मत पूछ मेरी पहचान कहाँ तक है, तू बदनाम कर, तेरी औकात जहाँ तक है
हमने तो तुझे अपना समझकर छोड़ दिया, अब तू आज़मा ले, तेरा ज़ोर जहाँ तक है
मेरी ख़ामोशी को कमजोरी मत समझ लेना ये सब है मेरा, मेरी बात जहाँ तक है
तू चाहे तो शहर भर में किस्से सुना दे, मैं भी देखूँगा तेरी आवाज़ कहाँ तक है
व्यस्त तो मधुमक्खी भी है और मक्खी भी!
फर्क सिर्फ इतना है एक व्यस्त होकर शहद बनाती है, दूसरी गंदगी फैलाती है!!
इसलिए पहचान व्यस्तता से नहीं, पीछे छोड़े गए परिणामों से होती है!!🙏
महाभारत साफ़ सिखाती है- अगर
सामने वाला शकुनि है,
तो तुम राम बनकर नहीं जीत सकते,
तुम्हें कृष्ण बनना ही पड़ेगा।
जब खेल में बेईमानी हो रही हो,
तो वहाँ 'फेयर प्ले' करना तुम्हारी महानता नहीं,
तुम्हारी सबसे बड़ी बेवकूफ़ी साबित होगी।
मतलबी लोगों को उनकी ही भाषा में
जवाब देना पाप नहीं, न्याय है।
लोग पहले वादा करेंगे
*फिर मुकर जाएंगे*
गलतियां करके बोलेंगे
*हम सुधर जाएंगे*
उम्मीद की राहें दिखा कर
*ना जाने किधर जाएंगे*
रुकने का भरोसा देकर
*फिर निकल जाएंगे*
उन्हें फ़र्क भी नही पड़ेगा
*और आप बिखर जाएंगे...*