटं मे ॥ १॥
सीतानिमित्तजरघूत्तमभूरिकष्ट
प्रोत्सारणैककसहाय हतास्रपौघ ।
निर्दग्धयातुपतिहाटकराजधाने
श्री रामदूत हनुमन् हर सङ्कटं मे ॥ २॥
दुर्वार्यरावणविसर्जितशक्तिघात
कण्ठासुलक्ष्मणसुखाह्रतजीववल्ले ।
द्रोणाचलानयननन्दितरामपक्ष
श्री रामदूत हनुमन् हर सङ्कटं मे ॥ ३॥
रामागमोक्तितरितारितबन्ध्वयोग
दुःखाब्धिमग्नभरतार्पितपारिबर्ह ।
रामाङ्घ्रीपद्ममधुपीभवदन्तरात्मन्
श्री रामदूत हनुमन् हर सङ्कटं मे ॥ ४॥
वातात्मकेसरिमहाकपिराटतदीय
भार्याञ्जनीपुरूतपःफलपुत्रभाव ।
तार्क्ष्योपमोचितवपुर्बलतीव्रवेग
श्री रामदूत हनुमन् हर सङ्कटं मे ॥ ५॥
नानाभिचारिकविसृष्टसवीरकृत्या
विद्रावणारुणसमीक्षणदुःप्रद्यर्ष्य ।
रोगध्नसत्सुतदवित्तदमन्त्रजाप
श्री रामदूत हनुमन् हर सङ्कटं मे ॥ ६॥
यन्नामधेयपदकश्रुतिमात्रतोऽपि
येब्रह्मराक्षसपिशाचगणाश्च भूताः ।
ते मारिकाश्च सभयं ह्यपयान्ति स त्वं
श्री रामदूत हनुमन् हर सङ्कटं मे ॥ ७॥
त्वं भक्तमानसस मीप्सितपूर्तिशक्तो
दीनस्य दुर्मदसपत्नभयार्तिभाजः ।
ईष्टं ममापि परिपूरय पूर्णकाम
श्री रामदूत हनुमन् हर सङ्कटं मे ॥ ८॥
इति श्रीहनुमानस्तोत्रं सम्पूर्णम् ।
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जय श्री राम, जय जय सियाराम 🚩🙏
जय बजरंगबली 🚩🙏
Deeply saddened by the passing of Shri Jaspal Rana Ji. His passing is a profound loss to the world of Indian sports.
He brought immense glory to the nation through his extraordinary achievements in shooting. Equally remarkable was his contribution as a mentor, shaping and guiding young athletes with great dedication. His unwavering commitment to excellence, discipline and service to the sporting world earned him immense admiration.
My thoughts are with his family, friends and the entire sporting fraternity in this hour of grief. Om Shanti.
Over the next few days, I will be in France and Slovakia to attend various programmes, including bilateral talks, multilateral engagements and interaction with the Indian diaspora. The focus will be on boosting economic as well as cultural linkages.
The visit will begin with programmes in Nice, notably ‘Bharat Innovates’, in which President Macron will be present. As India and France are marking the ‘India-France Year of Innovation’, ‘Bharat Innovates’ will be a vibrant platform that brings together innovators, StartUps and those related to the world of innovation.
In Nice, I will also hold talks with President Macron, where we will review the India-France Special Global Strategic Partnership.
@EmmanuelMacron
https://t.co/CTPbvPWSO4
Honoured to be entrusted with the responsibility of the Finance Dept of the W. Bengal government. It is a very challenging responsibility. However, the goals are clear: to restore good governance in the state & give back to the community its lost pride & self-respect. @SuvenduWB@narendramodi@AmitShah
बीएचयू के महान वेतन भोगी ज्योतिष शास्त्र के गुरुजन जो महामना मदनमोहन मालवीय जी की आत्मा को भी बेचकर खा सकतें हैं।
"ज्योतिष मे ६६° से ऊपर की गणना ही नहीं?
✓ए.आई. नहीं, शास्त्र और गणित की दृष्टि से विषय का विश्लेषण ✅
हाल के वर्षों में यह भ्रम फैलाया गया है कि भारतीय ज्योतिष में 66° से ऊपर किसी प्रकार की गणना या प्रभाव नहीं माना जाता। यह दावा न तो गणितीय दृष्टि से सही है और न ही शास्त्रीय दृष्टि से। भारतीय ज्योतिष का सम्पूर्ण आधार 360° के राशि-चक्र पर टिका है, जहाँ प्रत्येक राशि 30° की होती है और ग्रहों की स्थिति, दृष्टि, युति तथा विभिन्न बलों की गणना पूरे 360° चक्र में की जाती है।
यदि वास्तव में 66° के बाद गणना मान्य न होती, तो मंगल की चतुर्थ दृष्टि (90°), गुरु की पंचम दृष्टि (120°), गुरु की नवम दृष्टि (240°), शनि की दशम दृष्टि (270°) तथा सभी ग्रहों की सप्तम दृष्टि (180°) का कोई अस्तित्व ही नहीं रहता। बृहत्पाराशर होराशास्त्र में इन विशेष दृष्टियों का स्पष्ट उल्लेख मिलता है, जिससे सिद्ध होता है कि भारतीय ज्योतिष 66° तक सीमित नहीं है।
66° का भ्रम मुख्यतः आधुनिक "ऑर्ब" (Orb) सिद्धान्त से उत्पन्न हुआ है, जहाँ किसी दृष्टि के प्रभाव क्षेत्र को कुछ डिग्री आगे-पीछे तक माना जाता है। उदाहरण के लिए 60° के कोण पर ±6° का प्रभाव क्षेत्र लेकर कुछ लोग 66° को ही अधिकतम सीमा समझ लेते हैं, जबकि यह केवल प्रभाव क्षेत्र (Orb) है, दृष्टि या गणना की सीमा नहीं।
साथ ही, भारतीय ज्योतिष और पाश्चात्य ज्योतिष की दृष्टि-पद्धति में मूलभूत अंतर है। पश्चिमी ज्योतिष में 90° का Square Aspect एक स्वतंत्र योग माना जाता है, जबकि भारतीय ज्योतिष में 90° का महत्व मुख्यतः मंगल की विशेष दृष्टि अथवा भावगत सम्बन्ध के रूप में देखा जाता है। इसलिए दोनों प्रणालियों के सिद्धान्तों को मिलाकर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है।
•निष्कर्षतः, भारतीय ज्योतिष 360° के पूर्ण राशि-चक्र, ग्रह-दृष्टि, भाव, राशि, नक्षत्र, षड्बल और कर्मफल के समन्वित अध्ययन पर आधारित है। अतः "66° से ऊपर गणना नहीं होती" जैसा कथन शास्त्रीय प्रमाणों और ज्योतिषीय गणित दोनों के विरुद्ध है। 🚩